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नर्मदा घाटी के धार जिले में किसान मजदूर मछुआरे कुम्हार जताएंगे अपने ज़मीन पर हक

धार जिले में दिए सैकड़ो आवेदन
. धार, 17 अक्टूबर: जैसा की आपने सुना होगा की कल भोपाल में नर्मदा घाटी के सरदार सरोवर प्रभावित सैकड़ो की संख्या में पहुँच कर नए भू-अर्जन कानून के तहत भू-स्वामी होने की ऐतेहासिक घोषणा की । बड़ी संख्या में किसान, मजदूर, मछुआरे आदि के दौरान सरदार सरोवर प्रभावितों को बिना पुनर्वास डूबना और बाँध की उंचाई बढ़ने के निर्णय का विरोध किया । इसी कड़ी में आज धार जिले में विशाल कार्यक्रम हुआ।

आज धार जिला के कलेक्टर के सामने सैकड़ो आवेदन दिए गए । आवेदन यह है कि नए भू-अर्जन कानून, 2013 की धारा 24 (2) के तहत पुराने भू-अर्जन की प्रक्रिया रद्द होते-होते हुए, आज तक जिनका अपनी संपत्ति पर भौतिक कब्ज़ा कायम है या जिन्होंने मुआवजा नही लिया है ऐसे हजारों किसान, मजदूर , मछुआरे अपने पूर्व में अर्जित ज़मीन तथा भूमिहीनों के मकानों पर फिर से अपना मालिकाना हक प्राप्त कर चुके है । इसी प्रकार का कार्यक्रम हमने 30 सितम्बर को बडवानी में किया था जिसमें हजारों आवेदन बडवानी कलेक्टर को दिए थे । आज धार जिले में कलेक्टर के सामने फिर से यही प्रक्रिया दोहराई गयी। कलेक्टर को आवेदन में यह भी चेताया गया कि वह अब मालिकों की सहमति लिए बिना कोई भी ज़मीन या घर डुबा नहीं सकते ! इस पर कलेक्टर ने सहमती जताई और और दो घंटे की हमारी प्रस्तुति को ध्यान-पूर्वक सुनकर आश्वासन दिया की वह कानून के दायरे में रहकर हर महत्वपूर्ण कदम उठाएगी ।

साथ ही आज सरदार सरोवर परियोजना (स.स.प. ) प्रभावित किसान, मजदूर, मछुआरे, कुम्हार सभी, सरदार सरोवर बाँध की ऊंचाई 122 मी. से 139मी. बढ़ाये जाने के कार्य आरंभ होने का विरोध करा । स.स.प. के डूब क्षेत्र में आज भी ढाई लाख लोग बसे हैं। मध्य प्रदेश के अलीराजपुर, धार, बडवानी जिले हैं । पहाड़ी आदिवासी गाँव तथा निमाड़ के बड़े गाँव एवं नगर में आज खेती, फल-उद्यान, दवा-खाने, बाज़ार, मंदिर, मस्जिद, पंचायते होते हुए, आज के डूब में 177 गाँव, वर्तमान ऊंचाई 122 मी. पर निवासरत है । पुनर्वास में भ्रष्टचार के कारण हज़ारो किसानों की फर्जी रजिस्ट्री पाई है, ज़मीन नहीं । मजदूर, मछुआरे, कुम्हारों को मात्र ₹33,000 या ₹49,00 का अनुदान यह भी कई लोगो को न मिलते हुए, आजीविका का हक छिना जा रहा है ।

. आज भी 5 हज़ार परिवार को ज़मीन और कई हजारों को आजीविका मिलना बाक़ी है । पुनर्वास में भ्रष्टाचार के कारण बसावटे रहने लायक नहीं है , ऐसी स्थिति में 122 मी. से बाँध की ऊंचाई बढ़ाना और गाँव डूबना गैर कानूनी है । चिखाल्दा, निसरपुर, करोंदिया, एकाल्वारा, सेमाल्दा, आदि गाँव में आई डूब से नुकसान की भरपाई देना बाक़ी है । जो माननीय शिकायत निवारण प्राधिकरण से मंज़ूर हुई है । इस स्तिथि में 122 मी. के ऊपर 17 मी. गेट खड़ा करना गैरकानूनी है !

गुजरात सरकार ने 1,20,000 टन सीमेंट एवं 13,000 टन लोहे के गेट्स, लगाने का यह कार्य 250 करोड़ का तथा 20 महीने में पूरा होने वाला है । नर्मदा घाटी की पानी जल समाधी बनाने को अमादा मोदी सरकार जिस प्रकार जन विरोधी निर्णय ले रही है, उस पर मुख्यमंत्री भी मौन क्यों है ? कल भोपाल में मुख्यमंत्री ने 1000 नर्मदा घाटी के विस्थापितों को मिलने से क्यों मन किया ?

देवेन्द्र तोमर, मीरा, राहुल यादव, घनश्याम पाटीदार, गेंदलाल मुकाती, शन्नो बी, विश्वदीप पाटीदार, रणवीर भाई, मेधा पाटकर, संपर्क: +91 7049 391 073

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