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भूकम्प अवरोधक घर निर्माण पुस्तिका : बुनियाद

Author: 
राजेश कुमार (पी.एस.आई.)
Source: 
भूकम्प अवरोधक घर निर्माण पुस्तिका, लोक विज्ञान संस्थान, अप्रैल 2007

निर्माण किए जाने वाले मकान की बुनियाद 2 फिट चौड़ी होगी। ईंट या काँक्रीट-ब्लाॅक के लिए बुनियाद 1.5 फिट चौड़ी ठीक रहेगी। बुनियाद की गहराई कम से कम 1.5 फिट होनी चाहिए। यदि मिट्टी नरम है तो गहराई 2 या 2.5 फिट हो सकती है, परन्तु इसे 3 फिट से ज्यादा गहरी न करें। यदि 3 फिट की गहराई पर भी मिट्टी नरम ही मिले तो बुनियाद को ज्यादा गहरा खोदने के बजाए उसे अधिक चौड़ा करना ज्यादा उचित होगा। ऐसा करने पर बल ज्यादा बल ज्यादा क्षेत्र में फैलेगा और दीवाल की धँसने की सम्भावना नहीं होगी।

बुनियाद नरम मिट्टी की जाँच करने के लिए जमीन पर सम्भल मारें। यदि सम्भल करीब 6 ईंच या इससे ज्यादा जमीन में धँस जाए तो मिट्टी नरम कहलाएगी।

निशान लगाने के पश्चात खुदाई शुरू करें। परन्तु मिट्टी बारह की तरफ फेंकन के बजाए अन्दर की तरफ ही फेंकें। इससे प्लिंथ (या कुर्सी) की भराई के समय अधिक मेहनत नहीं करनी होगी और समय की भी बचत होगी।

बुनियाद जितनी चौड़ी बुनियाद की आवश्यकता हो उतनी ही चौड़ी बुनियाद खोंदें। यदि बुनियाद ज्यादा चौड़ी खुद गयी हो तो फिर भरान भी उतनी ही चौड़ाई की करनी होगी।

ढालदार जमीन में ऊपर दिए गए चित्र की तरह सतह के सबसे निचले स्थान से कम से कम 1.5 फिट गहरी खुदाई करनी चाहिए। यदि ढाल ज्यादा तीव्र हो तो बुनियाद में नीचे दिए गए चित्र की तरह सीढ़ियाँ काटी जा सकती है। इससे समय और पैसा, दोनों की ही बचत होगी। यदि ऐसा नहीं किया तो ‘ए’ की अपेक्षा ‘बी’ पर की मिट्टी ज्यादा नरम रह जाएगी। इससे आने वाले वर्षों में असमान धँसने के कारण मकान को नुकसान पहुँच सकता है।

बुनियाद

बुनियाद को भरने में अक्सर दो गलतियाँ होती हैंः


1. इसमें छोटे और गोल पत्थरों का इस्तेमाल किया जाता है और

2. पूरी चौड़ाई में पत्थर भरने के बजाए अक्सर बीच के स्थान में ही पत्थर भरे जाते हैं और बाद में किनारों पर मिट्टी भर दी जाती है (चित्र ए)। भूकम्प में जब जमीन हिलती है तो बीच के पत्थर किनारों की तरफ भागने की कोशिश करते हैं। जब दोनों तरफ भरान की नरम मिट्टी होती है तो ये पत्थर (चित्र बी) की तरह आसानी से किनारे चले जाते हैं और ऊपर की दीवाल नीचे धँसने लगती है। यह ज्यादा नुकसानदेह तब होता है जब बुनियाद में छोटे और गोल पत्थरों का इस्तेमाल किया गया हो।

बुनियाद पत्थर को इस तरफ से भरें ताकि वो बुनियाद में अच्छी तरह से पैक हो जाए। इसके लिए हर रद्दा लगाने के बाद उस पर चल कर अथवा पैर से ठोक कर संतुष्टी कर लें।

पत्थर की पैकिंग यदि अच्छी हो तो कमजोर मसाले (1:8 या 1:10) का या मिट्टी के गारे का प्रयोग भी किया जा सकता है। जब बुनियाद जमीन के स्तर से 5-6 ईंच गहरी रह जाए तब 1:6 के मसाले या अच्छे मिट्टी के गारे का प्रयोग करें। मसाले या मिट्टी के बारे में विस्तृत जानकारी पुस्तिका के अन्तिम भाग परिशिष्ट I व II से मिल सकती है।

कोने का सरिया


बुनियाद में एक रद्दा (परत) पत्थर लगाने के पश्चात हर कोने पर 4 सूत (ईंट या ब्लाॅक की दीवाल के लिए 3 सूत) के सरिये लगायें। इससे मकान में थोड़ा लचीलापन आएगा और मकान भूकम्प के झटके को सही ढँग से सह लेगा।

(अधिक जानकारी के लिए पी. एस. आई द्वारा प्रकाशित भूकम्प अवरोधक घर निर्माण प्रशिक्षण पुस्तिका पढ़ें)

कोने की सरिया की कुल लम्बाई = उस कोने पर दीवाल की ऊँचाई + बुनियाद की गहराई + 2 फिट (सारे नाप फिट में ही हैं)।

कोने का सरिया नक्शे के आधार पर जिस मकान का निर्माण हो रहा है वह 7 फिट ऊँचा है। इसकी बुनियाद 1.5 फिट गहरी है। इसलिए इसके कोने पर सरिया की लम्बाई 10.5 फिट होगी।

सरिये को पहले डाई की मदद से एल आकार में लगभग एक फिट मोड़ लें। फिर इसे मकान के कोने में इस तरह रखें जिससे ये दीवालों के बीचों बीच आए। इसके लिए बुनियाद खोदने से पहले गुनिया में गाड़ी गई खूँटियों की भी मदद ले लें। इससे सरिया ठीक बीच में आएगा। इस सरिए में करीब 1.5 फिट लम्बा और 3 ईंच मोटा पी. वी. सी. पाईप का टुकड़ा डाल दें। फिर सरिए को रस्सी और पत्थर (या ईंट) की मदद से नीचे दिए गए चित्र कि तरह तीन छोर पर बाँध लें जिससे सरिया इधर-उधर भागने न पाए। फिर बुनियाद में पत्थर और मसाले (या गारे) के साथ चिनाई शुरू करें।

सरिया कोनों पर, सरिये और पाईप के चारों तरफ यथा सम्भव लम्बे व चौड़े पत्थर लगाएँ। जब चिनाई करीब एक फिट की हो जाए तो पाईप को ऊपर खींच कर उसमें 1:2:4 का मसाला भरें। भरने के साथ ही साथ एक सरिये के टुकड़े से इसे अच्छी तरह ठोकते भी रहें। इससे मसाला बड़े पत्थरों के बीच खाली स्थान को भर लेगा और सरिये को मजबूती से पकड़ कर रखेगा।

सरिया इसी विधि से पूरी बुनियाद को पत्थर और सीमेन्ट के मसाले (या गारे) के साथ भरें। जमीन के स्तर तक बुनियाद जितनी चौड़ी खुदी है उतनी ही चौड़ी भरें। कुर्सी जमीन के स्तर से कम से एक फिट ऊपर रखें जिससे बाहर का पानी घर के अन्दर न घुस पाए। कुर्सी (या प्लिंथ) तक की चिनाई 2 फिट चौड़ी ही रखें। यदि बुनियाद में ईंट या काँक्रीट ब्लाॅक का इस्तेमाल किया गया हो तो इसकी चौड़ाई 1.5 फिट ही रखें।

पत्थर की चिनाई करते वक्त यह ध्यान रखना होगा कि पत्थर बड़े और चपटे हों। इसके लिए यदि पत्थरों को थोड़ा तराशना भी पड़े तो आलस न करें। चिनाई करते समय बड़े पत्थरों का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करें। आर-पार पत्थरों का यथा सम्भव प्रयोग करें। (आर-पार पत्थर के बारे में जानकारी आगे दी गई है।)

कोने के पत्थर


कोने के पत्थर भूकम्प में कोनों पर बल ज्यादा पड़ता है इसलिए कोनों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।

पत्थर की दीवाल में कोनों पर ज्यादा लम्बे व चौड़े पत्थरों का इस्तेमाल करें। यदि ऐसे पत्थर उपलब्ध न हो तो हाथ से बनें कांक्रीट ब्लाॅक का इस्तेमाल किया जा सकता है। कोना बनाते समय पाईप का इस्तेमाल पहले जैसे ही करें।

कुर्सी तक चिनाई हो जाने के पश्चात मकान नीचे दिए गए चित्र जैसा दिखेगा। चूँकि बरामदे की बुनियाद पर दीवाल का वजन नहीं आना है, इसलिए इसकी बुनियाद कम चौड़ी और कम गहरी है। पूरी लम्बाई में कम से कम तीन खम्बे होने चाहिए जिससे छत को सहारा मिल सके। ये खम्बे पत्थर, ईंट, ब्लाॅक, आर. सी. सी. अथवा लकड़ी के बने हो सकते हैं।

कुर्सी

कुर्सी की पट्टी


कुर्सी तक पहुँचने के पश्चात एक पट्टी, जिसे कुर्सी की पट्टी भी कहा जाता है, डालना बहुत जरूरी है जो चारों दीवाल को इस स्तर पर एक साथ पकड़ कर बाँध दें। इसके लिए पहले पूरी लम्बाई में 3 सूत के दो सरिये, 6 ईंच के फासले पर दिवाल के बीच में बिछाएँ। फिर हर एक फुट पर 2 सूत के सरिये का रिंग बाँधे। फिर दीवाल के दोनों किनारों पर ईंट की 4 ईंच की चिनाई करें। इसके तीन फायदे हैं:

1. यह शटरिंग का काम करती है,
2. मसाले की बचत होती है और
3. पट्टी पूरी 3 ईंच (ईंट की ऊँचाई जितनी) मोटी बनती है।

कुर्सी की पट्टी फिर इसके बीच में 1:2:4 का मसाला भरें। भरते समय मसाले को एक सरिए के टुकड़े से ठोकते रहें जिससे कांक्रीट अच्छी तरह से बैठ जाए।

यह ध्यान रखें कि पट्टी कहीं से भी टूटनी नहीं चाहिए अर्थात पूरे मकान में लगातार घूमनी चाहिए तभी इसका पूरा लाभ मिल सकता है। यदि पैसे कम पड़ रहे हों तो सिर्फ सरिया बिछाने से भी थोड़ा फायदा मिल सकता है। बरामदे में पट्टी घुमाने की आवश्यकता नहीं है।

कुर्सी की पट्टी

बरामदे का खम्बा


खम्बे आर.सी.सी., ईंट अथवा लकड़ी के हो सकते हैं। लकड़ी के खम्बों की कुर्सी के साथ अच्छी पकड़ के लिए इसमें नीचे के हिस्से में करीब 4 ईंच का छेद कर लें जिससे सरिया इसमें घुस सके। कुर्सी पर, जहाँ खम्बा बनाना हो, वहाँ सरिए का एक टुकड़ा (करीब 10 ईंच लम्बा) खड़ा कर रखें। सरिए के इर्द-गिर्द, उसे अच्छी तरह पकड़ने के लिए, 1:2:4 का मसाला करीब 6 ईंच तक भरें। एक दिन पश्चात बाहर निकले हुए सरिए में खम्बा डालकर करीब 6 ईंच की और चिनाई करें। इससे खम्बा मजबूती के साथ दीवाल से लगा रहेगा।

बारमदे का खम्बा पट्टी लगाने के बाद कमरे और बरामदे को कुर्सी तक मिट्टी से भर लें और लेवल कर लें। बुनियाद की मिट्टी जो खुदाई के वक्त अन्दर की तरफ ही डाली गई थी, इस क्रिया को आसान बनाएगी। पट्टी लगने और खम्बे की बुनियाद बन जाने के बाद आपको मकान नीचे दिए गए चित्र जैसा दिखेगा।

पट्टी लगाने के बाद

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