Latest

नाम डूबा, उतरा पानी

Source: 
पांचजन्य, अक्टूबर, 2016

हालाँकि पाकिस्तान के लिये विश्व मंच पर साख जैसी कोई चीज पहले भी नहीं थी परन्तु भारत के साथ लगातार उलझाव और तनातनी ने उसकी स्थिति को नाजुक बना दिया है। दुनिया में अलग-थलग पड़ता पाकिस्तान भारत से मिलने वाले अमूल्य जल संसाधन से भी हाथ धो सकता है

पाकिस्तान की जनसंख्या में दस प्रतिशत की वृद्धि उसे स्थायी रूप से जल की कमी वाले क्षेत्र में बदल देगी। पाकिस्तानी जल समस्या का एक अन्य पहलू यह भी है कि उसके 70 प्रतिशत जलस्रोत उसके सीमा क्षेत्र के बाहर स्थित हैं, जिस पर उसका कोई नियन्त्रण नहीं है। राष्ट्रीय सन्दर्भ में, पाकिस्तान को बराबर बढ़ती हुई माँग और आपूर्ति में अन्तर का सामना करना पड़ रहा है। सरकारी आँकड़ों के अनुसार विभिन्न प्रान्तों को आवंटित किये गये जलस्रोत की वजह से वहाँ 10 (एमएएफ) मिलियन एकड़ फुट जल की कमी आई है। पाकिस्तान की तीन उच्च जल प्रबन्धन एजेन्सियाँ-योजना आयोग, जल एवं विद्युत मंत्रालय (वाटर एंड पावर डिस्ट्रीब्यूशन एजेंसी-वापदा) और सिंधु नदी प्रणाली अथॉरिटी इस तथ्य को स्वीकारती हैं। उनका यह भी मानना है कि इस कारण से वे प्रान्तों को उनके हिस्से में आवंटित 114 एमएएफ पानी के बजाय केवल 100 एमएएफ पानी ही दे पा रही हैं। पाकिस्तान में वर्षा में भी खासी असमानता है। गर्मी और वर्षा के दौरान 4 महीनों में उसकी नदियों में 75 प्रतिशत पानी रहता है जबकि शेष 8 महीनों में इसका औसत घट कर 25 प्रतिशत रह जाता है। इसी दौरान उसकी जरूरत क्रमशः 60 प्रतिशत और 40 प्रतिशत की रहती है।

वर्तमान में लगभग 13 एमएएफ जल को ही संकट से बचाव के लिये सुरक्षित किया जाता है। इस वर्ष 25 फरवरी को सिंधु नदी प्रणाली अथॉरिटी ने पाकिस्तानी सरकार से अप्रत्याशित अनुरोध किया कि वह सार्वजनिक क्षेत्र में देश भर में जारी सारी योजनाओं को 5 वर्षों के लिये रोक दे और उस धन का उपयोग अगले 5 वर्षों तक युद्ध स्तर पर केवल बाँध बनाने में करे ताकि पाकिस्तान 22 एमएएफ जल का संरक्षण कर सके। उसका मानना है कि बिना ऐसा किये पाकिस्तान को बराबर पानी की किल्लत झेलनी पड़ेगी। अथॉरिटी ने यह भी उजागर किया है कि उसके नदी जल संसाधन में पिछले दस वर्षों में 9 एमएएफ जल की कमी हुई है, जोकि जल प्रबन्धन के असफल होने का ज्वलन्त उदाहरण है। पाकिस्तान में प्रान्तों के परस्पर असहयोग और उनमें एक दूसरे के प्रति संदेह के चलते कई बाँध और जल विद्युत परियोजनाएँ अधर में लटकी हुई हैं।

कोई सेना या बम इतने बड़े भू-भाग को नष्ट नहीं कर सकता जितना नुकसान भारत द्वारा पाकिस्तान को दिये जाने वाले पानी को रोकने से होगा। यह संदेश विश्व बैंक के तत्कालीन प्रमुख इयूने ब्लैक ने पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमन्त्री लियाकत अली खान को 1951 में दिया था। यह हकीकत है और भारत ऐसा करके पाकिस्तान को एक मरुस्थल में बदल सकता है। यह आकलन है पाकिस्तानी अखबार ‘डॉन’ का।

सिंधु समझौते के प्रमुख बिन्दु


समझौते के अन्तर्गत सिंधु नदी की सहायक नदियों को पूर्वी और पश्चिमी नदियों में विभाजित किया गया। सतलुज, व्यास और रावी पूर्वी जबकि झेलम, चेनाब और सिंधु को पश्चिमी नदी बताया गया। पूर्वी नदियों के पानी का कुछ अपवादों को छोड़ दें तो भारत बिना रोक-टोक इस्तेमाल कर सकता है। पश्चिमी नदियों का पानी पाकिस्तान के लिये होगा लेकिन समझौते के भीतर इन नदियों के पानी के सीमित इस्तेमाल का अधिकार भारत को दिया गया, जैसे बिजली बनाना, कृषि के लिये सीमित पानी और नौवहन इत्यादि। भारत को इसके अन्तर्गत इन नदियों के 20 प्रतिशत जल के उपयोग की अनुमति है जबकि वर्तमान में वह मात्र 7 प्रतिशत जल का ही उपयोग इन कार्यों के लिये कर रहा है। अनुबन्ध में बैठक, कार्यस्थल के निरीक्षण आदि का प्रावधान है।

सिंधु नदी

किशनगंगा पर पाकिस्तानी आपत्ति


भारत की 330 मेगावाट की किशनगंगा जल विद्युत परियोजना ने पाकिस्तान की नींद हराम कर रखी है। किशनगंगा परियोजना जम्मू एवं कश्मीर के बारामूला जिले में झेलम नदी की एक सहायक नदी किशनगंगा पर स्थित है। नेशनल हाइड्रो पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनएचपीसी) के अनुसार इस परियोजना में सैंतीस मीटर ऊँचे कंक्रीट मुख वाला एक रॉक-फिल (पत्थरों से भरा हुआ) बाँध और एक भूमिगत विद्युत गृह का निर्माण प्रस्तावित है। इस परियोजना के पूरा होने के बाद उरी-1 और उरी-2 जल विद्युत परियोजनाओं से भी 300 मेगावाट से अधिक अतिरिक्त बिजली उत्पादित की जाएगी।

बगलिहार बाँध परियोजना पर अड़ंगा


भारत द्वारा चेनाब नदी पर बनाए जा रहे बगलिहार बाँध के डिजाइन को लेकर पाकिस्तान अन्तरराष्ट्रीय न्यायालय में चला गया था। तटस्थ विशेषज्ञ ने सिंधु जल समझौते के तहत बनाई जाने वाली परियोजनाओं के लिये अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों के इस्तेमाल पर जोर दिया और इसके लिये सुरक्षा तथा पानी के सर्वोत्तम इस्तेमाल को कारण बताया। उन्होंने कहा कि समझौते के सामान्य नियमों के अनुसार अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों और विज्ञान के नियमों को अपनाने की अनुमति है। उन्होंने बगलिहार बाँध तथा पन बिजली संयंत्र की अवधारणा तथा डिजाइन के मूल्यांकन के बारे में यह टिप्पणी की थी।

तुलबुल की अड़चन


पाकिस्तान किशनगंगा और बगलिहार परियोजना की ही तरह भारत की तुलबुल परियोजना में भी अवरोध पैदा करता रहा है। इसको वूलर बैराज के नाम से भी जाना जाता है। भारत ने 1985 में भारत प्रशासित कश्मीर के बारामूला जिले में झेलम नदी पर इस परियोजना का निर्माण शुरू किया था जिसके अन्तर्गत झेलम को नौवहन के लायक बनाकर इसका उपयोग दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में व्यापार बढ़ाने के लिये किया जाना था। भारत इसे तुलबुल नेवीगेशन प्रोजेक्ट कहता है। लेकिन पाकिस्तान का कहना है कि भारत झेलम नदी पर जिस वूलर बैराज का निर्माण कर रहा है, उससे वह पाकिस्तान का पानी रोकेगा। पाकिस्तानी सरकार की ओर से आपत्ति और जिहादी गुटों की धमकियों के बाद भारत ने 1987 में इस परियोजना के निर्माण कार्य को रोक दिया था।

पाकिस्तान के चारों सूबे पानी के मामले में पंजाब को संदेह की नजर से देखते हैं। सिंधु जल संधि की दुहाई देने वाला पाकिस्तान स्वयं अपने यहाँ आज तक पानी का न्यायोचित बँटवारा नहीं कर पाया है। उसके पास उत्तरी पाकिस्तान में मंगला और तरबेला बाँध हैं।

ठण्डे बस्ते की परियोजनाएँ


पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ की सिंधु नदी पर ही पंजाब प्रान्त के मियांवली में कालाबाघ स्थान पर कालाबाघ बाँध बनाने की प्रबल इच्छा थी। इस बाँध की जल भण्डारण क्षमता 6,100,000 एकड़ फीट होती और पाकिस्तान इससे 3,600 मेगावाट बिजली का उत्पादन कर सकता था। किन्तु अन्य पाकिस्तानी सूबों के विरोध के चलते अब यह परियोजना ठण्डे बस्ते के हवाले कर दी गई है। दिअमिर उत्तरी पाकिस्तान के 6 जिलों में से एक है। चीन के द्वारा तैयार काराकोरम हाईवे यहीं से गुजरता है। पाकिस्तान सिंधु नदी पर यहीं भाषा क्षेत्र में 272 मीटर ऊँचा दिअमिर भाषा बाँध बनाने की तैयारी कर रहा है। इस बाँध की जल भण्डारण क्षमता लगभग 8,107,132 एकड़ फीट होगी और इससे 4,500 मेगावाट बिजली उत्पादित की जा सकेगी। चीन इस योजना के लिये अरबों रुपए का कर्ज देगा। सिनिहाइड्रो नाम की कम्पनी इस परियोजना के विकास पर काम करना चाहती है। किन्तु चीन इस परियोजना पर पूरी धनराशि लगाने से कतरा रहा है। भारत-पाकिस्तान के बीच विवादित स्थल पर स्थित होने की वजह से अन्तरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थान भी इस पर अपनी पूँजी फँसाने से बच रहे हैं।

पाकिस्तान में प्रजातन्त्र और सैनिक शासकों के बीच सत्ता को लेकर रस्साकशी तथा आतंकवादियों को सैनिक सहयोग की वजह से कोई भी वित्तीय संस्थान इन जल परियोजनाओं में हाथ बँटाने को तैयार नहीं है। दायमर भाषा बाँध चिलास, सिंधु नदी पर प्रस्तावित है। 4,500 मेगावाट बिजली उत्पादन के लक्ष्य वाली इस परियोजना पर लगभग 14 अरब डॉलर का व्यय अनुमानित था और इसे 12 वर्षों में तैयार होना था। सरकार ने इसके लिये 17,000 एकड़ भूमि का अधिग्रहण कर लिया है और कुछ आरम्भिक काम भी शुरू हुआ है। 2025 तक तैयार होने वाली इस परियोजना पर भी वित्तीय संकट का खतरा है। बहुमहत्वाकांक्षी स्कार्दू-कातजराह बाँध से पाकिस्तान को 15,000 मेगावाट बिजली की उम्मीद थी किन्तु यह परियोजना अभी ठण्डे बस्ते में ही है। आज से लगभग दस वर्ष पूर्व, पंजाब में सिंधु नदी पर परवेज मुशर्रफ के शासनकाल में कालाबाघ बाँध बस बनने ही वाला था किन्तु पाकिस्तान के अन्य प्रान्त पंजाब में यह बाँध नहीं बनने देना चाहते थे। उन्हें भय था कि इससे पंजाब अन्य राज्यों का पानी रोक कर बैठ जाएगा।

इस बाँध से केवल पंजाब को ही फायदा होता। साथ ही सिंधु नदी में सदैव के लिये जल की कमी उत्पन्न हो जाती। यह परियोजना अभी शुरू ही नहीं हो पाई है। पाकिस्तान अपने यहाँ जल प्रबन्धन को सुधारना तो चाहता है पर चाहे-अनचाहे उसे आर्थिक संकट की दीवार सामने खड़ी मिलती है। दूसरे सिंधु नदी में पर्याप्त जल कश्मीर के क्षेत्र में ही है और भी कश्मीर के विवादित होने की वजह से कोई अन्तरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थान इन परियोजनाओं में हाथ डालते हुए कतराता है।

Post new comment

The content of this field is kept private and will not be shown publicly.
  • Web page addresses and e-mail addresses turn into links automatically.
  • Allowed HTML tags: <a> <em> <strong> <cite> <code> <ul> <ol> <li> <dl> <dt> <dd>
  • Lines and paragraphs break automatically.

More information about formatting options

CAPTCHA
यह सवाल इस परीक्षण के लिए है कि क्या आप एक इंसान हैं या मशीनी स्वचालित स्पैम प्रस्तुतियाँ डालने वाली चीज
इस सरल गणितीय समस्या का समाधान करें. जैसे- उदाहरण 1+ 3= 4 और अपना पोस्ट करें
3 + 13 =
Solve this simple math problem and enter the result. E.g. for 1+3, enter 4.