रोजगार गारंटी पर अलग से ग्रामसभा की जरूरत: योगेश कुमार

Submitted by Hindi on Fri, 08/31/2012 - 11:07
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सीहोर के ही जहांगीरपुरा ग्राम पंचायत में जब सोशल ऑडिट पर चर्चा हुई, तो सरपंच एवं सचिव उस पर चर्चा करने के बजाय ग्रामसभा सदस्यों द्वारा अविश्वास प्रस्ताव पेश कर दिए जाने के डर से भाग गए। धार जिले के माफीपूरा ग्राम पंचायत के ग्रामीणों का कहना है कि पिछले छह वर्षों से वहां 15 अगस्त की ग्रामसभा में सिर्फ झंडावंदन ही किया जाता है।

मध्यप्रदेश में ग्रामसभाओं के आयोजन एवं रोजगार गारंटी के तहत ग्रामसभा में किए जाने वाले सोशल ऑडिट के लिए ग्रामीणों को प्रेरित करने के लिए स्वैच्छिक संस्था समर्थन द्वारा स्थानीय प्रशासन एवं संस्थाओं के सहयोग से प्रदेश के 10 जिलों में 1000 से ज्यादा पंचायतों में पिछले एक माह से विशेष अभियान चलाया गया। अभियान के बाद पिछले तीन दिनों से ग्राम पंचायतों में अनिवार्यतः आयोजित की जाने वाली ग्रामसभा के अवलोकन में यह देखा गया कि जिन ग्रामसभाओं में सोशल ऑडिट हुआ, वहां भ्रष्टाचार के व्यापक मामले सामने आए। ग्रामसभाओं में शासन द्वारा निर्धारित 30 बिंदुओं पर चर्चा संभव नहीं हो पाया। समर्थन के निदेशक डॉ योगेश कुमार का कहना है कि प्रदेश की ग्रामसभाओं को नए सिरे से मजबूत करने एवं रोजगार गारंटी योजना के तहत सोशल ऑडिट पर अलग से ग्रामसभा करने की जरूरत है ताकि ग्रामीण विकास के एजेंडे पर पंचायतों को चर्चा करने का मौका मिल सके एवं सही तरीके से सोशल ऑडिट कर रोजगार गारंटी की अनियमिततओं एवं भ्रष्टाचार को रोका जा सके।

रीवा जिले के ग्राम पंचायत कुशवार के बिहारी सिंह पुलिस विभाग में अपनी सेवा दे रहे हैं, पर उनके नाम पर 2011-12 में 100 दिन काम करना दर्शाकर 12200 रुपए का भुगतान भी किया गया है। बिहारी सिंह ने कहा कि उन्होंने कभी काम नही किया है। गांव के राममिलन साकेत भी आर्मी में कार्यरत हैं एवं उन्हें भी रोजगार गारंटी में काम करना दर्शाया गया है। सतना जिले के ग्राम पंचायत पोड़ी की सरपंच बूटन बाई को दलित होने के कारण झंडावंदन नहीं करने दिया गया। इसकी रिपोर्ट थाने में की गई है। ग्राम पंचायत कड़ौडा के दबंग सरपंच के सामने ग्रामीण अपनी बात ही नहीं रख पाए। सीहोर के रायपुर नयाखेड़ा पंचायत में ग्रामसभा ही आयोजित नहीं की गई एवं पंचायत भवन पर ताला लगा हुआ था। सचिव के पास मौजूद रजिस्टर में 10 बजे ही 11.30 बजे के समय से सदस्यों के हस्ताक्षर एवं अंगूठे लगे हुए थे।

सीहोर के ही जहांगीरपुरा ग्राम पंचायत में जब सोशल ऑडिट पर चर्चा हुई, तो सरपंच एवं सचिव उस पर चर्चा करने के बजाय ग्रामसभा सदस्यों द्वारा अविश्वास प्रस्ताव पेश कर दिए जाने के डर से भाग गए। धार जिले के माफीपूरा ग्राम पंचायत के ग्रामीणों का कहना है कि पिछले छह वर्षों से वहां 15 अगस्त की ग्रामसभा में सिर्फ झंडावंदन ही किया जाता है। जबलपुर जिले के कई पंचायतों में आय-व्यय से जुड़ी जानकारियों को ग्रामसभा के दौरान पहली बार सार्वजनिक तौर पर दीवारों पर लगाया गया। बड़वानी जिले के ग्राम पंचायत सुखपुरी में सरपंच एवं सचिव ने ग्रामसभा के समक्ष स्वीकार किया कि कपीलधारा कूप में एस्टीमेट से अधिक राशि खर्च हो जाने पर अन्य कार्यों में फर्जी मजदूरों की हाजरी डाल कर समायोजन किया गया है। झाबुआ जिले में कई ग्रामसभाओं में सामाजिक अंकेक्षण में मरे हुए व्यक्तियों के नाम पर भुगतान, पलायन पर गए लोगों के नाम पर भुगतान एवं जिन्होंने गांव में रहकर काम नहीं किया, उनके नाम पर भी भुगतान के मामले चर्चा में आए।

उल्लेखनीय है कि रोजगार गारंटी योजना ग्रामीण विकास के लिए देश की एक बड़ी योजना है, जिसमें भ्रष्टाचार के व्यापक आक्षेप लग रहे हैं। भ्रष्टाचार को रोकने एवं पारदर्शिता के लिए सोशल ऑडिट का प्रावधान योजना में हैं, पर पंचायतें इससे बचना चाहती है। ग्रामसभा में सोशल ऑडिट को सुनिश्चित कराने के लिए संस्था द्वारा प्रदेश के 10 जिलों सीहोर, धार, बड़वानी, झाबुआ, पन्ना, सतना, रीवा, जबलपुर, सिवनी एवं दमोह में सोशल ऑडिट की प्रक्रिया के लिए प्रशासन के सहयोग से अभियान चलाया गया। अभियान के तहत ग्राम पंचायत स्तर पर 2-2 प्रेरक तैयार किए गए, जो उसी ग्राम सभा के सदस्य हैं।

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