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2.5 एकड़ जमीन से दस-बारह लाख रु. की सालाना आमदनी!

वेब/संगठन: 
bhartiyapaksha.com
Author: 
विनय कुमार
हरियाणा के सोनीपत जिले का अकबरपुर बरोटा गांव। यहां आने के पहले आपके मस्तिष्क में गांव और खेती का कोई और चित्र भले ही हो, परंतु यहां आते ही खेत, खेती एवं किसान के बारे में आपकी धारणा पूरी तरह बदल जाएगी। इस गांव में स्थित है श्री रमेश डागर का माडल कृषि फार्म जो उनके अथक प्रयासों एवं प्रयोगधर्मिता की कहानी खुद सुनाता प्रतीत होता है। उनकी किसानी के कई ऐसे पहलू हैं, जिनके बारे में आम किसान सोचता ही नहीं। आइए जानते हैं, ऐसे कुछ पहलुओं के बारे में उन्हीं के शब्दों में…

प्रश्न : रमेशजी आज आप हर दृष्टि से एक सफल किसान हैं। हम आपके शुरुआती दिनों के बारे में जानना चाहेंगे।

रमेश डागर : बात सन् 1970 की है, घर की परिस्थितियों के कारण मुझे मैट्रिक स्तर पर ही पढ़ाई छोड़कर खेती में लगना पड़ा। तब मेरे पास केवल 16 एकड़ जमीन थी। शुरू में मैं भी वैसे ही खेती करता था जैसे बाकी लोग किया करते थे। मैंने पहले-पहले बाजरे की फसल लगाई थी, फसल अच्छी हुई, लाभ भी हुआ। फिर गेहूं की फसल लगाई, जिसमें खर-पतवार इतना अधिक हो गया कि नुकसान उठाना पड़ा। कुल मिलाकर मैं खेती के अपने तरीके से संतुष्ट नहीं था, इसलिए मैं कुछ अलग करना चाहता था, ताकि मैं भी समृध्दि के रास्ते पर आगे बढ़ सकूं। अंत में मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि मुझे अपने तौर-तरीके में बदलाव लाना होगा।

प्रश्न : आपने अपने तौर-तरीकों में क्या बदलाव किए और उनका क्या परिणाम निकला?

रमेश डागर : मैंने महसूस किया कि किसानों को फसलों के चयन में समझ-बूझ के साथ काम लेना चाहिए। मैं प्राय: कुछ किसानों को ट्रेन से सब्जी ले जाते हुए देखता था और उनसे रोज की बिक्री के बारे में पूछता था। उनसे मिली जानकारी ने मुझे सब्जी की खेती करने की प्रेरणा दी। सन् 1970 में मैंने पहली बार टिन्डे की फसल लगाई, जिसमें मुझे बाजरे और गेहूं से तीन गुना ज्यादा आमदनी हुई। सब्जीमंडी में मैंने एक बार कुछ ऐसी सब्जियां देखीं जो हमारे देश में नहीं बल्कि विदेशों में पैदा होती हैं। इनका भाव भी बहुत अधिक था। इनके बारे में मैंने कई स्रोतों से जानकारी इकट्ठी की और फिर सन् 1980 में उनकी खेती शुरू कर दी। सब्जियों की खेती से मेरी आमदनी काफी बढ़ गई।
इसी दौरान बाजार में फूलों की विशेष मांग को देखते हुए प्रयोग के तौर पर मैंने फूलों की भी खेती शुरू की, जिससे मुझे सबसे ज्यादा आमदनी हुई। सन् 1987-88में मैंने बेबीकार्न की खेती की। उस समय इसकी कीमत 400-500 रुपए प्रति किलो होने के कारण मुझे काफी लाभ हुआ। आज केवल सोनीपत जिले में ही बेबीकार्न की खेती 1600 एकड़ में हो रही है। फूल और सब्जियों की खेती से हुई आमदनी से मैंने सुख-समृध्दि के साधनों के साथ-साथ और खेत भी खरीदे। मेरे पास आज 122 एकड़ जमीन है।

प्रश्न : फसलों के चयन में सावधानी के साथ-साथ क्या आपने खेती के तौर-तरीकों में भी बदलाव किए हैं?

रमेश डागर :
हां किए हैं। मैं अपने खेतों में रासायनिक खाद (उर्वरक) का बिल्कुल इस्तेमाल नहीं करता। खाद के तौर पर मैं केंचुआ खाद व गोबर खाद का ही इस्तेमाल करता हूं। तथाकथित हरित क्रांति के नाम पर किसानों को जिस तरह से रासायनिक खाद का अधिक से अधिक इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, मुझे उस पर सख्त एतराज है।

प्रश्न : आपके राज्य में तो हरित क्रांति बहुत सफल रही है। यहां के किसानों ने काफी प्रगति भी की है। आप इससे असंतुष्ट क्यों हैं?

रमेश डागर :
पहली बार जब मैंने अपने खेत की मिट्टी की जांच करवाई तो पता चला कि रासायनिक खाद के इस्तेमाल का जमीन पर कितना बुरा प्रभाव पड़ता है। यदि रासायनिक खाद का इसी तरह इस्तेमाल होता रहा तो आने वाले 50-60 वर्षों में हमारी जमीनें बंजर हो जाएंगी। आर्थिक रूप से भी रासायनिक खाद का इस्तेमाल किसान के हित में नहीं रहा। हरित क्रांति से किसानों के खर्चे तो बढ़ गए पर आमदनी कम होती गई। जहां पहले एक कट्ठे यूरिया से काम चल जाता था, वहीं आज पांच कट्ठा लगता है। इससे किसान कर्जदार होता जा रहा है।

प्रश्न : हरित क्रांति के नाम पर होने वाली इस क्षति को रोकने के लिए आपने क्या पहल की?

रमेश डागर :
जमीन की उर्वरता बनाए रखने के लिए मैंने कई प्रयोग किए और किसान-क्लब बना कर अन्य किसान भाइयों से भी विचार-विमर्श किया। हमने पाया कि खेती की अपनी पुरानी पध्दति को विज्ञान के साथ जोड़कर एक नया रास्ता ढूंढा जा सकता है। और यह रास्ता हमने जैविक कृषि के रूप में विकसित कर लिया है।

प्रश्न : आप एक प्रयोगधर्मी किसान हैं। आपने लीक से हटकर कई ऐसे सफल प्रयोग किए हैं, जिनसे भारत का किसान प्रेरणा ले सकता है। हम आपके ऐसे कुछ प्रयोगों के बारे में विस्तार से जानना चाहेंगे।

रमेश डागर :
जैविक आधार पर की जाने वाली बहुआयामी खेती में ही मेरी सफलता का राज छिपा है। किस मौसम में कौन सी फसल की खेती करनी है, यह तय करने के पहले मैं जमीन की गुणवत्ता और पानी की उपलब्धता के साथ-साथ बाजार की मांग को भी हमेशा ध्यान में रखता हूं। मैं जिस तरह से खेती करता हूं, उसके कुछ खास पहलू इस प्रकार हैं :

केंचुआ खाद :

केंचुआ किसान के सबसे अच्छे मित्रें में से एक है। मैं अपने खेतों में केंचुआ खाद का खूब प्रयोग करता हूं। एक किलो केंचुआ वर्ष भर में 50-60 किलो केंचुआ पैदा कर सकता है। केंचुआ खाद बनाने में खेती के सारे बेकार पदार्थों, जैसे डंठल, सड़ी घास, भूसा, गोबर, चारा आदि का प्रयोग हो जाता है। सब मिलाकर केंचुए से 60-70 दिनों में खाद तैयार हो जाती है। इस खाद की प्रति एकड़ खपत यूरिया की अपेक्षा एक चौथाई है। इसके प्रयोग से मिट्टी को नुकसान भी नहीं पहुंचता है। फसल की उत्पादकता भी 20-30 प्रतिशत बढ़ जाती है। केंचुआ खाद बनाने पर यदि किसान ध्यान दें तो वे अपने खेतों में प्रयोग करने के बाद इसे बेच भी सकते हैं। यह किसान भाईयों के लिए आमदनी का एक अतिरिक्त स्रोत भी हो सकता है।

बायो गैस :

मैं बायोगैस का इतना अधिक उत्पादन कर लेता हूं कि इससे इंजन चलाने और अन्य जरूरतें पूरी करने के बाद भी गैस बच जाती है। बची हुई गैस मैं अपने मजदूरों में बांट देता हूं। इससे उनके भी ईंधन का काम चल जाता है। बायोगैस का मैंने एक परिवर्तित माडल तैयार किया है जिसमें प्रति घन मीटर की लागत 5000 रुपए की बजाय 1000 रफपए हो जाती है। मेरे इस माडल में गैस पलांट की मरम्मत का खर्चा भी न के बराबर है।

मशरूम खेती :

मैं मशरूम की कई फसलें लेता हूं। जिन किसान भाइयों के यहां मार्केट नजदीक नहीं है, उन्हें डिंगरी (ड्राई मशरूम) की फसल लेनी चाहिए। आज पूरी दुनिया में डिंगरी का 80 हजार करोड़ का बाजार है। जहां धान की फसल होती है, वहां इसकी खेती की संभावनाएं सबसे अधिक होती हैं क्योंकि इसकी खेती में पुआल का विशेष रूप से प्रयोग होता है। फसल लेने के बाद बेकार बचे हुए पदार्थों को मैं केंचुआ खाद में बदल कर 60-70 दिनों में वापस खेतों में पहुंचा देता हूं।

तालाब एवं मछली पालन :

खेत के सबसे नीचे कोने को और गहरा करके मैंने तालाब बना दिया है, जिसमें बरसात का सारा पानी इकट्ठा होता है और डेरी का सारा व्यर्थ पानी भी चला जाता है। डेरी के पानी में मिला गोबर आदि मछलियों का भोजन बन जाता है। इससे उनका विकास दोगुना हो जाता है। मछलीपालन के अलावा तालाब में कमल ककड़ी, मखाना आदि भी उगाता हूं।

बहुफसलीय खेती :

मैं एक साथ तीन से चार फसल लेता हूं। ऐसा करते समय मैं समय, तापमान और मेल का विशेष ध्यान रखता हूं। उदाहरण स्वरूप सितंबर माह के अंत में मूली की बुवाई हो जाती है जिसके साथ गेंदा फूल भी लगा देते हैं। मूली को अक्टूबर में निकाल लेते हैं और नवंबर के शुरूआत में पालक या तोरी आदि लगा देते हैं जिसकी कटाई दिसंबर में हो जाती है। वहीं फूलों से आमदनी जनवरी से शुरू हो जाती है।

गुलाब एवं स्टीवीया :

स्टीवीया एक छोटा सा पौधा है जिससे निकलने वाला रस चीनी से 300 गुना ज्यादा मीठा होता है। इसका प्रयोग मधुमेह के मरीज भी कर सकते हैं। मैंने इसकी खेती से प्रति एकड़ लाखों रुपए की कमाई की है। एक विशेष प्रकार के महारानी प्रजाति के गुलाब की खेती से भी मैंने काफी लाभ कमाया है। इस गुलाब से निकलने वाले तेल की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में 4 लाख रुपए प्रति लीटर है। एक एकड़ में उत्पादित गुलाब से लगभग 800 ग्राम तेल निकाला जा सकता है।

केले की खेती :

केले की खेती से जमीन में केंचुओं की संख्या बहुत ज्यादा हो जाती है। केला एक ऐसा पौधा है जो खराब एवं पथरीली जमीन को भी कोमल मिट्टी में तब्दील कर देता है। इसके प्रभाव से किसी भी फसल की उत्पादकता 25 से 30 प्रतिशत बढ़ जाती है। केले की जैविक खेती करने से पौधे सामान्य से ज्यादा ऊंचाई के होते हैं। इसकी खेती से लगभग 25 से 30 हजार रुपए प्रति एकड़ की आमदनी हो जाती है। गर्मी में केलों के बीच में ठंडक रहती है इसलिए इसमें फूलों की भी खेती हो जाती है, जिससे 15-20 हजार रुपए की अतिरिक्त आमदनी हो जाती है। गर्मी के दिनों में मधुमक्खी के बक्सों को रखने के लिए भी यह सबसे सुरक्षित स्थान होता है।

वृक्षारोपण :

खेतों की मेड़ों पर मैंने पापुलर आदि के पेड़ लगा रखे हैं जिससे 7 से 8 वर्षों में प्रति एकड़ 70 से 80 हजार रुपए की आमदनी हो जाती है। इन वृक्षों से खेतों को नुकसान भी नहीं होता और पर्यावरण भी ठीक रहता है।

मधुमक्खी पालन :

मधुमक्खी से भरे एक बक्से की कीमत लगभग चार हजार रुपए होती है। मेरी खेती में मधुमक्खियों की विशेष भूमिका है। वैसे भूमिहीन किसान भाइयों के लिए भी मधुमक्खी पालन एक अच्छा काम है। शहद उत्पादन के अलावा भी इनके कई फायदे हैं। फूलों की पैदावार में इनसे 30 से 40 प्रतिशत और तिलहन-दलहन की पैदावार में लगभग 10 से 20 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हो जाती है। बेहतर परागण के कारण फसलें भी एक ही समय पर पकती हैं। इस क्षेत्र में खादी ग्रामोद्योग एवं कई अन्य संस्थाएं सहायता कर रही हैं।

प्रश्न : आपने एक माडल तैयार किया है जिसमें सिर्फ 2.5 एकड़ जमीन से दस-बारह लाख रुपए प्रतिवर्ष की आमदनी हो सकती है और साथ ही कई लोगों को रोजगार भी मिल जाता है। इस बारे में जरा विस्तार से बताएं।

रमेश डागर :
मैंने 2.5 एकड़ में छ: परियोजनाएं चला रखी हैं जिसका संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है :

मधुमक्खी पालन :

मधुमक्खियों के 150 बक्सों से हम शुरुआत करते हैं। एक ही साल में इनकी संख्या दोगुनी हो जाती है। इससे साल में 5-6 लाख की आमदनी हो जाती है।

केंचुआ खाद:

इसे बेचकर मैं 3-4 लाख रुपए की आमदनी कर लेता हूं।

मशरूम खेती:

इससे मुझे प्रतिवर्ष 3-4 लाख रुपए मिल जाते हैं।

डेरी:

एक छोटी सी डेरी से लगभग 60-70 हजार की सीधी आय होती है।

मछली पालन :

इससे भी लगभग 15-20 हजार रुपए मिल जाते हैं।

ग्रीन हाउस :

इसमें लगी फसल से एक-डेढ़ लाख रुपए आ जाते हैं।

प्रश्न : आप किसान भाइयों के लिए क्या संदेश देना चाहेंगे?

रमेश डागर :
समझदार किसान तो वो है जो पहले मार्केट देखे, फिर मिट्टी की जांच कराए, तापमान का ख्याल रखे और अच्छे बीज का चयन करे। किसान भाइयों को जैविक खेती ही करनी चाहिए, मवेशी रखनी चाहिए, बायोगैस तथा वर्मी कम्पोस्ट तैयार करना चाहिए। 365 दिन में 300 दिन कैसे काम करें, प्रत्येक किसान को इसकी चिन्ता करनी चाहिए। हमें एक-दो फसलें ही नहीं बल्कि एक-दूसरे पर आश्रित खेती की बहुआयामी व्यवस्था विकसित करनी चाहिए। इस संबंध में किसी प्रकार की जानकारी के लिए किसान मुझसे जब चाहें संपर्क कर सकते हैं।
मेरा पता है :
डागर कृषि फार्म, ग्राम व पोस्ट – अकबरपुर बरोटा,
जिला-सोनीपत, हरियाणा, पिन-131003

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sir, I want some information for caltivation medicinal plant sach as tulsi aloevera pudina etc. so kindly inform where i selling it in our nearest market or medicinal co. my whatsaap no--9800018184. boram, jamshedpur, jarkhand.

Alovera farming

Muze alovera ki kheti karni he es bare me muze puri jankari chahey kheti kaise ki jati he use karne ke liye konse prakar ke bij lagte he waha lagat hone ka samay kya he use benifit kya hoga

Alovera farming

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Aloevera farming

नमस्कार प्रकाश जी !
अगर आप एलोवेरा लगाने की इच्छुक हैं तो आप मुझसे संपर्क कर सकते हैं l हमारी कंपनी कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के अंतर्गत एलोवेरा लगवाती है जिसका हम buy back एग्रीमेंट में किसान के साथ करते हैं l ज्यादा जानकारी के लिए संपर्क करें 8383985003

Sabji ki jankari Hindi me

Abhishek Kumar jankari chahte Hain

sabji ki kheti ki jankari chahiye

cal and whatsapp me sirya apna koi no btaey taki m information le saku 

Alovera ki kheti

Sir, shuru me kam se kam kitna jamin me aloevera ki kheti karna hoga.mera 1 Acer jamin hai aur thika jotte hai jo adhik barish parne par kuch dino ke liye khet me pani thora lag jata hai.
Kya mai aloevera ki kheti kar sakte hai.
Address
Village-gaura 1
Ps-teghra
District-begusarai
State-bihar

aleo vera farming

I am blonge to rampur uttar pradesh I want to aleo vera farming please suggetion

Aloevera farming

नमस्कार मशरूफ भाई !
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Sir,main chhattisgarh ka rahne wala hn,or main lahsun ki kheti 2 acre mein krna chahta hn,naye tarike se kaise kiya jay lagat kam or profit zayad ho,plz reply

Kheti

में लहसन की खेती करना चाहता हु मुझे खेती के बारे जानकारी चाहिए और ये किस समय रखी जाती है

Bussniss

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mai tulsi ki kheti karna chahta hu use kha bhech sakte hai pta kya please reply me

neemch mp

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kali mirch ki kheti karna h

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Hi, I have 2.5 acre land in Pauri Garhwal Uttarakhand and I wish to make cultivation of Aloe Veera pls suggest the techniques and preparation

A loaders ki kheti

M aloavera ki kheyi krna chahta hun add. Dis. Sri ganganagar teh. Sri vijaynagar vill. 6gbb margdarshan dijiye plz.

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नमस्कार Ranjit जी !
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औषधी जैविक खेती

जैविक खेती के बारे में कृपया हिंदी में लिटरेचर भेजकर सुझाव दें विभिन्न प्रकार की ओषधि की खेती किस प्रकार से की जाती है और अलग-अलग औषधियो के लिए बाजार कहां पर उपलब्ध है कृपया जानकारी भेजने की कृपा करें

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Aloevera me kharpatwar bhut jayada ho gaya , Koii upay bataye.
10 Hecate's me boya h.

Alovera fariming

Hi, I am belong to Aligarh UP.Please let me know,we want to alovera farming.but i don't know.where we purchase alovera plant & knowledge.so please provide the alovers supplier address & contact no. Gjendra singh

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sir mai polyhouse lgana chahata hun iske liye mujhe kisse sampark karna hoga aur unka uumber kaha se milega?

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Namaste sir meri jameen lease pr dena chahta hu . dist vidisha mp se hu . ya fir jyada profit wali kheti ki jankari de . 40 beegha zameen h mere paas.

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M alovera ki kheti krna chahta hu par muje iske bare ka much jyda pta ni h ki kheti kesi krni h

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Maan lijiye mene kuch ekar me kahi bhi tulsi,alovera,babul,chandan,shilajeet,agar,jaayfal etyadi me koi faasal ugai to usko bhechunga...kese?
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गवार पाठा (ऐलोविरा) कि खेती का 1 acre ( एकड़) का हिसाब 1 एकड़ मे 2×2फिट 10500 पौधे लगाते है जिसकी लागत 4 रूपये पर पौधा (पौधा + गाडी भाडा ) है इस प्रकार 10500×4= 42000किसान का खर्च होगागवार पाठा को 25 दिन मे 1 बार पानी लागाया जाता है यह किसी भी समय लगाया जा सकता हेलगाने के 11'से 12 महिने बाद पौधा तैयार हो जाता है उसके बाद पत्तीयों कि कटाई होगी। गीली पत्तियों को हम आपके खेत से हम 3 रुपये किलो से खरीदेगे ऐक पौधे के पतियों का वजन 4 से 7 किलो हो जाता है उस प्रकार 1 एकड़ मे 10500 पौधे (10500×4kg= 42000 kg) हो जाता है 42000×3= 1,26,000 रुपये कि कमाई होगीइसमे वर्षा ऋतु मै और वसन्त ऋतु मै बहुत सारे पौधे भी निकलते है उनको भी हम खरीदेंगे ।उसके बाद 6 महिने मे कटाई होती रहेगी यह क्रम 5 - 6 साल तक चलता रहेगाNote :- 1.ये पोधे 2 *2 फीट की दूरी पर लगते हैं । आप अपने लोकल खेती का माप भीगा ( भीगा ) से भी calculte कर सकते हैं।2.ये उपज हमारे पिछले अनुभवों और कई किसानों से आंकड़े प्राप्त करने के बाद का है ।3.कुछ आंशिक परिवर्तन उपज और कमाई हो सकता है। आप 1 एकड़ से कमाई 2 से 3 लाख तक मान सकते है।4.Payment के 15-20 दिन के बाद आपको प्लांट सप्लाई कर दिया जाएगा ।5.जिन किसान भाईयौ को लगाना है और पेमेंट्स (रुपए ) नही है ,हम उन किसान भाईयौ को लोन दिलाकर भी एलोबेरा की खेती कराते है ॥6.हमार उद्देश्य अन्नदाताओ की आर्थिक स्थिति को जितना हो सके मजबूत करना ॥7.तकनीकी सहायता से कृषि सलाहकारो ,कृषी विशेषज्ञ के परामर्श से ऊंच तकनीकी सहायता प्राप्त कराना ॥8.किसानों को औषधियों की खेतीयो मै सरकारी सहायता (अनुदान /सुब्सिडि )दिलाना ॥जिन किसान भाईयो को एलोबीरा की खेती करनी हो वो हमे नीचे दिये नंबर पर व्हट्सुप करे या कॉल भी कर सकते है संपर्क सूत्र फार्मर डेवलपमेंट & रिसर्च सेंटर9258924259, 70425856149258924259, 7042585614We are supplier of aloevera leaf and pulps.We have good 5 years experience in this field.We will arrange good price and regularly items because of we have our own plant in 500 acre.If your company want to deal We can supply 5-7/tone per day or more as you desire.Excellent PackingFor Good Price please send us your order, We’ll try to give you unbelievable price.As your company required you can send me quantity order.Warms & RegardsFarmer Development & Research Center+91 9258924259+91 7042585614E-mail – info.fdrc2016@gmail.com

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मैं एलोवेरा की खेती करना चाहता हु मै सुरत मै रहेता हु ओर मेरा गाँव गुजरात राज्य केभावनगर जीला के मालपरा गाँव में हे मेरे पास ६ एंकर ज़मीन है तो अाप मुजे मार्गदर्शन करे !

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Hi, I want to do aloe vera farming on 17 acre land in Siliguri,West Bengal. Kindly help in suggesting how should i go about it. I am new to farming. I need help with following: 1. Land Preparation2. Soil Preparation 3. Seed/ Plant Purchase4. Sowing and Best time for plantation5. type of fertilizers to be used 6. When to cultivate7. Where and how to sell  Regards,R K Agarwal

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Mera khet churu Rajasthan me h me konsa per Lagana chahiye Mera khet 10 bigha h

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