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निर्मल ग्राम पुरस्कार में अग्रणी जिला सतारा

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कुरुक्षेत्र, जुलाई 2012
देश में करीब 2.50 लाख ग्राम पंचायतें हैं जिनमें से अब तक 25 हजार निर्मल ग्राम घोषित हो चुके हैं। स्वच्छता से शौचालय बनाने से महिलाओं के जीवन में क्या बदलाव आता है यह अनुभव इन गांवों की महिलाएं ऐसे इलाकों में देंगी जहां अभी स्वच्छता का अभियान पीछे है। सतारा देश का पहला ऐसा जिला है जहां के गांवों के लोग शौचालय के लिए खुले में नहीं जाते। यहां स्वच्छता में शत-प्रतिशत सफलता पाई गई है। महाराष्ट्र का सतारा जिला देश का ऐसा जिला है जो निर्मल ग्राम पुरस्कार के मामले में अग्रणी है। सतारा जिला ग्रामीण स्वच्छता के मामले में अनुकरणीय उदाहरण बन चुका है। केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री जयराम रमेश ने सतारा जिले के निर्मल ग्राम से पुरस्कृत तीन गांवों ओजर्डे, चांदवाड़ी और धामनेर गांवों में जाकर ग्रामीण विकास में वहां के ग्रामीणों की भागीदारी की सराहना की। श्री रमेश ने धामनेर गांव में ग्रामीण स्वच्छता का पहला राष्ट्रीय प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने की घोषणा भी की।

सतारा जिले के 11 विकासखंडों में 1500 ग्राम पंचायतें हैं। अब तक 2004-05 से 8 विकासखंड तथा 1435 गांव निर्मल ग्राम पुरस्कार से सम्मानित हो चुके हैं। बाबा साहब अंबेडकर ने प्रताप सिंह हाई स्कूल सतारा में प्राथमिक शिक्षा प्राप्त की थी। प्रताप सिंह हाई स्कूल के दाखिला रजिस्टर में क्रमांक 1919 में उनका जन्मदिन 14 अप्रैल, 1891 दर्ज है। इस हाई स्कूल और पूरे सतारा जिले को इस पर गर्व है। महान समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फूले और सावित्री बाई फूले की कर्मभूमि भी यही जिला रहा है। पुणे, रायगढ़, रत्नागिरी, सांगली और कोल्हापुर जिलों की सीमाओं से जुड़ा सतारा जिला गन्ने की खेती के लिए प्रख्यात है, जहां आठ सहकारी चीनी मिलें हैं। सहकारी आंदोलन में सबसे सशक्त जिलों में से एक सतारा की भौगोलिक स्थिति बहुत विचित्र है। एक तरफ सर्वाधिक वर्षा वाला महाबलेश्वर है तो दूसरी तरफ मान और खाटव जैसे सूखाग्रस्त विकासखंड हैं। कोयना बांध भी इसी जिले में प्रख्यात विद्युत परियोजना के साथ अपनी मौजूदगी बनाए हुए हैं।

संपूर्ण स्वच्छता अभियान के मामले में सतारा जिले की पहल ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री जयराम रमेश ने कहा कि अब निजी शौचालय बनाने के लिए हर एक परिवार को तीन हजार रु. की बजाए सात हजार रु. की सहायता दी जाएगी। स्वच्छता के मामले में बीपीएल और एपीएल परिवार के अंतर को खत्म किया जा रहा है। उन्होंने सतारा जिले के तीनों गांवों की महिलाओं का आह्वान किया कि वे स्वच्छता के मामले में कोई समझौता न करें। पूरे देश में जाकर स्वच्छता का संदेश पहुंचाएं। इसके लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय उन्हें स्वच्छता-दूत बनाकर गांव-गांव तक ले जाएगा।

कोरेगांव तालुका का निर्मल ग्राम धामतेर एक ऐसा गांव था जहां दूसरे गावों के लोग अपनी लड़कियों या लड़कों का रिश्ता करने से कतराते थे क्योंकि यहां खुले में शौचालय का कलंक समस्या बना हुआ था। आज यह गांव हर तरह से खुशहाल गांवों में से एक है।

वर्ष 2004-05 में धामनेर को निर्मल गांव पुरस्कार मिल चुका है। पहला राज्यस्तरीय संत गडगे बाबा ग्राम स्वच्छता अभियान पुरस्कार वर्ष 2005 में मिला है। गांव की आबादी 2657 तथा परिवारों की संख्या 518 है। गांव में 377 निजी शौचालय, 71 समुदाय शौचालय तथा सात समुदाय भवन हैं। गांव के 390 लोग कृषि, 3 सिलाई, 7 ग्रोसरी की दुकान, दो डेरी तथा चार फ्लोर मिल से जुड़े हैं।

स्व-सहायता समूहों में 22 एपीएल ग्रुप के तथा 20 बीपीएल ग्रुप के हैं। वाई तहसील के ओजार्डे गांव की आबादी 5608 है। गांव के अधिकांश लोग खेती तथा अन्य व्यवसायों के साथ जुड़े हैं। कुछ परिवार मजदूरी भी करते हैं। इस गांव को 2009-10 में निर्मल ग्राम पुरस्कार मिल चुका है।

गांव में 992 एपी एल तथा 196 बीपीएल परिवार रहते हैं। गांव में 1102 निजी शौचालय तथा 35 सीटों वाला समुदाय शौचालय है। इसके अलावा 6 समुदाय भवन हैं। गांव के 850 परिवार खेती, 10 परिवार सिलाई, 12 परिवार दुकान (ग्रोसरी), से जुड़े हैं तथा 4 परिवारों की फ्लोर मिल है। गांव को पर्यावरण ग्राम पुरस्कार (2010-11), इंदिरा प्रियदर्शनी वृक्ष मित्र अवार्ड (2005-06) तथा जिला स्तरीय साहू फूले अंबेडकर पुरस्कार (2009-10) मिल चुके हैं।

वाई तहसील का एक और निर्मल ग्राम है चांदवाड़ी। यह पुनर्वासित गांव है। गांव की आबादी 519 तथा परिवारों की संख्या 98 है। एपीएल परिवार 84 तथा बीपीएल परिवार 14 हैं।

निर्मल ग्राम चांदवाड़ी को निर्मल ग्राम पुरस्कार (2006-07), पर्यावरण ग्राम पुरस्कार (2006-07), पर्यावरण ग्राम पुरस्कार (2010-11), मिल चुके हैं। आपसी झगड़ों एवं विवाद से पूरी तरह मुक्त होने के कारण इस गांव को एक लाख रुपये के टंटा मुक्त अभियान पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।

निर्मल ग्राम चांदवाड़ी में 88 निजी शौचालय, 10 सामुदायिक शौचालय तथा 5 समुदाय भवन हैं। गांव के 72 परिवार खेतीबाड़ी करते हैं, एक परिवार टेलरिंग से जुड़ा है तथा 3 परिवारों की दुकान (ग्रोसरी) एवं एक परिवार की फ्लोर मिल है।

ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश तीनों निर्मल ग्राम की शानदार उपलब्धियों से बहुत प्रभावित हुए। उन्होंने कहा कि मनरेगा - 2 में अब 30 नए कामों को जोड़ा गया है जो ग्रामीण विकास और खेती से जुड़े हैं। इसका खेती को लाभ मिलेगा। स्वच्छता अभियान हेतु ग्राम पंचायतों की भागीदारी को सुनिश्चित किया जाएगा। इसको ध्यान में रखकर ही अब गांवों में हर एक को निजी शौचालय बनाने के लिए सात हजार रु. दिए जाएंगे।

श्री रमेश ने हर गांव में यही संदेश दिया कि महिलाओं के लिए शौचालय न होना समाज के लिए कलंक है। देश में करीब 2.50 लाख ग्राम पंचायतें हैं जिनमें से अब तक 25 हजार निर्मल ग्राम घोषित हो चुके हैं। स्वच्छता से शौचालय बनाने से महिलाओं के जीवन में क्या बदलाव आता है यह अनुभव इन गांवों की महिलाएं ऐसे इलाकों में देंगी जहां अभी स्वच्छता का अभियान पीछे है। सतारा देश का पहला ऐसा जिला है जहां के गांवों के लोग शौचालय के लिए खुले में नहीं जाते। यहां स्वच्छता में शत-प्रतिशत सफलता पाई गई है।

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