भारत की कल्पना नदियों के बिना नहीं हो सकती है : रविशंकर प्रसाद

Submitted by Hindi on Tue, 04/30/2013 - 08:50
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राज्यसभा टीवी

विश्व की अनेक संस्कृतियों की भांति भारतीय संस्कृति का जन्म भी नदियों के किनारे हुआ है। इसीलिए भारतीय संस्कृति में नदियों को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। भारतीय धर्म और संस्कृति में गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम स्थल का विशेष महत्व है। भारत की कल्पना नदियों के बिना नहीं हो सकती है। गंगा, यमुना, गोदावरी, नर्मदा, कृष्णा कावेरी आदि नदियां भारत के बड़े भूभाग को सिंचती आ रही हैं। नदी का गंतव्य समुद्र है लेकिन समुद्र तक जाते-जाते रास्ते में वह अनेकों के पाप धोती जाती है। ऊँचे पर्वत-शिखर से उतर कर, धरती को तृप्त करती अपना सर्वस्व लुटाती, निरंतर आगे बढ़ती वह समुद्र में मिलने से पहले न जाने कितने मलजल, कारखानों का कचरा आदि को ढोती जाती है। जिस दिन यह नदी हमारे भीतर प्रवाहित होगी, हमारा सारा दृष्टिकोण ही बदल जाएगा।“यमुना मुक्ति पदयात्रा” के समय भारतीय जनता पार्टी के सांसद रविशंकर प्रसाद का राज्यसभा में दिया गया बयान।

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