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शानदार स्कोप वाली फील्ड है सीस्मोलॉजी

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दैनिक जागरण, 21 फरवरी, 2018

इंजीनियरिंग की कई ऐसी ब्रांचेज हैं, जिनमें शानदार स्कोप होने के बावजूद कम ही स्टूडेंट्स उनमें करियर बनाने के बारे में सोचते हैं, ऐसी ही एक ब्रांच है, सीस्मोलॉजी। जो स्टूडेंट्स एनवायरनमेंट को लेकर कन्सर्न्ड रहते हैं और इंजीनियरिंग भी करना चाहते हैं, उनके लिये यह करियर ऑप्शन बेस्ट है…

भूकम्प और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदायें लगभग हर देश के लोगों को प्रभावित करती हैं। यही कारण है कि अथॉरिटीज अब सिर्फ डिजास्टर मैनेजमेंट नहीं, बल्कि प्रिवेंशन पर भी फोकस कर रही हैं। जाहिर है, इसमें सीस्मोलॉजिस्ट्स का रोल बहुत इम्पोर्टेंट है। अगर आप भी इंजीनियरिंग पढ़ने के बारे में सोच रहे हैं, तो सीस्मोलॉजी में करियर बना सकते हैं…

क्या है सीस्मोलॉजी?


पृथ्वी पर होने वाले बदलावों की साइंटिफिक स्टडी को सीस्मोलॉजी कहते हैं। इसमें भूकम्प, सी-क्वैक्स, ज्वालामुखी और प्लेट टेक्टोनिक्स व सुनामी जैसी प्राकृतिक आपदाओं के बारे में पढ़ाया जाता है। एक सीस्मोलॉजिस्ट पृथ्वी के अन्दर की वेव्स को रीड करके भूकम्प की इंटेंसिटी बताता है, साथ ही ऐसी जगहों में कम-से-कम नुकसान के लिये अपने सुझाव भी देता है।

कौन से कोर्सेज हैं जरूरी?


इस फील्ड में करियर बनाने के लिये इंटर में साइंस होनी जरूरी है। आप जियोफिजिक्स या जियोलॉजी में ग्रेजुएशन करने के बाद अर्थक्वैक इंजीनियरिंग में मास्टर्स कर सकते हैं, जिसके लिये गेट एक्जाम क्वालिफाई करना जरूरी है। मास्टर्स के बाद आप रिसर्च भी कर सकते हैं। चूँकि यह एक एकेडमिक फील्ड है, इसलिये इसमें हायर एजुकेशन की बहुत इम्पोर्टेंस है।

कैसी है वर्क प्रोफाइल?


सीस्मोलॉजी में दो तरह की ब्रांचेज होती हैं: रिसर्च और एप्लाइड। रिसर्च विंग से जुड़े सीस्मोलॉजिस्ट्स अर्थ के जियोलॉजिकल कॉम्पोजीशन और स्ट्रक्चर के इंटरप्रिटेशन पर रिसर्च करते हैं, ताकि अर्थक्वैक्स की फंडामेंटल प्रोसेस को समझा जा सके। वहीं एप्लाइड सीस्मोलॉजी में इस स्टडी को साइंटिफिक और सोसाइटल इशूज में अप्लाई किया जाता है।

कैसी होनी चाहिए स्किल्स?


एस्पिरेंट्स का अर्थ साइंस में इंटरेस्टेड और डीटेल ओरिएंटेड होना जरूरी है। इसके अलावा एस्पिरेंट में कुछ नया जानने की क्यूरियॉसिटी और रीडिंग्स व इंडिकेशन्स को एनालाइज करने की एबिलिटी भी होनी चाहिए।

क्या है फ्यूचर प्रॉस्पेक्ट्स?


आप रिसोर्स, एक्सप्लोरेशन, इंजीनियरिंग और एनवायरनमेंटल कम्पनीज, डेवलपमेंट अथॉरिटीज, गवर्नमेंट ऑर्गेनाइजेशन्स व एजेंसीज, ऑयल, गैस, माइनिंग कम्पनीज और पब्लिक व प्राइवेट रिसर्च कम्पनीज में भी काम कर सकते हैं।

कैसा है रिम्यूनरेशन?


यह एक हाइली स्किल्ड फील्ड है इसलिये इसमें रिम्यूनिरेशन भी उसे के अनुसार है। गवर्नमेंट और प्राइवेट दोनों सेक्टर्स में सैलरी पैकेजेस अलग-अलग हैं।

इंस्टीट्यूट्स


1. इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, रुड़की, खड़गपुर
2. बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी, बनारस
3. अन्ना यूनिवर्सिटी, चेन्नई
4. उस्मानिया यूनिवर्सिटी, हैदराबाद
5. मुम्बई यूनिवर्सिटी, मुम्बई
6. कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी, हरियाणा
7. वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी, देहरादून
8. इंस्टीट्यूट ऑफ सीस्मोलॉजिकल रिसर्च, गुजरात
9. नेशनल जियोफिजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट हैदराबाद

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