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मीडिया पारिस्थितिकी में करियर

Author: 
डॉ. प्रदीप नायर
Source: 
रोजगार समाचार
मीडिया पारिस्थितिकी सूचना- परिवेश का अध्ययन है। यह इस जानकारी से संबंधित है कि किस तरह संचार की प्रौद्योगिकी तथा तकनीकी सूचना के रूप, मात्रा, गति, वितरण तथा दिशा को नियंत्रित करती है और कैसे इस सूचना का रूप या प्रवृत्ति लोगों के ज्ञान, मूल्यों एवं मनोवृत्ति को प्रभावित करती है।

मीडिया पारिस्थितिकी व्यापक रूप में अपनाए जाने वाले कई विषयों जैसे मनोविज्ञान एवं सामाजिक विज्ञान को उत्कृष्ट बनाती है, क्योंकि यह माना जाता है कि व्यक्तियों का मनोविज्ञान तथा सामाजिक संगठन की उनकी पद्धतियां, बड़े पैमाने पर, किसी संस्कृति की विशिष्ट सूचना पद्धति की होती है।

एक नए व्यापक विषय के रूप में मीडिया पारिस्थितिकी हमें, मीडिया तथा मीडिया परिवेश की अपनी समझ को व्यापक बनाने में सहायता करती है। यह हमें दैनिक मानवीय कार्यों में विभिन्न मीडिया प्रौद्योगिकी तथा तकनीकों, सूचना एवं संचार कोडों की भूमिका का अध्ययन करने का अवसर देती है।

मीडिया पारिस्थितिकी में, सामग्रियों या विषयों को सरल बनाने वाले उपकरण के रूप में देखने के बजाय हम उन्हें एक परिवेश मानते हैं जैसे स्वयं भाषा, प्रतीकात्मक परिवेश जिसमें हम अपनी मानवता की विशेष रूप में खोज करते हैं, आकार देते हैं और व्यक्त करते हैं।

एक नए परिप्रेक्ष्य या उभर रहे व्यापक विषय के रूप में मीडिया पारिस्थितिकी को जटिल संचार प्रणालियों का एक परिवेश के रूप में अध्ययन माना गया है और यह मानवीय भावनाओं, विचार मूल्यों एवं आचरण के साथ संचार मीडिया, प्रौद्योगिकी तकनीक तथा प्रक्रियाओं के साथ पारस्परिक क्रिया से संबंधित है। इस तरह मीडिया पारिस्थितिकी एवं पूर्व निदर्शनात्मक (प्रिपेराडिग्मेटिक) विज्ञान है।

व्यक्ति एवं कार्य क्षेत्र


प्रकृति में पूर्णतः बहुविषयीय, मीडिया पारिस्थितिकी विविध सैद्धांतिक तथा प्रणालीबद्ध दृष्टिकोणों को मीडिया परिवेश में कार्यान्वित करती है, जिसमें दार्शनिक सौंदर्यपरक, साहित्यिक, ऐतिहासिक, मनोवैज्ञानिक, सामाजिक, मानवविज्ञानीय, राजनीतिक, आर्थिक तथा वैज्ञानिक अन्वेषण एवं अनुप्रयुक्त, व्यावसायिक और शैक्षणिक परिप्रेक्ष्य शामिल हैं।

मीडिया पारिस्थितिकी ऐसे मामलों से जुड़ी है कि कैसे संचार मीडिया मानव की धारणा, समझ, भावना तथा मूल्यों को प्रभावित करती है और मीडिया से हमारे पारस्परिक संबंध कैसे हमारी उत्तर जीविता के अवसरों को कारगर या बाधक बनाते हैं।

मीडिया पारिस्थितिकी में, हम मीडिया परिवेश, उनके ढांचे, वर्ण्य-विषय, एवं मनुष्य पर प्रभाव के बारे में अध्ययन करते हैं। मीडिया परिवेश एक मिश्रित संदेश प्रणाली है जो कई रूपों में मानव की सोच, भावना तथा व्यवहार को प्रभावित करती है। जो हम देखते या कहते हैं और करते हैं, उसे यह रूप देता है यह हमें कार्य देता है और उन्हें करने पर बल देता है। यह निर्दिष्ट करता है कि हमें क्या करना है और क्या नहीं।

रेडियो, फिल्म, दूरदर्शन आदि जैसे मीडिया परिवेश का अध्ययन करते समय सामान्यतः विशेष विवरण प्रायः अस्पष्ट एवं अनौपचारिक होते हैं, हमारी इस धारणा से आधे अधूरे रहते हैं कि जिसका हम सामना करते हैं वह कोई परिवेश नहीं, बल्कि मात्र एक प्रक्रिया (मशीन) है।

मीडिया पारिस्थितिकी हमें इन विनिर्दिष्टियों का अधिक स्पष्ट रूप में अध्ययन करने का अवसर देती है। हमें यह पता लगाने का अवसर देती है कि मीडिया हमें कौन सा कार्य करने को कहती है, जो हम देखते हैं, मीडिया उसे रूप कैसे देती हैं। जो हम करते हैं मीडिया उसका हमें क्या बोध कराती है।

आजकल मीडिया पारिस्थितिकी ने एक अद्भुत विषय का स्थान ले लिया है, क्योंकि विश्व पर मीडिया के प्रभावों की जानकारी इसमें निहित है। मुख्य रूप से सामाजिक पृष्ठभूमि के साथ मीडिया पारिस्थितिकी मनुष्य पर विभिन्न मीडिया के प्रभावों का अध्ययन करती है।

मीडिया पारिस्थितिकी युवा मीडिया छात्रों को, मीडिया को न केवल सूचना के एक तटस्थ मार्ग के रूप में, बल्कि इस रूप में समझने का एक श्रेष्ठ अवसर देती है कि किसी तरह प्रत्येक मीडिया रूप सूचना को मौलिक रूप में परिवर्तित करते हैं। मीडिया पारिस्थितिकी में, हम अध्ययन करते हैं कि प्रत्येक मीडिया में ऐसी विशेष तथा खोज योग्य प्रवृत्ति होती है जो उस तरीके को आकृति देती है जिसे मीडिया अनुभव करता है।

मीडिया पारिस्थितिकी यह भी पता लगाती है कि इसकी अतटस्थता की प्रकृति तथा प्रवृत्ति के कारण मीडिया अपने प्रयोग से मनुष्य पर कई प्रभाव छोड़ता है।

कार्य की प्रकृति


मीडिया पारिस्थितिकी में कोई डिग्री या मीडिया अध्ययन में कोई औपचारिक प्रशिक्षण आपको विविध संचार कार्य दिला सकता है। अनुसंधान की दृष्टि से, मीडिया पारिस्थितिकी संचार तथा सामाजिक विज्ञान में डिग्रीधारी छात्रों को मीडिया का अधिक गंभीरता से अध्ययन तथा खोज करने का अवसर देती है क्योंकि अब संचार के नए प्रभावी रूप निरंतर फैलते जा रहे हैं. ट्विटर तथा माइक्रोब्लोगिंग जैसे सामाजिक नेटवर्किंग वेबसाइट का उदय एक सटीक केस अध्ययन है। ये सामाजिक नेटवर्किंग साइट्स तथा ब्लॉग अपने प्रयोक्ताओं में सामाजिक सूचना के चैनल पर जानकारी देकर ”आस-पास की घनिष्ठता“ की समझ सृजित कर रहे हैं, जो स्वयं में अध्ययन का एक रोचक क्षेत्र है।

एक मीडिया पारिस्थितिकी विज्ञानी के रूप में आप सामाजिक तथा संचार - दोनों का एक प्रणालीबद्ध विश्लेषण में विस्तार कर सकते हैं जो कार्यक्षेत्र में अधिक व्यापक एवं अंतर संबंधित है। इस तरह मीडिया पारिस्थितिकी एक मिश्रित रूप है और विभिन्न पैमानों पर मीडिया प्रणालियों में एक्टर्स तथा प्रोसेस के बीच संबंधों का अध्ययन है।

सामान्यतः संचार अध्ययन में, जब हम मीडिया पर ध्यान देते हैं तो विषय वस्तु के बारे में और वह विषय वस्तु मनुष्य पर कैसे प्रभाव छोड़ती है और फिर वे प्रभावित मनुष्य सामाजिक प्रणलियों को प्रभावित करने के लिए कैसे कार्रवाई कर सकते हैं, के बारे में सोचते हैं। यद्यपि मीडिया पारिस्थितिकी विषय वस्तु पर प्रणालियों के अन्य पैमानों के बारे में सोच का विकास करती है। यहां हम ऐसे हार्डवेयर का निर्माण करने के लिए प्रयुक्त उत्पादन की प्रणालियों की समर्थता को देखने का प्रयास करते हैं, जो विषय वस्तु का सृजन, वितरण करता है और उसे निभाता है। यह विषय डिजिटल रूप में सृजित तथा वितरित मीडिया कॉन्टेंट के वर्तमान आधिपत्य, हार्डवेयर उपकरणों एवं मानव उत्पादकों तथा डिजिटल मीडिया को प्रयोक्ताओं के बीच माध्यम बनने के लिए प्रयुक्त सॉफ्टवेयर प्रणालियों का अध्ययन करने के नए अवसर खोलता है।

इस समय, यह पता लगाने के लिए कि क्या डिजिटल मीडिया प्रणालियां मूल्य के प्रति तटस्थ हैं या क्या सॉफ्टवेयर उत्पादन की पद्धतियां, एग्लोरिद्म, भाषा विकल्प, कोड, इंटरफेस डिजाइनें और उसमें लगी लाइसेंसिंग प्रणालियां कुछ मूल्य (वैल्यू) उत्पन्न करती हैं, मीडिया पारिस्थितिकी पर व्यापक वाद-विवाद हो रहे हैं। इसलिए मीडिया पारिस्थितिकी मीडिया अध्ययन तथा प्रैक्टिस करने का एक नवप्रवर्तित मार्ग है। एक मीडिया पारिस्थितिकी विज्ञानी के रूप में आप मीडिया अध्ययन में प्रौद्योगिकी नियतिवाद पर पुनः सोच सकते हैं।

अध्ययन कहां करें एवं पात्रता


भारतीय मीडिया विद्यालयों के लिए मीडिया पारिस्थितिकी एक नया विषय है, इसलिए कोई भी भारतीय विश्वविद्यालय मीडिया पारिस्थितिकी में कोई विशेष पाठ्यक्रम नहीं चलाता है। किन्तु एक बौद्धिक परम्परा के रूप में, कई विश्वविद्यालय मीडिया पारिस्थितिकी को मानव विज्ञान एवं सामाजिक अध्ययन के एक कोर कंपोनेंट के रूप में पढ़ा रहे हैं। एशियन कॉलेज ऑफ जर्नलिज्म, चैन्ने, मुंबई विश्वविद्यालय; जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली; टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान, मुम्बई, सिम्बियोसिस विश्वविद्यालय, पुणे जैसे कुछ संस्थानों में मीडिया पारिस्थितिकी पर एक या दो विशिष्ट मॉड्यूल उनके नियमित मीडिया कार्यक्रमों के भाग हैं।

पांडिचेरी, हैदराबाद, जामिया मिल्लिया इस्लामिया जैसे केन्द्रीय विश्वविद्यालय मीडिया पारिस्थितिकी में अंतर-विषयीय अनुसंधान तथा इंटर एक्शन को बढ़ावा देते हैं. स्टेनहर्ड्ट स्कूल ऑफ कल्चर, एजुकेशन एंड ह्यूमन डेवलपमेंट ऑफ न्यूयार्क यूनिवर्सिटी, स्कूल ऑफ कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज्म ऑफ यूनिवर्सिटी मैन, स्कूल ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्यूनिकेशन ऑफ बुहन यूनिवर्सिटी, चीन; स्कूल ऑफ मीडिया स्टडीज ऑफ यूनिवर्सिटी ऑफ ओटावा, कनाडा, स्कूल ऑफ ला एंड मीडिया स्टडीज ऑफ येल यूनिवर्सिटी कुछ ऐसे अच्छे अध्ययन केन्द्र हैं जो मीडिया पारिस्थितिकी छात्रवृत्ति, अनुसंधान, समालोचना, अनुप्रयोग एवं कलात्मक अभ्यास में उत्कृष्टता को बढ़ावा तथा मान्यता देते हैं।

मीडिया पारिस्थितिकी एसोसिएशन (एमईए) भी औद्योगिक एवं शैक्षिक क्षेत्र में मीडिया पारिस्थितिकी के नव अध्ययन, अनुसंधान तथा अनुप्रयोग को बढ़ावा देती है और मीडिया संस्थाओं तथा संगठनों में विचारों, सूचना तथा अनुसंधान के खुले आदान-प्रदान को प्रोत्साहन देती है। यह एसोसिएशन छात्रों को उनकी व्यावसायिक उन्नति एवं विकास के लिए मीडिया पारिस्थितिकी के समसमायिक मामलों पर कार्य करने के लिए अनेक छात्रवृत्तियां देती है।

रोजगार कहां ढूंढ़ें :


मीडिया के पारम्परिक दृष्टिकोण मीडिया पाठों की लक्ष्य के रूप में जांच करने की ओर प्रवृत्त है, जो किसी फिल्म, किसी उपन्यास, किसी समाचार पत्र के लेख या रेडियो प्रसारण के संदर्भ में अनुभूति कराते हैं, क्योंकि आप अधिकांशतः एक निर्धारित पाठ से संबंधित होते हैं, जो एक केन्द्र बिन्दु, चाहे वह कोई मुद्रक हो या प्रसारण केन्द्र, से व्यापक रूप में उपलब्ध होते हैं। जब हम समकालीन मीडिया पारिस्थितिकी की ओर देखते हैं तो हमें अनेक मीडिया रूप दिखाई देते हैं, जो पारम्परिक मीडिया उद्देश्यों के सदृश नहीं होते। चाहे हम विकिपीडिया, वर्ल्ड ऑफ वारक्राफ्ट, फेसबुक या ट्विटर को देखें, हमें मीडिया के विविध रूप दिखाई देंगे, जिनका लक्ष्य की तुलना में अधिक विकास प्रक्रिया होने की संभावना होती है। ये विविध प्रकार के मीडिया गतिशील तथा खुली प्रणालियों से युक्त हैं, जिन्हें प्रोग्रामरों, जो स्वयं प्लेटफार्म को निरंतर अद्यतन करते रहते हैं और प्रयोक्ताओं, जो निरंतर प्रतिस्पर्धा की चिर परिवर्तनशील श्रृंखलाएं प्रस्तुत करते हैं, दोनों के ध्यान से बढ़ावा मिलता है। जब हम ऐसे संकल्पनात्मक साधनों को देखते हैं जिनकी सहायता से इन प्रक्रियाओं के विश्लेषण के तरीके का विकास होता है तो ऐसे साधनों, जो पारिस्थितिकी के अन्य रजिस्टरों का विश्लेषण करने में प्रयुक्त होते हैं, वे उपयोग में कुछ उपयोगी समानता प्रतीत होती है, क्योंकि वितरित नेटवर्क के रूप में और आकस्मिक व्यवहार की पद्धतियां तथा समर्थन लूप्स इस प्रकार के नेटवर्क पर सभी पैमानों पर समान होते हैं।

एक मीडिया पारिस्थितिक विज्ञानी के रूप में आप ऐसे संगठनों के साथ कार्य कर सकते हैं जो हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर मीडिया सामग्रियों एवं नीतिपरक कार्यों से जुड़े होते हैं। आप उन विश्व हार्डवेयर उत्पादन संस्थाओं, मैक्रो तथा माइक्रो नेटवर्किंग कंपनियों के साथ भी कार्य कर सकते हैं, जो स्थानीय मुद्दों की उपेक्षा किए बिना निरंतर बढ़ रही वैश्विक सूचना सोसायटी में नीतिपरक तथा राजनीतिक समस्याओं की जटिलता को दूर करती है।

वेतन :


मीडिया पारिस्थितिकी क्षेत्र में वेतन आपकी योग्यता एवं अनुभव, मीडिया एवं उद्योग मामलों में आपकी विशेषज्ञता तथा आपके संचार कौशल पर निर्भर करता है। संचार अध्ययन में डिग्री या डिप्लोमा के साथ मीडिया के पारिस्थितिकी पहलुओं की अच्छी समझ आपको एंट्री स्तर के पदों पर 30,000 से 40,000 रु. वेतन दिला सकती है। संचार अध्ययन में मास्टर या डॉक्टरेट डिग्री के साथ मीडिया पारिस्थितिकी में औपचारिक शिक्षा/विशेषज्ञता आपको रोजगार के अधिक अवसर देती है। प्रतिष्ठित मीडिया फर्में तथा परामर्शदात्रि संस्थाएं मीडिया पारिस्थितिकी व्यावसायियों को अपनी विभिन्न परियोजनाओं/कार्यक्रमों में अच्छा वेतन दे सकती हैं। मीडिया कॉन्टेट्स का उत्पादन एवं वितरण करने वाली वैश्विक हार्डवेयर तथा सॉफ्टवेयर कंपनियां मीडिया पारिस्थितिक अनुसंधान में समर्थन की अच्छी समझ रखने वाले व्यक्तियों को अच्छे पद देती है। एक सशक्त नेतृत्व, टीम विकास तथा नेटवर्किंग कौशल आपको मीडिया तथा नेटवर्किंग क्षेत्र में उच्च पद दिला सकते हैं।

अपने कौशल को प्रखर करें :


एक मीडिया पारिस्थितिकी विज्ञानी के रूप में मीडिया प्रणालियों को समझने के लिए आपको मीडिया अध्ययन के नए दृष्टिकोण का विकास करने की आवश्यकता होती है. नई मीडिया प्रौद्योगिकी, सॉफ्टवेयर, मानकों, प्रोटोकोल, प्रयोक्ताओं, डिजाइनरों तथा सामाजिक एवं परिवेश के संदर्भ में जिनमें मीडिया प्रणाली विद्यमान रहती हों, का व्यापक अध्ययन करने के लिए कार्य-पद्धति का विकास करना होगा। आपको मीडिया प्रौद्योगिकी तथा प्रकृति के बीच मिश्रित संबंधों को समझने की समझ की आवश्यकता होती है।

आपको उभर रहे मामलों और मनोरंजन एवं सृजनशील उद्योगों के ध्येय तथा नवप्रवर्तन एवं नीति विकास, विधिक और नीतिपरक मामलों, समाज के आर्थिक एवं सामाजिक सहयोग तथा सृजनशील उद्योगों में उद्योग सहभागियों और विभिन्न मीडिया के लिए कॉन्टेंट क्रिएटर्स के रूप में कार्यरत युवाओं की समस्याओं की बहुत अच्छी समझ होनी चाहिए।

कलात्मक अभिव्यक्ति पर मीडिया के प्रभाव, मानव प्रतिक्रियाओं पर इसके प्रभाव मानवता के लिए मीडिया के महत्व की समझ युवा छात्रों को मानव विकास के लिए मीडिया के प्रभावी उपयोग का निर्धारण करने में सहायता कर सकती है।

डॉ. प्रदीप नायर, अनवर जमाल किदवई जनसंचार अनुसंधान केन्द्र (एम.सी.आर.सी.), जामिया मिल्लिया इस्लामिया (केन्द्रीय विश्वविद्यालय), जामिया नगर, नई दिल्ली में डॉक्टरेट कार्यक्रम (पीएच.डी.) के कोऑर्डिनेटर हैं। ई-मेल आईडीः nairdevcom@ yahoo.co.in

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