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मदन की मर्दानगी से भागा बाघ


. प्रकृति का नियम बताता है कि बड़ा जानवर हमेशा छोटे जानवर को धमकाता है, खा जाता है वगैरह। लेकिन मनुष्य प्राणी पर जंगली जानवरों का हमला कम ही होता आया है। जबसे लोगों ने प्राकृतिक संसाधनों का गलत दोहन, जंगली जानवरों का अत्यधिक शिकार यानि व्यावसायिक तौर पर हुआ, तब से मनुष्यों और कुछ जंगली जानवरों में लगातार संघर्ष बढ़ता नजर आ रहा है। उत्तराखण्ड में बाघ का प्रकोप पिछले 20 वर्षों से अधिक बढ़ गया है। मंशबाघ अर्थात मनुष्य को खाने वाला बाघ। बताते हैं कि एक बार बाघ को मनुष्य का खून लग जाये तो वह और विकराल हो जाता है। अब तो उत्तराखण्ड में जंगल कम हो रहे हैं तो स्वाभाविक है कि जंगली जानवर संकट में होंगे। उनके आशियाने और भोजन आधुनिक विकास की चपेट में आ गये हैं। और वे अब शहरों और गाँवों की तरफ भाग रहे हैं। हालात यह हो चुकी है कि उन्हें भी लोगों से खतरा है और बाघ जैसे खुंखार जानवर से लोगों को खतरा उत्पन्न हो गया है। इस द्वन्दात्मक रवैये से बाघ अब सीधे लोगों पर हमला करने लग गया है।

अभी हाल ही में पिथौरागढ़ अधौली के मदन नाम के एक ग्रामीण पर बाघ ने ताबड़तोड़ हमला कर दिया। अचानक हुए इस हमले से ग्रामीण मदन पहले तो एकदम घबरा गया कि वह अब बाघ के मुँह से नहीं बच सकता। जब उसने हौसला संभाला कि बाघ तो उसे अब नहीं छोड़ने वाला। उसने अपने जान की परवाह किये बगैर बाघ पर वापस हमला कर दिया और वह हिम्मत जुटाकर बाघ से भिड़ गया। यह बात मदन ने घायल अवस्था में बताई कि वह लगभग पाँच मिनट तक बाघ से लड़ता रहा।

प्रत्यक्षदर्शीयों के मुताबिक आखिरकार बाघ मदन से पस्त हो गया और मौके से भाग गया। इस संघर्ष में मदन गम्भीर रूप से घायल हो गया। ग्रामीण मदन को जिला अस्पताल पिथौरागढ ले गए जहाँ उसके सिर पर 40 टांके लगे। ग्रामीण बता रहे हैं कि एक सप्ताह से बाघ उनके इलाके में घूम रहा है। इससे पहले वह बाघ गाँव के दो अन्य लोगों पर हमला कर चुका है।

ज्ञात हो कि अधौली गाँव निवासी मदन सिंह कार्की (49) पुत्र भवान सिंह कार्की बुधवार शाम किसी काम से आमथल गाँव आए थे। वे अब वापस सायं के सात बजे अकेले अपने गाँव-घर की तरफ निकल रहे थे, तभी लटीगाड़ नामक स्थान के पास एक झाड़ी में छिपे बाघ ने मदन पर हमला कर दिया। बाघ ने पहला प्रहार मदन सिंह के सिर पर किया। मदन सिंह के साहस को दाद देनी पड़ेगी कि वह वापस बाघ के साथ भिड़ गया। पाँच मिनट के इस संघर्ष में बाघ को जब अपनी जान का खतरा महसूस हुआ तो वह मौके से भाग निकला। किसी तरह मदन सिंह कार्की लहूलुहान हालत में अपने घर मधौली पहुँचा और मदन सिंह ने इस वारदात की सम्पूर्ण कहानी परिवार और गाँव के लोगों को बताई। इतने में मदन की हालत बिगड़ने लगी, और रात में ही मदन को ग्रामीणों ने 108 आपात वाहन से गोचर अस्पताल लाया गया। चिकित्सकों ने मदन की गम्भीर हालत को देखते हुए रात को ही मदन को जिला अस्पताल पिथौरागढ भेज दिया।

उल्लेखनीय हो कि राज्य में बाघ के हमले लोगों पर बढते ही जा रहे हैं। ग्रामीण बताते हैं कि यह भी एक प्रकार की प्राकृतिक आपदा है। अचानक जंगली जानवरों के हमले से राज्य में कइयों ने अपनी जानें गँवाई है। इस तरह के जंगली जानवरों के सर्वाधिक शिकार बच्चे और महिलाएं हो रही हैं। कुल-मिलाकर अब तो राज्य में एक तरफ प्रकृति का प्रकोप और दूसरी तरफ जंगली जानवरों का खतरा लोगों की जान पर आ पड़ी है। ग्रामीणों का सुझाव है कि जंगली जानवरों के आशियाने और पेयजल एवं भोजन के स्थल समाप्त हो रहे हैं इस कारण भी जंगली जानवरों के खतरे गाँव के नजदीक आ चुके हैं। उनका मानना है कि वन्य जीव सुरक्षा कानून इतना कड़ा है कि कोई भी जंगली जानवरों पर हाथ नहीं लगा सकता। अर्थात एक तरफ जंगली जानवरों का जानलेवा हमला तो दूसरी तरफ जंगली जानवरों की सुरक्षा का कानून। लोगों के समझ में नहीं आ रहा है कि उनकी सुरक्षा का कौन सा कानून है?

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