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इस मानसून, अब हमारी बारी

Author: 
अविनाश श्रीवास्तव
Source: 
नवोत्थान, जुलाई, 2016

पेड़ों, पहाड़ों, नदियों की आराधना करने वाले हम प्रकृति से दूर हो गये हैं। प्राकृतिक स्रोतों का हर पल आभार मानना हमने छोड़ दिया है। जीवनशैली इतनी कैसी बदल सकती है कि जीवन की ही अवहेलना होने लगे? बहुत समय हो गया प्रकृति से लेते-लेते, अब एहसान चुकाने की बारी हमारी है।

मानसून मानसून में इस धरा का हर कोना, पेड़-पौधे, जीव गर्मी की तपन सहने के बाद राहत के लिये खुद को तर कर लेते हैं। नई कोपलें खिलती हैं, नवजीवन का प्रारम्भ होता है। हर एक नई शुरुआत करता है। तो हम क्यों नहीं? इस मानसून प्रकृति को लौटाने की शुरुआत कीजिये। कम-से-कम एक पौधा जरूर लगाइये...। और भी बहुत कुछ है, जो आप कर सकते हैं।

हर रोज आप ग्लोबल वॉर्मिंग, मौसम में बदलाव, भूजल स्तर में कमी, ऊर्जा के घटते स्रोतों और कार्बन फुटप्रिंट्स के बारे में बातें सुनते होंगे। कैसी बलायें हैं ये? सही सोचते होंगे। तो एक वाक्य में इनके बारे में यही कहा जा सकता है कि आपके बच्चों की दुनिया को बहुत मुश्किल में डालने वाली बलाओं के हैं ये नाम।

और ये क्यों सामने आईं हैं, यह जानने के लिये बस इतना समझ लीजिये कि हमारी ही लापरवाहियों का नतीजा है। दरअसल, हमने ही अपनी जीवनशैली को प्रकृति से इतना दूर कर लिया है कि प्रकृति का साथ छूट जाना स्वाभाविक है।

अब सोचना यह है कि हम क्या कर सकते हैं? तो जवाब है बहुत कुछ बहुत कुछ ऐसा जिसकी शुरुआत आपके घर से होगी, आपके प्रयासों से होगी। आपको अपनी जीवनशैली में कुछ परिवर्तन करने होंगे, कुछ संसाधनों का उपयोग अलग अन्दाज में करना होगा, पारम्परिक साधनों की ओर मुड़ना होगा। प्रदूषण रहित वातावरण के निर्माण में सहयोग करना और प्राकृतिक संसाधनों का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करने के अलावा ऐसे प्रयास भी करने होंगे जिससे पर्यावरण को कम-से-कम नुकसान पहुँचे। यह समय की जरूरत भी है और प्रकृति का सन्देश भी। कुछ सुझाव आपके लिये, जो प्रकृति ने सुझाये तो पहले से हैं, लेकिन हमने अपनाये नहीं। इन प्रयासों की शुरुआत के लिये मानसून से बेहतर क्या होगा-

एक पौधा, विश्वास का


गर्मी की तपिश से धरती की छाती तक गर्म है, इसलिये पेड़-पौधे भी कम हरे, कम खिले नजर आते हैं। उन्हें पानी की जरूरत ज्यादा होती हैं। लेकिन मानसून की पहली बारिश के साथ सब तर हो जाते हैं। राहत की सौंधी खुशबू हर कोने में महकती हैं। ऐसे राहत भरे और तर वक्त में अगर आप एक पौधा लगा दें, तो प्रकृति की बेहतरी में ये एक बहुत बड़ा कदम होगा। मानसून के साथ जैसे-जैसे मौसम जवान होगा आपका लगाया पेड़ भी फलता और बढ़ता रहेगा। बहुत राहत मिलती है अपने हाथों से लगाये पौधों को बड़ा और हरा-भरा होते देख, विश्वास कीजिये। प्रकृति में आपके इसी विश्वास का प्रतीक बनेगा आपका लगाया एक पौधा।

ऊर्जा की बचत


बारिश के मौसम में हल्की ठंडक रहती है, इसलिये फैन, एसी की उतनी जरूरत नहीं पड़ती। इनकी जगह आप खिड़की-दरवाजे खोल लें तो बड़ी बचत है। कोशिश करें ज्यादा नहीं हफ्ते में कम-से-कम एक दिन बिजली रहित बिताने की। अगर आस-पास के लोग, परिवार भी इसमें मदद करें, तो आप ‘अर्थ ऑवर’ की तर्ज पर ‘अर्थ डे’ मना सकते हैं।

साथ चलना अच्छा है…


आप महीने में कितने बार बाजार जाते हैं? कैसे जाते हैं और किसके साथ? यह प्रश्न इसलिये महत्त्वपूर्ण है क्योंकि आप अकेले जाकर जितना ईंधन, समय और पैसा खर्च करते हैं, वह आप अपने परिवार या दोस्तों के साथ जाकर भी खर्च कर सकते हैं। बारिश का मौसम है इसलिये गाड़ी पूल करना भी अच्छा विकल्प साबित हो सकता है। इस तरह आप अपना और अपने परिवार का कार्बन फुटप्रिंट भी कम करेंगे। कार्बन फुटप्रिंट को शून्य करना हो तो घर की गैस, बिजली और पेट्रोल/डीजल की खपत का हिसाब निकालिये और जितना कार्बन आपके परिवार की वजह से उत्सर्जित होकर पर्यावरण को नुकसान पहुँचा रहा हो, उसके हिसाब से पेड़ लगाइये। फुटप्रिंट कैसे मापें, इसके टूल आपको इंटरनेट पर मिल जायेंगे।

सब ऑनलाइन है…


आजकल बैंकिंग सहित तकरीबन सभी जरूरी सेवाएँ ऑनलाइन हो गई हैं जैसे बिजली का बिल, रेल टिकट बुकिंग, बीमा प्रीमियम का भुगतान और भी बहुत कुछ। इन आधुनिक सेवाओं का उपयोग कर आप समय के साथ काफी कागज भी बचायेंगे, जो असंख्य पेड़ों की बलि चढ़ाकर बनता है। ऑनलाइन सेवाओं का उपयोग कर यदि हर घर/परिवार एक पेड़ को भी काटने से बचाता है, तो प्रकृति के लिये इतना योगदान भी काफी होगा।

प्रधानमंत्री ने भी की है अपील- पेड़ लगाइये, ताकि गर्व हो!


पाँच जून को ‘विश्व पर्यावरण दिवस’ के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के प्रत्येक नागरिक से अपने आस-पास एक पौधा लगाने की अपील की। इसकी शुरुआत भी उन्होंने खुद ही की, प्रधानमंत्री आवास में पौधा लगाकर। इस मौके पर उन्होंने कहा था- मैं देशवासियों से अपील करता हूँ कि आप अपने घर में लगाये पेड़ों के लिये गर्व करें। जैसे आपको घर, कार, बंगला होने का गर्व होता है वैसे ही आप के पास पेड़ है इसका भी गर्व होना चाहिए। पिछले दिनों जब मोदी उज्जैन सिंहस्थ में आयोजित वैचारिक कुम्भ में आये थे, तो वहाँ भी उन्होंने यही अपील की थी और बताया था कि एक पौधा किस तरह पर्यावरण और खासकर नदियों के लिये जरूरी है। मानसून के साथ आप इस काम में सरकार की मदद कर सकते हैं।

 

इन्हें भी अपनायें

1.

वाहन पूल करने के विचार को महत्त्व दें। साथ ही दूसरों को भी प्रोत्साहित करें।

2.

ऊर्जा, ईंधन व पानी की बचत पर विशेष ध्यान दें। यह आने वाले कल के लिये जरूरी है।

3.

गिफ्ट में पेड़-पौधों को देने का विकल्प आजमायें

4.

हफ्ते में एक दिन कुछ घंटों के लिये घर के सभी बिजली उपकरणों को बन्द करें। साथ ही अन्य को भी इस विचार में सहभागी बनायें।

5.

आधुनिक संसाधनों की जगह प्राकृतिक और पारम्परिक संसाधनों का प्रयोग करें।

 

ग्रीन इंडिया की दिशा में काम कर रही सरकार


1. पर्यावरण मंत्रालय ने पिछले साल प्लांटेशन कैम्पेन से सचिन तेंदुलकर, विराट कोहली, ओलम्पिक मेडलिस्ट सुशील कुमार जैसे बड़े खिलाड़ियों को जोड़ा था, ताकि अभियान जनआन्दोलन की शक्ल ले सके।

2. केन्द्र ने वन-उद्यान योजना के तहत सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों और निगमों को कहा है कि वह अपने आस-पास ऐसे शहरी इलाके तलाशें, जहाँ जंगल नहीं है। आमतौर पर शहरों में गार्डन तो होते हैं, लेकिन जंगल नहीं। अगर शहरों के आस-पास जंगल होंगे तो ये कार्बन को भी कम करेंगे।

3. केन्द्र ने 35000 करोड़ का एक बिल भी संसद में पेश किया है, जो Compensatory Afforestation Fund Management and Planning Authority (CAMPA) के तहत काम करेगा और आने वाले समय के लिये शहरी इलाकों के आस-पास जंगल तैयार करेगा।

4. इसके अलावा केंद्र सरकार राष्ट्रीय हरित भारत मिशन (नेशनल ग्रीन इंडिया मिशन) भी चला रही है, जो देश में वन क्षेत्र को बढ़ाने और इसकी स्थितियों में सुधार लाने की दिशा में काम कर रहा है। इस मिशन के तहत सरकार का लक्ष्य अगले एक दशक में एक करोड़ हेक्टेयर जमीन वन तैयार करना है। सरकार ने इसे मनरेगा से भी जोड़ा है। मिशन की निगरानी के लिये रिमोट सेंसिंग जैसी आधुनिक तकनीक अपनाई जा रही है।

5. एक व्यक्ति एक पौधा कार्यक्रम के तहत पिछले साल पुणे में 4000 पौधे रोपने का लक्ष्य था। 2000 रुपये देकर आप इन पौधों को अपना नाम दे सकते थे।

6. Clean Air, Clean Water, Clean Energy और Clean Environment जैसे कैम्पेन भी पर्यावरण मंत्रालय सतत रूप से चला रहा है।

और अंत में, मानसून के साथ प्रकृति के नवजीवन की शुरुआत होती है। उसकी ख्वाहिश है कि आप-हम भी इस नवाचार में शामिल हों। तपती और झुलसा देने वाली गर्मी के तुरंत बाद प्रकृति हमें तर होने और राहत की बारिश से भीगने का मौका हमेशा देती है, इस बार उसे कुछ देने की बारी आपकी है, हमारी है...।

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