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Acid Rain (अम्ल वर्षा )

HIndi Title: 

अम्ल वर्षा


डॉ. दयाशंकर त्रिपाठी
वातावरण में सल्फर एवं नाइट्रोजन के ऑक्साइडों तथा कणीय पदार्थों या एयरोसाल के बड़ी मात्रा में एकत्र होने का परिणाम अम्लीय वर्षा है। ये गैसें और एयरोसाल वायुमण्डल में काफी ऊँचाई पर एकत्रित रहती हैं। जल वाष्प एयरोसाल के सतह पर जम जाते हैं और उस पर एक महीन परत बना लेते हैं। यह सल्फर और नाइट्रोजन के ऑक्साइडों को घुलने के लिए उचित स्थान प्रदान करता है। इस प्रकार उनके अम्लों का निर्माण होता है। जब ये विभिन्न लवणों, जैसे सल्फेट और नाइट्रेट, क्षारीय प्रकृति के एयरोसाल के सम्पर्क आते हैं तो अम्ल बनाते हैं। इससे द्वितीयक एयरोसाल का निर्माण होता है, जिसमें अम्ल और इन अम्लों के लवण उपस्थित रहते हैं। जब ये छोटे-छोटे एयरोसाल कण आपस में टकरातें हैं तो बड़े और भारी एयरोसाल बनते हैं और जो भारी होने के कारण नीचे बैठते जाते हैं। इन एयरोसालों पर जलवाष्प का जमना जारी रहता है जिससे जल के बड़े बूँद बनते हैं और अम्ल वर्षा के रूप में जमीन पर बरस जाते हैं। वर्षाजल वायु में उड़ते कणों और अन्य गैसों की अधिकांश मात्रा को शोषित कर लेते हैं जिससे वे अम्लीय होकर बरस जाते हैं।

SO2+H2O -------H2SO3+O--------H2SO4
2NO+O2----------2NO2+H2O+O----------2HNO3
NH3+H2O--------NH4OH
NH4OH+H2SO4---------(NH4)2SO4+H2O
NH4OH+HNO3----------NH4NO3+H2O

वस्तुतः इन्हीं अम्लों के कारण वर्षा जल और हिम अम्लीय हो जाते हैं। यही अम्ल वर्षाजल या हिम के पिघलने के साथ धरती पर आकर जैव-मंडल को हानि पहुँचाते हैं। अम्ल-वर्षा नम और शुष्क दोनों प्रकार की होती है। वस्तुतः इसे अम्ल-वर्षा न कहकर ‘अम्ल विक्षेपण’ कहना अधिक उपयुक्त है। नम विक्षेपण ही पर्यावरण के लिए अधिक हानिकर है। अम्ल वर्षा लगभग 70 प्रतिशत सल्फर के ऑक्साइड और 30 प्रतिशत नाइट्रोजन के ऑक्साइड के कारण होती है। यह भी देखा गया है कि अपने श्रोत से सैकड़ों-हजारों मील की यात्रा करके यह वहाँ भी अपने कुप्रभाव दिखाती है। यही कारण है कि अम्ल-वर्षा आज किसी एक देश की समस्या नहीं, अन्तर्राष्ट्रीय समस्या है।

वायुमण्डल में अम्लीय प्रकृति की वर्षा का पीएच मान 2.5 से 4.8 के मध्य हो सकता है। इनमें अम्लीय वर्षा में सल्फयूरिक अम्ल, नाइट्रिक अम्ल, विभिन्न सल्फेट और नाइट्रेट मुख्य रासायनिक अवयव होते हैं। यद्यपि अन्य अम्ल और उनके लवण भी अल्प मात्रा में पाए जा सकते हैं। अम्लीय अवक्षेपण के कारण हुई क्षति विविध प्रकृति की होती है।

वर्षा जल में अम्ल की उपस्थिति के कारण खुरचने या खुरदरा (क्षरण) करने वाली क्रिया (Corrosive action) भवन, लकड़ी, स्टील और सीमेण्ट पत्थर के निर्माणों को क्षति पहुँचाती है। यह फैब्रिक्स और फाइबर्स से निर्मित सामग्रियों पर भी दर्ज किया गया था। सन् 1964 के नवम्बर माह में उत्तर-पूर्वी संयुक्त राज्य अमेरिका में हुई अम्ल-वर्षा जल का पीएच मान 2.1 था। 10 अप्रैल, 1974 में यूरोप में हुए अम्ल-वर्षा का पीएच मान 2.5 और एक बार नार्वे के समुद्र तटीय क्षेत्र में हुई अम्ल-वर्षा का पीएच मान क्रमशः 2.7 और 3.55 था। अमेरिका के पेनसिल्वानिया नगर से तो अम्ल-वर्षा का पीएच मान 1.5 तक रिपोर्ट किया गया है।

संदर्भ: 
1 - पर्यावरण अध्ययन से साभार

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बाहरी कड़ियाँ: 

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