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उत्तराखण्ड में बदलाव और विकास के सपने को साकार करने की कोशिश

Author: 
त्रिवेंद्र सिंह रावत
Source: 
आउटलुक, 01 जनवरी, 2018

उत्तराखण्ड राज्य की स्थापना के 17 वर्षों में प्रदेश ने बहुत सी मंजिलें तय की हैं। आज राज्य की सकल घरेलू उत्पाद दर, राष्ट्रीय दर के बराबर है और राज्य की प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत आय की डेढ़ गुनी से भी अधिक है। केन्द्र सरकार की आर्थिक सलाहकार परिषद और नीति आयोग द्वारा तैयार किये गये सूचकांक के अनुसार सामाजिक तरक्की के मामले में उत्तराखण्ड, देश का चौथा शीर्ष राज्य है। लेकिन यह कहने में संकोच नहीं होना चाहिए कि अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है।

एक दिवसीय संगोष्ठी वर्तमान में उत्तराखण्ड का नेतृत्व त्रिवेंद्र सिंह रावत के कुशल हाथों में है जिन्होंने उत्तराखण्ड के आठवें मुख्यमंत्री का पदभार सम्भालने के साथ ही बिना समय गँवाए राज्य को समृद्धि और विकास के नये स्तरों पर ले जाने की योजना और रणनीति बनाना प्रारम्भ कर दिया।

मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लिये अभी अधिक समय नहीं गुजरा है लेकिन कई महत्त्वपूर्ण निर्णय लिये गये हैं जो उत्तराखण्ड को अधिक समृद्ध बनाने में बड़ा योगदान देंगे। रावत कहते हैं : “इस अल्प अवधि में मेरी सरकार ने प्रदेश की समस्याओं को पहचान कर उनके निराकरण हेतु एक ठोस रोडमैप तैयार किया है।”

प्रदेश के चौतरफा विकास के लिये रावत सरकार ने उच्च लक्ष्य निर्धारित किये हैं जिसकी पूर्ति के लिये ‘TASK’ अभियान चलाया गया है जो चार प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करेगा : पर्यटन को बढ़ावा देना कृषि क्षेत्र में सुधार करना, कौशल विकास को प्राथमिकता देना और उत्तराखण्ड में एक ज्ञान आधारित सोसाइटी के निर्माण के लिये कार्य करना। रावत सरकार का आम आदमी केन्द्रित दृष्टिकोण साफ दिखाई दे रहा है और वर्तमान मुख्यमंत्री के लगभग 7 महीने के कार्यकाल के दौरान लिये गये प्रमुख नीतिगत फैसलों ने बेहतर दिनों की आशा की भावना जागृत कर दी है।

पर्यटन को बढ़ावा


उत्तराखण्ड के समग्र विकास में पर्यटन क्षेत्र पर आधारित गतिविधियों की महत्त्वपूर्ण भूमिका है। इसीलिये सरकार ने ‘13 डिस्ट्रिक्ट 13 न्यू डेस्टिनेशन योजना’ के तहत सभी 13 जनपदों में 13 नये पर्यटन स्थल विकसित करने का निर्णय लिया है।

इस बाबत मुख्यमंत्री रावत का कहना है: “इस वर्ष चारधाम यात्रा में 23 लाख से भी अधिक तीर्थयात्रियों ने चारधाम के दर्शन किये। यह सम्भवतः प्रथम अवसर है जब राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री दो-दो बार एक ही सत्र में श्री बद्रीनाथ और श्री केदारनाथ धाम आये। भारत के शीर्ष नेतृत्व द्वारा उत्तराखण्ड के प्रति दर्शाये गये प्रेम से प्रत्येक उत्तराखण्डवासी अभिभूत है। इससे देश-दुनिया में सुरक्षित और सुगम उत्तराखण्ड का सन्देश भी गया है। श्री केदारनाथ में प्रकृति और पर्यावरण के अनुकूल भव्य श्री केदारपुरी का पुनर्निर्माण कार्य किया जायेगा। भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने श्री केदारनाथ धाम में श्री केदारपुरी के पुनर्निर्माण से सम्बन्धित पाँच परियोजनाओं का शिलान्यास किया है, जिनमें श्री केदार मन्दिर परिसर पहुँचने के मुख्य मार्ग के चौड़ीकरण और सौन्दर्यीकरण कार्य, सरस्वती और मन्दाकिनी नदियों के बाढ़ सुरक्षा और घाट निर्माण कार्य, तीर्थ पुरोहितों के लिये आवासीय भवनों के निर्माण कार्य तथा आदि शंकराचार्य के समाधि स्थल के पुनर्निर्माण कार्य शामिल है।”

पर्यटन को बढ़ावा देने के लिये आवश्यक है कि मूलभूत सुविधाओं को विकसित किया जाये। पिछले कुछ माह में उत्तराखण्ड सरकार ने बिजली, पानी, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा जैसे क्षेत्रों में ठोस कदम उठाये हैं। दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के अन्तर्गत प्रदेश में 99.60 प्रतिशत ग्राम विद्युतीकृत किये जा चुके हैं, शेष 43 गाँवों का विद्युतीकरण शीघ्र कर लिया जायेगा। सरकार ने लक्ष्य निर्धारित किया है कि वर्ष 2019 तक बिजली से वंचित हर परिवार को ग्रिड या ऑफ ग्रिड बिजली उपलब्ध करा दें। गत 7 माह में 28 दूरस्थ गाँव विद्युतीकृत किये गये हैं। व्यासी जल विद्युत परियोजना (120MW) दिसम्बर, 2018 तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। 05 मेगावाट तक की सौर ऊर्जा परियोजनाओं को राज्य के स्थायी निवासियों हेतु आरक्षित करने का निर्णय लिया गया है। उत्तराखण्ड सरकार और आईआईपी के बीच पिरूल से तारपीन ऑयल और बायोफ्यूल तैयार करने का समझौता किया गया है। बिजली की बचत के लिये सभी सरकारी भवनों में LED बल्बों का उपयोग अनिवार्य किया गया है।

सरकार ने नैनीझील के संरक्षण के प्रयास भी शुरू कर दिये हैं। देहरादून की ऋषिपर्णा यानि रिस्पना, बिंदाल नदी और कुमाऊँ क्षेत्र की महत्त्वपूर्ण कोसी नदी को पुनर्जीवन करने का लक्ष्य चिन्हित किया गया है। प्रत्येक जनपद में कम-से-कम एक नदी या जलस्रोत के पुनर्जीवीकरण का अभियान चलाने का निर्णय लिया है।

सड़कें और सम्पर्क मार्ग किसी भी देश-प्रदेश के लिये जीवन रेखा का कार्य करती है। उत्तराखण्ड के सर्वांगीण विकास के लिये एक मजबूत सड़क-रेल-हवाई नेटवर्क की स्थापना को सरकार शीर्ष प्राथमिकता दे रही है। चारधाम आलवेदर रोड के लिये भूमि अधिग्रहण, वन भूमि स्थानान्तरण और मुआवजा वितरण कार्यशीघ्र पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे लाइन एवं रुड़की-देवबंद रेलवे लाइन के लिये त्वरित गति से भूमि अधिग्रहण प्रगति पर है। सम्पर्क मार्ग को सुदृढ़ बनाने के लिये हरिद्वार, रुद्रपुर, देहरादून और हल्द्वानी में बाईपास/रिंग रोड का निर्माण प्रस्तावित है। देहरादून-दिल्ली मार्ग पर ‘डाट काली’ स्थान पर टू-लेन टनल का निर्माण कार्य मई 2019 तक पूर्ण करने एवं देहरादून में 2 रेलवे ओवर ब्रिज दिसम्बर, 2018 तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। वर्ष 2022 तक ग्रामीण सड़क सम्पर्क मार्ग से वंचित गाँवों को सड़क से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। देहरादून-पन्तनगर के बीच ‘उड़ान योजना’ के अन्तर्गत हवाई सेवा शीघ्र शुरू की जायेगी। इसके साथ ही देहरादून, हरिद्वार, ऋषीकेश क्षेत्रान्तर्गत मेट्रो रेल का निर्माण किया जाना प्रस्तावित है। गढ़वाल व कुमाऊँ को जोड़ने वाली महत्त्वपूर्ण कंडी रोड के निर्माण पर भी कार्यवाही की जा रही है।

कृषि क्षेत्र में सुधार


कौशल विकास पर जोर प्रदेश में किसानों की आय को वर्ष 2022 तक दो गुना करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिये एक विस्तृत कार्ययोजना भी तैयार कर ली गई है। लघु एवं सीमान्त कृषकों को एक लाख तक का कृषि ऋण मात्र 2 प्रतिशत ब्याज दर पर दिये जाने हेतु ‘दीनदयाल उपाध्याय किसान कल्याण योजना’ लागू की गई है। नर्सरी एक्ट 2017 लागू करने का निर्णय लिया गया है। उत्तराखण्ड को ऑर्गेनिक-हर्बल स्टेट बनाने की कार्ययोजना भी तैयार की गई है। पर्वतीय क्षेत्रों में छोटी एवं बिखरी जोतों की दृष्टिगत चकबन्दी का निर्णय लिया गया है, जिससे किसानों को लाभ होगा। डी.बी.टी. के माध्यम से उर्वरक पर सब्सिडी सीधे कृषकों के खाते में ट्रांसफर की जायेगी। 2.50 लाख से कम वार्षिक आय वाले ऐसे परिवार, जो उज्जवला योजना से लाभान्वित नहीं हो पाये हैं, को निःशुल्क गैस कनेक्शन वितरित करने का निर्णय लिया गया है।

कौशल विकास पर जोर


उत्तराखण्ड सरकार ने आगामी 05 वर्षों में 01 लाख से अधिक युवाओं को ‘Skilled’ बनाने का लक्ष्य रखा है। इसके साथ ही राज्य के कुमाऊँ और गढ़वाल मण्डलों में दो आवासीय कौशल विकास केन्द्र स्थापित करने की कार्यवाही की जा रही है। राज्य के आई.टी.आई. एवं पॉलीटेक्निक में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को औद्योगिक ट्रेनिंग की व्यवस्था शुरू की गई है। उद्योगों की आवश्यकता के अनुसार आई.टी.आई. व पॉलीटेक्निक में नये ट्रेड्स के प्रशिक्षण की व्यवस्था भी की जा रही है।

औद्योगिक विकास को गति प्रदान कर प्रदेश के युवाओं के लिये रोजगार के नये अवसर सृजित करना सरकार की प्राथमिकता है। सरकार ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग के लिये स्टार्टअप नीति 2017 लागू कर दी है। इस नीति के तहत राज्य में विभिन्न स्थानों को वर्गीकृत किया है और इन क्षेत्रों में उद्यमों की स्थापना पर भी प्रोत्साहन की घोषणा की है। औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिये एक विशेष आर्थिक क्षेत्र बनाने का निर्णय भी लिया गया है।

ज्ञान आधारित सोसायटी का निर्माण सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के अतिरिक्त मुख्यमंत्री राज्य में पूंजीगत निवेश पर नजर रख रहे हैं। इसके लिये एक ‘निवेशक अनुकूल नीति’ बनाने पर कार्य किया जा रहा है। निवेश को बढ़ावा देने के लिये 15 लाख रुपये से 40 लाख रुपये तक की सहायता प्रदान की जाएगी। इसके अतिरिक्त बिजली और अन्य सरकारी शुल्क पर छूट भी दी जाएगी। इस वर्ष लगभग 1400 करोड़ रुपये के औद्योगिक निवेश प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई है जिससे लगभग 5000 युवाओं को रोजगार मिलेगा।

ज्ञान आधारित सोसाइटी का निर्माण


सरकार स्कूली और उच्च शिक्षा में गुणात्मक सुधार के लिये कदम उठा रही है। 10 से कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों को एकीकृत करने का निर्णय लिया गया है। सभी विद्यालयों में एनसीईआरटी की पुस्तकें लागू करने का निर्णय लिया गया है। वर्ष 2022 तक प्रत्येक जनपद में शत-प्रतिशत साक्षरता का लक्ष्य हासिल किया जाना है।

साथ ही उच्च शिक्षा के चेहरे को बदलने के लिये राज्य सरकार तेजी से अग्रसर है। गुणवत्ता शिक्षा अभियान के अन्तर्गत सहायक प्रोफेसरों के 877 रिक्त पदों पर चयन की माँग भेजकर उत्तराखण्ड लोक सेवा आयोग के माध्यम से भर्ती की प्रक्रिया को पूरा किया जा रहा है। भविष्य के लिये सरकार ने उच्च शिक्षा चयन बोर्ड की स्थापना का निर्णय लिया है। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि राज्य में सरकारी डिग्री महाविद्यालयों में शिक्षकों के पद खाली नहीं रहें। हाल ही में राज्य में लगभग एक तिहाई डिग्री कॉलेजों में खाली पड़े प्रधानाचार्यों के पदों को पदोन्नति से भरा गया है। कॉलेजों एवं विश्वविद्यालयों का शैक्षिक कैलेण्डर लागू किया गया है। सभी डिग्री कॉलेजों में प्राचार्यों की तैनाती की गई है। जहाँ सहायक प्रवक्ताओं की कमी है वहाँ प्राचार्यों को गेस्ट फैकल्टी की सेवा लेने का अधिकार दिया गया है। सभी सरकारी विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों में करियर ट्रेकिंग प्रणाली को लागू करने का निर्णय लिया गया है। इससे युवाओं की वास्तविक संख्या और राज्य में रोजगार की आवश्यकता वाले युवाओं की संख्या जानने में मदद मिलेगी।

मुद्रा प्रोत्साहन अभियान ई-शिक्षा और ई-संसाधन सरकार की प्राथमिकता में हैं। सभी महाविद्यालयों में ई-लाइब्रेरी की व्यवस्था की जा रही है और डिग्री कॉलेजों को इससे जोड़ने की पहल की गई है। इसका उद्देश्य दूर-दराज के महाविद्यालयों के छात्रों को उत्कृष्ट किताबें और पत्रिकाएँ प्रदान करना है।

यह भी निर्णय लिया गया है कि प्रत्येक वर्ष 100 विद्यार्थियों को रिसर्च स्कॉलरशिप प्रदान की जाएगी। NIFT के लिये देहरादून में भूमि चयनित कर ली गई है। सीपैट की कक्षाएँ अगले वर्ष जनवरी से संचालित होने लगेंगी।

एक अन्य प्रमुख कदम में सरकार ने छह नर्सिंग कॉलेजों को शुरू करने के अलावा रुद्रपुर, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, कोटद्वार और भगवानपुर में मेडिकल कॉलेजों को तुरन्त स्थापित करने का निर्णय लिया है। यह मेडिकल और नर्सिंग कॉलेज राज्य में चिकित्सा और चिकित्सा सेवाओं को बेहतर बनाने में बड़ा योगदान देंगे।

स्वामी विवेकानन्द ने कहा था, “उठो, जागो और तब तक रुको नहीं, जब तक लक्ष्य हासिल न हो जाये।” मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत स्वामी विवेकानंद के इस कथन को पथ प्रदर्शक के रूप में लेते हैं। उनका संकल्प है कि उत्तराखण्ड प्रदेश और भारत वर्ष के समग्र विकास और समृद्धि हेतु अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान देंगे। वह कहते हैं, “हमें मिलकर उत्तराखण्ड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाना है। यही शहीद राज्य आन्दोलनकारियों के प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।”

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