लेखक की और रचनाएं

SIMILAR TOPIC WISE

क्यों नहीं खुलते बांध के दरवाजे

Author: 
विमल भाई
लामबगड़, विनायक चट्टी, पांडुकेश्वर, गोविंदधार के पुल बहने से जो नुकसान हुआ, उसका मुख्य कारण था समय रहते विष्णुप्रयाग बांध के दरवाजों का न खुलना।

पानी से बांध को टूटने से बचाने के लिए कंपनी ने आनन-फानन नदी तट पर रहने वालों को बगैर किसी चेतावनी के बांध के गेट को लगभग पांच बजे पूरा खोल दिया। इससे जलाशय का पानी प्रबल वेग से नीचे को बढ़ा। जिसके कारण पानी द्वारा नदी के तीन तटों पर डंप किया गया मलबा भी बहा। नदी की मारक क्षमता बढ़ गई। श्रीनगर की सरकारी, अर्धसरकारी और व्यक्तिगत संपत्ति भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुई। पिछले साल 15-16 जून की रात बद्रीनाथ के नीचे अलकनंदा-गंगा पर बना एक निजी कंपनी का बांध दरवाजे न खोलने के कारण टूटा। बांध के नीचे के क्षेत्र में नदी से भयंकर तबाही हुई। दो किमी लंबी झील बन गई। लामबगड़, विनायक चट्टी, पांडुकेश्वर, गोविंदधार के पुल बहने से जो नुकसान हुआ, उसका मुख्य कारण था, समय रहते निजी कंपनी का विष्णुप्रयाग बांध के दरवाजों का न खुलना।

400 मेगावॉट क्षमता के विष्णुप्रयाग बांध से ग्रामीणों को उनकी आवश्यकता पूरी करने के लिए पानी भी नहीं मिलता था। 2012 के मानसून में इस परियोजना के कारण हुई तबाही में लामबगड़ गांव के बाजार की दुकानें तक बह गईं। कंपनी ने कोई मुआवजा नहीं दिया। विष्णुप्रयाग बांध की सुरंग के ऊपर चाईं और थैंग गांव 2007 में धंस गए। आज भी लगभग तीस परिवार बिना पुनर्वास के भटक रहे हैं।

इसी बांध के ऊपर एक अन्य निजी कंपनी की अलकनंदा बद्रीनाथ जल बिजली परियोजना 300 मेगावॉट की प्रस्तावित है। यहां की वनभूमि राज्य सरकार के वन विभाग ने 19 जुलाई तक हस्तांतरित नहीं की किंतु वन कटाव का काम तेजी से चालू हो गया था। वे पेड़ और मशीनरी भी अलकनंदा गंगा में आई विपदा में बहे।

नीचे के क्षेत्र की तबाही में इसने बड़ी भूमिका अदा की। इसी नदी में विष्णुप्रयाग बांध से लगभग 200 किमी नीचे भागीरथी गंगा और अलकनंदा गंगा के संगम देव प्रयाग से 32 किमी ऊपर श्रीनगर में लगभग बन चुकी श्रीनगर परियोजना जल बिजली परियोजना (330 मेगावाट की) के मलबे से खासी तबाही हुई।

श्रीनगर परियोजना बिना किसी पर्यावरण स्वीकृति को सुधारे या बदलवाए 200 मेगावाट से 330 मेगावाट हो गई और बांध की ऊंचाई 65 से 95 मीटर कर दी गई। 16-17 जून 2013 को ऊपर से आ रहे पानी से जलाशय का जल स्तर बढ़ने की परिस्थिति का फायदा उठाकर श्रीनगर जल विद्युत परियोजना की निर्माणदायी निजी कंपनी के कुछ अधिकारियों ने धारीदेवी मंदिर को ‘अपलिफ्ट’ करने की अपनी योजना पर अमल किया जो अगस्त 2013 में प्रस्तावित थी।

इस दौरान जो गेट पहले आधे खुले थे उन्हें पूरा बंद कर दिया गया। इससे बांध की झील का जलस्तर बढ़ गया। पानी से बांध को टूटने से बचाने के लिए कंपनी ने आनन-फानन नदी तट पर रहने वालों को बगैर किसी चेतावनी के बांध के गेट को लगभग पांच बजे पूरा खोल दिया। इससे जलाशय का पानी प्रबल वेग से नीचे को बढ़ा। जिसके कारण पानी द्वारा नदी के तीन तटों पर डंप किया गया मलबा भी बहा। नदी की मारक क्षमता बढ़ गई। श्रीनगर की सरकारी, अर्धसरकारी और व्यक्तिगत संपत्ति भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुई।

अलकनंदा की सहयोगी नदी मंदाकिनी में छोटी से लेकर बड़ी जल विद्युत परियोजनाएं जैसे फाटा-व्योंग और सिंगोली-भटवारी का भी यही हाल हुआ। बांधों के निर्माण में प्रयुक्त विस्फोटकों, सुरंग और पहाड़ के अंदर बने बिजलीघरों और अन्य निर्माण कार्यों से निकला मलबा भी सरकारी अनदेखी के चलते तबाही का कारण बना।

एक आकलन के अनुसार 150 लाख घन मीटर मलबा नदियों में बहा। इससे नदी की विनाशकारी शक्ति बढ़ी। विष्णुप्रयाग और श्रीनगर, दोनों परियोजनाओं से हुई बर्बादी के बावजूद बांध कंपनी ने प्रभावित लोगों की खोज-खबर नहीं ली। यही रवैया सरकारी अधिकारियों का भी था।

हालांकि मात्र दस महीने पहले ही उत्तराखंड में गंगा की दोनों मुख्यधाराओं, भागीरथी गंगा की अस्सी गंगा घाटी और अलकनंदा गंगा की केदारघाटी में अगस्त और सितंबर 2012 में भयानक तबाही हुई। भागीरथी गंगा में 3 अगस्त 2012 को अस्सीगंगा नदी में बादल फटने के कारण निर्माणाधीन कलीगाद और अस्सीगंगा चरण एक व दो जलविद्युत परियोजनाओं ने खासी तबाही मचाई थी और भागीरथी गंगा में मनेरीमाल चरण-दो के कारण बहुत नुकसान हुआ।

अस्सी गंगा के गांव बुरी तरह प्रभावित हुए। छोटे-छोटे रास्ते टूटे, अस्सी गंगा घाटी का पर्यावरण प्रभावित हुआ। इसकी भरपाई में दशकों लगेंगे। मारे गए मजदूरों का रिकॉर्ड नहीं है। पनेरी माली चरण-2 का जलाशय पहले भी भरा हुआ था। जब पीछे से तेजी से पानी आया तो उत्तरकाशी में जोशियाड़ा और ज्ञानसू को जोड़ने वाला बड़ा मुख्य पुल बह गया।

अचानक बांध के गेट खुले तब नीचे की ओर हजार क्यूसेक पानी अनेक पैदल पुलों को भी बहा ले गए। पनेरी माली चरण दो के जलाशय बाईं तरफ जोशीयाड़ा और दाईं तरफ ज्ञानसू क्षेत्र की सुरक्षा के लिए बनाई गई दीवारें क्षतिग्रस्त हो गईं।

तथाकथित सुरक्षा दीवारें, बांध का जलाशय भरने के बाद बनीं। इन्हें बनवाने के लिए स्थानीय लोगों ने काफी संघर्ष किया था। 13 सितंबर 2012 को उखीमठ तहसील मुख्यालय में एक साथ छह स्थानों पर बादल फटे, चारों ओर तबाही मची। कालीगंगा प्रथम, द्वितीय और महेश्वर जलविद्युत परियोजनाएं बन रही हैं।

इनके कारण अनेक गांवों की स्थिति खराब हुई। दीवारें पूरी बन ही नहीं पाई थीं। पिछले साल की वर्षा में (2013) में जोसियाड़ा का सैकड़ों मीटर लंबा और दसियों मीटर चौड़ा क्षेत्र भागीरथी गंगा में बह गया। जिसका कारण काफी हद तक पनली माली चरण दो का जलाशय है।

टिहरी बांध झील में आज भी अस्सीगंगा के टूटे बांधों का मलबा जमा है। टिहरी बांध से बाढ़ रुकी। बांधों से नुकसान को ढंकने की कोशिश है।

कम ही आते हैं यात्रियों से भरे वाहन


माटू जनसंगठन के पूरण सिंह राणा, दिनेश पंवार और विजयलक्ष्मी रतूड़ी ने बताया राज्य के विकास के नाम पर बिजली परियोजनाओं के कारण व्यापक प्राकृतिक आपदा, सरकारी लापरवाही और लाभ कमाने के निजी मंसूबों के चलते उत्तराखंड अब बहुत बदल गया है।

यहां के मशहूर धारी देवी के मंदिर को न हटाने के लिए चल रहे आंदोलन में कभी केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा पुनर्जीवन मंत्री उमा भरती ने खुद हिस्सा लिया था। लेकिन विकास के बहाने जलबिजली परियोजना की निजी कंपनियों ने धारीदेवी को भी उनके ऐतिहासिक स्थल से हटाकर यहां की संस्कृति से छेड़छाड़ की।

गांव, नदियों के रास्ते सड़कों की लंबाई और संस्कृति भी काफी कुछ बदल-सी गई है। विकास के नाम पर इस बदलाव का आतंक है कि देश-परदेस के लोगों का इस प्रदेश में आना बहुत कम हो गया है। गंगा और दूसरी नदियों के जलस्रोतों की सफाई, उनके प्रवाह में निर्मलता और स्वच्छता पर किस हद तक प्रदेश और केंद्र सरकार सक्रिय रह पाते हैं यह देखना है।

लेखक गांधीवादी हैं। वे माटू जन संगठन (उत्तराखंड) से जुड़े हैं। साथ ही, नेशनल एलायंस ऑफ पीपुल्स मूवमेंट्स से जुड़े हैं।

Post new comment

The content of this field is kept private and will not be shown publicly.
  • Web page addresses and e-mail addresses turn into links automatically.
  • Allowed HTML tags: <a> <em> <strong> <cite> <code> <ul> <ol> <li> <dl> <dt> <dd>
  • Lines and paragraphs break automatically.

More information about formatting options

CAPTCHA
यह सवाल इस परीक्षण के लिए है कि क्या आप एक इंसान हैं या मशीनी स्वचालित स्पैम प्रस्तुतियाँ डालने वाली चीज
इस सरल गणितीय समस्या का समाधान करें. जैसे- उदाहरण 1+ 3= 4 और अपना पोस्ट करें
3 + 3 =
Solve this simple math problem and enter the result. E.g. for 1+3, enter 4.