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फोटोग्राफी के मूल सिद्धान्त

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नवोदय टाइम्स, 24 जून 2015
फोटोग्राफी जितना बड़ा विज्ञान है उतनी ही बड़ी यह कला भी है। आधुनिक डिजिटल कैमरों की मदद से अब इस मोहक विषय पर विशेषज्ञता प्राप्त करना सरल है।

. किसी जमाने में फ़ोटोग्राफ़ी सम्पन्न वर्ग तक सीमित थी। यह महँगी थी और इसके लिए उपकरणों से काम लेने के लिए काफी तकनीक तथा कौशल की जरूरत होती थी। एक ठीक-ठाक कैमरा खरीदना भी बहुत महँगा था। फोटो खींचने के बाद उसे तैयार करवाने के लिए स्टूडियो जाना पड़ता जहाँ फिल्म धोकर नैगेटिव तैयार करवाया जाता। इसीलिए लोग अपने खास पलों की यादों को फोटो के रूप में कैद करवाने के लिए पेशेवर फोटोग्राफर्स की सेवाओं पर ही अधिकतर निर्भर करते थे। डिजिटल कैमरों के आने के बाद फोटोग्राफी पहले से कहीं अधिक किफायती तथा सरल हो गई। जेब में समा सकने वाले डिजिटल कैमरे अच्छी फोटो खींचते हैं जिनके प्रिंट घर पर कलर प्रिंटर से भी निकाले जा सकते हैं।

अब अधिक से अधिक लोग इसे अपनी हॉबी बना रहे हैं और इस फील्ड में करियर भी बना रहे हैं। बेशक फोटोग्राफी काफी सरल हो गई हो परन्तु डिजिटल कैमरों के बारे में ऐसा बहुत कुछ है जिनका ध्यान रखना बहुत जरूरी है तभी फोटोज में सर्वोत्तम परिणाम हासिल किए जा सकते हैं। पेश हैं फोटोग्राफी से जुड़े मूल सिद्धान्तों का ज्ञान।

कैमरे का चुनाव : प्वाइंट एंड शूट या डी.एस.एल.आर. कैमरे में मुख्य अंतर है कि पहले कैमरे में लैंस फिक्स होता था जिसे अलग नहीं किया जा सकता जबकि डी.एस.एल.आर. के लैंस को बदला जा सकता है। ये डिजिटल कैमरों से काफी ज्यादा महँगे भी होते हैं।

डी.एस.एल.आर. कैमरे बेहतर फोटो खींचते हैं परन्तु फोटोग्राफी की शुरूआत करने वालों के लिए प्वाइंट एंड शूट कैमरे उपयुक्त हैं क्योंकि इनके अधिकतर फंक्शन ऑटोमैटिक होते हैं।

अधिकतर कैमरों में तीन मूल फंक्शन होते हैं : शटर स्पीड, एपर्चर तथा फोकस


शटर स्पीड : शटर वह छोटी-सी स्क्रीन है जो इमेज सैंसर पर तेजी से घूमती है और सैकेंड के कुछ हिस्से के लिए सैंसर पर रोशनी पड़ने देती है। जितनी अधिक देर तक शटर सैंसर पर रोशनी पड़ने देगा फोटो उतनी ज्यादा रोशन होगी। काली या धुँधली फोटो तब आती है जब शटर बहुत तेजी से घूमता है। सैंसर पर जितनी देर तक रोशनी पड़ती है, उसे ही शटर स्पीड कहते हैं जिसे सैकेंड के हिस्सों में नापा जाता है। 1/3 वें सैकेंड वाली शटर स्पीड से सैंसर पर 1/300 वें सैकेंड की शटर स्पीड की तुलना में अधिक रोशनी पड़ेगी जिससे अधिक साफ फोटो मिलेगी। यदि आप कम रोशनी में फोटो ले रहे हैं तो आप धीमी शटर स्पीड का इस्तेमाल कर सकते हैं।

एपर्चर : फोटो सैंसिटिव मैटीरियल पर पड़ने वाली रोशनी की मात्रा को एपर्चर नियन्त्रित करता है। यदि उपलब्ध रोशनी कम है तो एपर्चर को अधिक खोलें और यदि धूप में हैं तो कम, ठीक अपनी आँखों की तरह। एपर्चर का आकार ‘एफ-स्टॉप्स’ से मापा जाता है। ‘एफ-22’ जैसे उच्च एफ-स्टॉप का अर्थ है कि एपर्चर का छिद्र बहुत छोटा है और ‘एफ-5.6’ का अर्थ है कि एपर्चर खूब खुला है।

फोकस : उपयुक्त फोकस के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना होगा।

1. लक्ष्य पर फोकस करने के लिए समय लें। हाथों को स्थिर रखें, नहीं तो धुँधली फोटो आएगी।
2. शटर बटन को इस प्रकार आधा दबाएँ कि ऑटोमैटिक कैमरा लक्ष्य पर फोकस करे और फिर शूट कर लें। एकदम से फोटो न खींच लें।
3. तेजी से हिलते लक्ष्य की फोटो खींचने के लिए अधिक समय दें। इसके लिए शटर स्पीड को एडजस्ट करें ताकि दृश्य की फोटो सही से कैमरे में कैद हो सके।

फोटो खींचते वक्त ध्यान में रखने वाली बातें


रोशनी: अच्छी फोटो का रहस्य अच्छी रोशनी में छुपा है। बहुत तेज रोशनी जैसे तेज धूप पोर्ट्रेट के लिए सही नहीं होती जबकि मद्धम रोशनी लैंडस्केप फोटोग्राफी के लिए खराब होगी। जिसकी फोटो खींचनी है, उसका मुँह रोशनी की ओर हो। बेहतर होगा कि चेहरे पर एकदम सीधी रोशनी न पड़े। खुले स्थान पर फोटो लेते वक्त सूरज आपकी पीठ की ओर होना चाहिए। दिन का वह वक्त चुनें जब रोशनी न तो बहुत तेज हो और न ही बहुत कम।

फ्रेम कम्पोजिशन : फोटो लेते वक्त दूसरी महत्त्वपूर्ण बात है फ्रेम कम्पोजिशन का ध्यान रखना। सुनिश्चित बनाएँ कि फ्रेम में बहुत ज्यादा चीजें न हों। इससे फोटो के मुख्य विषय से ध्यान भटकेगा। साथ ही ध्यान रखें कि दृश्य के अनुरूप कौन-सा कोण सही बैठेगा। कोशिश करें कि बिजली की तारें जैसी अन्य अनावश्यक चीजें फोटो में कैद न हों। गौर करें कि कोई चीज आपके फ्रेम की सुंदरता को खराब न कर रही हो तथा इस बात को भी देखें कि कौन-सी चीज फोटो को और सुंदर बना सकती है। जैसे कि पृष्ठभूमि में फूल रख कर फ्रेम की सुंदरता बढ़ाई जा सकती है।

लॉ ऑफ थर्ड : तीसरी मुख्य बात को ‘लॉ ऑफ थर्ड’ कहते हैं यानी फ्रेम को हमेशा लम्बवत तथा समानांतर रेखाओं की मदद से तीन हिस्सों में विभाजित करें और तस्वीर के मुख्य तत्वों को वहाँ रखें जहाँ वे रेखाएँ एक-दूसरे को काट रही हों। एक अकेले पात्र को केन्द्र में न रखें। केन्द्र के दाएँ व बाएँ हिस्सों में पात्र देखने में अच्छे लगते हैं।

सुंदरता निखारने वाले तत्व : ऐसी सिमिट्री, कर्व, टैक्सचर तथा रंगों की तलाश करें जो आपकी फोटो में खास बात पैदा कर सकें। ये तत्व फोटो की सुंदरता में कई गुणा वृद्धि कर सकते हैं। उदाहरण के लिए पोर्ट्रेट की पृष्ठभूमि में लकड़ी का टैक्सचर सुंदर दिखाई देता है।

फोटोग्राफी में करियर


योग्यता
अगर आपमें भी फोटोग्राफी को लेकर जुनून है तो इसमें करियर बनाने के लिए किसी तरह की औपचारिक डिग्री की आवश्यकता नहीं है लेकिन फिर भी आपको 10+2 या समकक्ष होना जरूरी है जिसके बाद आप फोटोग्राफी सम्बन्धी डिप्लोमा या डिग्री कोर्स में दाखिला ले सकते हैं।

इसके अलावा कम्प्यूटर पर आधारित फोटोशॉप सम्बन्धी सॉफ्टवेयर का ज्ञान अतिरिक्त योग्यता है जिसके बाद आपके लिए डिजिटल और सामान्य फोटोग्राफी में आगे बढ़ने की अपार सम्भावनाएँ हैं।

कोर्स
किसी भी सरकारी या निजी संस्थान से फोटोग्राफी का कोर्स करने के बाद इस क्षेत्र में प्रवेश किया जा सकता है। हालाँकि भारत में अभी इस क्षेत्र के लिए विशेष कोर्स उपलब्ध नहीं हैं, फिर भी फोटोग्राफी में डिप्लोमा और सर्टिफ़िकेट दो तरह के कोर्स कराए जाते हैं।

प्रमुख संस्थान
1. ए.जे.के. मास कम्युनिकेशन सेंटर, जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली
2. कॉलेज ऑफ आर्ट्स, तिलक मार्ग, दिल्ली
3. सेंटर फॉर रिसर्च आर्ट ऑफ फिल्म्स एंड टेलीविजन, नई दिल्ली
4. दिल्ली स्कूल ऑफ फोटोग्राफी, दिल्ली
5. इंडियन इंस्टीट्यूट फॉर डवलपमेंट इन एजुकेशन एंड एडवांस स्टडीज, अहमदाबाद, गुजरात
6. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन, अहमदाबाद, गुजरात 7. नेश्नल इंस्टीट्यूट ऑफ फोटोग्राफी, मुंबई, महाराष्ट्र

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