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उत्तराखण्ड की बड़ी प्राकृतिक आपदाएँ

Author: 
श्री शंकर प्रसाद तिवारी ‘विनय’
Source: 
जल चेतना तकनीकी पत्रिका, जुलाई 2014

1868: बादल फटने से चमोली स्थित ‘बिरही’ की सहायक नदी में भू–स्खलन से 73 मरे।

19 सितंबर, 1880: नैनीताल में हुए भू–स्खलन से 151 लोगों की मौत।

1893–94: बिरही नदी में चट्टान गिरने से बड़ी झील बनी, जिसके फूटने से हरिद्वार तक 80 लोगों की मौत तथा संपत्ति का नुकसान।

1951: सतपुली (पौड़ी) में नयार नदी में आयी आकस्मिक बाढ़ से 20 बसें बही, लगभग 65 लोगों की मौत।

1957: भू–स्खलन से ‘कपकोट के सुडिम’ (बागेश्वर) में 12 लोगों की मौत।

1970: अलकनंदा में बनी झील के फूटने से निचली घाटियों में 70 लोगों की मौत ‘बेलाकूची’ (चमोली) में बाढ़ से 30 लोगों की मौत। झढ़कुला, सलूड डुंग्रा, बरोसी तथा मोल्टा गांवों में भू–स्खलन से 27 लोगों की मौत।

1973: दशोली ब्लॉक (चमोली) के ‘सैकोट’ गांव में बादल फटने से 11 लोगों की मौत।

1977: भू–स्खलन से ‘तवाघाट’ में 44 लोगों की मौत।

अगस्त 1978: कनोडिया गांव (टिहरी) के पास झील फटने से भागीरथी घाटी में 25 लोगों की मौत।

1979: कौंथा गांव (रूद्रप्रयाग) में भारी भू–स्खलन से 50 लोगों की मौत।

23 जून, 1980: ‘ज्ञानसू’ कस्बे (उत्तरकाशी) में भारी भू–स्खलन से 45 लोगों की मौत।

9 सितंबर, 1980: कन्नौडिया गाँव (उत्तरकाशी) के पास सड़क निर्माण कार्य के दौरान अचानक चट्टान खिसकने से 15 अधिकारी व कर्मचारियों समेत 22 लोगों की मौत।

1983: ‘कर्मी गांव’ (बागेश्वर) में एक नाले में अचानक आई बाढ़ से 37 लोगों की मौत।

1990: ‘नीलकंठ’ (ऋषिकेश) में भारी भू–स्खलन से 100 लोगों की मौत।

अगस्त 1991: चमोली के विभिन्न गाँवों में बादल फटने व भू–स्खलन से 29 लोगों की मौत।

20 अक्टूबर, 1991: उत्तरकाशी जिले में आए विनाशकारी भूकंप से 150 लोगों की मौत।

1996: पिथौरागढ़ के बेलकोट तथा रैतोली में बादल फटने से 16 लोगों की मौत।

जुलाई–अगस्त 1998: ऊखीमठ क्षेत्र के मनसूना–बुरूवा–रांऊलैक (रूद्रप्रयाग) में बादल फटने तथा भू–स्खलन की घटना में 120 लोगों की जानें गयी। 17 अगस्त को ‘मालपा’ (पिथौरागढ़) में भू–स्खलन से 210 लोग जिंदा दफन।

28 मार्च, 1999: चमोली तथा रूद्रप्रयाग जिले में आए भीषण भूकंप से 100 लोगों की मौत।

2000: छुड़की गांव (पिथौरागढ़) में भू–स्खलन से 19 लोगों की मौत।

2001: बूढ़ाकेदार (टिहरी) क्षेत्र में बादल फटने से 16 लोगों की मौत।

16 जुलाई, 2001: फाटा (रूद्रप्रयाग) क्षेत्र में भू–स्खलन से 40 लोगों की मौत।

अगस्त 2002: बाल–गंगा घाटी तथा घनसाली (टिहरी) में बादल फटने व भू–स्खलन से 50 लोगों की मौत।

2004: लामबगड़ तथा मारवाड़ी (जोशीमठ) में बादल फटने व भू–स्खलन से 24 लोगों की मौत।

2007: देवपुरी तथा बरम (कुमाऊं) में बादल फटने से 30 लोगों की मौत।

2008: घांघरिया, हेमकुण्ड (चमोली) में ग्लेशियर टूटने से 15 लोगों की मौत।

2010: सुमगढ़ (बागेश्वर) में एक स्कूल के पास भू–स्खलन से 18 बच्चों की मौत तथा चमोली, पिथौरागढ़, बागेश्वर व उत्तरकाशी में बादल फटने व भू–स्खलन से 45 लोगों की मौत।

2012: चुन्नी–मंगोली (ऊखीमठ) गाँव में बादल फटने से 100 लोगों की मौत।

संपर्कः
श्री शंकर प्रसाद तिवारी ‘विनय’, फ्रैण्डस बुक डिपो, यूनिवर्सिटी गेट के सामने, श्रीनगर गढ़वाल, ग्रा.पो.गुप्तकाशी अपर मार्केट जनपद–रूद्रप्रयाग पौड़ी गढ़वाल, पिनकोड़–246174, मो– 9756918227

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