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नर्मदा कार्ययोजना: विशेषज्ञ राय हेतु 08 को सेमिनार


दिनांक: 08 मई, 2017
स्थान: भोपाल, मध्य प्रदेश
आयोजक: मध्य प्रदेश शासन

सेमिनार का विषय: नदी जल और पर्यावरण संरक्षण

मध्य प्रदेश शासन के योजना, आर्थिकी एवं सांख्यिकी विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री दीपक खाण्डेकर से प्राप्त आमंत्रण पत्रानुसार, शासन 08 मई को भोपाल में नदी जल और पर्यावरण संरक्षण विषय पर एक सेमिनार आयोजित कर रहा है। सेमिनार का उद्देश्य, नर्मदा नदी संरक्षण एवं संवर्द्धन कार्यों को अधिक प्रभावी बनाने हेतु विशेषज्ञों के अनुभवों का लाभ लेना है। इसी उद्देश्य से सेमिनार में चर्चा हेतु विषयवार पाँच समूहों का गठन किया गया है:

प्रथम समूह - मध्य प्रदेश में नदियों और झीलों के संरक्षण और पुनर्स्थापित की स्थिति।

द्वितीय समूह - नर्मदा सेवा मिशन के तहत नर्मदा नदी संरक्षण के लिये चिन्हित वर्तमान चुनौतियाँ, मुद्दे तथा नदी, जल ढाँचे, जैव विविधता व पर्यावरण संरक्षण संबंधित गतिविधियों पर आधारित कार्ययोजना।

तृतीय समूह - नदी निर्भर संसाधनों का उपयोग की वर्तमान स्थिति व भावी चुनौतियाँ: मुद्दे, रणनीति तथा कार्य योजना।

चतुर्थ समूह - नदी जल, पर्यावरण सुरक्षा व खाद्य सुरक्षा: वर्तमान स्थिति, संभावित चुनौतियाँ, रणनीति व कार्य योजना।

पंचम समूह - मध्य प्रदेश में नदी, जल, पर्यावरण सुरक्षा व पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करने वाले कदमों में संस्थागत ढाँचों की भूमिका।

यात्रा


गौरतलब है कि मध्य प्रदेश शासन ने गत 11 दिसम्बर, 2017 को अमरकंटक से ‘नमामि देवि नर्मदे’ नर्मदा सेवा यात्रा का शुभारंभ किया गया था। यह यात्रा विशेष रूप से मिट्टी-जल प्रदूषण की रोकथाम, हरित क्षेत्र में वृद्धि तथा स्वच्छता को केन्द्र बिंदु बनाकर शुरू की गई थी। तीन मई तक दर्ज जानकारी के मुताबिक यह यात्रा अभी तक 16 ज़िलों के 51 विकासखण्डों की 615 ग्राम पंचायतों के 762 गाँवों से होकर गुजर चुकी है। करीब 23 लाख, 40 हज़ार लोग इस यात्रा में भागीदार हुए। यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री की उपस्थिति में अब तक 47 जनसंवादों का आयोजन किया गया। मुख्य यात्रा के साथ-साथ 1749 उप-यात्रायें भी चलीं। 76.533 नर्मदा सेवक और 712 नर्मदा सेवा समितियाँ इस यात्रा का अह्म हिस्सा बने। सांकेतिक तौर पर करीब 37,404 पौधे लगाये गये। यह यात्रा 15 मई, 2017 को सम्पन्न हो जायेगी।

घोषणायें


मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने एक संबोधन में कहा कि यह यात्रा का समापन नहीं, एक शुरुआत होगा। इसीलिए यात्रा सम्पन्न होने से पहले ही हम आगे की कार्ययोजना तैयार कर रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने नर्मदा किनारे जैविक खेती, नर्मदा किनारे शासकीय व निजी ज़मीनों पर वृक्षारोपण, अंतिम संस्कार की नई व्यवस्था, नदी में सीवेज का पानी न आये; इस हेतु संयंत्र, अमरंकटक नगर में मल शोधन संयंत्र हेतु 15.50 करोड़ रुपये की स्वीकृति तथा प्रत्येक गाँव में नर्मदा सेवा समिति के गठन जैसी आधिकारिक घोषणायें की हैं। वर्षाऋतु आने पर 02 जुलाई, 2017 को नर्मदा किनारे के इलाकों में बड़ी संख्या में वृक्षारोपण का आयोजन भी किया गया है। इस मौके पर पूरे भारत से नदी प्रेमियों को आमंत्रित किया जा रहा है।

अपेक्षायें


अच्छी बात है कि नर्मदा को जीवित इकाई के रूप में वैधानिक अधिकार प्रदान करने के शासकीय संकल्प को मंजूरी देने में कैबिनेट ने भी देरी नहीं लगाई। काश! मुख्यमंत्री महोदय ने जीवित नर्मदा के गले की फांस बनने जा रहे प्रस्तावित पाँच बड़े बाँधों पर रोक की घोषणा की होती। पूरी नर्मदा नदी घाटी में प्रस्तावित 30 बड़े, 135 मध्यम और तीन हज़ार लघु बाँधों के प्रस्ताव को तब तक मंजूरी नहीं देने की घोषणा की होती, जब तक नर्मदा यात्रा हेतु बनाई विशेषज्ञ समिति से इसकी मंजूरी नहीं ले ली जाती।

गौर करने की बात है कि नर्मदा में कम होता पानी, प्रवाह की घटती रफ्तार और मार्ग में बढ़ती बाधायें नर्मदा के लिये आज बड़ी चुनौतियाँ हैं। नर्मदा और इसे समृद्ध करने वाली सहायक नदियों, झीलों, तालाबों, वनक्षेत्रों की भूमि पर अवैध कब्जा, निर्माण, खनन और उद्योग अन्य चुनौतियाँ है। अच्छा होता, अगर मुख्यमंत्री इन विषयों पर ठोस संकल्प दिखाकर माँ नर्मदा के प्रति अपनी ईमानदारी दिखाते।

हम एक तरफ मल शोधन संयंत्रों की संख्या बढ़ायें; मलीन जल को शोधन के पश्चात नदी से दूर अन्यत्र ले जाने के लिये तकनीक व बजट बढ़ाते जायें और दूसरी ओर, सीवेज पाइप लाइनों का संजाल बढ़ाते जायें। क्या यह उचित है? अभी हमसे शहरी मल संभाले नहीं संभल रहा; दूसरी ओर हम घर-घर शौचालयों के जरिए ग्रामीण मल का एक ऐसा ढाँचागत तंत्र खड़ा कर रहे हैं, जो आगे चलकर गाँव-गाँव सीवेज पाइप और मल शोधन संयंत्र की मांग करने लाने वाला साबित होगा। इसके साथ ही गाँव-गाँव पानी की पाइपलाइन, जलापूर्ति के निजीकरण और पानी-सीवेज के बिल लाने वाला और गाँव के गरीब की जेब से धन उगाहने वाला भी। क्या यह अच्छा होगा? बंद चारदीवारी वाली नई आवासीय व व्यावसायिक परियोजनायें अच्छा होगा ?

अच्छा हो कि सेमिनार ऐसे सवालों के जवाब भी तलाशें। बंद चारदीवारी वाली नई आवासीय व व्यावसायिक परियोजनाओं को यह क्यों नहीं कहा जा सकता कि वे अपने मल को अपने परिसर के भीतर ही निष्पादित करने की व्यवस्था बनायें। पुरानी त्रिकुण्डीय प्रणाली के जरिए मल शोधन की व्यवस्था बेहतर है अथवा सीवेज पाइपों के जरिए मल को ढोकर नदी तक ले जाना और फिर संयंत्रों के जरिए निष्पादित करना ? ‘टट्टी पर मिट्टी’ का पुराना तौर-तरीका मल निष्पादन का बेहतर तरीका है अथवा ‘ओडीएफ’ की नई हवा? क्या भारत के हर गाँव... हर घर को शौचालय की वाकई ज़रूरत है? ऐसे तमाम पहलुओं के नफे-नुक़सान पर चर्चा क्यों नहीं होनी चाहिए?

विरोधाभास


आमंत्रण पत्र भेजते हुए मध्य प्रदेश शासन क अपर मुख्य सचिव श्री दीपक खाण्डेकर ने नर्मदा नदी को एक ओर आस्था और विकास का प्रतीक बताया है, तो दूसरी ओर इसे मध्य प्रदेश की 23 लाख हेक्टेयर से अधिक रकबे की सिंचाई, करोड़ो लोगों के पेयजल का स्रोत तथा 2400 मेगावाट बिजली की उत्पादक के रूप में जिक्र किया है। अच्छा होता कि नर्मदा कार्ययोजना के निर्माता, नर्मदा को महज एक संसाधन अथवा वस्तु समझने की बजाय, एक ऐसी जीवित बूढ़ी माँ समझें, आज जिसका दोहन करने की नहीं, पालन करने की जरूरत है। क्या वे समझेंगे ??

संपर्क


वेबसाइट: namamidevinarmade.mp.gov.in पर यात्रा के संबंध में काफी जानकारी उपलब्ध है। अधिक जानकारी चाहें, तो पाठक निम्नलिखित पते पर भी संपर्क कर सकते हैं:

मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद,
राज्य कार्यालय, भोपाल
(योजना, आर्थिकी एवं सांख्यिकी विभाग, मध्य प्रदेश शासन)
फोन: 0755-2660235/2660203

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