SIMILAR TOPIC WISE

Latest

पेरिस जलवायु समझौता (Paris Climate Agreement)

Author: 
श्रीशन वेंकटेश
Source: 
डाउन टू अर्थ, नवम्बर 2016

जलवायु परिवर्तन पर पिछले साल पेरिस में बनी सहमति के बाद भारत ने भी इसे मंजूरी दे दी है। यह समझौता जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने और वैश्विक तापमान में बढ़ोत्तरी को 2 डिग्री सेल्सियस के भीतर सीमित रखने से जुड़ा है। जानते हैं इस समझौते से जुड़े 10 अहम सवालों के जवाबः

कोप 21 पेरिस

1. सीओपी क्या है? (Conference of Parties - COP )


जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र के ढाँचे यानी यूएनएफसीसीसी में शामिल सदस्यों का सम्मेलन कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज (सीओपी) कहलाता है। ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को स्थिर करने और पृथ्वी को जलवायु परिवर्तन के खतरे से बचाने के लिये सन 1994 में यूएनएफसीसीसी का गठन हुआ था। वर्ष 1995 से सीओपी के सदस्य हर साल मिलते रहे हैं। साल 2015 तक यूएनएफसीसीसी में सदस्य देशों की संख्या 197 तक पहुँच चुकी है।

2. सीओपी-21 (COP 21) समझौता क्या है।


पिछले वर्ष दिसम्बर में पेरिस में हुई सीओपी की 21वीं बैठक में कार्बन उत्सर्जन में कटौती के जरिये वैश्विक तापमान में वृद्धि को 2 डिग्री सेल्सियस के अंदर सीमित रखने और 1.5 डिग्री सेल्सियस के आदर्श लक्ष्य को लेकर एक व्यापक सहमति बनी थी। इस बैठक के बाद सामने आए 18 पन्नों के दस्तावेज को सीओपी-21 समझौता या पेरिस समझौता कहा जाता है। अक्टूबर, 2016 तक 191 सदस्य देश इस समझौते पर हस्ताक्षर कर चुके हैं। यानी अधिकांश देश ग्लोबल वार्मिंग पर काबू पाने के लिये जरूरी तौर-तरीके अपनाने पर राजी हो गए हैं।

3. इस समझौते का क्या महत्त्व है।


पेरिस संधि पर शुरुआत में ही 177 सदस्यों ने हस्ताक्षर कर दिये थे। ऐसा पहली बार हुआ जब किसी अन्तरराष्ट्रीय समझौते के पहले ही दिन इतनी बड़ी संख्या में सदस्यों ने सहमति व्यक्त की। इसी तरह का एक समझौता 1997 का क्योटो प्रोटोकॉल है, जिसकी वैधता 2020 तक बढ़ाने के लिये 2012 में इसमें संशोधन किया गया था। लेकिन व्यापक सहमति के अभाव में ये संशोधन अभी तक लागू नहीं हो पाए हैं।

4. जलवायु परिवर्तन पर सहमति बनाने में इतना समय क्यों लगा?


पिछले 21 सालों से सीओपी बैठकों में विवाद का सबसे बड़ा बिंदु सदस्य देशों के बीच जलवायु परिवर्तन से निपटने की जिम्मेदारी और इसके बोझ के उचित बँटवारे का रहा है। विकसित देश भारत और चीन जैसे विकासशील देशों पर वैश्विक उत्सर्जन बढ़ाने का दोष लगाते हुए कार्बन उत्सर्जन में वृद्धि की अपनी ऐतिहासिक जिम्मेदारी से बचते रहे हैं, जबकि आज भी विकासशील और विकसित देशों के बीच प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन में बड़ा अंतर है।

5. इस समझौते में सदस्य देशों की क्या भूमिका है?


कार्बन उत्सर्जन और ग्लोबल वार्मिंग को काबू में रखने के लिये पेरिस सम्मेलन के दौरान सदस्य देशों ने अपने-अपने योगदान को लेकर प्रतिबद्धता जताई थी। हरेक देश ने स्वेच्छा से कार्बन उत्सर्जन में कटौती के अपने लक्ष्य पेश किए थे। ये लक्ष्य न तो कानूनी रूप से बाध्यकारी हैं और न ही इन्हें लागू कराने के लिये कोई व्यवस्था बनी है।

6. यह समझौता भारत को कैसे प्रभावित करेगा?


भारत जलवायु परिवर्तन के खतरों से प्रभावित होने वाले देशों में से है। साथ ही कार्बन उत्सर्जन में कटौती का असर भी भारत जैसी तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं पर सबसे अधिक पड़ेगा। साल 2030 तक भारत ने अपनी उत्सर्जन तीव्रता को 2005 के मुकाबले 33-35 फीसदी तक कम करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिये कृषि, जल संसाधन, तटीय क्षेत्रों, स्वास्थ्य और आपदा प्रबंधन के मोर्चे पर भारी निवेश की जरूरत है। पेरिस समझौते में भारत विकासशील और विकसित देशों के बीच अंतर स्थापित करने में कामयाब रहा है। यह बड़ी सफलता है।

7. यह समझौता कब अस्तित्व में आएगा?


पेरिस समझौते के लागू होने के लिये 2020 को आधार वर्ष माना गया है। लेकिन सदस्य देशों की सहमति बन जाए तो यह पहले भी लागू हो सकता है। यूरोपीय संघ ने 5 अक्टूबर 2016 को पेरिस समझौते को मंजूरी दे दी है। अब यह समझौता 4 नवम्बर, 2016 को औपचारिक रूप से अस्तित्व में आ जाएगा।

8. क्या भारत ने समझौते की पुष्टि की है?


हाँ, भारत ने 2 अक्टूबर, 2016 को समझौते पर हस्ताक्षर कर दिये हैं। अमेरिका और चीन ने भी अगस्त में समझौते को स्वीकार कर लिया था।

9. क्या यह समझौता जलवायु परिवर्तन से निपटने में सक्षम है?


पेरिस समझौता सही दिशा में एक बड़ी पहल है। हालाँकि, यह समझौता बहुत सीमित और देरी से उठाया गया कदम है। इस साल सितम्बर में कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर पूर्व औद्योगिक स्तर की तुलना में 30 प्रतिशत बढ़ चुका है। इस समझौते की एक प्रमुख आलोचना है कि यह जलवायु परिवर्तन के पहले से दिखाई पड़ रहे प्रभावों को नजरअंदाज करते हुए अब भी इसे भविष्य के खतरे के तौर पर देखता है। आलोचकों ने इस मुद्दे को भी उठाया है कि यह समझौता कार्बन उत्सर्जन रोकने के उपायों पर तो जोर देता है लेकिन इन उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करने की व्यवस्था सुनिश्चित नहीं करता।

10. सीओपी की अगली बैठक में बातचीत का मुख्य मुद्दा क्या होगा?


संभावना है कि मोरक्कों में नवम्बर में होने वाले सीओपी-22 में जलवायु परिवर्तन का सामना कर रहे देशों के लिये वित्त जुटाने पर विचार-विमर्श होगा। आमतौर पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को रोकने के लिये फंड उपलब्ध रहा है जबकि जलवायु परिवर्तन के हिसाब से ढलने के लिये पर्याप्त फंड उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। सीओपी की अगली बैठक में खाद्य सुरक्षा, पलायन, स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने और वित्त पहलुओं पर चर्चा होने की संभावना है।


TAGS

About conference of parties on climate change in Hindi, About unfccc cop 22 in Hindi, About conference of parties 2015 in Hindi, Information about conference of parties 2016 in Hindi, About united nations climate change conference 2016 in Hindi, Paris climate agreement summary in Hindi, Paris agreement on climate change pdf in Hindi, Information about cop21 paris agreement in Hindi, article on Paris climate summit 2016 in Hindi, Essay on un climate change conference 2016 in Hindi, About paris climate change conference 2016 in Hindi,


Very helpfull

Very helpfull

Thanx really so good. sir is

Thanx really so good.
sir is prakaar ki jankari hamesha post karte rahiye.

Really very helpful Thanks

Really very helpful
Thanks alot.

gs

These blogs are very helpful for exam purpose. Thanks 

Post new comment

The content of this field is kept private and will not be shown publicly.
  • Web page addresses and e-mail addresses turn into links automatically.
  • Allowed HTML tags: <a> <em> <strong> <cite> <code> <ul> <ol> <li> <dl> <dt> <dd>
  • Lines and paragraphs break automatically.

More information about formatting options

CAPTCHA
यह सवाल इस परीक्षण के लिए है कि क्या आप एक इंसान हैं या मशीनी स्वचालित स्पैम प्रस्तुतियाँ डालने वाली चीज
इस सरल गणितीय समस्या का समाधान करें. जैसे- उदाहरण 1+ 3= 4 और अपना पोस्ट करें
1 + 1 =
Solve this simple math problem and enter the result. E.g. for 1+3, enter 4.