तालाबों, सरोवरों पर से कब्ज़ा हटवाकर किया जल संकट का समाधान

Submitted by Hindi on Fri, 04/05/2013 - 15:31
Printer Friendly, PDF & Email
Source
गोरखपुर एनवायरन्मेंटल एक्शन ग्रुप, 2011
ओमप्रकाश द्वारा कब्जा मुक्त कराया गया तालाबओमप्रकाश द्वारा कब्जा मुक्त कराया गया तालाबसूखे की समस्या तालाबों, बावड़ियों के पटते जाने से और विकराल हुई, पर मुख्य बात यह थी कि इसे रोकने के लिए पहल कौन करे, क्योंकि सबके हित कहीं न कहीं सध रहे थे। ऐसे में एक शिक्षा मित्र ने इसकी अगुवाई कर स्थानीय प्रशासन व सरकार से लड़ाई मोल लेकर नवीन पहल की।

संदर्भ


बुंदेलखंड अपनी भौगोलिक परिस्थितियों, विंध्य श्रृंखलाओं, वनों, उपवनों, नदियों के साथ तालाबों, सरोवरों, झरनों आदि प्राकृतिक संरचनाओं के लिए शुरू से ही प्रसिद्ध रही है। लेकिन बीते दो दशकों से इसकी सौम्यता, सुंदरता धूमिल हो रही है। इसका प्रमुख कारण सूखे बुंदेलखंड का और अधिक सूखना है।

साल-दर-साल सूखा, उसके लिए सरकारी राहत, सूखे से बचाव की सरकारी परियोजनाएं व धरती में गहरे बोरों की श्रृंखला भी यहां के जल संकट को कम करने में सक्षम नहीं हुई। सूखा से निपटने के लिए अरबों की राशियां आईं, परंतु नतीजा सिफर रहा। इसकी वजह सिर्फ यह है कि क्षेत्र की जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियों से मेल खाती परंपरा में मौजूद जल संरक्षण एवं कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना तो दूर जीवनदायी बहुसंख्यक तालाबों, कुओं, बावड़ियों, उनके सहायक पूरक मेड़ों, बंधियों, पेड़ों, वनों, पहाड़ों का भरपूर विनाश, भूमि परिवर्तन और कब्ज़ा हुआ है। कुछ तो समय के साथ अपना अस्तित्व खो दिए और कुछ को शहर में रहने वाले लोगों ने कूड़ादान और गंदे नाले में तब्दील कर दिया। क्योंकि उनके पास पानी की कृत्रिम साधन मौजूद हो गये थे। किंतु अब जब कृत्रिम जल स्रोत श्रृंखलाबद्ध ढंग से सूखने लगे, तो याद आने लगी पुरानी बावड़ियां, पुराने तालाब, कुएँ जिनके पुनरूत्थान, गहरीकरण व सुंदरीकरण के लिए भी अनेक योजनाएं बनीं, पर हासिल कुछ नहीं हुआ। क्योंकि उन पर कब्ज़ा, पानी के आवागमन के रास्तों का भारी बदलाव एवं गंदगी पाटने हेतु कूड़ेदान के तौर पर इनका प्रयोग निरंतर हो रहा था। (और यह सब सरकारी, राजनैतिक एजेंडे में कहीं दूर तक भी नहीं शामिल है।) पर इसके लिए पहल कौन करे, कौन इस काम की अगुवाई करे, क्योंकि मामला बड़े पहुंच वाले लोगों का था।

ऐसे में जनपद बांदा के ग्राम पल्हरी के शिक्षामित्र श्री ओमप्रकाश ने इस लड़ाई को अकेले ही लड़ने की ठानी और निकल पड़े-तालाबों के मिटते अस्तित्व के साथ खत्म हो रही ग्रामीण परिवारों एवं संस्कृति को बचाने की मुहिम पर।

प्रक्रिया


पेशे से शिक्षक ओमप्रकाश ने साल-दर-साल कम होती वर्षा, बढ़ता सूखा और गहराते भूगर्भ जल संकट के साथ ही वर्षाजल संरक्षित न हो पाने की कठिनाई को महसूस किया और दिनांक 11.7.2006 को तहसील दिवस के अवसर पर तहसील प्रांगण बवेरू में पहुँचकर अपने गांव के तालाबों पर से कब्ज़ा हटवाने, उन्हें खाली कराकर गहरा कराने की बात करते हुए एक आवेदन दिया, पर सुनवाई महीनों तक नहीं हुई। फिर दूसरा आवेदन पत्रांक 225/34-1-2006 दिनांक 15.7.2006 को मुख्यमंत्री उ.प्र. को भेजा, जिसकी प्रतिलिपि जिलाधिकारी, बांदा को सौंपी। इस आवेदन पर भी कोई सुनवाई नहीं हुई, तो इन्होंने न्यायालय का सहारा लिया और जुलाई 2007 को न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर कर रिट संख्या RKK/57696/07 दिनांक 23.11.2007 के माध्यम से जिलाधिकारी को नोटिस दी, जिसमें माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी आदेश का हवाला देते हुए तालाबों को कब्ज़ा मुक्त कराने का आदेश दिया। तत्कालीन जिलाधिकारी, बांदा द्वारा इस आदेश को भी अमान्य कर दिया गया, तो कोर्ट के आदेश की अवमानना पर कार्यवाही संबंधी नोटिस जिला प्रशासन को दी गई। इस नोटिस ने जिला प्रशासन के कान खड़े किए। आनन-फानन जे.सी.बी. मशीनों के साथ नगरपालिका के कामगारों, पुलिस बल आदि को साथ कर कई दर्जन मकानों को ढहाकर एक शुरुआत की गई। ऐसा नहीं है कि जिनका तालाबों पर कब्ज़ा था, उनसे ओमप्रकाश का कोई बैर था, पर सामुदायिक विकास एवं जल स्रोतों के संरक्षण की प्रक्रिया में इन्होंने यह कदम उठाया। इसके लिए इन्हें धमकियां मिली., कई काबिजदार, जो इनके पट्टीदार भी थे, उनसे खान-पान भी खत्म हुआ, जिला प्रशासन ने भी इन्हें धमकाया, पर ये अपने संकल्प पर कायम रहे।

प्रसार


इस पूरी प्रक्रिया ने पड़ोसी गांव भदेहदू के तालाबों को कब्ज़ा मुक्त कराने का काम भी आसान कर दिया। अब पूरे जनपद के कब्जेदारों सहित ग्रामवार सूचनाएं ओमप्रकाश से मांगी गई हैं, जिसे पाने और कोर्ट-कचहरी का खर्च शिक्षा मित्र को मिलने वाले मानदेय के सहारे है। ओमप्रकाश किसानी भी करते हैं और परिवार का भरण-पोषण खेती से करते हैं। इस कष्टसाध्य एवं जीवन के मूल्य पर किए जाने वाले कार्य में खुलकर साथ आने वालों की संख्या नगण्य है, पर अन्तः समर्थन बहुतों का है।

इस प्रयास को देख-सुनकर सामाजिक स्वैच्छिक जन संगठनों ने साथ दिया। अखबारों, राष्ट्रीय स्तर की पत्रिकाओं ने इसे स्थान दिया, टी.वी. चैनलों ने इसे आगे बढ़ाया और दूरस्थ ग्रामीणों ने इसे सम्बल प्रदान किया। अन्य गाँवों के लोगों के लिए ओमप्रकाश एक सहारा है, जिनके मार्गदर्शन में लोग जल स्रोतों पर से कब्ज़ा हटवाने के लिए स्वयं जिला प्रशासन पर दबाव बना रहे हैं।

अभियान में आई लागत व लाभ




(उपरोक्त खर्च में मात्र 8,000.00 रुपए गांव वालों ने दिये हैं। शेष सभी पैसे ओमप्रकाश के स्वयं के खर्च हुए हैं।)

जबकि लाभ की गणना अभी संभव नहीं है क्योंकि इस पूरी प्रक्रिया के परिणाम स्वरूप कब्ज़ा मुक्त हुए तालाबों को अभी अपने पुराने स्वरूप में वापस आने में समय लगेगा।

परिणाम


ग्राम पल्हरी में तालाबों पर हुए कब्जों को हटाने, उन तक वर्षा की एक-एक बूंद को पहुँचाकर संरक्षित करने की ओमप्रकाश की ललक अब आमजन का संकल्प बनकर जिले में जहां-तहां उभर रही है। जिला प्रशासन ने तालाबों के गहरीकरण के साथ छिट-पुट आसान कब्जों को हटाया है, जिससे कुछ तालाबों में पानी भरा है। पल्हरी का एक तालाब तो खलिहान बन चुका था, जहां फ़सलों की मड़ाई का काम होता था, अब वह पुनः तालाब का रूप ले चुका है। आने वाली वर्षा की बूंदों से तालाब भरने और भूगर्भ जल संकट के न्यूनतम होने की उम्मीद परवान चढ़ी है साथ ही पशुपालकों एवं आम ज़रूरतों की पूर्ति का रास्ता भी आसान हुआ है।

नीतिगत बदलाव, जो आवश्यक है


बुंदेलखंड में तालाबों को कब्ज़ा मुक्त कराने और उन्हें 1962 की शक्ल में लाने वाले माननीय सर्वोच्च न्यायालय का आदेश लागू कराने के लिए प्रांतीय सरकार और जिला प्रशासन को अपनी नीति में बदलाव लाना होगा।
तालाबों के भीटों, पानी आवागमन के रास्तों, आगर क्षेत्रों में खड़ी बाधाओं में सिर्फ दबंग लोग ही नहीं वरन् सरकारी, गैर सरकारी भवनें, सड़के भी शामिल हैं। अतः तत्संबंधी उचित कार्यवाही करते हुए वर्षा जल को संरक्षित करने वाली नीति।
जलाशयों को कूड़ा, कचड़ा, गंदे नालों से मुक्त कराने वाली नीति और आमजन को इन सारी क्रियाओं में शामिल होने हेतु प्रोत्साहन नीति आवश्यक है।

Add new comment

This question is for testing whether or not you are a human visitor and to prevent automated spam submissions.

2 + 11 =
Solve this simple math problem and enter the result. E.g. for 1+3, enter 4.

More From Author

Related Articles (Topic wise)

Related Articles (District wise)

About the author

Latest