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डम्पिंग का डंक

Author: 
मोफीद खान
Source: 
सबका सामना सभी के लिये सब कुछ, 01 फरवरी 2016

. देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में रोजाना करीब दस हजार मैट्रिक टन कचरा निकलता है। इस कचरे पर किसी भी तरह की प्रक्रिया न करते हुए इसे डम्पिंग ग्राउण्ड पर डम्प किया जाता है। दस हजार मैट्रिक टन में से 50 फीसदी कचरा देवनार डम्पिंग ग्राउण्ड में डम्प किया जाता है। देवनार डम्पिंग ग्राऊंड की क्षमता समाप्त होने के बावजूद डम्पिंग के लिये मनपा प्रशासन के पास दूसरी पर्यायी जगह न होने के कारण यहाँ अब भी कचरा डम्प किया जा रहा है। आलम यह है कि देवनार डम्पिंग ग्राउण्ड में कचरे का ढेर शहर में बने आलीशान टॉवर की ऊँचाई तक लगा हुआ है।

कचरे के निपटारे का प्रस्ताव मनपा प्रशासन की अलमारी में धूल खा रहा है। यहाँ पर कचरे से बिजली निर्माण करने की परियोजना के प्रस्ताव पर प्रशासन कोई दिलचस्पी नहीं ले रहा है। इस परियोजना के लिये सलाहकार नियुक्ति के लिये निविदा प्रक्रिया पूर्ण होने के बावजूद प्रशासन इसे अमली जामा पहनाने में कोताही बरत रहा है। प्रशासन की इसी कोताही के चलते देवनार डम्पिंग ग्राउण्ड में आए दिन आग की घटनाएँ घट रही हैं। इस डम्पिंग ग्राउण्ड में अभी तक सैकड़ों आग लगने की घटनाएँ घट चुकी हैं। कचरे में लगी आग से निकलने वाला जहरीला धुआँ वायु में मिश्रित होकर इसे प्रदूषित करता है।

इस जहरीले धुएँ का सबसे अधिक प्रभाव डम्पिंग से सटे इलाके शिवाजी नगर, चेंबूर, गोवंडी, वडाला, भांडुप, मुलुंड, घाटकोपर, कांजुरमार्ग और विक्रोली पर पड़ रहा है। इस जहरीले धुएँ से यहाँ के निवासी भयंकर बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। देवनार डम्पिंग ग्राउण्ड के कचरे में लगी आग से निकलने वाले जहरीले धुएँ का कहर पिछले तीन दिनों में शहर में जारी है। इस डम्पिंग ग्राउण्ड में बायो मेडिकल कचरा, रसायनिक पदार्थ, प्लास्टिक आदि कचरे डम्प किए जाते हैं। ‘वनशक्ति स्वयं सेवी संस्था’ के.डी. स्टेलिन के अनुसार इन कचरों में आग लगने से सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, कार्बन मोनो ऑक्साइड, ओजोन जैसी जहरीली गैसें वायु को प्रदूषित कर रहे हैं।

मनपा के पर्यावरण विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक शनिवार को वायु की गुणवत्ता का स्तर (एक्यु आई) 432 तक पहुँच गया था। एक्युआई 300 से 400 व उसके ऊपर होने से उक्त वायु स्वास्थ्य के लिये काफी हानिकारक साबित होती है। डी. स्टेलिन के मुताबिक इससे लोगों को साँस लेने की तकलीफ, खाँसी, आँखों में जलन, दमा जैसी बीमारी के शिकार होने के साथ-साथ लोगों को अस्थमा अटैक आने की प्रबल संभावना बनी रहती है। डम्पिंग में डम्प रासायनिक वस्तुओं के जलने पर निकलने वाले कण से कैंसर, हृदय जैसी बीमारी भी होने की बात से इंकार नहीं किया जा सकता। देवनार डम्पिंग ग्राउण्ड पश्चिम में मेडिकल सेंटर चलाने वाले राजीव गाँधी मेडिकल सेंटर के प्रमुख डॉ. राहिल कमर के अनुसार लोग रोजाना डम्पिंग में लगे आग से निकलने वाले धुएँ के शिकार हो रहे हैं।

उन्होंने बताया कि वर्षों पहले डम्पिंग पर पानी का छिड़काव, दवा का छिड़काव आदि हुआ करता था लेकिन बीते कुछ वर्षों से उक्त प्रक्रिया न होने से यहाँ से निकलने वाले धुएँ के मामले ने तूल पकड़ लिया है। उनका मानना है कि डम्पिंग से सटकर रहने वाले निवासियों की जीवन अवधि इन धुओं से कम हो गई है। टीबी, दमा, हृदय रोग आदि बीमारी यहाँ के निवासियों के लिये काल बनी हुई है। खासकर बुजुर्ग और छोटे मासूम बच्चों के लिये यह धुआँ जानलेवा साबित हो रहा है। डम्पिंग ग्राउण्ड का मुद्दा इतना गंभीर हो चुका है कई बार न्यायालय ने इसमें हस्तक्षेप भी किया। इस हस्तक्षेप के बाद सरकारी मशीनरी कुछ दिन के लिये सक्रिय हो जाती है लेकिन बाद में मामला फिर वैसा ही हो जाता है।

डम्पिंग में जब-जब आग लगती है तब-तब इस पर चर्चा और इसे रोकने की बात होती है लेकिन जैसे ही आग बुझ जाती है उसी तरह डम्पिंग का मुद्दा पानी के बहाव में बह जाता है। इस बार डम्पिंग में लगी आग को मुख्यमंत्री से लेकर आयुक्त ने इसे गम्भीरता से लिया है। एक बार फिर इस आग को लेकर अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कराया गया है। आग किसने लगाई, क्यों लगाई और इसे रोकने के लिये क्या एक्शन प्लान किया जाना चाहिए, इस पर कोई निर्णय अब तक प्रशासन ने नहीं लिया है।

हालाँकि डम्पिंग ग्राउण्ड में तीन दिन से लगी आग फिलहाल कल शाम तक बुझ गई है लेकिन इससे निकलने वाला धुआँ अब तक आसमान में घिरा हुए है और यहाँ के लोगों पर अब भी कहर बरपा रहा है। अब देखना है कि इस धुएँ से निपटने के लिये मनपा प्रशासन ठोस उपाय योजना करता है या नहीं, या फिर यहाँ बसे लोगों को इन्हीं धुएँ के हवाले छोड़ देता है।

(फोटो साभार - एनडीटीवी इंडिया)

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