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पर्यावरण का रखवाला जय श्रीराम

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चौथी दुनिया
जय श्रीरामजय श्रीरामबख्तियारपुर (पटना) निवासी आरक्षी जितेंद्र शर्मा उ़र्फ जय श्रीराम उन चंद पुलिसकर्मियों में शामिल हैं, जिनके कार्य से प्रभावित हुए बिना कोई नहीं रह सकता। पटना के यातायात थाने में तैनात बिहार पुलिस का यह जवान एक अलग कार्य संस्कृति और जीवनशैली के लिए मशहूर हो रहा है। जुनून की सीमा से काफी आगे जाकर जय श्रीराम अब तक तीस हजार पेड़ लगा चुका है। हैरानी की बात यह है कि इस आरक्षी ने कभी किसी से कोई आर्थिक मदद भी नहीं ली। पेड़ों को अपनी संतान मानने वाला यह पर्यावरण प्रेमी पुलिसकर्मी पिछले पच्चीस वर्षों से अनवरत वृक्षारोपण अभियान में जुटा है। जितेंद्र शर्मा का संकल्प है कि वह अपने जीवनकाल में एक लाख वृक्ष लगा दें। इस महान लक्ष्य का करीब एक चौथाई हिस्सा वह तय कर चुके हैं। उन्होंने पूर्णिया, कटिहार, मुरलीगंज, सहरसा, फारबिसगंज, जोगबनी, समस्तीपुर, राघोपुर, बरौनी, पटना, बख्तियारपुर एवं किशनगंज आदि स्थानों पर पेड़ लगाए हैं।

नीम के पेड़ों के संबंध में उनका मानना है कि इनसे पर्यावरण साफ और स्वच्छ रहता है। वृक्षारोपण का शौक कभी उनके कार्य में बाधा नहीं बना। सरकारी नौकरी में रहते हुए गलत तरीके से कभी एक रुपया भी न कमाने वाला यह सिपाही अपने कर्तव्य के प्रति भी इतना ही मुस्तैद रहता है। जितेंद्र बताते हैं कि उनके पास अपनी ज़मीन नहीं है, परंतु जहां कहीं भी उन्हें खाली जमीन नजर आती है, वहीं पर वह अपना शौक पूरा करने के लिए खुरपी, टोकरी, कुदाल और पौधों के साथ हाजिर हो जाते हैं। पर्यावरण असंतुलन एवं प्रदूषण से बचने के लिए लोगों को सीख देता यह पुलिसकर्मी पर्यावरण संचेतना की अलख जगाने में जुटा है। जितेंद्र जब कभी किसी से मिलते हैं तो अभिवादन स्वरूप जय श्रीराम कहते हैं। जय श्रीराम कहने की आदत ने लोगों के बीच उन्हें इसी नाम से मशहूर कर दिया। आज स्थिति यह है कि लोग उन्हें जय श्रीराम के नाम से अधिक जानते हैं। वह सुबह कुदाल, खुरपी, टोकरी और फलदार छायादार वृक्षों के पौधे लेकर निकल पड़ते हैं। जगह का चयन करने के बाद जितेंद्र वहां पौधे लगाते हैं और फिर उसकी घेराबंदी भी करते हैं, ताकि पौधे को कोई नुकसान न पहुंचे। पेड़ों की अंधाधुंध कटाई से चिंतित जय श्रीराम बताते हैं कि अखबारों, समाचार चैनलों में पर्यावरण पर बढ़ते खतरों एवं प्रदूषण वृद्धि की खबरों ने उनके अंदर एक लक्ष्य पैदा कर दिया। उनके मन में ख्याल आया कि क्यों न वृक्षारोपण शुरू किया जाए। मन में आई एक बात जीवन का लक्ष्य बन गई। जय श्रीराम मुख्यत: पीपल, नीम, आम, पाकड़ एवं बड़ आदि के वृक्ष लगाते हैं। पीपल के पौधे लगाने पर जोर ज्यादा रहता है। उनका मानना है कि पीपल एवं पाकड़ जैसे वृक्ष चौबीसों घंटे ऑक्सीजन छोड़ते हैं और इनसे पर्यावरण का संतुलन बना रहता है।

नीम के पेड़ों के संबंध में उनका मानना है कि इनसे पर्यावरण साफ और स्वच्छ रहता है। वृक्षारोपण का शौक कभी उनके कार्य में बाधा नहीं बना सरकारी नौकरी में रहते हुए गलत तरीके से कभी एक रुपया भी न कमाने वाला यह सिपाही अपने कर्तव्य के प्रति भी इतना ही मुस्तैद रहता है। राघोपुर में तैनाती के दौरान 20 मई 2002 को सहरसा से फारबिसगंज जाने वाली सवारी गाड़ी से जय श्रीराम ने दो रायफलें बरामदगी की थीं। बरौनी जीआरपी में रहते हुए गौहाटी-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस से 31 जुलाई 2002 को एक लाख रुपये मूल्य का तस्करी का सामान बरामद किया। जय श्रीराम किसी लावारिस लाश को देखकर मुंह नहीं फेरते, उसकी अंत्येष्टि खुद करते हैं। वह कहते हैं कि जीवन यदि मनुष्य का अधिकार है तो जीवन समाप्ति के उपरांत उसके शव का ससम्मान क्रियाकर्म भी उसका अधिकार है।

जय श्रीराम कभी सांप भी पाला करते थे। जब आरक्षी अधीक्षक ने विभागीय कार्रवाई की चेतावनी दी तो उन्होंने पाले गए सांप को छोड़ दिया। आरक्षी जय श्रीराम के कार्यों के मद्देनजर बख्तियारपुर बीडीओ माधव कुमार सिंह ने एक प्रशस्ति पत्र भी दिया। मजबूत आत्मविश्वास, अनोखी कार्यशैली और ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने वाले आरक्षी जय श्रीराम के कार्यों की सुधि न तो सरकार ने ली और न ही प्रशासन ने। जबकि अच्छे काम करने वाले लोगों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। यह स्थिति तब है, जब रिकार्ड तोड़ संख्या में पेड़ लगाने वाला यह सिपाही उस शहर का है, जहां सूबे के मुखिया नीतीश कुमार का घर है। जय श्रीराम को भले ही किसी पुरस्कार की जरूरत न हो, परंतु बख्तियारपुर वालों की इच्छा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ऐसे पर्यावरण प्रेमी को सम्मानित करें, ताकि अन्य लोगों को भी अच्छे काम करने की प्रेरणा मिले।

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