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अल नीनो में गिरावट से कोई सूखा नहीं रहेगा

Author: 
इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)

मौसम विभाग ने भी कहा- इस बार पिछले दो साल से अधिक बारिश होगी
समय पर आएगा मानसून; 106% होगी बारिश, जून में अपडेट होगा अनुमान


सूखा अब मौसम विभाग ने भी इस साल भरपूर बारिश का अनुमान जता दिया है। मंगलवार को विभाग ने कहा कि इस बार 106% तक बारिश होगी। एक दिन पहले स्कायमेट ने 105% बारिश का अंदाजा जताया था। मौसम विभाग ने कहा कि इस बार सभी जगह खूब बारिश होगी। सूखा झेल रहे मराठवाड़ा में तो सामान्य से ज्यादा की उम्मीद जताई है। मॉनसून के अभी दो अनुमान और आएँगे। मई और जून में। लेकिन ये पहली बार है जब पहले अनुमान में ही 100% से ज्यादा बारिश की उम्मीद जताई गई है।

लगातार दो साल कई राज्यों में सूखे के बाद अच्छी खबर आई है। मौसम की भविष्यवाणी करने वाली एजेंसी स्कायमेट ने दावा किया है। कि इस बार सामान्य से ज्यादा बारिश होगी। वहीं केन्द्र सरकार ने भी पिछली बार से ज्यादा बारिश की सम्भावना जताई है। सोमवार को सामने आए दोनों के दावों के पीछे वजह है- सूखे का कारण माने जाने वाले अन नीनो फैक्टर खत्म होना। नासा और ऑस्ट्रेलियाई, एजेंसी ने भी देश में अल नीनो फैक्टर खत्म होने की बात कही है। अब इन्तजार मंगलवार का है। इसी दिन मौसम विभाग मानसून का अनुमान जारी करेगा।

स्कायमेट ने बताया कि इस बार 105 से 110% तक बारिश हो सकती है। सामान्य से ज्यादा बारिश की सम्भावना 35% है। मध्य भारत और पश्चिमी तटीय इलाकों में अच्छी बारिश होने की उम्मीद है। जबकि तमिलनाडु, उत्तरपूर्वी भारत और दक्षिण कर्नाटक के कुछ इलाकों में कम बारिश हो सकती है। दूसरी ओर, केन्द्रीय कृषि सचिव शोभना पटनायक ने बताया कि मई आखिर तक मॉनसून के केरल तट तक पहुँचते ही ये फैक्टर कमजोर हो जाएगा। इसके बाद देशभर में समय पर अच्छा मानसून दस्तक देगा।

ऐसे समझें अनुमान को


111% तक हो सकती है बारिश: इस बार मानसून में जून से सितम्बर के बीच बारिश 50 साल की बारिश के औसत के मुकाबले 5 फीसदी घट-बढ़ के साथ 106% होगी। यानी कम से कम 101% और अधिकतम 111% बारिश होने के आसार हैं।

64% सम्भावना सामान्य से ज्यादा बारिश की: सामान्य बारिश (यानी 96% से 104%) की सम्भावना 30%, सामान्य से अधिक बारिश (यानी 104% से 110%) की सम्भावना 34% और अधिक (110% से ज्यादा) बारिश की सम्भावना 30% है। यानी 64% सम्भावना है कि सामान्य से ज्यादा बारिश हो।

5% सम्भावना कम मानसून की: सामान्य से कम (90 से 96% तक) की सम्भावना सिर्फ 5% है। मौसम विभाग के मुताबिक इस साल 94% सम्भावना इस बात की है कि 96 फीसदी से ज्यादा बारिश होगी।

1% आशंका सूखे की: सिर्फ एक फीसदी सम्भावना इस बात की है कि इस साल देश में 90% से कम बारिश हो। इससे कम पानी को मौसम विभाग सूखा मानता है।

सितम्बर में ज्यादा बारिश: जून में 90%, जुलाई में 105%, अगस्त में 108% और सितम्बर में 115% बारिश होगी। इसमें 5% कम-ज्यादा हो सकता है।

करीब-करीब ठीक ही निकलता है मौसम विभाग का अनुमान


 

वर्ष

अनुमान

वास्तविक

2008

99%

98%

2009

96%

78%

2010

98%

102%

2011

98%

102%

2012

99%

93%

2013

98%

106%

2014

93%

89%

2015

93%

86%

 


116 साल में सिर्फ 4 बार लगातार दो साल सूखा रहा है। पर तीसरे साल आज तक कभी सूखा नहीं रहा है।

अच्छे मानसून से कैसे होगा फायदा


 

सामान्य से बेहतर रहेगा इस वर्ष मानसून : मौसम विभाग

गर्मी भी झुलसाएगी और फिर ठंड भी कड़क होगी

भयंकर सूखे की मार झेल रहे मराठवाड़ा और बुन्देलखण्ड में इस साल होगी अच्छी बारिश

 


दो वर्ष बाद देश में समय पर और सामान्य से बेहतर मानसूनी बारिश की सम्भावना को वर्ष 2016 की सबसे बेहतरीन खबर यूँ ही नहीं कहा जा रहा है। मौसम विभाग की इस घोषणा से सरकार व उद्योग जगत दोनों खुश हैं। बेहतर मानसून ग्रामीण माँग को बढ़ाएगा जो कई उद्योगों को मंदी से निकालने में अहम साबित होगा। साथ ही इससे खजाना प्रबंधन करने में जुटे वित्त मंत्री अरुण जेटली को भी मदद मिलेगी। इससे अगले दो वर्षों के भीतर महंगाई दर को चार फीसद पर सीमित करने की भी सूरत बनेगी जिससे आने वाले दिनों में कर्ज को और सस्ता करने का रास्ता भी साफ होगा।

किसानों को बेहतर अवसर


धानुका एग्रीटेक लिमिटेड के चेयरमैन आर जी अग्रवाल इसे खेती व किसानों के लिये बहुत ही अहम सूचना मानते हैं। उनका कहना है कि दो वर्षों से देश का किसान काफी परेशानी में था, अब उसके लिये बेहतर अवसर पैदा होंगे।

बताते चलें कि पिछले दो वर्षों के दौरान खराब मानसून को देश की अर्थव्यवस्था की रफ्तार सुस्त होने के पीछे एक अहम वजह माना जाता है। कारों व दोपहिया वाहनों की बिक्री घटने के पीछे भी खराब मानसून को ही वजह माना जाता है क्योंकि कृषि पर निर्भर दो-तिहाई भारतीयों की कमाई पर इसका असर पड़ता है। माँग से ही देश की औद्योगिक वृद्धि दर की रफ्तार भी काफी सुस्त बनी हुई है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रफ्तार सुधरने का असर सीमेंट, ट्रैक्टर जैसे भारी उद्योग व साबुन-शैंपू जैसे एफएमसीजी सेक्टर पर भी पड़ता है।

सस्ता कर्ज


सीआइआइ के चंद्रजीत बनर्जी ने उम्मीद जताई है कि यह इस वर्षा के बाकी महीनों में कर्ज को सस्ता करने का माहौल बनाएगा। रिजर्व बैंक पहले ही इसकी जमीन तैयार कर चुका है।

महँगाई में होगी गिरावट


क्रिसिल के प्रमुख अर्थशास्त्री डी के जोशी के मुताबिक इस वर्ष की पहली मौद्रिक नीति पेश करते हुए भारतीय रिजर्व बैंक ने महँगाई की दर को दो वर्षों के भीतर चार फीसद पर लाने का लक्ष्य रखा है। इसे हासिल करने के लिये जरूरी है कि देश में पर्याप्त बारिश हो क्योंकि इससे खाद्य उत्पादों की महँगाई में खाद्य उत्पादों का हिस्सा 45 फीसद तक होता है। यह बहुत हद तक मानसून से निर्धारित होता है।

आर्थिक विकास दर में उछाल


उद्योग संगठन भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआइआइ) के महासचिव चंद्रजीत बनर्जी के अनुसार बेहतर मानसून पूरे उद्योग जगत के मूड को बदलने वाला साबित हो सकता है। इससे देश की आर्थिक विकास दर को 8 फीसद के करीब ले जाने में काफी मदद मिलेगी। इससे कम्पनियों को उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिलेगी, गाँवों में लोगों की आय बढ़ेगी जिससे कई तरह के उद्योगों की माँग गाँवों में बढ़ेगी। महँगाई को थामने में इसकी भूमिका होगी।

मौसम विभाग विभाग का पूर्वानुमान सटीक बैठा तो इस बार मानसून झमाझम बरसेगा। पिछले दो बार से मानसून में कम बारिश हो रही है। मई तक अल नीनो का असर होने के कारण देश में गर्मी भी ज्यादा होगी और अगस्त के बाद ला नीनो के प्रभाव के कारण ठंडियाँ भी ज्यादा कड़क होगा।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक लक्ष्मण सिंह राठौड़ ने एक जून से 30 सितम्बर तक के बीच होने वाली बारिश का पूर्वानुमानों की घोषणा करते हुए कहा कि 94 प्रतिशत सम्भावना है। देश में इस वर्ष सामान्य से लेकर सामान्य से ज्यादा बारिश होगी, जबकि कम बारिश होने की आशंका महज एक प्रतिशत है। मानसून दीर्घावधि औसत (एलपीए) 106 प्रतिशत रहेगा। इसमें गणना मॉडल में चूक के कारण पाँच प्रतिशत कम या ज्यादा का फर्क आ सकता है। सामान्य मानसून एलपीए का 96-104 प्रतिशत होता है। 90 प्रतिशत से कम एलपीए को बहुत कम मानसून माना जाता है और 90-96 प्रतिशत एलपीए को सामान्य से कम मानसून माना जाता है। सामान्य से बेहतर मानसून एलपीए के 104-110 प्रतिशत के बीच होता है और 110 प्रतिशत से ज्यादा एलपीए को बहुत ज्यादा माना जाता है। एक सवाल के जवाब में राठौड़ ने कहा कि भयंकर सूखे की मार झेल रहे मराठवाड़ा और बुन्देलखण्ड में इस साल अच्छी बारिश होगी। उन्होंने कहा कि इस वर्ष पूरे देश में मानसून का कमोवेश समान वितरण होगा। अच्छी बारिश..यह अच्छा वर्ष रहेगा। अच्छे मानसून में भी कुछ क्षेत्र ऐसे रहेंगे, जैसे पूर्वोत्तर भारत, जहाँ सामान्य से कुछ कम वर्षा होने की आशंका है।

साथ ही प्रायद्वीप के दक्षिण-पूर्वी हिस्से जैसे तमिलनाडु और पास स्थित रायलसीमा जिलों में भी सामान्य से कुछ कम वर्षा हो सकती है। राठौड़ ने कहा कि हम मासिक रूप से भी अच्छी वर्षा की आशा कर रहे हैं, जिसके कारण मानसून के मध्य या बाद के हिस्से में भी दबाव का क्षेत्र बन सकता है। मौसम विज्ञान विभाग के वैज्ञानिक डीएस पाई ने कहा कि ‘अल नीनो’ प्रभाव कमजोर पड़ रहा है।

 

स्कायमेट की रिपोर्ट - 105 से 110% तक बारिश की सम्भावना

केन्द्र का दावा-सूखे का डर नहीं, मानसून सामान्य रहेगा

आज मौसम विभाग के ऐलान के बाद लग जाएगी मुहर

2 साल से 12 से 14% कम बारिश हो रही है। लिहाजा, देश के 12 राज्यों में सूखा पड़ा हुआ है।

35% इलाके यानी देश के 688 में से 246 जिले सूखे की चपेट में हैं।

2015-16 में 1 करोड़ से ज्यादा फूड प्रोडक्शन घट गया ।

सूखे से महाराष्ट्र में मोटे अनाज का प्रोडक्शन करीब 41% और दालों का उत्पादन 11% घटेगा।

 



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