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नाबार्ड : गांव बढ़े तो देश बढ़े

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तहलका, अगस्त 2013
राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के अध्यक्ष डॉ. प्रकाश बक्षी से ग्रामीण भारत की बैंकिंग आवश्यकताएं, वित्तीय समावेशन हेतु उनके संगठन द्वारा उठाए गए कदमों और रूपे (RuPay) किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से किसानों को ऋण वितरण आदि के संबंध में बातचीत के कुछ अंश..

ग्रामीण भारत की बैंकिंग आवश्यकताएं एक तरह से अनुपम हैं। कृपया यह बताएं कि बैंकों के लिए किस प्रकार की सेवाएं एवं स्कीम सफल होंगी और क्या उनके दृष्टिकोण में परिवर्तन होगा?
ग्रामीण भारत की बैंकिंग आवश्यकताएं इस दृष्टि से अनुपम हैं कि ऋण आवश्यकताएं छोटी होती हैं और बार-बार लेन-देन करना होता है। इस कारण बैंकों की लेन-देन लागत बढ़ जाती है जिससे बैंक ग्रामीण क्षेत्रों में जाने से झिझकते हैं। इससे ग्रामीण ग्राहकों को भी कठिनाई होती है। नाबार्ड द्वारा प्रचलित किए गए स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) ने इस समस्या का प्रभावी समाधान खोज निकाला है। यह बचत और ऋण संवितरण के लिए एक अत्यंत प्रभावशाली विकल्प बन गया है। देश में लगभग 80 लाख एसएचजी हैं, जिसमें 8 करोड़ से अधिक महिलाएं हैं जो इस योजना की लोकप्रियता को दर्शाता है। संयुक्त देयता समूह (जेएलजी), कॉमन हित समूह (सीआईजी), उत्पादक संगठन (पीओ) स्वयं सहायता समूह के अन्य रूप है जो ग्रामीण भारत में उभरकर संगठन (पीओ) स्वयं सहायता समूह के अन्य रूप है जो ग्रामीण भारत में उभरकर आ रहे हैं। यह भी बैंकों के बदलते हुए दृष्टिकोण का प्रतीक है।

बैंकों को वित्तीय समावेशन कार्यक्रम को अपने व्यापार बढ़ाने का एक साधन मानकर चलना पड़ेगा। वास्तविकता भी यही है। दूर-दूर गांव तक बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराते हुए बैंक अपनी बचत एवं ऋणों को बढ़ाकर अपना व्यापार बढ़ा सकते हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोज़गार बढ़ेगा एवं अर्थव्यवस्था का विकास होगा। इसके अलावा बीमा, माइक्रो पेंशन और धन प्रेषण को बैंकिंग सेवाओं का हिस्सा बनाकर ग्रामीण क्षेत्रों में ले जाने की आवश्यकता है। देश के समाविष्ट आर्थिक विकास के लिए पूर्ण वित्तीय समावेशन अत्यंत आवश्यक है।

भारत में बड़ी संख्या में दूर-दराज क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक पहुंचने के लिए प्रौद्योगिकी के उपयोग के संबंध में आप क्या सोचते हैं?
वित्तीय समावेशन कार्यक्रम में तकनीकी परिज्ञान मुख्यतः सूचना एवं प्रसारण परिज्ञान (आईसीटी) की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसका मूल मंत्र यह है कि वंचित लोगों तक बैंकिंग सेवाएं पहुँचाते हुए उनके विकास के लिए किए जाने वाले हर एक कार्यक्रम में तकनीकी परिज्ञान का भरपूर उपयोग करें।

नाबार्ड अपनी योजनाएं और कार्यक्रमों में ‘रूपे’ (RuPay) कार्ड का उपयोग करने के लिए किस प्रकार की योजना बना रहा है?
हाल ही में शुरू किया गया ‘रूपे कार्ड’ कम लागत में तैयार देशी टेक्नोलॉजी कार्ड है, इससे वंचितों तक पहुंचने में सुविधा होगी। कार्ड एटीएम से लेकर प्वाइंट ऑफ सेल (पीओएस) और ई-कॉमर्स साइट जैसे विभिन्न प्लेटफार्म पर उपयोग के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसमें पिन आधारित अतिरिक्त सुरक्षा भी प्रदान की गई है।

नाबार्ड रूपे किसान क्रेडिट कार्ड का संवर्धन बड़े पैमाने पर कर रहा है। इसके लिए क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और सहकारी बैंकों को कार्ड की छपाई और जारी करने, माइक्रो एटीएम/पीओएस मशीन लगाने तथा क्षमता निर्माण के लिए वित्तीय सहायता प्रदान कर रहा है। नाबार्ड बढ़ रहे प्रतिस्पर्धी बैंकिंग परिवेश में सीबीएस वेंडरों को सहकारी बैंकों से मिला रहा है और उन्हें समर्थ तथा तकनीकी रूप से सक्षम बनाकर संपूर्ण भारत में 205 सहकारी बैंकों में क्लाइड आधारित कोर बैंकिंग सॉल्यूशन के कार्यान्वयन में सहायता दे रहा है। इस तरह नाबार्ड मांग और आपूर्ति दोनों पक्षों का समाधान करके सुदूर क्षेत्रों में बैंकिंग सुविधा पहुंचा रहा है।

ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के लिए नाबार्ड के कार्यक्रमों के बारे में कुछ बताएं?
जैसा कि आप जानते हैं कि नाबार्ड देश में स्वयं सहायता समुह बैंक सहबद्धता कार्यक्रम का अग्रणी है। बीस वर्ष पहले केवल 500 स्वयं सहायता समूहों के स्वर्धन का कार्यक्रम शुरू हुआ था। आज सूक्ष्म वित्त क्षेत्र में 80 लाख से अधिक बचत सहबद्ध स्वयं सहायता समूह हैं। देश में कुल स्वयं सहायता समूहों में 80 प्रतिशत महिला स्वयं सहायता समूह हैं और ये ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। वर्तमान में देश में 28 राज्यों के 150 उग्रवाद प्रभावित और पिछड़े जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों में महिला स्वयं सहायता समूहों के विकास को तेज करने के लिए भारत सरकार की योजना नाबार्ड के माध्यम से कार्यान्वित की जा रही है। इस योजना के मुख्य उद्देश्य:

स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ग़रीबों को बैंकिंग सेवाएं प्रदान करना
सूक्ष्म वित्त कार्यक्रम के माध्यम से ग़रीबों को आर्थिक विकास कार्यक्रम में शामिल करना
स्वयं सहायता समूह के माध्यम से ग़रीबों के लिए आजीविका के विकास को बढ़ावा देना।
स्वयं सहायता समूहों का संवर्धन करके महिलाओं को सशक्त बनाना।

अगले दो वर्षों के लिए नाबार्ड का विजन और लक्ष्य क्या है?
अगले दो वर्षों का विजन और लक्ष्य मूल रूप से पिछले दो वर्षों के दौरान शुरू की गई कुछ साहसिक और भविष्योन्मुखी परियोजनाओं से जुड़ा हुआ है। इन परियोजनाओं से ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ेगा।

भारत सरकार ने सहकारी बैंकों के लिए 30,000 करोड़ की अल्पावधि पुनर्वित्त निधि और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के लिए 20,000 करोड़ का अतिरिक्त आबंटन किया है। इसके साथ हमने फसल ऋण के लिए 80,000 करोड़ पुनर्वित्त का बड़ा लक्ष्य रखा है। निवेश ऋण पुनर्वित्त के लिए हमने 17,000 करोड़ का लक्ष्य निर्धारित किया है।

नाबार्ड ने इस वर्ष के दौरान देश में राज्य प्रायोजित आधारभूत सुविधाओं के विकास के लिए ग्रामीण आधारभूत संरचना निधि (आरआईडीएफ) के अंतर्गत 20,000 करोड़ का लक्ष्य रखा है। इसके अतिरिक्त ग्रामीण गोदामों के लिए 5000 करोड़ का लक्ष्य रखा है।

नाबार्ड आधारभूत सुविधा विकास सहायता (एनआईडीए) के अंतर्गत राज्य के स्वामित्व वाली और प्रायोजित संस्थाओं को ग्रामीण आधारभूत सुविधा विकास में भी (आरआईडीएफ से इतर) आधारभूत सुविधाओं के लिए वित्त पोषण कर रहे हैं। हमने 2013-14 के दौरान 3000 करोड़ के वित्तीय संवितरण का लक्ष्य रखा है। नाबार्ड ने प्रत्यक्ष ऋण पहल के अंतर्गत वर्ष 2013-14 के दौरान सहकारी बैंकों के लिए 3000 करोड़ और अन्य सहकारी समितियों के लिए 6000 करोड़ के संवितरण का लक्ष्य रखा है।

हमारे इन प्रयत्नों के कारण आज राज्य सहकारी बैंकों और मध्यवर्ती सहकारी बैंकों के लगभग 5,900 शाखाएं सीबीएस प्लेटफार्म पर हैं और हमारी योजना है कि इस वर्ष के अंत तक 205 राज्य सरकारी बैंकों और जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंकों के सभी 7,000 शाखाओं, जो सीबीएस पर आने के लिए हमारे सीबीएस कार्य योजना में शामिल हुए हैं, उन सबको सीबीएस प्लेटफार्म पर लाया जाए और आरटीजीएस या एनईएफटी के माध्यम से भुगतान प्रणाली से लिंक किया जाए।

एक आम किसान को नाबार्ड से कैसे लाभ मिल सकता है?
स्थापना से लेकर आज तक नाबार्ड ने कई कदम उठाया है और कई परियोजनाएं चलाई जिनसे लाखों किसानों का जीवन बदल गया है। आरआईडीएफ के अंतर्गत शुरू की गई परियोजनाओं से सड़कों का निर्माण हुआ है जिससे कृषक समुदाय को उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने में सहूलियत हुई है और इससे किसानों को लाभ मिल रहा है। सिंचाई परियोजनाओं से किसान एक से अधिक फसल उगा रहे हैं जिससे उनकी उत्पादन तथा उत्पादकता में वृद्धि हुई है। वाटरशेड विकास निधि (डब्ल्यूडीएफ) और आदवासी विकास निधि (टीडीएफ) के अंतर्गत कई लाख किसानों और आदिवासियों को प्रत्यक्ष लाभ मिला है।

कृषि नवोन्मेष और संवर्धन निधि


(एफआईपीएफ) कृषक तकनीक अंतरण निधि (एफटीटीएफ) और ग्रामीण नवोन्मेष निधि (आरआईएफ) जैसी अन्य निधियों की सहायता से एक लाख से अधिक कृषक क्लब और कृषक प्रशिक्षण संस्थानों की स्थापना की गई है। नवोन्मेषी प्रोद्योगिकी की शुरुआत, प्रशिक्षण कार्यक्रमों का संचालन और देश के विभिन्न भागों में कृषकों के एक्सपोजर कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। भारत सरकार ने नाबार्ड को सहकारी बैंकों के पुनरुत्थान पैकेज के कार्यान्वयन की ज़िम्मेदारी सौंपी है जो कृषक समुदाय के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। नाबार्ड ग्रामीण भंडारगृह, कोल्ड स्टोरेज, डेयरी, पोल्ट्री, मत्स्यपालन इत्यादि जैसे विभिन्न सरकार प्रायोजित योजनाओं का कार्यान्वयन कर रहा है जिससे बहुत सारे किसान लाभान्वित हो रहे हैं।

पिछले कुछ वर्षों के दौरान कृषि क्षेत्र में कौन सा महत्वपूर्ण विकास हुआ है जिसमें नाबार्ड की भूमिका रही है?
नाबार्ड ने बहुत सारी सकारात्मक गतिविधियों को अपनाया है जिसके कारण कृषि क्षेत्र में आवश्यक संरचनागत परिवर्तनों की उम्मीद जगी है। इनमें मुख्यतः फसल विविधीकरण, वैज्ञानिक कृषि पद्धति अपनाना, भंडारण आधारभूत सुविधाओं का निर्माण आदि शामिल है। नाबार्ड ने देश में 1.27 लाख कृषक क्लबों का नेटवर्क तैयार किया है जो किसानों को बेहतर कृषि पद्धति अपनाने की आवश्यकता, एक साथ आने और संगठित विपणन के लाभ के बारे में किसानों को शिक्षित कर रहे हैं। भारत सरकार द्वारा प्रायोजित ग्रामीण भंडारण योजना नाबार्ड के माध्यम से परिचालित की जा रही है। इससे भंडारण क्षमता बढ़ गई है और इस प्रकार की आधारभूत सुविधाओं की आवश्यकताओं के बारे में जागरुकता बढ़ी है। किसानों द्वारा भंडारण में रखे गए उपज के आधार पर कर्जा भी मिल रहा है। इससे किसानों को कम दाम पर अपने उपज को बेचने को बाध्य नहीं होना पड़ेगा।

किसान तकनीकी अंतरण निधि के अंतर्गत मुख्य फसलों हेतु प्रायोगिक परियोजना, सिस्टम ऑफ राइस इन्टेन्सिफकेशन (एसआरआई), मास्टर कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम, ग्राम विकास कार्यक्रम, कृषक क्लब कार्यक्रम, प्रोद्योगिकी अपनाने हेतु क्षमता निर्माण (सीएटी), कृषकों का प्रशिक्षण और ग्रामीण केंद्र (एफटीआरडीसी) आदि महत्वपूर्ण परियोजनाओं से नाबार्ड पिछले कुछ वर्षों में वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों के बारे में जागरुकता बढाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

वाटरशेड, वाडी आदि पर्यावरण से संबंधित कार्यक्रमों के कारण नाबार्ड जलवायु परिवर्तन अपनाने के परियोजनाओं को भी बड़े पैमाने पर अपना रहा है। इसी संदर्भ में हाल ही में नाबार्ड जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क सम्मेलन (यूएनएफसीसी) के क्योटो प्रोटोकॉल के अंतर्गत स्थापित एडाप्टेशन फंड बोर्ड (एएफबी) का राष्ट्रीय कार्यान्वयक संस्था (एनआई) के रूप में नामित किया गया है।

हरित ऊर्जा के क्षेत्र में नाबार्ड का क्या योगदान रहा है?
नाबार्ड हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए कटिबद्ध है। इसके अंतर्गत हमारे प्रधान कार्यालय और कुछ क्षेत्रीय कार्यालयों में सौर ऊर्जा इकाई लगाना शामिल है। नाबार्ड ने एक मेगावाट की पहला केनाल टॉप विद्युत परियोजना गुजरात में स्वीकृत किया है। भारत सरकारी की जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय सौर ऊर्जा परियोजना भी नाबार्ड द्वारा कार्यान्वित की जा रही है जिससे कई हजार गांव सौर ऊर्जा से प्रकाशित है।

दुग्ध उत्पादन

सर मेरे पास दुग्ध उत्पादन के लिए पर्याप्त जगह है,लेकिन पैसों की कमी के कारण मै इस व्यवसाय को नही कर पाया .सर नाबार्ड योजना से कुछ सहायता मिल जाती तो काम बन जाता.

To open dairy form

i want to open a buffalows and cows dairy form in uttar pradesh . So i help me to give loan .

Dairy farming

सर,मैं एक किसान हूं,मेरे पास अपनी जमीन नहीं है,पुस्तेनी प्लाट है ,उस पर हाईटेक डेयरी करना चाहता हूं,90 लाख खर्च आयेगा,लोन मिल सकता है,कृपा सहायता करें

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lon kaise milega. sir

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