मल्टी-टॉस्किंगः समय प्रबंधन का एक प्रभावी साधन

Submitted by Hindi on Thu, 08/09/2012 - 09:29
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रोजगार समाचार

जितना हम मल्टी-टॉस्किंग की संकल्पना का पता लगाएंगे, उतना ही हम इसकी तकनीक सीखेंगे और अपनी संभावनाओं को बढ़ाने के लिए इस संकल्पना का अभ्यास करना आसान हो जाएगा। हमें एक ऐसी अंतर-दृष्टि का विकास करने की आवश्यकता है, जो मल्टी-टॉस्किंग की संकल्पना के अनुप्रयोग को हमारे निजी तथा व्यावसायिक जीवन में स्थापित कर सके।

आज का युग गति का युग है। हम सभी अपने कार्यों तथा दायित्वों को तीव्र गति से, समय पर और सफलतापूर्वक पूरा करने की होड़ में लगे हुए हैं। हम अपने कार्यों में गुणवत्ता लाने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग कर रहे हैं। अपने समय के प्रभावी प्रबंधन के लिए हम अनेक उपाय खोज रहे हैंमल्टी-टॉस्किंग एक ऐसा ही उपाय तथा माध्यम है। जो समय-अंतराल को समाप्त करके प्रभावी समय प्रबंधन सुनिश्चित करने में हमारी सहायता कर सकता है। मल्टी-टॉस्किंग शब्द साइबर विश्व या कम्प्यूटर जगत की देन है, जहां हम कम्प्यूटरों को कई कार्य एक साथ करता हुआ देखते हैं। यह कार्य कोई फाइल अटैच करने, किसी वर्ड डॉक्यूमेंट को टाइप करने और प्रिंट कमांड देने का हो सकता है। ये सभी कार्य एक साथ किए जा सकते हैं। एक दी गई समय-अवधि में कार्य को एक साथ किए जाने के कारण इस प्रक्रिया को बहु-कार्य या मल्टी-टॉस्किंग कहा जाता है और कम्प्यूटरों को बहु-कार्यकर्ता या मल्टी-टास्कर्स कहा जाता है। इस शब्द को हाल ही में मनुष्य पर लागू करने के लिए भी स्वीकार किया गया है।

जब हम इसे मनुष्य पर लागू करने की बात करते हैं तो मल्टी-टॉस्किंग संकल्पना का अभिप्राय कई कार्यों का एक साथ प्रबंधन या समन्वय करने की गुणवत्ता या तकनीक से होता है। इस संकल्पना का उद्देश्य, संसाधनों के समन्वित उपयोग को सुनिश्चित करके कार्य-दायित्व के अबाध तथा समय पर पूरा करने के लिए समय बचाना है। कम्प्यूटरों के संदर्भ में, विभिन्न प्रकार के सॉफ्टवेयर या हार्डवेयर संसाधन होते हैं, किंतु मनुष्य के मामले में, संसाधन किसी भी ऐसी उपयोगी वस्तु को कह सकते हैं जो हमारे पास उपलब्ध है और हमारी सहायता कर सकती है। यह मनुष्य, सामग्री या धन आदि कुछ भी हो सकता है। वास्तव में, हम सभी कम्प्यूटर की मल्टी-टॉस्किंग के विकास के बहुत पहले से एक साथ बहु-कार्य करने वाले या मल्टी-टास्कर रहे हैं। एक बेहतर मल्टी-टास्कर बनने के लिए मात्रा यह आवश्यकता है कि कम्प्यूटर की तरह हम भी एक प्रणाली बद्ध दृष्टिकोण अपनाएं। इसमें एक निर्धारित समय अवधि में, उपलब्ध संसाधनों की सहायता से कार्य की योजना बनाना, उसका संयोजन करना तथा उसे पूरा करना शामिल है। यह वही कार्य है जो कम्प्यूटर करता है या कई कार्य एक साथ करने के दौरान हमारे द्वारा कराया जाता है। यदि कम्प्यूटर जैसी एक मशीन मल्टी-टॉस्किंग कर सकती है तो कम्प्यूटरों का जनक तथा सर्वशक्तिमान की श्रेष्ठ सृष्टि मनुष्य यह कार्य क्यों नहीं कर सकता।

हम भारतीय कई भुजाओं वाली देवी दुर्गा तथा ऐसे ही अन्य देवी-देवताओं के बहु-कार्य की संकल्पना से अच्छी तरह परिचित हैं, उनके ये हाथ विभिन्न कार्यों के द्योतक के रूप में प्रसिद्ध हैं। शायद देवी ने महिलाओं को बहु-कार्य करने के गुणों का वरदान दिया था और इसलिए महिलाओं को विभिन्न कार्य करते देखा जाना एक आम बात है, चाहे वह बच्चों की देखभाल का, घरेलू, सामाजिक संबंधों या पारिवारिक संबंधों का कार्य हो। महिलाओं के बहु-कार्य या मल्टी-टॉस्किंग के गुण ‘कामकाजी महिलाओं या आधुनिक युग की महिला’ की अवधारणा के अविर्भाव से और अधिक प्रमाणित हो गए हैं।

मल्टी-टॉस्किंग के गुण उन्हें उनके व्यावसायिक तथा व्यक्तिगत जीवन के बीच एक संतुलन बनाए रखने में उन्हें सक्षम बनाते हैं। मल्टी-टॉस्किंग का गुण, किसी सीमा तक, आज की आधुनिक युग की महिला, जो एक जानी-मानी गृहनिर्मात्री, एक मां और एक पत्नी के साथ-साथ एक सफल व्यवसायी भी है, की सफलता का मार्गदर्शन कर रहा है। घरों में यह देखा जाना आम बात है कि जब वाशिंग मशीन कपड़े धोती है या जब गैस स्टोव पर कुछ पक रहा होता है तो महिलाएं उन कार्यों को करने के साथ-साथ बच्चों का होम वर्क कराने में भी सहायता करती हैं। मुंबई की स्थानीय ट्रेनों की महिला बोगियों में यात्रा करने वाली महिलाओं को प्रायः अपने कार्यालयों से घर जाते समय यात्रा करते हुए सब्जी काटते हुए देखा जाता है, ऐसा वे अपनी यात्रा के समय का उपयोग करने के लिए करती हैं। इससे उन्हें घर पर अपने परिवार के साथ रहने का खाली समय मिल जाता है। कई बार हम किसी संगठन के कार्यपालक को ट्रेन या हवाई जहाज में यात्रा के दौरान खाना खाने के समय लैपटॉप पर मीटिंग (जिसमें भाग लेने के लिए वह जा रहा है) के लिए पावर प्वाइंट प्रजेंटेशन तैयार करते हुए भी देख सकते हैं।

मल्टी-टास्कर हमेशा खाली समय का उपयोग करने का प्रयास करता है। यदि महिलाओं को अच्छा मल्टी-टास्कर कहा जाता है तो इसका यह कारण नहीं है कि वे श्रेष्ठ मनुष्य हैं या समाज में उनकी निर्धारित भूमिका भी इसका कारण नहीं है, बल्कि कार्य करने की एक सुनियोजित योजना तथा प्रबंधन नीति इसका कारण है। हम इन पहलुओं को अनदेखा कर देते हैं, क्योंकि ये पहलू इतने साधारण लगते हैं कि इन पर ध्यान नहीं जाता। लेकिन मल्टी-टॉस्किंग की संकल्पना पर ध्यान देने तथा कार्य करने से व्यावसायिक जीवन में हमारा प्रभाव तथा कार्यक्षमता में निश्चय ही वृद्धि होगी।

मल्टी-टॉस्किंग के गुणों का, प्रत्येक मनुष्य अपने कार्यों का बेहतर परिणाम प्राप्त करने के लिए विकास तथा अधिकतम उपयोग कर सकता है। ‘3 इडियट्स’ फिल्म में वायरस को दोनों हाथों से एक साथ लिखते हुए दिखाया गया है। दो या अधिक कार्यों को एक साथ करने पर ध्यान देना मस्तिष्क के लिए निश्चय ही बहुत कठिन है, किंतु जैसा कि इस फिल्म में दिखाया गया है; वायरस ने अपने मस्तिष्क को एक साथ लिखने के लिए अपने दोनों हाथों पर नियंत्रण रखने के लिए प्रशिक्षित कर लिया था। इससे स्पष्ट होता है कि दृढ़ता तथा अभ्यास से, किसी व्यक्ति को मल्टी-टास्कर बनाने के लिए मस्तिष्क तथा शरीर के विभिन्न अंगों को प्रशिक्षित किया जा सकता है।

मल्टी-टॉस्किंग शब्द को केवल एक साथ किए जाने वाले बहु या समकालिक कार्य के संदर्भ में नहीं समझा जाना चाहिए। मल्टी-टॉस्किंग से संबंधित कार्य प्रत्यक्ष या परोक्ष अथवा दृश्य या अदृश्य हो सकते हैं, इन्हें शारीरिक या मानसिक/बौद्धिक अथवा दोनों रूपों में किया जा सकता है। बल्कि इसे एक प्रक्रिया के रूप में माना जाना चाहिए; एक ऐसी प्रक्रिया जिसमें परिणाम देने के लिए लगाए गए विभिन्न प्रकार के संसाधन शामिल होते हैं। ये परिणाम आपको अपना कार्य एक निर्धारित समय-सीमा में सुचारू रूप से पूरा करने में आपकी सहायता करते हैं। जब यह संकल्पना किसी घर से निकल कर बड़े संगठनों में पहुंचती है तो इसका संबंध दिए गए निर्धारित समय-सीमा में निर्धारित कार्य करने वाली किसी एक टीम या एक-साथ कार्य करने वाली अनेक टीमों से होता है। यहां कार्य एक-दूसरे से पूर्णतः भिन्न हो सकते हैं, कार्य करने वाले मनुष्य भी अलग-अलग हो सकते हैं, किंतु उद्देश्य सभी का एक होता है और वह ध्येय होता है- संगठन का विकास करना। इसी तरह एक गृहिणी जैसी मल्टी-टास्कर परिवार की प्रगति का प्रयास करती है। वह अपने परिवार में बेहतर योगदान देने के लिए अपना समय तथा शक्ति बचाने के लिए मल्टी-टॉस्किंग की संकल्पना पर कार्य करती है।

यह एक विवाद का विषय है कि क्या मल्टी-टॉस्किंग की संकल्पना एक कला है, विज्ञान है या कुछ और? यह व्यक्ति की अपनी इस समझ पर निर्भर होता है कि वह इस संकल्पना को किस दृष्टि से देखता है। किंतु मल्टी-टॉस्किंग के विभिन्न पहलुओं की जानकारी यह स्पष्ट करती है कि कुल मिलाकर यह एक प्रबंधन संकल्पना है, क्योंकि यह नियोजन, संयोजन, समन्वय तथा निष्पादन के सिद्धांतों पर आधारित है।

नियोजन: यह अल्प, अत्यधिक अल्प, मध्यम, दीर्घ या अत्यधिक दीर्घ अवधि की नीतियां बनाने से संबंधित है। इसमें कार्यों की सूची बनाना, लक्ष्य, समय-सीमा, उपलब्ध संसाधनों तथा इसे करने के तरीके का निर्धारण करना शामिल है दूसरे शब्दों में कहें तो यह निर्धारित करता है कि क्या, क्यों, किस समय-सीमा में, किन संसाधनों से तथा कैसे किया जाना है?

संयोजन तथा समन्वय: इस द्वि-संकल्पना का संबंध वस्तुओं, सामग्रियों या संसाधनों की प्रणालीबद्ध व्यवस्था तथा एकीकरण से है। इस चरण पर आप विभिन्न सामग्रियों, कार्यों या संसाधनों के बीच एक सम्पर्क भी स्थापित करते हैं। सभी वस्तुओं को एक बार एक साथ मिलाने से आप उस कार्य को आसानी से एवं सुचारू रूप में निष्पादित कर सकते हैं, जिसकी आपने योजना बनाई है। इस चरण पर आपको अपने नियोजित, संगठित तथा समन्वित घटकों से भावी कार्य पर नियंत्रण एवं अधिकार भी रखना होता है। दूसरे शब्दों में आप वास्तविक कार्य के लिए एक आधार बनाते हैं।

कार्य निष्पादन: यह वह प्रक्रिया है जिसके लिए आप मल्टी-टॉस्किंग की श्रृंखला में प्रयासरत रहे हैं। इस चरण पर आप वास्तविक कार्य को विगत नियोजन, संगठन तथा समन्वय की सहायता से पूरा करते हैं। ये मल्टी-टॉस्किंग के विभिन्न चरण हैं।

प्रभावी नियोजन तथा संगठन वाली एक सुनियोजित कार्य विधि या नीति से कार्य आसान हो जाता है। दूसरे शब्दों में अच्छी तरह से किया गया होम वर्क आपके स्कूल वर्क को आसान तथा आपको श्रेष्ठ एवं प्रखर बना देता है। यदि आप मुंबई की लोकल ट्रेनों में यात्रा के दौरान सब्जी काटने वाली महिलाओं का उदाहरण लें तो इसमें हमें एक सुनियोजित संगठन एवं समन्वय का प्रयोग मिलता है।

इस मामले में उपलब्ध संसाधन हैं चाकू, सब्जी तथा बैठने का स्थान (सीट)। निर्धारित समय सीमा है अपने गंतव्य स्थान पर पहुंचने के लिए ट्रेन द्वारा लिया जाने वाला समय-जिसके दौरान वे सब्जी काटने का कार्य पूरा करने का प्रयास करती हैं। इस समय का उपयोग करके महिलाएं अपने परिवार तथा स्वयं अपने लिए अधिक समय निकालती हैं।

यह इस तथ्य का उदाहरण है कि हम मल्टी-टॉस्किंग किस तरह कर सकते हैं। एक बेहतर नीति के साथ हम बेहतर रूप में कार्य कर सकते हैं। मल्टी टॉस्किंग का कोई निर्धारित प्रारूप या पहले से तैयार कोई सिद्धांत नहीं है। कई बार आप संक्षिप्त सिद्धांतों पर कार्य करते हैं तो कई बार हम कार्य की रूपरेखा दिए गए कार्य के अनुसार बना सकते हैं। यह सब, मल्टी-टॉस्किंग की दृष्टि से कार्य की योजना, संगठन एवं निष्पादन की क्षमता, सक्षमता पर निर्भर करता है। जितना हम मल्टी-टॉस्किंग की संकल्पना का पता लगाएंगे, उतना ही हम इसकी तकनीक सीखेंगे और अपनी संभावनाओं को बढ़ाने के लिए इस संकल्पना का अभ्यास करना आसान हो जाएगा। हमें एक ऐसी अंतर-दृष्टि का विकास करने की आवश्यकता है, जो मल्टी-टॉस्किंग की संकल्पना के अनुप्रयोग को हमारे निजी तथा व्यावसायिक जीवन में स्थापित कर सके।

लेखिका इस समय गोरखपुर में पी.टी.आई। की एक अंशकालिक संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं। ई-मेलः hena_naqvipti@yahoo. co.in

Comments

Submitted by vijay (not verified) on Wed, 10/18/2017 - 21:30

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 नमस्ते,

आजसे पहले इस विषय पर इतने विस्तारसे मैंने कंही पढ़ा नहीं था, आपने इस विषय पर अच्छे विचार प्रस्तुत किए है, इसलिए आपको बधाई|

एक कार्य करते वक्त हम सिर्फ वही काम नहीं करते, साथमे उससे जुड़े कई कार्य करते जाते है |  कुछ काम अनायास होते जाते है; इसलिए वह काम हमें काम नहीं लगते | हमारा दिमाग जन्मसेही मल्टी-टास्किंग होता है | कुछ मिनिटों पहले पैदा हुआ बच्चा रोनेके साथ-साथ हाथ-पैरभी हिलाता है |

यह मैंनेभी गौर किया है, कि पुरुषों के मुकाबले महिलाएं अधिक मल्टी-टास्किंग होती है | शायद, उनकी परवरिश तथा परिवेश उन्हें यह हुनर सिखाता है |

आप इस विषयपर अधिक अनुसंधान करते रहे, आपको शुभकामनाएं, धन्यवाद् |

 

Submitted by Deepeshbushahari (not verified) on Thu, 10/19/2017 - 12:19

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