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हिन्दी सिनेमा में पानी


नदियों के अस्तित्व के लिए एक खतरनाक फैसला

वेब/संगठन: 
visfot.com
अक्षरधाम मंदिर निर्माण संबंधी पूर्व आदेश को मानने की बाध्यता, खेलगांव निर्माण संबंधी देरी से की गई आपत्ति तथा डीडीए द्वारा अक्षरधाम बांध निर्माण के बाद खेलगांव कॉम्पलेक्स स्थल की अवस्थिति को नदी भूमि और बाढ़ क्षेत्र न करार देते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने विगत 30 जुलाई को खेलगांव कॉम्पलेक्स निर्माण कार्य जारी रखने की इजाजत दे दी। देश की सबसे बड़ी अदालत का फैसला मानने की बाध्यता के हम आदी हैं, लेकिन यदि भविष्य में इस फैसले को नजीर माना गया, तो यह फैसला भारत की नदियों के लिए खतरनाक साबित होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने दी यमुना किनारे निर्माण को मंजूरी

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बिजनेश स्टैन्डर्ड / नई दिल्ली July 30, 2009

जब मैं केन्द्रीय भूजल बोर्ड का अध्यक्ष रहा उस समय CGWB ने यमुना के इन जलजनित क्षेत्र का विस्तृत अध्ययन किया था और उसके अनुसार इन मैदानों का रक्षण करना बेहद जरूरी है और 2 सितम्बर 2000 को एक अधिसूचना जारी करके यह स्पष्ट किया गया था कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में स्थित यमुना का बाढ़जनित इलाका एक विशिष्ट अधिसूचित क्षेत्र है, तथा इस इलाके में किसी भी प्रकार के निर्माण, संरचना निर्माण अथवा अन्य प्रकार की ड्रिलिंग आदि प्रतिबन्धित रहेगी। इसी प्रकार इस क्षेत्र में भूजल का दोहन सिर्फ़ पीने के पानी और घरेलू उपयोग हेतु संरक्षित रहेगा।

- डी के चड्ढा (पूर्व अध्यक्ष - केन्द्रीय भूजल बोर्ड )

विज्ञान के पास जलसंकट का समाधान है?

Source: 
रंजन के पांडा / इन्फोचेंज समाचार एवं फीचर
वास्तव में भारत के हर गांव और हर शहर की अपनी पारंपरिक जल संचयन तकनीक थी। लेकिन आधुनिक विज्ञान ने इस तरह के पारंपरिक ज्ञान को तिरस्कार की दृष्टि से देखा और हम आज इसकी कीमत चुका रहे हैं। उच्चतम न्यायालय के मुताबिक ‘हां है’। न्यायालय ने अपने हालिया निर्देशों में बार-बार कहा है कि आर्यभट्ट और रामानुजन के देश में पानी की समस्या का समाधान करने के लिए वैज्ञानिक आगे आएं। मगर रंजन के पांडा मानते हैं कि यह विज्ञान ही है जिसने इतनी समस्याएं खडी की हैं, ऐसे में हमें जल प्रबंधन के पारंपरिक और सांस्कृतिक समाधानों को मजबूत बनाने के प्रयास भी करने चाहिए। इस साल की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट ने एक समिति तत्काल गठित करने की सिफारिश की जो भारत में जल संकट के वैज्ञानिक समाधान की तलाश करे।
26 अप्रैल 2009 को एक अन्य मामले में फैसला सुनाते हुए उसने सरकार पर भारी प्रहार किया और उसे इस मुद्दे पर निश्चित लक्ष्य और तय समय सीमा के साथ काम करने का निर्देश दिया।

वैज्ञानिकों का पैनल करेगा संकट का समाधान

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IANS
नई दिल्ली (आईएएनएस). पानी के लिए घंटों कतार में खडी रहने वाली गृहिणियों की दुर्दशा से द्रवित होकर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को अविलंब इसके समाधान की दिशा में प्रयास करने को कहा है. अदालत ने सरकार से वैज्ञानिकों का एक पैनल बनाने कहा है, जो पेयजल संकट से निपटने के तरीके सुझा सके.

पानी नहीं पिला सकते तो सरकार भी नहीं चला सकते

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विस्फोट डॉट कॉम
.. 28अप्रैल को माननीय उच्चतम न्यायालय ने एक आदेश दिया है जिसके तहत न्यायालय ने भारत सरकार को लताड़ लगाते हुए कहा है कि सबको पानी नहीं पिला सकते तो फिर सरकार भी नहीं चला सकते. माननीय न्यायलय ने भारत सरकार से कहा है कि जल्द से जल्द बरसाती पानी को रोकने के लिए देशज और स्थानीय ज्ञान को प्रमुखता देते हुए योजना तैयार करे. न्यायालय ने जल को मौलिक अधिकार बताते हुए सबको पानी उपलब्ध कराने की जिम्मेवारी सुनिश्चित करने का आदेश दिया है।

रेनवाटर हार्वेस्टिंग अनिवार्य

Source: 
http://timesofindia.indiatimes.com
इलाहाबाद उच्च न्यायालय की एक खण्डपीठ ने अपने एक महत्वपूर्ण निर्णय में इलाहाबाद विकास प्राधिकरण को निर्देश दिया है कि सम्पूर्ण जिले में भवनों के नक्शे स्वीकृत करते समय उनमें “रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम” (Rainwater Harvesting) का होना अनिवार्य करें एवं इसका कड़ाई से पालन किया जाये। न्यायालय ने अपने निर्देश में कहा है कि भवन मालिकों को पूर्णता प्रमाण-पत्र तथा भवन का कब्जा देने से पहले यह सुनिश्चित किया जाये कि यह सिस्टम मकान मालिक द्वारा लगाया जा चुका है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश की धज्जी

वाराणसी। रोज सुबह आठ ट्रैक्टर टालियां मिट्टी लेकर डाफी-लंका मार्ग से पहुंचती हैं शुक्रेश्वर तालाब। शुक्रेश्वर तालाब एक ऐतिहासिक तालाब है, जो कि धीरे –धीरे पट रहा है।

कुडों-तालाबों के संरक्षण को लेकर नगर निगम संजीदगी का शुक्रेश्वर तालाब ताजा नमूना है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेशों की भी धज्जी उड़ाई जा रही है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा है कि हर जिले में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई जाए। जिसका काम होगा कि जिले की सभी जल निकायों को चिन्हित करे और उसके संरक्षण के लिए योजनाएं बनवाए।

जलस्रोतों का संरक्षण करें

उच्च न्यायालय की लखनऊ बेंच का निर्देश

इलाहाबाद हाइकोर्ट की लखनऊ बेंच ने सरकार को निर्देश दिया है कि आने वाले समय में जल की होने वाली कमी से निपटने के लिये समूचे उत्तरप्रदेश में झीलों, तालाबों और अन्य जलस्रोतों का संरक्षण और उचित संधारण किया जाये। जस्टिस देवीप्रसाद सिंह ने एक सुनवाई के दौरान यह निर्देश भी दिया कि यदि कोई क्षेत्र या भूमि का टुकड़ा किसी जलस्रोत या तालाब/झील के लिये आरक्षित है तो उस जगह किसी भी प्रकार के निर्माण कार्य की अनुमति नहीं दी जाये, और यदि ऐसी कोई अनुमति दी गई है तो उसे तत्काल प्रभाव से रद्द करें।

दिल्ली उच्चन्यायालय ने जलस्रोतों पर कब्जे को रोका

दिल्ली उच्चन्यायालयदिल्ली उच्चन्यायालय

दो प्रमुख जल स्रोतों तथा आसपास निर्माण कार्यों पर दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा रोक…


उच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार को अगले निर्देश तक राजधानी क्षेत्र के दो महत्वपूर्ण जलस्रोतों के आसपास निर्माण कार्य करने पर रोक लगा दी है। जस्टिस मुकुल मुदगल और जस्टिस वीएस सांघी की डिवीजन बेंच ने सरकार को उत्तरी दिल्ली की जहाँगीरपुरी और मायापुरी झील और उसके दलदली क्षेत्रों में जारी निर्माण कार्यों पर रोक लगाते हुए