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वन अधिकार लागू करने के लिए संघर्ष

Author: 
पंकज सिंह
Source: 
सामयिक वार्ता, सितंबर 2013
सम्मेलन में पारित ‘महान घोषणापत्र’ में सर्वसम्मति से फैसला लिया गया कि महान के लोग अपने जंगल-ज़मीन को नहीं छोड़ेगे। साथ ही, शांतिपूर्वक तरीके से वनाधिकार कानून लागू करवाने के लिए एकजुट होकर संघर्ष करेंगे। महान संघर्ष समिति जंगल पर निर्भर गाँवों के लोगों ने हाल ही में अपने संघर्ष को आगे बढ़ाने के लिए महान संघर्ष को आगे बढ़ाने के लिए महान संघर्ष समिति का गठन किया। पिछले दिनों अमिलिया (सिंगरौली) में महान संघर्ष समिति द्वारा वन अधिकार सम्मेलन आयोजित किया गया। इस सम्मेलन में कुल ग्यारह गाँवों के ग्रामीणों ने एक जुट हो अपने जंगल को कोयला खदान में न बदलने का संकल्प लिया। सम्मेलन में आए लोगों ने एक स्वर में वन अधिकार अधिनियम के तहत अपने जंगल पर अधिकार लेने संबंधी घोषणा पत्र को पारित किया। नियमगिरि में ग्रामसभाओं की सफलता से प्रेरित और केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री के.सी. देव से दिल्ली में मुलाकात के बाद उत्साहित महान संघर्ष समिति ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे कोयला खदान के खिलाफ उनकी लड़ाई में साथ दें।

जन संघर्ष मोर्चा के अनुराग मोदी ने महान संघर्ष समिति का समर्थन करते हुए कहा कि “मध्य प्रदेश सरकार का विकास का पूरा मॉडल असफल हो चुका है। चाहे कोयले से बिजली बनने वाली हो या परमाणु से बिजली उत्पादित किया जाए। यह सब सिर्फ प्रदेश के संसाधन की लूट ही साबित हुई है। इस विकास के मॉडल पर पुनर्विचार करने की जरूरत है। थोड़े समय की बिजली के लिए संसाधनों को नष्ट करना बंद करना होगा।”

सम्मेलन में भाग लेने आए जन संघर्ष मोर्चा के अन्य नेता सुनील भाई, माधुरी कृष्णास्वामी, जनचेतना मंच के राजेश, एमएमपी के युसुफ भाई आदि ने भी इस आंदोलन का समर्थन किया। महान संघर्ष समिति के सदस्य और अमिलिया गांव निवासी बेचनलाल ने कहा कि “केंद्रीय मंत्री के समर्थन से हमारा उत्साह बढ़ा है लेकिन हमें नियमगिरि की तरह स्थानीय स्तर पर लड़ाई को मजबूत करना होगा।”

उल्लेखनीय है कि 19 जुलाई को एक संयुक्त प्रेस सम्मेलन में केंद्रीय जनजातीय मंत्री केसी देव ने मध्य प्रदेश सरकार की वनाधिकार कानून के उल्लंघन के लिए निंदा की। उन्होंने गांव वालों को आश्वस्त किया कि अमिलिया ग्रामसभा में पारित उस प्रस्ताव की जांच की जाएगी, जिसमें खदान के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी गई। आरटीआई की मदद से निकाले गए उस प्रस्ताव की कॉपी से पता चला है कि उसमें ज्यादातर हस्ताक्षर फ़र्ज़ी हैं और कई हस्ताक्षरित नाम के लोगों का निधन भी हो चुका है।

महान संघर्ष समिति के साथ काम कर रही ग्रीनपीस की प्रिया पिल्लई ने कहा कि “महान कोल ब्लॉक को कोयला खदान आवंटन करने का मतलब होगा 14,190 लोगों के जविकोपार्जन को खत्म करना। 2001 जनगणना के अनुसार इनमें से 5,650 आदिवासी समुदाय के लोग हैं। महान कोल ब्लॉक आवंटित करने का मतलब यह भी होगा कि दूसरे कोल ब्लॉक के लिए दरवाज़े खोल देना। इससे पूरे क्षेत्र के जंगल टुकड़ों में बदल जाएंगे।”

सम्मेलन में पारित ‘महान घोषणापत्र’ में सर्वसम्मति से फैसला लिया गया कि महान के लोग अपने जंगल-ज़मीन को नहीं छोड़ेगे। साथ ही, शांतिपूर्वक तरीके से वनाधिकार कानून लागू करवाने के लिए एकजुट होकर संघर्ष करेंगे। महान संघर्ष समिति जंगल पर निर्भर गाँवों के लोगों ने हाल ही में अपने संघर्ष को आगे बढ़ाने के लिए महान संघर्ष को आगे बढ़ाने के लिए महान संघर्ष समिति का गठन किया।

पंकज सिंह 07389205584

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