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भाषा विज्ञान के क्षेत्र में रोजगार के अवसर

Author: 
ब्रजेश प्रियदर्शी
Source: 
रोजगार समाचार
भाषा विज्ञान क्या है? भाषा विज्ञानी कौन होता है? भाषा विज्ञानी क्या करते हैं? भाषा विज्ञान के क्षेत्र में रोजगार की क्या संभावनाएं हैं? साहित्य के अध्ययन से भाषा विज्ञान किस प्रकार से भिन्न है? भाषा विज्ञान का समाजशास्त्र, मनोविज्ञान, दर्शनशास्त्र, साहित्यिक सिद्धांत, स्पीच लैंग्वेज पैथालॉजी और इसी तरह के अन्य विषय-क्षेत्रों से क्या संबंध हैं? ये ऐसे कुछ प्रश्न हैं जो हमारे मन में भाषा विज्ञान विषय को लेकर उठते रहते हैं।

लिंग्विस्टिक्स (भाषा विज्ञान) शब्द लातिन लिंग्वा (जुबान) और इस्टिक्स (ज्ञान या विज्ञान) से बना है। अतः व्युत्पत्ति अनुसार भाषा-विज्ञान, भाषा का वैज्ञानिक अध्ययन है। भाषा विज्ञान का कार्य किसी भाषा विशेष की संरचना तथा विकास और अन्य भाषाओं से इसके संबंध के अध्ययन से जुड़ा होता है। यह किसी खास भाषा का अध्ययन न होकर बल्कि सामान्य तौर पर एक मानवीय भाषा का अध्ययन होता है। मोटे तौर पर, भाषा विज्ञान मानवीय भाषा, इसकी ध्वनि, संरचना, अर्थ और कार्य का अध्ययन होता है। इसमें भाषा की सार्व- भौमिकता तथा मानवीय व्यवहार के पहचान योग्य कार्यों का अध्ययन किया जाता है। इसमें भाषा का निर्धारण और विश्लेषण कार्य किया जाता है।

इस तरह के अध्ययन कार्यों से जुड़ा व्यक्ति भाषा विज्ञानी कहलाता है। भाषा-विज्ञानी की भाषा के सभी पहलुओं, और विश्व की सभी भाषाओं में दिलचस्पी होती है, लेकिन यह ज़रूरी नहीं है कि वह बहुभाषाविद् भी हो। वे सामाजिक व्यवस्था (सामाजिक-भाषा विज्ञान), भौगोलिक क्षेत्रों (बोली विज्ञान) समय-अवधियों (ऐतिहासिक भाषा विज्ञान), भाषा और मन के बीच संबंध (मनो-भाषा विज्ञान) तथा ऐसे बहुत से मुद्दों के अनुरूप भाषा की भिन्नताओं से संबंधित कार्यों से जुड़े होते हैं।

भाषा विज्ञान का अध्ययन तीन प्रमुख धुरियों के आसपास टिका होता है। इसके अन्तः बिंदु इस प्रकार हैं:


• किसी भाषा का वर्णानात्मक और ऐतिहासिक वर्णनात्मक अध्ययन केवल भाषा से संबंधित होता है क्योंकि यह एक प्रदत्त समय पर होता है; ऐतिहासिक अध्ययन भाषा या भाषाओं के समूह के इतिहास और उसमें क्या कुछ संरचनात्मक बदलाव आए हैं, इनसे संबंधित होता है।
• सैद्धान्तिक और अनुप्रयुक्त सैद्धान्तिक भाषा विज्ञान किसी भाषा के चित्रण हेतु ढांचा सृजन के साथ-साथ भाषा के सार्वभौम पहलुओं के बारे में सिद्धांतों से संबंधित होता है। दूसरी तरफ अनुप्रयुक्त भाषा विज्ञान क्रिया और पारस्परिक-क्रिया का भाषा विज्ञान है। यह किसी बात को लेकर भाषा-विज्ञान के सिद्धान्त का अनुप्रयोग मात्र नहीं है, परंतु इसका अपना तत्व-ज्ञान होता है तथा यह अपने आप में ही एक विषय-क्षेत्र है।
• प्रासंगिक और स्वतंत्र इन शब्दों का यहां केवल सुविधा के लिए प्रयोग किया जाता है, क्योंकि इस द्विभाजन के लिए सुस्थापित शब्द नहीं हैं। प्रासंगिक भाषा विज्ञान इस बात से संबंधित होता है कि भाषा किस तरह विश्व में उपयुक्त बैठती है: इसके सामाजिक प्रकार्य, यह कैसे उपार्जित होती है और किस तरह यह सृजित और समझी जाती है। इसके विपरीत स्वतंत्र भाषा विज्ञान में भाषाओं पर उनके अपने लिए और भाषा से संबंधित बाह्यताओं के बगैर विचार किया जाता है।

सैद्धान्तिक भाषा-विज्ञान:


सैद्धान्तिक भाषा विज्ञान को अक्सर कई अलग-अलग क्षेत्रों में बांटा जाता है, जिन पर कुल मिलाकर स्वतंत्र अध्ययन संचालित किया जाता है। वर्तमान में मुख्यतः निम्नलिखित श्रेणियां अभिस्वीकृत हैं:

• स्वर विज्ञान, सभी मानवीय भाषाओं से जुड़ी विभिन्न ध्वनियों का अध्ययन।
• स्वानिकी, किसी भाषा की मौलिक ध्वनियों की पद्धति का अध्ययन•
• रूप विज्ञान, शब्दों की आंतरिक संरचना का अध्ययन।
• वाक्य-विन्यास, इस बात का अध्ययन कि किस तरह से शब्द मिलकर व्याकरण के अनुरूप वाक्य बन जाते है।
• अर्थ-ज्ञान, शब्दों के अर्थ का अध्ययन, और इन शब्दों से मिलकर किस तरह व्याकरण के अनुरूप वाक्य बन जाते हैं।
• शैली शास्त्र, भाषाओं में शैली का अध्ययन।
• व्यावहारिक, इसका अध्ययन कि सम्प्रेषण में कैसे उच्चारण किया जाता है।

ऐतिहासिक भाषा-विज्ञान


जबकि सैद्धान्तिक भाषा-विज्ञान का सत एक खास समय के आधार पर भाषाओं के अध्ययन से संबंधित होता है (सामान्यतः वर्तमान में), ऐतिहासिक भाषा विज्ञान में इस बात का पता लगाया जाता है कि भाषा समय अनुसार, कई बार सदियों के बाद, कैसे बदलती है। ऐतिहासिक भाषा विज्ञानी भाषा परिवर्तन के अध्ययन के लिए धनी इतिहास और मजबूत सैद्धान्तिक आधार, दोनों का लाभ उठाते हैं। स्पष्टतया ऐतिहासिक परिदृश्य में ऐतिहासिक-तुलनात्मक भाषा विज्ञान और व्युत्पत्ति सम्मिलित है।

अनुप्रयुक्त भाषा विज्ञान


जबकि सैद्धान्तिक भाषा विज्ञान का संबंध भाषाओं के अंदर और समूह के तौर पर सभी भाषाओं के बीच सामान्यताओं को ढूंढने और उनका वर्णन करने से संबंधित होता है, अनुप्रयुक्त भाषा विज्ञानी इन निष्कर्षों को प्राप्त करते हैं तथा अन्य क्षेत्रों में इनका अनुप्रयोग करते हैं। इसमें न केवल भाषा शिक्षण क्षेत्र बल्कि इसमें वाणी संश्लेषण, बोली पहचान और वाणी/भाषा पैथोलॉजी भी शामिल होते हैं। ये क्षेत्र न केवल कंप्यूटरों को स्वर अंतरापृष्ठ उपलब्ध कराने के लिए भाषा-विज्ञान के ज्ञान का प्रयोग करने में मदद करते हैं बल्कि ये चिकित्सकों/वाणी पैथोलॉजिस्ट्स को उनके रोगियों की आवश्यकताओं के अनुरूप इलाज के मूल्यांकन तथा उपाय ढूंढने में भी मददगार होते हैं।

प्रासंगिक भाषा-विज्ञान


प्रासंगिक भाषा-विज्ञान वह क्षेत्र है जहां भाषा- विज्ञानी अन्य अकादमिक विषय क्षेत्रों पर विचार-विमर्श करते हैं। जबकि भाषा विज्ञानी भाषाओं का अध्ययन अपने लिए करते हैं, भाषा विज्ञान के अन्तर विषयक क्षेत्रों में इस बात पर विचार किया जाता है कि भाषा शेष विश्व को किस तरह एक-दूसरे को प्रभावित करती है। इनमें कुछेक हैं:

• सामाजिक भाषा विज्ञान और मानव शास्त्रीय भाषा विज्ञान, जहां समाज विज्ञानी भाषा विज्ञानियों से विचारों का आदान-प्रदान करते हैं।
• भाषण विश्लेषण, जहां आलंकारिक भाषा और दार्शनिकता का भाषा-विज्ञानियों से संपर्क जुड़ता है।
• मनो-भाषा विज्ञान और न्यूरो-भाषा विज्ञान, जहां चिकित्सा विज्ञान भाषा विज्ञान के साथ जुड़ता है।
• भाषा विज्ञान के अन्य अन्तर-विषयक क्षेत्रों में अधिग्रहण, विकासमूलक भाषा विज्ञान तथा संज्ञानात्मक विज्ञान सम्मिलित है।

रोजगार से जुड़े पदनाम तथा विशेषज्ञता के क्षेत्र


• द्विभाषी शिक्षा
• प्रसारणकर्ता/समाचार वाचक
• सम्प्रेषण व्यतिक्रम विशेषज्ञ
• कापी राइटर
• संपादक
• अनुदान/प्रस्ताव लेखक
• भाषान्तरकार
• भाषा योजनाकार
• कोशकार
• प्रोफेसर/अनुदेशक/शिक्षक
• मनोभाषा-विज्ञानी
• जन संपर्क
• पब्लिशिंग
• शोधकर्ता
• तकनीकी लेखक
• अनुवादक और इसके अलावा कई अन्य.

शिक्षा, पब्लिशिंग, मीडिया, सामाजिक सेवाएं, संचार, कंप्यूटर लैंग्वेजिज, स्वर विश्लेषण अनुसंधान, सम्प्रेषण व्यक्तिक्रम और भाषा संबंधी अन्य क्षेत्रों में करियर के वास्ते भाषा विज्ञान में डिग्री की बहुत कीमत होती है। हाल के वर्षों में विभिन्न उद्योगों में सक्षम भाषा- विज्ञानियों की जबर्दस्त मांग रही है।

ऐसा कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सम्प्रेषण विज्ञानों, तथा प्राकृतिक भाषा प्रोसेसिंग और समझ में कंप्यूटर अनुप्रयोगों, सूचना विज्ञानों तथा अन्य उच्च-प्रौद्योगिकी गतिविधियों में हुए विकास के कारण हुआ है. द्विभाषीकरण, साक्षरता, जातीय अल्पसंख्यकों की भाषा संबंधी समस्याओं और अनुप्रयुक्त भाषा-विज्ञान में अन्य विषयों के अन्तर्गत भी विकासोन्मुख क्षेत्र हैं।

भाषा विषयक अध्ययन के तहत उपलब्ध शिक्षण कार्य भी एक उत्तम विकल्प है। स्कूलों, कालेजों और अन्य शिक्षण संस्थानों में विदेशी भाषाओं में प्रशिक्षण/शिक्षण कार्यक्रम उपलब्ध है।

कई सरकारी एजेंसियां भाषा-प्रशिक्षण कार्यक्रमों के पर्यवेक्षण के लिए भाषा- विज्ञानियों को नियुक्त करती हैं। कई अन्य संगठन विभिन्न भाषाओं पर अनुसंधान संचालित करने या विशिष्ट क्षेत्रों, जैसे कि, मानचित्रीकरण हेतु भौगोलिक नामों के निर्धारण तथा अन्य उद्देश्यों के लिए कार्य करने हेतु भाषा-विज्ञानी रखते हैं।

कोशकार शब्दकोशों के प्रकाशन (इलेक्ट्रॉनिक रूप में भी) में संलग्न रहते हैं। वे उच्चारण, व्याकरणीय शब्दों की परिभाषा, विभिन्न भाषाओं, बोलियों की भिन्नता तथा व्युत्पत्ति से जुड़े मामलों से संबंद्ध होते हैं। प्रकाशन के अन्य क्षेत्र, जिनमें भाषा-विज्ञानी संलग्न रहते हैं, उनमें विदेशी भाषा पाठ्यपुस्तकें, संपादन और पाठन, लेखन तथा वर्तनी (पाठ्यसामग्री डिजाइनिंग) से जुड़े कार्यक्रम शामिल हैं।

भाषा विज्ञानियों की स्पीच पैथोलॉजी और ऑडियोलॉजी में भिन्न-भिन्न भूमिकाएं होती है। शोध प्रयासों के जरिए उन्होंने विभिन्न व्यक्तिक्रमों, जैसे कि एपेसिया, डीसलेक्सिया आदि से संबंद्ध भाषा विच्छेदन के विश्लेषण और मूल्यांकन के तरीकों में सुधार किया है। भाषा विज्ञान से संबंद्ध अनुसंधानों ने बच्चे के मुख से निकले पहले शब्द उपरांत उसके विभिन्न सामान्य चरणों के बारे में मूल्यवान सूचना भी उपलब्ध कराई हैं, जिससे बच्चे के भाषा व्यक्तिक्रम तथा विकास के सामान्य क्रम पर आधारित कार्यक्रम के डिजाइन का मूल्यांकन करने में मदद मिलती है। यह एक ऐसा व्यापक क्षेत्र है, जिसमें आने वाले दिनों में अधिक से अधिक भाषा विज्ञानियों के योगदान की मांग बलवती होगी।

भाषा विज्ञानी कुछेक आपराधिक मामलों को सुलझाने में प्रमुख भूमिका निभाते हैं। यहां तक कि जांच एजेंसियों को भी उन मामलों में भाषा विज्ञानियों की मदद लेनी पड़ती है, जिनमें वक्ता की पहचान करना सम्मिलित होता है. ध्वनिक स्वर विज्ञान भाषा विज्ञान अध्ययन के महत्वपूर्ण पाठ्यक्रमों में से एक है, भाषा विज्ञानी को इस तरह की जांच के लिए तकनीकी रूप से प्रशिक्षित प्रामाणिक मानव शक्ति माना गया है।

आजकल कॉलसेंटर से जुड़े रोजगारों की भरमार है। भाषा-विज्ञानी सीधे अपनी जरूरतें पूरी करते हैं। ये केंद्र न केवल प्रशिक्षण मॉड्यूल्स तैयार करने के लिए भाषा-विज्ञानियों की सेवाए लेते हैं, बल्कि अपने प्रशिक्षुओं को पेशेवर के तौर पर प्रशिक्षित करते हैं। इस उद्योग में भाषा-विज्ञानियों की असीमित मांग हमेशा बनी रहेगी।

तकनीकी लेखन में मैनुअल्स अनुदेशात्मक सामग्री और इंजीनियरी रिपोर्टें तैयार करने के लिए समझ योग्य भाषा में वैज्ञानिक तथा तकनीकी सूचनाएं प्रस्तुत करना शामिल होता है। ये तकनीकी लेखक कोई और नहीं बल्कि भाषा विज्ञानी ही होते हैं सामान्यतः उस टीम का हिस्सा होते हैं, जो कि वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, लेखाकारों और अन्यों के साथ निकटता से कार्य करते हैं।

अनुवाद का अध्ययन भाषा विज्ञान कार्यक्रम का ही हिस्सा होता है। भाषा विज्ञानी को अनुवाद की तकनीकों में प्रशिक्षित किया जाता है, जो उन्हें सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों, दोनों में अनुवादक के पदों के लिए पात्र बनाते हैं। इन क्षेत्रों के अलावा, भाषा विज्ञानियों के लिए कई नए उभरते क्षेत्र भी हैं जिनमें उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। ये क्षेत्र हमारे बैंकिंग और वित्तीय सेवा से संबंधित हैं, जो कि भाषा विज्ञानियों को प्रबंधकीय पदों का प्रस्ताव करते हैं जिन्हें डेलीगेट्स को प्रभावी वाच्य, भाषा, इनपुट, कल्चर और ग्राहक सेवा प्रशिक्षण देने तथा प्रशिक्षण की सतत निगरानी का दायित्व सौंपा जाता है।

ऊपर वर्णित रोजगारोन्मुख क्षेत्रों के अलावा, यदि कोई व्यक्ति अनुसंधान के क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त करना चाहता है, तो भाषा विज्ञान के क्षेत्र में न केवल भारत में बल्कि विश्व के अन्य भागों में भी व्यापक अवसर मौजूद हैं। यदि आप सघन यात्राएं करने को तैयार हैं और विश्व में विभिन्न क्षेत्रों की संस्कृति और सभ्यताओं से परिचित हैं तो भाषा विज्ञान आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है। लगभग सभी बड़ी और छोटी वित्तपोषण एजेंसियां (राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय दोनों) भाषा-विषयक अनुसंधान कार्यों के लिए अध्येतावृत्ति/ छात्रावृत्ति सहायता प्रदान करती हैं, जो कि उनके रुचि के क्षेत्र पर निर्भर करता है।

रोजगार के स्थान:


• परामर्शी फर्में
• प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय
• सरकारी सेवाएं:
जांच एजेंसियां
रक्षा विभाग, आदि
• अंतर्राष्ट्रीय संगठन
• भाषा संस्थान
• मीडिया हाउस
• प्रकाशन कंपनियां
• अनुसंधान संस्थान
• स्पीच/लैंग्वेज पुनर्वास केंद्र
• चिहिन्त भाषा प्रकोष्ठ
• विश्वविद्यालय और कालेज

अध्ययन कहां करें और इसके लिए पात्रता


भारत में लगभग सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों में भाषा विज्ञान में अनुसंधान कार्यक्रम (एमफिल/पीएचडी) संचालित किए जाते हैं। ज्यादातर संस्थान भाषा विज्ञान में मास्टर कार्यक्रम भी संचालित करते हैं। इन विश्वविद्यालयों में प्रवेश परीक्षा में शामिल होने के लिए पात्रता किसी भी विषय क्षेत्र में स्नातक है। यदि आप विश्व के अन्य हिस्सों में पाठ्यक्रम में शामिल होना चाहते हैं तो भाषा विज्ञान लगभग सभी विश्वविद्यालयों और प्रतिष्ठित कालेजों में स्नातक स्तर से ही संचालित किया जाता है। विदेशी कार्यक्रमों के बारे में विस्तृत सूचना संबंधित कालेजों/ विश्वविद्यालयों से प्राप्त की जा सकती है।

लेखक मैसूर स्थित एक शिक्षाविद् हैं, ई मेल: brajeshaiish@gmail.com

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