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यमुना में अबाध प्रवाह चाहिए

Author: 
रमेश बाबा
Source: 
राष्ट्रीय सहारा (हस्तक्षेप), 23 मार्च 2013
प्रस्तुति - सिराज केसर

कृष्णप्रिया राधा जी का गांव है बरसाना। बरसाना में स्थित मानमंदिर के संस्थापक और यमुना रक्षक दल के प्रणेता रमेश बाबा की पहचान जुझारू संत की है। कृष्ण भक्ति के साथ ही, कृष्ण लीला के इलाकों के संरक्षण और यमुना मुक्ति अभियान को भी वे भगवद् भक्ति ही मानते हैं। प्रस्तुत है रमेश बाबा से सिराज केसर द्वारा लिया गया साक्षात्कार का संपादित अंश

यमुना रक्षक दल और यमुना मुक्ति पदयात्रा के प्रणेता मान मंदिर के संत रमेश बाबा ने साफ कहा है कि यमुना मुक्ति अभियान का लक्ष्य ब्रज में यमुना का अबाध प्रवाह ही है। यमुना जी की सेवा के लिए ही यमुना रक्षक दल बनाया गया है। यमुनोत्री से लेकर पूरे प्रवाह में हमें यमुना का निर्मल प्रवाह चाहिए। हमारा कर्त्तव्य है कि हर तरीके से यमुना की सेवा करें।

यमुना पदयात्रा की समाप्ति के समय भारत सरकार द्वारा वजीराबाद से ओखला तक गंदे पानी की निकासी के लिए यमुना के समानांतर एक महानाला बनाए जाने की बात हुई है। यह समझौता तो एक आंशिक उपलब्धि है। यमुना बांधों की कैद से मुक्त हो, इसके लिए संघर्ष जारी रहेगा। हमें भरोसा केवल भगवान का है।

सरकार ने एक महानाला बनाने की बात कही है। इसे बनाने के लिए जो कमेटी बनाई जाएगी उसमें यमुना रक्षक दल के भी दो सदस्य होंगे। महानाला बनाने की योजना लगभग ढाई हजार करोड़ रुपए की होगी। पैसा तो केंद्र सरकार लगाएगी पर ज़मीन दिल्ली सरकार को देनी है। और आजकल जो दिल्ली सरकार का रवैया हो गया है। हर काम के लिए यमुना खादर की ज़मीन अधिग्रहीत की जा रही है। महानाले के लिए यमुना जी की ज़मीन यदि सरकार लेती है तो यह उचित नहीं होगा।

जैसा सरकार ने वादा किया है कि वह कई रास्ते तलाश रही है, जिससे यमुना में पानी बढ़े। अगर वैसा करती है तो ब्रज में यमुना जल ज़रूर बढ़ जाएगा। लेकिन हमें तो यमुना का निर्मल प्रवाह चाहिए। यमुना में अबाध प्रवाह हो या ब्रज को पाइपों और नहरों से साफ पानी मिल जाय। इन दोनों में से हमें तो अबाध प्रवाह ही चाहिए।

यमुना और गंगा के संगम पर लगने वाले कुंभ में हजारों संत-संन्यासी आए। ब्रज में भी हजारों मठ-मंदिर हैं पर यमुना जी के लिए वे आवाज़ नहीं उठा रहे हैं। यमुना और गंगा जी का काम धार्मिंक ही है। यमुना की सेवा से भगवद् सेवा, राष्ट्र सेवा और प्रकृति सेवा, सब होती है। कोई भारतवासी, साधु-संत या महंत- मंडलेश्वर क्यों नहीं बोलता, यह मैं नहीं जानता हूं। मैं जो भी बोल रहा हूं केवल अपना कर्त्तव्य कर रहा हूं। यमुना मुक्ति अभियान से पूर्व हमने जो ब्रज में खनन के खिलाफ पर्वतों की रक्षा की लड़ाई लड़ी थी वह भी भगवद् सेवा और प्रकृति सेवा ही थी।

यमुना को बांधों की कैद से मुक्त करने की आगे की लड़ाई जारी रहेगी। ईश्वर भक्ति हमारा अस्त्र है।

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