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यमुना मुक्तिकरण अभियान : फिर भरी हुंकार

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कल्पतरु एक्सप्रेस, 29 दिसंबर 2014
प्रदर्शनी को देख यमुना भक्तों के मन में अतीत के आन्दोलन की स्मृतियां जागृत हो गयीं। उद्घाटन समारोह में आगन्तुकों के लिए प्रदर्शनी आकर्षण का केन्द्र रहा है। यमुना मुक्तिकरण अभियान द्वारा लगाई गयी प्रदर्शनी में यमुना आन्दोलन और यमुना मुक्ति के प्रयासों में सहयोग करने वाली संस्थाओं और यमुना भक्तों के योगदान को भी दर्शाया गया है। कल्पतरु समाचार सेवा वृंदावन। ब्रज के विरक्त संत रमेश बाबा महाराज के सानिध्य में यमुना को प्रदूषण से निजात दिला उसके पुरातन स्वरूप को पुन: ब्रज में लाने हेतु मान मन्दिर, श्रीमद् पुष्टीय मार्ग और भारतीय किसान यूनियन (भानु) के संयुक्त तत्वावधान में यमुना मुक्तिकरण अभियान के कार्यकर्ताओं ने कमरकस के फिर हुंकार भरी। ऐलान किया गया कि 15 मार्च को यमुना भक्त पदयात्रा निकालेंगे।

छटीकरा मार्ग स्थित जाट धर्मशाला में यमुना मुक्तिकरण अभियान के केन्द्रीय कार्यालय के उद्घाटन समारोह में उपस्थित यमुना भक्तों ने यमुना मुक्ति का संकल्प लिया। पूज्य संत रमेश बाबा महाराज ने यमुना भक्तों को सम्बोधित करते हुए कहा कि सूर्यपुत्री यमुना की रक्षा के लिये आज पूरे ब्रज को घर से निकलना होगा। यमुना ब्रज की शान है ब्रजवासियों की माँ है और उसकी रक्षा के लिये हम सभी को निकलना होगा। यही हमारा परम कर्तव्य है। यमुना अवश्य आएगी हम सभी निःस्वार्थ भाव से यमुना मुक्ति अभियान में सहभागिता करें और हरिकृपा से यमुना ब्रज में आकर ही रहेगी।

.गोकुलपीठाधीश्वर पंकज बाबा महाराज ने कहा कि कभी यमुना का जल सप्त देवालयों में पूजा में प्रयोग किया जाता था परन्तु, आज ब्रज में यमुना का जल ही नहीं रहा यह हम सभी का दुर्भाग्य है। भारतीय किसान यूनियन भानू के राष्ट्रीय अध्यक्ष भानू प्रताप सिंह ने हुंकार भरते हुए कहा कि हम बाबा महाराज के आदेशानुसार चल रहे हैं। यमुना मुक्ति के इस अभियान में हम जी जान से सहभागिता करते आए और करते रहेंगे।

यमुना मुक्तिकरण अभियान के संरक्षक हरिबोल बाबा ने कहा कि यमुना मुक्ति के पावन संकल्प में समाज के हर वर्ग को सहयोग करना होगा, क्योंकि यह हमारी वर्तमान पीढ़ी के साथ-साथ आगे आने वाली पीढ़ियों के लिए आवश्यक है। महन्त परमेश्वर दास, महासाचिव हरेश ठेनुआ, राष्ट्रीय संयोजक राधाकान्त शास्त्री, डीपी चतुर्वेदी, प्रदेश संयोजक श्याम चतुर्वेदी, संजय शर्मा, पंकज चतुर्वेदी, महेन्द्र राजपूत, गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी, रीतराम सिंह, सोहन सिसौदिया, रतन सिंह पहलवान, श्रीचन्द चौधरी, श्रीदास प्रजापति, आचार्य सोहन लाल, भगवान दास चौधरी , अश्वनी शर्मा, राघव भारद्वाज, रोहतान सिंह, बलवीर सिंह हवलदार, रामगोपाल सिकरवार, अजय सिंकरवार, ठाकुर रमेश सिकरवार, ऊषा सिंह, रामविनोद भट्ट, श्रीमती पुष्पा सिंह, ओमप्रकाश पचौरी आदि थे।

यमुना आंदोलनों की प्रदर्शनी लगाई


वृंदावन। केन्द्रीय कार्यालय पर 2010 से अब तक यमुना मुक्ति के लिए किए गए आन्दोलन और प्रयासों की प्रदर्शनी लगाई गयी। प्रदर्शनी को देख यमुना भक्तों के मन में अतीत के आन्दोलन की स्मृतियां जागृत हो गयीं। उद्घाटन समारोह में आगन्तुकों के लिए प्रदर्शनी आकर्षण का केन्द्र रहा है। यमुना मुक्तिकरण अभियान द्वारा लगाई गयी प्रदर्शनी में यमुना आन्दोलन और यमुना मुक्ति के प्रयासों में सहयोग करने वाली संस्थाओं और यमुना भक्तों के योगदान को भी दर्शाया गया है।

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