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आमंत्रण : आठवाँ मीडिया सम्मेलन

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विकास संवाद
साथियों
विकास और जनसरोकार के मुद्दों पर बातचीत का सिलसिला साल-दर-साल आगे बढ़ता ही जा रहा है। हालाँकि इस बार हम यह राष्ट्रीय सम्मेलन अपने तय समय से थोडा देर से करने जा रहे हैं, लेकिन कई बार मार्च में संसद और राज्य विधानसभाओं के सत्र और बजट की आपाधापी में फंसने के कारण बहुत सारे साथी आ नहीं पाते थे। और इस बार तो थे चुनाव और उसके बाद नई सरकार तो, इस बार सोचा थोडा लेट चलें, लेकिन सब मिल सकें।

आप सब जानते ही हैं कि यह सफ़र 2007 में सतपुड़ा की रानी पचमढ़ी से शुरू हुआ। चित्रकूट, बांधवगढ़, महेश्वर, छतरपुर, पचमढ़ी फिर सुखतवा (केसला) के बाद इस बार हम यह आयोजन चंदेरी में करने जा रहे हैं। इस बार कई दौर की बैठकों के बाद चंदेरी संवाद के लिए जो विषय चुना गया है, वह है।

आदिवासी – हमारी, आपकी और मीडिया की नजर में
समय, स्थान- 23,24,25 अगस्त 2014, चंदेरी, जिला- अशोकनगर, मध्यप्रदेश


कृपया विषय व स्थान चयन के लिए आपकी राय दर्ज कराएँ..और आखिर में इस निवेदन के साथ कि आपकी उपस्थिति इन विषयों पर सार्थक हस्तक्षेप के साथ सम्मेलन को सफल बनाएगी।

आयोजन स्थल चंदेरी के विषय में

यहां पर जैनों के 9वीं और 10वीं सदी के मदिर हैं, यहां एक बौद्ध मठ (अब क्षतिग्रस्त) है, 5वीं सदी का विष्णु दशावतार मंदिर है, जो अपने नक्काशीदार स्तंभों के लिए जगजाहिर है और प्रदेश की बड़ी मस्जिदों में शुमार जामा मस्जिद है। कुल मिलाकर साम्प्रदायिक सौहार्द का बखान करता है यह नगर। मध्य प्रदेश के अशोक नगर जिले में स्थित चंदेरी, छोटा किंतु ऐतिहासिक स्थल है। पौराणिक काल में चेदिराज के रूप में प्रख्यात चंदेरी नगरी का इतिहास 11वीं सदी से जुड़ा है जब यह मध्यभारत का एक प्रमुख व्यापार केंद्र था। इस शहर का जिक्र महाभारत में भी मिलता है।

यह नगरी सात परकोटों के बीच बसी हुई है, जिनमें अनेक प्रवेशद्वार हैं। मुख्य द्वार के भी विशेष नाम हैं- जैसे दिल्ली दरवाजा, ढोलिया खूनी दरवाजा, खिलजी दरवाजा, परवन दरवाजा, पछार दरवाजा, रेतबाग दरवाजा, बिना नींव दरवाजा, बादल महल दरवाजा, जौहरी दरवाजा आदि। दर्शनीय स्थल चंदेरी का किला चंदेरी का किला पहाड़ी पर स्थित है।

इन सबके अलावा हम सभी इस नगरी को एक विशेष सन्दर्भ के लिए भी जानते हैं और वह है यहाँ का हैंडलूम का काम। चंदेरी में हैंडलूम का बड़ा कारोबार होता है। खासकर साडि़यों के लिए इसे जाना जाता है जिसे चंदेरी सिल्क भी कहा जाता है। यहां तीन तरह के फैब्रिक बनाए जाते हैं- प्योर सिल्क, चंदेरी कॉटन और सिल्क कॉटन। चंदेरी साड़ी पूरे भारत में लोकप्रिय है। इसे हाथ से बुनकर बनाया जाता है। बुनकरों के हुनर की साक्षी इस नगरी में बुनकरों के सवाल भी मौजूं हैं।

इसके अलावा जिस समुदाय पर हमारा इस बार का विषय केंद्रित है, उस आदिवासी समुदाय में सहरिया समुदाय भी यहां पर मौजूं हैं। यही है चंदेरी। आध्यात्म,साम्प्रदायिक सौहार्द और हुनर के इस अद्भुत संगम स्थल पर हम सभी मिलने का कार्यक्रम बना रहे हैं।

आप स्थान चयन और विषय पर भी टिप्पणी कर सकें तो बेहतर है, क्योंकि आयोजन करना हम आपको मिलकर ही है तो हाँ में हाँ मिलाना भी जरुरी है या ना का भी सम्मान और स्वीकार्यता भी है ही।

कैसे पहुंचें

निकटतम रेलवे स्टेशन ललितपुर हैं। यहां से नियमित अंतराल पर चंदेरी के लिए बसें चलती हैं। इसके अलावा झांसी, ग्वालियर, टीकमगढ़ से भी सड़क मार्ग के जरिए यहां पहुंचा जा सकता है। सबसे बेहतर विकल्प के रूप में ललितपुर ही है, जहाँ से हम कुछ वाहन की व्यवस्था भी करने की कोशिश करेंगे।

प्रमुख स्टेशनों से दूरी

ललितपुरः 37 किलोमीटर, शिवपुरीः 127 किलोमीटर, ईसागढ़ः 45 किलोमीटर, मुंगावली :38 किलोमीटर

तो आप आ रहे हैं ना .....

राकेश/ सचिन/ प्रशांत/ रोली
विकास संवाद,

प्रशांत जी का मोबाइल नंबर -9425026331

कृपया आयोजकों से बात करके ही आने का कार्यक्रम बनाएं

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