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सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के प्रयोग का अनुकरणीय उदाहरण : ग्रामीण ज्ञान केंद्र

Author: 
डॉ. राजेश सिंह
Source: 
विज्ञान गंगा, 2013

. बहुमाध्यम का प्रयोग कर सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल से जहाँ एक तरफ देश की सामाजिक संरचना में आमूल-चूल बदलाव आ रहा है, वहीं दूसरी ओर नित नवीन जानकारियाँ प्राप्त होने से देश की जनसंख्या का बड़ा हिस्सा जागरूक हो रहा है। फलस्वरूपप, देश के बेरोजगार अब स्वरोजगार की तरफ अग्रसर हो रहे हैं तथा ग्रामीण क्षेत्र में शहरों में पलायन की दर में कमी देखी जा रही है। आज सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी एवं जनमाध्यम की बदौलत सूचना विश्व एक वैश्विक ग्राम (ग्लोबल विलेज) बन गया है। बहुमाध्यमों ने लोगों तक पहुँच को इतना आसान बना दिया है कि विश्व स्तर पर प्रौद्योगिकी विकास तीव्र हो गया है।

ग्रामीण क्षेत्रों का भी तकनीकी विकास तेजी से होने लगा है, ग्रामीण साक्षरता की स्थिति में इजाफा हो रहा है, विद्युत आपूर्ति की स्थिति चाहे जैसी हो लेकिन संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी की सुदृढ़ पहुँच ने जबरदस्त क्रांति ला दी है। इस प्रौद्योगिकी के उपयोग से देश में अनेक ग्रामीण केंद्र संचालित हो रहे हैं जिनसे सामाजिक संरचना में उत्थान तो आ ही रहा है साथ आधुनिक तकनीकी के प्रति आयी जागरूकता ने समाज के ढाँचे को बदल दिया है यदि ग्रामीण ज्ञान केंद्रों की कार्य प्रणाली को चुस्त-दुरुस्त करके उसे और सुविधा एवं साधन संपन्न बना दिया जाए तो यह अत्यंत सार्थक एवं अनुकरणीय पहल होगी। जीवन-यापन के लिये ग्रामीण ज्ञान केंद्र परियोजना को मीडिया लैब एशिया, सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार के सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) के कोर ग्रुप के समक्ष मार्च 2006 को प्रस्तुत किया गया। परियोजना की प्रकृति शोध अभिकल्पन और विकास (आर डी एंड डी ) का अनुप्रयोग कर उत्पादन क्षमता बढ़ाने हेतु थी। परियोजना के लिये रुपये 94,05,000 की राशि मंजूर की गई।

इसका उद्देश्य सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) के उपयोग के माध्यम से कृषि पद्धतियों, सामाजिक बुनियादी ढाँचे (शिक्षा, स्वास्थ्य आदि) और उभरते ज्ञान आधारित समाज के नए आयामों के लिये स्थानीय अधिकारियों के साथ सार्वजनिक बातचीत और एकीकृत ग्रामीण विकास के लिये रोजगार सृजन और आजीविका सुरक्षा प्रदान करना है। ग्रामीण ज्ञान केंद्र के मुख्य उद्देश्य निम्नवत हैं :

1. संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करके सामाजिक संरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य इत्यादि में सुधार और स्थानीय अधिकारी एवं पंचायती अधिकारियों के सहयोग से नयी खोज की जानकारी का सही इस्तेमाल किस प्रकार से किया जाए जिससे आम आदमी के लिये रोजगार के अतिरिक्त अवसर सृजित कराये जा सकें।

2. बहु-माध्यम (मल्टी मीडिया) साधनों का प्रयोग करके निम्नलिखित विषयों पर कार्यक्रम हेतु सीडी का निर्माण करना।

3. कृषि, पशुपालन, कालीन उद्योग, स्थानीय कला एवं दस्तकारी (बांस की टोकरी, लकड़ी के खिलौने इत्यादि) उद्यान-कृषि, चुनार की मूर्तिकला, सांस्कृतिक सम्पत्ति, बनारसी साड़ी, कढ़ाई, प्राथमिक उपचार, पत्थर पर मूर्तिकला, आयुर्वेदिक एवं पारंपरिक दवाएँ, लोक-साहित्य, संगीत एवं स्थानीय परंपरा, करघा एवं बुनाई।

बहु-माध्यम (मल्टी-मीडिया) सीडी में ज्यादा से ज्यादा चित्रों एवं चल-चित्रों का प्रयोग कर कच्चा माल, स्रोत, तकनीकी, जानकारी, संभावित बाजार और विभिन्न घटकों आदि की लागत के बारे में जानकारी प्राप्त होती है।

1. निर्मित विभिन्न सीडी अनेक गाँवों में प्रदान की जाती हैं, जिनके उपयोग से स्थानीय कला का प्रचार एवं प्रसार किया जाता है और रोजगार के अतिरिक्त अवसर भी सृजित होते हैं। वेब पेज द्वारा इंटरनेट पर भी इनका प्रसार होता है। कृषि, पशुपालन, शिक्षा, स्वास्थ्य, लोक साहित्य एवं स्थानीय परंपरा जैसे विषयों पर केंद्रित होता है।

2. प्रशिक्षण कार्यक्रम, विचार-गोष्ठी, कार्यशालाएं, ग्राम विकास क्लीनिक का आयोजन किया जाता है।

3. विभिन्न ग्रामों में ग्रामीण ज्ञान केंद्रों की स्थापना की गयी है जिससे स्थानीय लोगों को सूचना समय से प्रदान की जा सके। केंद्रों को आत्मनिर्भर बनाने के लिये व्यावसायिक ढाँचे का भी निर्माण हो रहा है।

4. ग्रामीण कला, दस्तकारी, कृषि आधारित औषधि, हथकरघा उद्योग, सांस्कृतिक संपत्ति, पर्यावरण का परिरक्षण और प्रोत्साहन किया जा रहा है।

परियोजना समीक्षा और संचालन (पी आर एस जी) समूह समिति द्वारा वर्ष 2010 के बाद एकीकृत कृषि सेवा कार्यक्रम (आई ए एस पी) के ई-सागू के रूप में एक अन्य सेवा परियोजना के उपरोक्त उद्देश्यों में संलग्न किया गया है।

ई-सागू मंथन पुरस्कार 2007- भारत के विकास के लिये सर्वश्रेष्ठ ‘‘ई-सामग्री’’ विजेता है, आईटी आधारित व्यक्तिगत कृषि सलाहकार प्रणाली के लिये आईआईटी, हैदराबाद द्वारा विकसित एक सॉफ्टवेयर है। इसका उद्देश्य उच्च गुणवत्ता व्यक्तिगत (खेत विशेष) कृषि विशेषज्ञ सलाह द्वारा प्रत्येक क्षेत्र का समय-समय पर कृषि उत्पादकता में सुधार करना है।

- ग्रामीण ज्ञान केंद्र द्वारा विंध्य क्षेत्र में कार्यरत नौ केंद्र :

1. भारतीय लोक विकास एवं शोध संस्थान, बहुती, मिर्जापुर।
2. सुरभि शोध संस्थान, डगमगपुर, चुनार, मिर्जापुर।
3. कृषि विज्ञान केंद्र, दक्षिणी परिसर, काशी हिंदू विश्वविद्यालय, मिर्जापुर।
4. रामकृष्ण सेवाश्रम, रामपुर, कैलहट, मिर्जापुर।
5. फोर्ड फाउंडेशन, अन्नतपुर, मिर्जापुर।
6. सेल्फ रिलायंस इनिसिएटिव्स सोसाइटी, धरमादेवा, मिर्जापुर।
7. युवा ग्राम विकास समिति, बसनी, बाबतपुर, वाराणसी।
8. काशी योग एवं मूल्य शिक्षा संस्थान, पसहीं कला, सोनभद्र।
9. काशी योग एवं मूल्य शिक्षा संस्थान, रौप, सोनभद्र में स्थापित है।

- इन नौ केंद्रों पर संचालन हेतु लैपटॉप, कैमरा, प्रोजेक्टर, स्क्रीन, इंटरनेट कनेक्शन (मॉडल) आदि उपकरण प्रदान किया गया है।

- इन केंद्रों पर ग्रामीण ज्ञान केंद्र द्वारा कृषि, पशुपालन, शिक्षा, स्वास्थ्य, लोक साहित्य एवं स्थानीय परंपरा जैसे विषयों पर तैयार सीडी के माध्यम से प्रतिदिन ग्रामीणों को उनकी आवश्यकता का कार्यक्रम दिखाया जाता है।

- मॉडम के माध्यम से विश्व में उपलब्ध अन्य सभी नई जानकारियाँ ग्रामीणों तक पहुँचायी जाती हैं।

- ग्रामीण ज्ञान केंद्र द्वारा समय-समय पर विश्वविद्यालय के अनुभवी अनसंधानकर्ताओं द्वारा गाँवों में स्थापित केंद्रों पर विचार-गोष्ठियों का आयोजन कराया जाता है।

- ग्रामीण केंद्रों द्वारा कृषि, कढ़ाई-सिलाई, कम्प्यूटर आदि विषयों पर दस दिवसीय कार्यशालाओं का आयोजन ग्रामीणों के लिये कराया गया।

- कढ़ाई-सिलाई के नये सॉफ्टवेयर (चिप की) की जानकारी दी गई है जिससे बहुत से ग्रामीणों की सोच साकारात्मक हुई, आगे बढ़ने एवं जीविकोपार्जन के अवसर प्राप्त हुए और उनके निराशा भरे जीवन में ख़ुशियाँ भर गयीं।

- किसानों की खेती संबंधित समस्याओं (फसल में रोग, अच्छी उपज न प्राप्त होना, लाभदायक फसल-चक्र आदि) का आॅनलाइन दो दिनों के अंदर किसानों को (कृषि विशेषज्ञों तक पहुँचने के लिये बिना किसी आर्थिक व समय व्यर्थ किये हुए) विश्वविद्यालय के कृषि विशेषज्ञों द्वारा सर्वोत्तम सलाह प्रदान की जाती है।

- ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को इस कार्यक्रम के तहत पंजीकृत किया जा रहा है आज तक लगभग 1400 किसानों को पंजीकृत किया गया है तथा 9500 समस्याओं का हल प्रदान किया गया है।

- उपरोक्त के अलावा, ग्रामीण क्षेत्रों में चयनित 9 ज्ञान केंद्रों में पंजीकृत किसानों को मंडी और मौसम संबंधी जानकारी अद्यतन करना जोड़ा गया है।

वर्तमान में मौजूदा 9 केंद्रों के माध्यम से ई-सागू कार्यक्रम को लागू करने में ग्रामीण ज्ञान केंद्र लगे हुये हैं। ई-सागू सॉफ्टवेयर की स्थापना और अनुकूलन काशी हिंदू विश्वविद्यालय में किया गया है और ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को इस कार्यक्रम के तहत पंजीकृत किया जा रहा है। आज लगभग 1400 किसानों को पंजीकृत किया गया है जो ई-सागू सॉफ्टवेयर के तहत लाभान्वित हो रहे हैं। वर्तमान में इस परियोजना के अंतर्गत विंध्य, सोनभद्र, मिर्जापुर, वाराणसी जिले शामिल हैं। वास्तव में ग्रामीण ज्ञान केंद्र, द्विमार्गी संचार प्रणाली पर आधारित है।

ग्रामीण ज्ञान केंद्रों की सकारात्मक पहल से आ रही जागरूकता से ग्रामीण क्षेत्रों के शिक्षित लोगों में इसे और साधन एवं सुविधा संपन्न बनाने पर जोर देना शुरू किया है। विशेषज्ञ भी मानते हैं कि यदि इस प्रकार के ग्रामीण ज्ञान केंद्रों को उन्नत एवं आधुनिक सॉफ्टवेयरों से जोड़कर इसके प्रति लोगों को प्रशिक्षित किया जाए तो देश के सामाजिक विकास में सचमुच एक नवीन क्रांति का संचार हो सकेगा।

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