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पिकर कम वॉकिंग स्टिक स्वच्छ भारत की ओर एक नवाचारी कदम

Author: 
‘विज्ञानरत्न’ लक्ष्मण प्रसाद
Source: 
लोक विज्ञान एवं पर्यावरण पत्रिका, विज्ञान आपके लिये, अप्रैल-जून, 2015

महात्मा गाँधी अहिंसा के ही पुजारी नहीं थे बल्कि स्वच्छता के प्रबल समर्थक थे। बाल जीवनकाल से ही उन्‍हें माता-पिता ने स्वच्छता का पाठ पढ़ाया था। वे सदैव चाहते थे कि प्रत्येक घर, गाँव, कस्बा, शहर, स्कूल आदि में किसी भी प्रकार की गंदगी न हो और स्वच्छ वातावरण में सभी का जीवन-यापन हो। अफ्रीका से लौटने के उपरांत भारत को एक स्वच्छ देश के रूप में देखना चाहते थे।

पिकर कम वॉकिंग स्टिक आजादी के 68 साल बाद भी हम स्वच्छता के प्रति संवेदनशील नहीं हैं। सभी शहरी और ग्रामवासी घर और घर के आस-पास जमीन पर पड़े हुए कागज के टुकड़े, फूलों पंखुड़ियां एवं पत्ते, लकड़ी के छोटे-छोटे टुकड़े आदि को भी उठाने का कार्य प्रमुख रूप से सफाई कर्मचारी का समझते हैं। हमें अपनी इस मानसिकता को बदलना होगा और ये छोटे-छोटे कार्य प्रत्येक व्यक्ति को स्वयं करने होंगे तभी हम ‘‘स्वच्छ भारत’’ की कल्पना कर सकते हैं। इस कार्य में सभी महिला-पुरुष और बच्चों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने के साथ-साथ भागीदार बनना पड़ेगा, तभी सफाई अभियान को सफल बनाने में कामयाब होंगे। केवल परम्परागत उपकरण जैसे झाड़ू, फावड़ा आदि के साथ-साथ अन्य प्रकार के सफाई उपकरणों एवं आधुनिक सफाई करने वाली मशीनों की भी सहायता लेनी पड़ेगी।

2 अक्टूबर 2014 को राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी जी के जन्म दिवस से माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के स्वच्छता अभियान की जन-आंदोलन के रूप में शुरुआत की है और सभी को इसमें भागीदार बनना चाहिए। तभी यह अभियान सफल हो सकेगा। इस उद्देश्य की आंशिक पूर्ति के लिये मैंने एक ऐसे उपकरण ‘पिकर-कम-वॉकिंग स्टिक’ (टू-इन-वन) का इन्नोवेशन (नवाचार) किया है, जो मुख्य रूप से सफाई कर्मचारियों की कार्यप्रणाली में कुछ परिवर्तन ला सके और हाथ से स्पर्श किए बिना खड़े-खड़े कूड़ा-कचरा को आसानी से उठा सकें। इनके अलावा करोड़ों व्यक्ति जो प्रतिदिन सुबह-शाम टहलने जाते हैं वे भी खड़े-खड़े इस उपकरण की सहायता से सड़क पर या गली में पड़े हुए कूड़े-कचरे को उठाकर एक सुरक्षित स्थान या डस्टबिन में आसानी से डाल सकते हैं। धीरे-धीरे इस प्रकार की आदत से शहरों व कस्बों में स्वच्छता का वातावरण विकसित होगा।

समाजोपयोगी एवं बहुउद्देशीय उपकरण होने के नाते यह विकलांगों, बुजुर्गों, महिलाओं आदि को भी अनेक प्रकार के कार्यों को करने में सहायक होगा। व्हील-चेयर का इस्तेमाल करने वाले विकलांग, बुजुर्ग, महिलाएं आदि जमीन पर पड़े हुए सामान को आसानी से उठा सकते हैं। महिलाएँ ऊँचाई पर रखी गई अलमारियों आदि में रखे गए सामान जैसे-बर्तन, कपड़े, खिलौने, फाइल आदि को आसानी से उठा सकती हैं। इन सभी वर्गों के लिये ‘पिकर-कम-वॉकिंग स्टिक’ एक कारगर, सुविधाजनक एवं सुरक्षित साधन है। उपकरण का विवरण निम्न प्रकार है :

जैसा कि चित्र-A में दिखाया गया है, पिकर कम वॉकिंग स्टिक में लगभग 30 इंच की एक लंबी छड़ी होती है, जिसके ऊपरी सिरे पर एक हैंडल लगा हुआ है। इस हैंडल के नीचे एक ट्रिगर लगा हुआ है। इस ट्रिगर का संबंध छड़ी के दूसरे सिरे से होता है। छड़ी के दूसरे सिरे पर सिरे से लगभग 5 इंच ऊपर एक विशेष युक्ति के साथ एक जोड़ लगा हुआ है। इसी जोड़ पर एक चुंबक भी लगा हुआ है। इससे थोड़ा ऊपर एक हुक की तरह मुड़ी हुई आकृति का धातु का कैचर लगा हुआ है। जब हाथ में पकड़े हुए हैंडल के साथ लगे ट्रिगर को दबाते हैं तो नीचे का टुकड़ा चित्र-B में दिखाए गए अनुसार पीछे की ओर मुड़ जाता है और हुक वाला हिस्सा चुंबक वाली जगह के साथ छड़ी से सट जाता है। इस समय इन दोनों जबड़ों के बीच जो भी कुछ आएगा उसे पकड़कर आसानी से उठाया जा सकता है और फिर ट्रिगर को छोड़ देने पर जबड़े खुल जाते हैं। इस तरह जहाँ चाहो वहाँ उसे वस्तु या कूड़े के टुकड़े को डाला जा सकता है। उसके बाद पुनः आपकी वॉकिंग स्टिक तैयार हो जाती है।

इसके लाभ निम्न प्रकार हो सकते हैं :


1. ‘पिकर-कम-वॉकिंग स्टिक’ एक मजबूत पिकर यानि पकड़कर उठाने की सुविधा के साथ-साथ सुविधाजनक छड़ी/बेंत है।
2. इसके द्वारा सफाई कर्मचारी/महिला या पुरुष खड़े-खड़े जमीन पर पड़े हुए कूड़े कचरे को हाथ से स्पर्श किए बिना आसानी से उठा सकते हैं।
3. यह जमीन पर पड़े हुए कागज के टुकड़े, अखबार की रद्दी, पुराने कपड़े के टुकड़े, प्लास्टिक पाउच, गत्ते/सिगरेट की डिब्बी, पानी/सॉफ्ट ड्रिंक की खाली बोतलें, पान-मसाला/गुटकों के पाउच, लकड़ी/धातु आदि के छोटे-छोटे टुकड़ों को आसानी से उठा लेता है।
4. यह पतले से पतले कागज/फोटोग्राफिक फिल्म और अत्यंत छोटे से छोटे पदार्थ जैसे आलपिन, क्लिप, जूड़े की पिन आदि को भी आसानी से उठाता है।
5. इसकी लंबाई लगभग वॉकिंग स्टिक (छड़ी/बेंत) के बराबर है जो लगभग एक किलोग्राम वजन वाली चीजों को आसानी से पकड़कर उठा सकता है।

स्वच्छता अभियान के प्रति सभी देशवासी संवेदनशील बनें और अपने अनुभव एवं योग्यता के आधार पर प्रधानमंत्री जी के स्वप्न को साकार करने में सहायता करें। तभी ‘‘स्वच्छ भारत’’ का निर्माण हो सकेगा।

सम्पर्क


‘विज्ञानरत्न’ लक्ष्मण प्रसाद
3/6 मैरिस रोड, मैंडू कम्पाउंड, अलीगढ़-202 001, ई-मेल : lakshmanratna@yahoo.co.in


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