झींगा पालन की आधुनिक तकनीक

Submitted by HindiWater on Mon, 11/10/2014 - 10:49
Printer Friendly, PDF & Email
Source
कुरुक्षेत्र, अप्रैल 2010

झींगा मछली की खेतीझींगा मछली की खेतीभारत में अभी तक झींगा उत्पादन का कार्य प्राकृतिक रूप से समुद्र के खारे पानी से किया जाता था, लेकिन कृषि में हुए तकनीकी विकास और अनुसंधान के चलते झींगा का सफल उत्पादन मीठे पानी में भी सम्भव हो चला है। देश में लगभग 4 मिलियन हेक्टेयर मीठे जल क्षेत्र के रूप में जलाशय, पोखर, तालाब आदि उपलब्ध हैं। इन जल क्षेत्रों का उपयोग झींगा पालन के लिए बखूबी किया जा सकता है। झींगा पालन का कार्य कृषि और पशुपालन के साथ सहायक व्यवसाय के रूप में किया जा सकता है। इस व्यवसाय से ग्रामीणों को छोटे से जल क्षेत्र से अच्छी खासी कमाई हो जाती है। खेती संग इस व्यवसाय को अपनाकर खेती को और लाभकारी बनाया जा सकता है।

वर्तमान में देश में झींगा पालन एक बहुत तेजी से बढ़ने वाले व्यवसाय के रूप में उभरा है। पिछले दो दशकों में मत्स्य पालन के साथ-साथ झींगा पालन व्यवसाय प्रतिवर्ष 6 फीसदी की दर से बढ़ रहा है। आज घरेलू बाजार के साथ विदेशी बाजार में झींगा की काफी मांग बढ़ी है। हमारे देश में झींगा निर्यात की भरपूर संभावनाएं मौजूद हैं। व्यावसायिक रूप से झींगा पालन के लिए निम्नवत तकनीकी पहलुओं को ध्यान में रखना चाहिए।

स्थान का चुनाव व तालाब का निर्माण


सफल झींगा पालन के लिए स्थान का चुनाव बहुत महत्वपूर्ण होता है। तालाब का निर्माण क्ले सिल्ट या दोमट मिट्टी जिसमें पानी रोकने की क्षमता अच्छी हो का चुनाव करना चाहिए। तालाब का पानी सभी तरह के प्रदूषण से मुक्त होना चाहिए।

इसके अतिरिक्त तालाब की मिट्टी भी हानिकारक तत्वों जैसे कार्बोनेट, क्लोराइड, सल्फेट आदि से मुक्त होनी चाहिए या फिर इन तत्वों की मात्रा सूक्ष्म स्तर पर होनी चाहिए।

व्यवसायिक रूप से झींगा पालन का कार्य छोटे व बड़े दोनों तरह के जल क्षेत्रों में सफलतापूर्वक किया जा सकता है। सामान्यतः झींगा पालन के लिए 0.50 से 1.50 हेक्टेयर का तालाब पर्याप्त होता है। तालाब की न्यूनतम गहराई 0.75 मीटर का अधिकतम गहराई 1.2 मीटर रखते हैं। तालाब की दीवारों को ढालदार न बनाकर सीधी खड़ी रखना चाहिए। पानी भरने तथा वर्षा का अतिरिक्त पानी निकालने का उत्तम प्रबंध होना चाहिए। पानी भरने व निकालने के स्थान पर लोहे की जाली का प्रयोग करना चाहिए। झींगा के तालाब में जलीय वनस्पति होना बहुत लाभकारी होता है। क्योंकि झींगों को दिन में तालाब के किनारे छुपकर आराम करने की आदत होती है।

तालाब में चूने का प्रयोग


मीठे जल में झींगा पालन के लिए चूने का प्रयोग बहुत महत्वपूर्ण होता है। चूने का प्रयोग तालाब के पानी के पी.एच.मान के आधार पर करना चाहिए। सामान्यतः लगभग 100 किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से चूने का प्रयोग किया जाता है। नए तालाबों में चूना और खाद के प्रयोग के पूर्व मत्स्य विशेषज्ञों से सलाह ले लेना अधिक उपयुक्त होता है।

नर्सरी तैयार करना


एक एकड़ जल क्षेत्र पालन के लिए 0.04 एकड़ जल क्षेत्रफल में नर्सरी तैयार करने की आवश्यकता होती है। नर्सरी तैयार किए जाने वाले तालाब का पूरा पानी निकाल कर अच्छी तरह सूखने के लिए छोड़ देना चाहिए। अच्छा उत्पादन लेने के लिए तालाब को तब तक सुखाते हैं जब तक कि मिट्टी में दरारें न पड़ जाए।

तालाब की मिट्टी को तेज धूप में सुखाने से हानिकारक जीवाणु एवं परजीवी नष्ट हो जाते हैं। तालाब की एक जुताई भी कर देना चाहिए। इसके बाद तालाब में 1 मीटर की गहराई तक पानी भरें। अच्छी नर्सरी तैयार करने के लिए चूना, खाद एवं उर्वरकों का प्रयोग भी करना चाहिए। इसके लिए 20 किलोग्राम चूना, 4 किलोग्राम सुपर फास्फेट एवं 2 किलोग्राम यूरिया का प्रयोग करना चाहिए।

नर्सरी में बीज डालना


एक एकड़ क्षेत्रफल में झींगा पालन के लिए 20 हजार बीज नर्सरी में संचय करना चाहिए। नर्सरी में बीज संचय के पूर्व बीज का अनकूलन कर लेना चाहिए। अनुकूलन के लिए झींगा बीज के पैकेटों के बराबर तालाब का पानी भरकर 15 मिनट तक रखना चाहिए। इसके बाद इन पैकेटों को तालाब के पानी में मुंह खोलकर तालाब में तब तक डुबोए रखें जब तक लार्वा पैकेट से तैर कर पानी में न निकल जाए। पैकेट के पानी और तालाब के पानी का पी.एच.मान एवं तापक्रम में अधिक अंतर होने पर अनुकूलन अधिक देर तक करना चाहिए।

नर्सरी में डाले गए इन लार्वों को लगभग 45 दिनों तक रहने देना चाहिए। इस दौरान ये लार्वा शिशु झींगा में बदल जाते हैं। इतने दिनों में इनका वजन 3 ग्राम तक हो जाता है। नर्सरी में इन शिशु झींगों की जलीय जीव-जंतुओं से रक्षा भी करनी चाहिए। इसके लिए नर्सरी के चारों ओर जाल घेर देना चाहिए। यदि चिड़ियों से हानि पहुंचने का डर हो तो तालाब के ऊपर भी जाल घेर देना चाहिए।

नर्सरी से तालाब में हस्तांतरण


जब नर्सरी में शिशु झींगें 3-4 ग्राम तक हो जाएं तो इन्हें पहले से तैयार तालाब में हस्तांतरित कर देना चाहिए। झींगा पालन के साथ मत्स्य पालन करके इस व्यवसाय को और अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है।

इसके साथ कतला और रोहू आदि मछली की प्रजातियों का पालन चाहिए। कामन कार्प, ग्रास कार्म, मृगल आदि मछली की प्रजातियों को झींगा के तालाब में संचय नहीं करना चाहिए। लेकिन कतला के स्थान पर सिल्वर कार्प का संचय किया जा सकता है।

आहार


झींगा सर्व भक्षी स्वभाव का जीव है। अतः जन्तु एवं वनस्पति दोनों का भक्षण करता हैं। झींगें दिन में छिपे रहते हैं। रात्रि के समय भोजन के लिए सक्रिय होकर तालाब में विचरण करते हैं। व्यावसायिक स्तर पर उत्पादन प्राप्त करने के लिए चूना, खाद एवं उर्वरकों के अतिरिक्त पूरक आहार देने की आवश्यकता होती है।

झींगों के तीव्र गति से वृद्धि के लिए शाकाहार और मांसाहार दोनों तरह का भोजन देना चाहिए। झींगों को भोजन के रूप में 80 प्रतिशत शाकाहारी और 20 प्रतिशत मांसाहारी भोजन देना लाभकारी होता है। भोजन में 4 फीसदी सरसों की खली, 4 फीसदी राईस ब्रान एवं 2 फीसदी फिशमील देना चाहिए।

मांसाहार में प्रमुख रूप से मछलियों का चूरा, घोंघा, छोटे झींगे एवं बूचड़खाने का अवशेष दिया जा सकता है। मांसाहार के रूप में छोटी मछलियों को उबाल कर दिया जा सकता है।

आहार की मात्रा


झींगा सर्वभक्षी के साथ-साथ परभक्षी स्वभाव का भी होता है। इसलिए तालाब में आहार की कमी नहीं होने देना चाहिए अन्यथा भूखा रहने की दशा में झींगे आपस में एक-दूसरे को खाना शुरू कर देते हैं। सामान्यतः झींगा बीज के वजन का 10 प्रतिशत तक आहार प्रतिदिन देना चाहिए।

तालाब में शुद्ध रूप से झींगा पालन के लिए दो माह तक 2 से 3 किग्रा पूरक आहार प्रति एकड़ की दर से देना चाहिए। इसके बाद 4 से 6 माह तक 4 से 5 किग्रा प्रति एकड़ की दर से पूरक आहार देना चाहिए।

आहार के अतिरिक्त एग्रीमीन 1 प्रतिशत, टैरामाईसीन पाउडर 40 ग्राम एवं एंटीबायोटिक 2 ग्राम/सिफालैक्सिन आदि दवाएं भी देना चाहिए। आहार को चौड़ेमुंह वाले पात्रों में भरकर तालाब के किनारे कई स्थानों पर रखना चाहिए।

उचित देखभाल


कभी-कभी झींगा तालाब में असामान्य लक्षण दिखाई पड़ने लगते हैं जिनका समय से निदान करना आवश्यक होता है। तालाब के बंधों के किनारे अधिक संख्या में झींगों का पाया जाना तालाब के पानी में ऑक्सीजन की कमी को दर्शाता है। इसके लिए एयरटेल का प्रयोग करे या फिर पंपिंग सेट द्वारा तालाब के पानी को कुछ ऊचाई से तालाब में डालें। झींगों की वृद्धि एवं जीविता में पानी का उचित पी.एच. मान बहतु महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

अतः पानी का वांछित पी.एच.मान को बनाए रखने के लिए उचित मात्रा में चूने का प्रयोग करना चाहिए। तालाब में बीज संचय के 15 से 20 दिन बाद तक शिशु झीगें नहीं दिखाई पड़ने पर भी आहार देते रहना चाहिए। क्योंकि झींगों की वृद्धि दर में काफी अंतर पाया जाता है। इसके अतिरिक्त झींगों की कछुआ, केकड़ा, मेंढक, सांप आदि जलीय जीवों से रक्षा करनी चाहिए।

उत्पादन एवं आर्थिकी


तालाब में डाले गए समस्त लार्वा का लगभग 50 से 70 फीसदी तक झींगें जीवित बचते हैं। यह प्रतिशत उचित देख-रेख और कुशल प्रबंधन पर निर्भर करता है। झींगों की वृद्धि दर एक समान न होकर काफी विविधतापूर्ण होती है। झींगा 50 ग्राम से 200 ग्राम वजन तक बढ़ते हैं। 4 से 5 माह में 50 से 70 ग्राम तक झींगों का वजन बढ़ जाता है। बिक्री के लिए इतने वजन के झींगों को तालाब से निकालना शुरू कर देना चाहिए। 6 से 8 माह में 100 से 200 ग्राम भार तक झींगों की वृद्धि हो जाती है।

तालाब में शुद्ध रूप से झींगा का बाजार भाव काफी अधिक होता है। बाजार में 250 रुपया प्रति किग्रा. की दर से बिक्री की जाती है तो 3 लाख रुपए की आमदनी होती है। यदि इससे लागत पूंजी को निकाल दिया जाए, तब भी एक एकड़ जल क्षेत्र से लगभग 2 लाख रुपए से अधिक का शुद्ध लाभ प्राप्त हो जाता है।

झींगा पालन हेतु तालाब में चूने की मात्रा का निर्धारण


पी.एच. मान

चूने का प्रयोग किग्रा./एकड़

5 से 6 पी.एच.

50 किलोग्राम

6 से 7 पी.एच.

3 किलोग्राम

7 से 7.5 पी.एच.

15 किलोग्राम

झींगा पालन हेतु जल की गुणवत्ता का मानक

तापमान

26 से 32 डिग्री सेंटीग्रेड

पी.एच. मान

7.5 से 8.5

ऑक्सीजन

4 से 10 मिग्रा./लीटर

कठोरता

150 मिग्रा. /लीटर से कम

क्षारीयता

0.25 से 0.75 पीपीएम

फास्फोरस

1 पीपीएम से कम

नाइट्रोजन

1 पीपीएम से कम

कैल्शियम

100 पीपीएम से कम

घुलनशील लवण

300 से 500 पीपीएम

तालाब की गहराई

1 से 1.5 मीटर



झीगों का शारीरिक भार बढ़ने के साथ-साथ तालाब में आहार की मात्रा को बढ़ाना चाहिए

3-5

2.0-3.0

5-7

3.0-3.9

7-11

3.9-4.8

11-18

4.8-5.8

18-28

5.8-62

28-45

6.2-7.0

45-65

7.0-7.6

65-100

7.6-10.0



(लेखक उदय प्रताप स्वायत्तशासी महाविद्यालय में कृषि प्रसार विभाग में प्रवक्ता हैं।)

ई-मेल : drsingh2008.1284@sifymail.com

Comments

Submitted by कौशल सिंह (not verified) on Sat, 03/28/2015 - 22:41

Permalink

आपके द्वारा किया गया रिसर्च मुझे अच्छा लगा लेकिन कृपया झींगा पालन के बारे में अगर आपके द्वारा लिखी गई कोई पुस्तक हो तो मुझे ख़ुशी होगी उसे पढ़ने में चुकी मै झींगा पालन में रूचि लेना चाहता हूँ और पालन भी करना चाहता हूँ। मैं एक B.sc (Ag) का विद्यार्थी हूँ।धन्यवाद आपके इस पोस्ट के लिएक्यों की मुझे इससे बहुत सहयोग मिला ।

Submitted by बशिष्ठ कुमार सिंह (not verified) on Thu, 06/16/2016 - 19:52

Permalink

मैं बिहार में सीवान जिला का रहने वाला हूँ , क्या लार्वा के समय भी आहार देना चाहिए। और लार्वा या इनके बिज कहाँ से प्राप्त करें , इनका भी जानकारी दें । आपने इस प्रकार से निर्देशित कर के हमें और भी उत्साहित किया है।धन्यवाद्

Submitted by बशिष्ठ कुमार सिंह (not verified) on Thu, 06/16/2016 - 19:55

Permalink

मैं बिहार में सीवान जिला का रहने वाला हूँ , क्या लार्वा के समय भी आहार देना चाहिए। और लार्वा या इनके बिज कहाँ से प्राप्त करें , इनका भी जानकारी दें । आपने इस प्रकार से निर्देशित कर के हमें और भी उत्साहित किया है।धन्यवाद्

Submitted by Pawan kumar (not verified) on Sun, 08/21/2016 - 19:31

Permalink

1 क्या यह खारे पानी में कामयाब है 2 इसके लिए कितनी जगह की आवस्यकता होती है 3 क्या इस पर ऋण की सुविधा उपलब्ध है 3 मैं राजस्थान के चूरू जिले से हु श्रीमानजी कृपया जानकारी देवे

Submitted by Sukhp (not verified) on Wed, 12/07/2016 - 00:03

Permalink

सब्बसीडी का कोई पर्वधान हे तो ये बताऐ हरियाणा मे फतेहाबाद मे लागू है ।अगर है तो सुझाव दे।ना है तो क्यो नही।

Submitted by Surendra Singh (not verified) on Tue, 03/07/2017 - 21:41

Permalink

KAYA JHINGA FORMING GORAKHPUR UP EAST ME SURU KIYA JA SAKTA HAI.

 

ESKE LEEYE KOE SUBSIDY MILTI HAI .

 

KAHA SAMPARK KARE ..

 

Surendra Singh

9560476608

Gorakhpur

Submitted by Shaikh Rizwan (not verified) on Tue, 03/21/2017 - 14:50

Permalink

Kya ye nadi ke mithe pani me bhi ho sakate he Is ke liye kya karna cahiye Is bare me koi kitab ho to pls batae

Submitted by surendra Singh (not verified) on Sat, 04/08/2017 - 19:16

Permalink

Sir,

          My self Surendra Singh

From Gorakhpur UP East.

 

I want know about jhinga forming.   in Gorakhpur plese advoice whwer can gat tranning and et...

 

Submitted by surendra Singh (not verified) on Sat, 04/08/2017 - 19:16

Permalink

Sir,

          My self Surendra Singh

From Gorakhpur UP East.

 

I want know about jhinga forming.   in Gorakhpur plese advoice whwer can gat tranning and et...

 

Submitted by akpearl (not verified) on Thu, 05/04/2017 - 11:17

Permalink


आप सभी को मैं बताना चाहता हूँ की आप मछली पालन के साथ मोती की खेती करके लाखों कमाई कर सकते हैं 
मोती की खेती का प्रशिक्षण ke liye आप हमारे website:- http://akpearl.tk/ पर जा कर ट्रेनिंग की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं अधिक जानकारी के लिए कॉल करे or whatsapp - 09648834147

या इ मेल करें - skpearls81@gmail.com

Submitted by Shahid (not verified) on Tue, 05/09/2017 - 11:19

Permalink

Sir mjhe suggest Lee ki Mai jhinga ke need Kaha se lu kyuki Mai feed Aur aerator aqua sb Kuch ready Kr liya hu Bs I need a prawn beez plz sir contact me

Submitted by Amish mai6 (not verified) on Wed, 05/17/2017 - 08:09

Permalink

Jigah farming karna chataho me surat ka rahniwala ho muje uski trnig lini hi surat ya ushki aspsh kahi pe trnig sintar ho to bataya addres djiya pls.

Submitted by Latif (not verified) on Fri, 07/28/2017 - 00:36

Permalink

Sir... . Me veraval somnath... Gujarat se hu.. Me zinga palan karna chahta hu... . Mere pas ek eked zamin he.. . Muje loan aur uski training chahiye.. .. Kaha se milegi.. . Pls zarur batana.. .. .

Submitted by hiteshkumar J… (not verified) on Sun, 08/13/2017 - 20:49

Permalink

I have 2 accore farm place non agriculture I am interested ginga undhog pls info me

Submitted by Yogesh (not verified) on Wed, 01/17/2018 - 15:38

Permalink

सर मुझे मिठे पाणी की झींगा बीज चाहिए मैं dist. नासिक से state महाराष्ट्र से आपको contact कर रहा हूँ pls tell me for good prawn bij available in inreat dealer thanks

Submitted by Deepak kumar (not verified) on Sat, 01/20/2018 - 05:32

Permalink

Sr iska beajh kaha milaga or ky mai jhingha machli palan January ya February month me kr sakta hu mai bihar se hu

Submitted by Bharat Patel (not verified) on Sun, 04/22/2018 - 17:10

Permalink

Sir ,

I am from Gujarat near Khambhat , can you guide me which breed or type prawns are more suitable for this Area , also guide us for the best seeds available .

Submitted by MD ALAMGIR (not verified) on Fri, 04/27/2018 - 11:56

Permalink

सेवा  में  

  सर  आप  को  बहुत  बहुत  धन्यवाद  आप  का  पूरा  लेख  पढ़ा  और  जानकारी  से  भी  अवगत  हुवा 

 मै  बिहार  राज्य  के कटिहार जिला  का रहने  वाला  हु  और  मै  झींगा  पालन  का  काम  करना  चाहता  हु  मेरे  पास 2 एकड़  का  पोखर  है  उसमे  पानी  भी  प्रयाप्त  रहता  है  और  झींगा  का  बाज़ार  भी  बहुत  अच्छा  है  लेकिन इसका  बीज कहा  मिलता  है  इसकी  जानकारी  नहीं  मिल रहा  है  मेरी  सहयता  करे  

Submitted by Chudasama Ajaysinh (not verified) on Tue, 05/22/2018 - 14:50

Permalink

Muje jiga ucherke liye talav dena he kisiko kiraye pe lenna he to call karna 09913160220 gujrat bhavnagar ak dum samundar ke kinare pe

Submitted by vanshkano (not verified) on Mon, 06/18/2018 - 21:01

Permalink

Sr mere talab me whait spot ho gaya tha to use muje isu for na ho to us ke loye muje kya kar na pade ga \ \ \ \ Sr \

Add new comment

This question is for testing whether or not you are a human visitor and to prevent automated spam submissions.

9 + 8 =
Solve this simple math problem and enter the result. E.g. for 1+3, enter 4.

Related Articles (Topic wise)

Related Articles (District wise)

About the author

Latest