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व्यवहार विज्ञान एक करियर के रूप में

Author: 
शैलेन्द्र कुमार
Source: 
रोजगार समाचार
व्यवहार विज्ञान अध्ययन, छात्रों को समूह तथा व्यक्तिगत संदर्भ में निर्णय लेने तथा संचार के बारे में शिक्षा देता है। किसी व्यवहार का अध्ययन आसान नहीं है। व्यवहार विज्ञान मूल रूप में मानव तथा पशु-दोनों के व्यवहार का नियंत्रित तथा प्रकृतिवादी विश्व में अध्ययन करता है। व्यवहार विज्ञान कुछ समय पहले तब चलन में आया जब मनुष्य ने एक-दूसरे का तथा पशुओं का इस आशय से अध्ययन करना प्रारंभ किया। वे भी उनकी दुनिया का भाग होते हैं। अन्यों में मनोवैज्ञानिक एवं सामाजिक तंत्रिका विज्ञानी, मनुष्य की एक-दूसरे के प्रति तथा उनके आस-पास के जीवों से संचार कुशलता एवं निर्णय प्रक्रिया से प्रभावित थे। वे व्यक्तियों के परस्पर सम्पर्क करने तथा अपने जीवन के विभिन्न मामलों के संबंध में निर्णय लेने के तरीके से भी आकर्षित थे। यह वही आकर्षण है जिसे आज-कल व्यवहार विज्ञान कहा जाता है।

वैज्ञानिक विषय :


व्यवहार विज्ञान दो मुख्य वर्गों में बंटा होता है -1. तंत्रिका-निर्णय विज्ञान (न्यूरल डिसिजन साइंस) एवं 2. सामाजिक संचार विज्ञान (सोशल कम्यूनिकेशन साइंस)। निर्णय विज्ञान इस तथ्य से संबंधित होता है कि हमारा निर्णय एवं हमारा शरीर रचना विज्ञान एक-दूसरे को कैसे प्रभावित करते हैं। हम यह निर्णय कैसे लेते हैं कि सामाजिक परिवेश में रहने के लिए क्या कार्य किया जाए। दूसरी ओर संचार विज्ञान हमारे समाज, संबंधों तथा हमारे शरीर पर भाषा और संचार के प्रभाव का विश्लेषण करता है। यदि संचार पर एकाग्रता को चुनते हैं तो आपको मानव विज्ञान, संगठनात्मक व्यवहार, संगठन अध्ययन, सामाजिकी एवं सामाजिक नेटवर्क की गहराई में जाना होगा।

महत्व :


अपनी तथा अपने आस-पास की समझ हमें विश्व के कार्य करने के तरीके और यह आगे कैसे बढ़ता है इसे समझने में सहायता करता है। व्यवहार विज्ञान के क्षेत्र में करियर सामाजिक विज्ञान तथा प्राकृतिक विज्ञान को आपस में जोड़ने के लिए अनिवार्य होते हैं इन दोनों क्षेत्रों को एक साथ ला कर, दोनों क्षेत्रों में और अधिक खोज करने और दोनों के बीच व्यापक सहयोग की और संभावना होगी। इससे नए सिद्धांतों एवं खोजों को बढ़ावा देकर विश्वभर में अनेक व्यक्तियों को लाभ होगा।

व्यवहार विज्ञान तथा सामाजिक विज्ञान के बीच अंतर


व्यवहार विज्ञान शब्द का प्रायः सामाजिक विज्ञान शब्द से भ्रांति होती है। यद्यपि ये दोनों व्यापक क्षेत्र आपस में अंतर-संबंधित होते हैं और व्यवहार की प्रणालीबद्ध प्रक्रियाओं का अध्ययन करते हैं, किंतु व्यवहार के विभिन्न आयामों के वैज्ञानिक विश्लेषण के अपने स्तर पर भिन्न होते हैं। व्यवहार विज्ञान एक सामाजिक व्यवस्था में जीवों में तथा उनके बीच निर्णय प्रक्रियाओं एवं संचार नीतियों का अनुसंधान करने के लिए अनुभव आश्रित सूचना का सार देता है। इसमें अन्य क्षेत्रों में मनोविज्ञान तथा सामाजिक तंत्रिकाविज्ञान जैसे क्षेत्र निहित होते हैं। इसके विपरीत, सामाजिक विज्ञान व्यक्ति तथा समूहों के संरचनात्मक समायोजन पर सामाजिक संगठन के प्रभावों के माध्यम से किसी सामाजिक प्रणाली की प्रक्रियाओं का अध्ययन करने के लिए एक परिप्रेक्ष्य ढांचा देता है। इसमें विशेष रूप से सामाजिकी, अर्थशास्त्र, इतिहास, परामर्श, लोक स्वास्थ्य, मानव विज्ञान तथा राजनीति विज्ञान जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

लाभ :


व्यवहार विज्ञान में करियर बनाने के इच्छुक व्यक्तियों के लिए लाभ व्यापक हो सकते हैं। मानव का अध्ययन सामान्यतः एक अत्यधिक रोचक विषय है और विभिन्न व्यक्तियों तथा विभिन्न संस्कृतियों के बीच समझ को बढ़ावा देने में सहायता करता है। दोनों-समानताओं तथा भिन्नताओं का अध्ययन करके परियोजना तथा विचारों पर एक साथ सामान्य आधार का पता लगाना तथा वैयक्तिक कार्य में सहायता करना संभव है, जिससे विश्व में परियोजना एवं अन्य कार्यों से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति को लाभ मिल सकता है। यह व्यवहार विज्ञान के करियर में उपयुक्त व्यक्ति को मिलने वाले लाभ का एक भाग है।

संभाव्यता


कुछ व्यक्ति, व्यवहार विज्ञान के करियर में आने वाली प्रबल संभावनाओं का अनुभव नहीं करते। युद्ध तथा अन्य अत्याचार प्रायः इसलिए घटित होते हैं, क्योंकि मनुष्य इसके कुछ सामान्य आधार नहीं तलाशते। व्यवहार विज्ञानी व्यक्तियों में उस सामान्य आधार का पता लगाने और व्यक्तिगत आवश्यकता तथा अन्यों के साथ उनके संबंधों के अभाव तथा उनमें कमियों का पता लगाने पर कार्य करते हैं। इसका यह अभिप्राय नहीं है कि व्यवहार विज्ञान के करियर में सेना के साथ कार्य करना या युद्ध को रोकने के प्रयास करने का कार्य शामिल है, बल्कि व्यवहार विज्ञान के क्षेत्र में करियर का मुख्य ध्येय इस तथ्य की बेहतर समझ का विकास करना है।

व्यवहार विज्ञान क्या है?


व्यवहार विज्ञान एक ऐसा विषय है जो आपको अध्ययन के निम्नलिखित क्षेत्रों से जोड़ता है:

• मनोविज्ञान : एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें यह अनुप्रयुक्त तथा शैक्षिक अध्ययन किया जाता है कि वैचारिक प्रक्रियाओं, भावात्मक प्रतिक्रिया के संबंध में व्यक्ति कैसे सोचते तथा व्यवहार करते हैं और यह क्षेत्र व्यवहार संबंधी मामलों का सम्मिलित रूप है। वह व्यक्ति जो मनोविज्ञान के क्षेत्र में कार्य करते हैं वे मानसिक स्वास्थ्य तथा उन ज्वलंत मामलों का सामना करते हैं जिनसे व्यक्ति प्रति दिन गुजरते हैं यहां तक कि एक बेहतर जीवन की खोज मनोविज्ञान के माध्यम से की जाती है। एक अभ्यासरत मनोवैज्ञानिक बनने के लिए आपको मनोविज्ञान के डॉक्टर या पीएच.डी होने की आवश्यकता होती है। सभी राज्यों को ऐसे मनोवैज्ञानिकों की आवश्यकता होती है जो लाइसेंस या प्रमाणन के लिए मरीजों को देखते हैं।

• समाज : विज्ञान में समाज का तथा यह अध्ययन निहित होता है कि समाज का निर्माण करने वाले व्यक्ति मनोवृत्ति, प्रतिक्रियाओं तथा अवसरों को प्रभावित करते हैं। समाज विज्ञानी व्यक्तियों को उनकी श्रेणी, आयु, लिंग, धर्म एवं जाति के अनुसार वर्गीकृत करते हैं। इसमें राजनीति, अर्थशास्त्र, धर्म एवं संबंधों जैसी सांस्थानिक प्रवृत्ति भी शामिल होती है। इस संकाय में सामान्यतः कोई मास्टर डिग्री या पीएच.डी आवश्यक होती है, किंतु किसी विश्वविद्यालय स्तर पर व्यवहार विज्ञान का ज्ञान ठोस शैक्षिक शुरूआत देता है।

• मानव विज्ञान : व्यवहार विज्ञान की एक आकर्षक शाखा है जो मनुष्य के जैविकीय तथा सामाजिक-सांस्कृतिक इतिहास के विवरण देती है। यदि आप इस प्रकार के अन्वेषण या खोज में हैं तो पुरातत्व विज्ञान, जैव मानव विज्ञान, भाषा विज्ञान तथा सामाजिक- सांस्कृतिक मानव विज्ञान के क्षेत्र में जाएं। इस विषय शाखा में व्यवहार विज्ञान की अनेक रोचक परियोजनाएं हैं। मानव विज्ञान में मास्टर डिग्री या पीएच.डी. करने के लिए व्यवहार विज्ञान में स्नातक डिग्री एक मजबूत प्रारंभिक आधार हो सकती है।

• सामाजिक नेटवर्क में : यह अध्ययन निहित है कि समूह, संगठन तथा समाज कैसे बनते हैं। शायद अत्यधिक प्रचलित सामाजिक नेटवर्क जैसे फेसबुक, ट्विट्टर, मल्टीप्लाई तथा अन्य लोकप्रिय सामाजिक मीडिया-जिनका लाखों व्यक्ति संचार के लिए उपयोग करते हैं, ऐसे साधन हैं जिन्हें व्यक्ति दैनिक आधार पर उपयोग करके आसानी से आत्मसात कर सकते हैं।

• मानव जाति विज्ञान: प्राणियों से संबंधित विज्ञान एक ऐसा विज्ञान है, जिसमें मानव जाति विज्ञानी पशु-व्यवहार का, विशेष रूप से सीखे हुए व्यवहार की तुलना में उनके नैसर्गिक व्यवहार का अध्ययन करते हैं। व्यवहार विज्ञान के एक भाग के रूप में मानव जाति विज्ञान मनुष्यों में नैसर्गिक या मूल व्यवहार पर ध्यान देता है।

• न्यूरो मार्केटिंग (तंत्रिका विपणन) : यह नया क्षेत्र उपभोक्ता के व्यवहार का अध्ययन करने के लिए तंत्रिका-विज्ञान का उपयोग करता है, किंतु इस समय निजी क्षेत्र में इसका उपयोग अत्यधिक कम है।

• जनमत अनुसंधान: व्यवहार विज्ञान जन-मत पर पड़ने वाले प्रभाव आदि की जानकारी के साथ-साथ विषय को बेहतर रूप में स्पष्ट करता है।

• स्वास्थ्य शिक्षा/सार्वजनिक स्वास्थ्य : व्यवहार विज्ञान व्यक्तियों को, उनकी स्वस्थ पसंद बनाने में सहायता देता है। इसमें प्रायः विविध रोग निवारण, आहार, मद्यपान या नशीले पदार्थों के सेवन या वरिष्ठ नागरिकों के लिए जीवन-स्तर जैसे विषयों पर समाज-वार शिक्षा प्रवर्तन शामिल होते हैं।

कौशल :


मानव-प्रकृति गतिशील तथा अनुमान से परे होती है, किंतु किसी व्यवहार विज्ञानी को समाज में गतिशील परिवर्तनों चाहे वे व्यक्तिगत, समूहगत या सामाजिक परिवर्तन हों, को अंगीकार करना एवं समझना चाहिए। किसी व्यवहार विज्ञानी के लिए, अपने विषयों को समझने हेतु वार्तालाप अत्यधिक महत्वपूर्ण होता है और इस तरह उसे उसमें उच्च अंतर वैयक्तिक संचार कौशल होना अपेक्षित होता है। संगठनों का अध्ययन करते समय व्यवहार विज्ञानियों को एक तरफ तो संगठन के व्यावसायिक नीतिशास्त्र को समझना चाहिए और वहीं दूसरी ओर उन्हें अपने व्यवसाय (व्यवहार विज्ञान) की सत्यनिष्ठा को भी बनाए रखना चाहिए। सूचना विश्लेषण भी व्यवहार विज्ञान में एक अन्य महत्वपूर्ण कार्य है। व्यवहार विज्ञानियों को, सूचना की जांच करने तथा उन्हें सिद्धांतों में परिवर्तित करने के लिए उन्नत कंप्यूटर अनुप्रयोगों के माध्यम से सूचना का विश्लेषण करना आवश्यक होता है। किसी भी व्यवहार विज्ञानी में अच्छा प्रस्तुति एवं लेखन कौशल होना चाहिए, ताकि वे अपने निष्कर्ष तथा अनुसंधान, व्यवहार विज्ञान का ज्ञान नहीं रखने वाले व्यक्ति या जन-समुदाय में आसानी से पहुंचा सके। मानव व्यवहार परिवर्तनशील है और मिले-जुले सिद्धांत का सृजन करना किसी व्यवहार विज्ञानी के लिए संभव नहीं है। इसलिए किसी सिद्धांत का सृजन करने के लिए इसे क्षेत्र में जाना होगा, समस्या का गहन मूल्यांकन करना तथा उनका समाधान करना होगा क्योंकि सिद्धांतों को बदलने वाली समस्याएं भी समय-समय पर बदलती रहती हैं। किसी प्रभावी सिद्धांत को प्राप्त करने के लिए किसी व्यवहार विज्ञानी को सिद्धांतों का सृजन करते समय अपने अनुसंधान की अन्य व्यवहार विज्ञानियों से तुलना करनी चाहिए।

कार्य-संभावनाएं:


व्यवहार विज्ञानी, जो मानव विज्ञान, मानव जाति विज्ञान के क्षेत्र में रत है, के लिए अपराध विज्ञानी आपराधिक प्रोफाइलर, मनोविज्ञान, समाजशास्त्री, कार्पोरेट कोच, आर्थिक विश्लेषक, बाजार अनुसंधानकर्ता, तंत्रिका विपणन एवं स्वास्थ्य शिक्षा/सार्वजनिक स्वास्थ्य में करियर के विकल्प हैं। मानव विज्ञानियों को या तो सरकार अथवा गैर-लाभ भोगी संगठन द्वारा कार्य पर रखा जाता है। उनका कार्य भूगोल, विकास तथा व्यक्ति समूहों पर लक्षण जैसे तथ्यों के प्रभाव का मूल्यांकन करना होता है। वे अपराध, निर्धनता तथा सामाजिक अशांति जैसी सामाजिक बुराइयों के मूल कारणों को समझने में सहायता करते हैं और इस तरह सरकार को, जनता को अपील करने वाले विकास कार्यक्रमों में सहायता करते हैं। मानव जाति विज्ञानी का कार्य मानव तथा पशुओं के नैसर्गिक व्यवहार का अध्ययन करना है। मानव विज्ञानियों की तरह ही अपराध विज्ञानी भी अर्थशास्त्र, जनांकिकी तथा भूगोल जैसे तथ्यों की जांच करके अपराध के मूल कारणों का अध्ययन करते हैं और अपराध की दर को रोकने में सहायता देते हैं। आपराधिक प्रोफाइलर उन कारणों को समझने का प्रयास करते हैं कि कोई व्यक्ति विशेष अपराध में क्यों आया। वे उन्हें अपराध जगत से बाहर भी निकाल सकते हैं। मनोवैज्ञानिक मानव व्यवहार का अध्ययन करते हैं। समाजविज्ञानी समाज के व्यवहार का अध्ययन करते हैं।

समाजविज्ञानी सामाजिक-सांस्कृतिक परिस्थितियों को समझ कर समुदायों में निर्धनता या हिंसा जैसी समस्याओं के उन्मूलन में सहायता करते हैं। कोई भी समाज विज्ञानी सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में कार्य कर सकता है या गैर-सरकारी संगठन में कार्य प्राप्त कर सकता है। पनप रहे प्रतिस्पर्धी परिवेश में प्रतिभा को आंकना कठिन है, एक कॉर्पोरेट कोच प्रतिभावान व्यक्ति की भर्ती कराने में सहायता करता है और कंपनी को बेहतर सफलता में योगदान देता है। आर्थिक विश्लेषक उपभोक्ता की निर्णय लेने की प्रक्रिया को समझने में सहायता करता है और व्यवसायी को उसके उत्पाद बाजार में बेचने तथा सरकार को बाजार पर दबाव डालने में सक्षम बनाता है किसी भी आर्थिक विश्लेषक को कोई भी व्यावसायिक संगठन या सरकारी निकाय रोजगार पर रख सकता है। आर्थिक विश्लेषक जैसे बाजार अनुसंधानकर्ता, किसी उपभोक्ता द्वारा कोई उत्पाद खरीदने से पहले उस उत्पाद के विश्लेषण करने की प्रक्रिया को समझते हैं। किसी भी बाजार अनुसंधानकर्ता को, व्यवसाय संगठन बाजार को समझने के उद्देश्य से रोजगार पर रख सकते हैं। छोटे निजी क्षेत्रों में, न्यूरो-मार्केटिंग उभरी है. यहां व्यवहार विज्ञानी उपभोक्ता के व्यवहार का अध्ययन करने के लिए न्यूरो साइंस की सहायता लेते हैं। विभिन्न रोगों, मद्यपान तथा नशीले पदार्थो के सेवन या आहार तथा वरिष्ठ नागरिकों की विशेष देखभाल जैसे विषय स्वास्थ्य शिक्षा या सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग देखता है, जहां व्यवहार विज्ञानी व्यक्तियों के लिए बेहतर स्वास्थ्य विकल्प देने में सहायता करते हैं।

वेतन :


व्यवहार विज्ञानी बहुत अच्छा वेतन प्राप्त करते हैं। सार्वजनिक क्षेत्रों, अनुसंधान संस्थाओं तथा विभागों में सेवारत ऐसे व्यक्तियों को सरकार की शर्तों के अनुसार वेतन-पैकेज मिलता है। अंतर्राष्ट्रीय विकास एजेंसियों में सेवारत व्यवहार विज्ञानियों को उच्च वेतन तथा अन्य लाभ मिलते हैं। कॉर्पोरेट गृह तथा उद्योग वेतन तथा भत्तों के अतिरिक्त अन्य अनुषंगी लाभ भी देते हैं। शैक्षिक संस्थाओं के प्रोफेसरों तथा अध्यापकों का वेतन पैकेज भी आकर्षक होता है।

लेखक सामाजिकी विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ से पीएच.डी. डिग्री धारी हैं। ईमेल: shailendra.14@ gmail.com

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