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जीवन का आधार हैं वृक्ष

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दैनिक जागरण, 21 मार्च 2018

एक पेड़ अपने पूरे जीवनकाल में हर तरह से मनुष्य के काम आता है। भोजन प्रदान करने, छाँव देने, घर बनाने को लकड़ी देने से लेकर सांसे लेने के लिये जीवनदायिनी ऑक्सीजन भी देता है। आपके आस-पास जितने अधिक पेड़ उतना कम प्रदूषण। इसके बावजूद आधुनिकता की अंधाधुंध दौड़ में जंगलों की कटाई तेजी से जारी है। 2016 में कुल 7.3 करोड़ एकड़ वन क्षेत्र का खात्मा हुआ। वनों को बचाने और धरती को हरा-भरा बनाए रखने के लिये लोगों को जागरुक करने के उद्देश्य से हर साल आज के दिन अन्तरराष्ट्रीय वन दिवस मनाया जाता है।

- ⅓ धरती के कुल भूभाग पर वनों की हिस्सेदारी
- 1.6 अरब जीवनयापन के लिये वनों पर आश्रित वैश्विक आबादी

सतत विकास के लिये अहम


1971 में यूरोपियन संघ की महासभा ने 21 मार्च को विश्व वानिकी दिवस घोषित किया। 28 नवम्बर, 2012 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने इस दिन को अन्तरराष्ट्रीय वन दिवस घोषित किया। लोगों को वनों की अहमियत समझाने और गरीबी मिटाने, पर्यावरण बचाने और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में पेड़ों की भूमिका बताने के उद्देश्य से हर साल यह दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष की थीम है - वन और टिकाऊ शहर। इस वर्ष यह आयोजन दुनियाभर के शहरों को हरा-भरा, स्वस्थ और खुशहाल बनाने पर केंद्रित है।

अब तक की थीमें


2015 - वन , मौसम, बदलाव
2016 - वन और जंगल
2017 - वन और ऊर्जा

घट रहे जंगल


अमेरिका स्थिति यूनिवर्सिटी ऑफ मेरीलैंड द्वारा अक्टूबर, 2017 में पेश की गई रिपोर्ट के मुताबिक 2016 में अब तक का रिकॉर्ड (7.3 करोड़ एकड़) वन क्षेत्र कम हुआ। यह 2015 के मुकाबले 51 फीसद अधिक है। सर्वाधिक वन क्षेत्र दावानल से खत्म हुआ। कृषि, खनन और लकड़ी जुटाने के लिये भी बड़ी संख्या में पेड़ काटे गए।

जंगल बचाने के आधुनिक प्रयास


लगातार बढ़ते वायु प्रदूषण और ग्लोबल वार्मिंग का स्तर कम करने के लिये शहरों के बीचों-बीच जंगलों को खड़ा किया जा रहा है। ऐसे टिकाऊ शहरों को निर्माण करके ही वन क्षेत्र और पेड़ों को बढ़ाया जा सकेगा।

चीन: यहाँ इटली की एक कम्पनी ऐसी दो गगनचुम्बी इमारतें बनाने जा रही हैं जिसमें एक हजार से अधिक पेड़ और ढाई हजार पौधे लगाये जाएँगे। यह पेड़-पौधे रोजाना 60 किग्रा ऑक्सीजन उत्पादित करेंगे।

जापान : यहाँ लकड़ी से बनी दुनिया की सबसे ऊँची इमारत बनाई जा रही है। 350 मीटर ऊँची इस इमारत के हर माले पर पेड़ और पौधे लगाए जाएँगे।

भारत में सुधर रहे हालात


24.4 फीसद वन क्षेत्र के साथ भारत दुनिया में 10वें स्थान पर आता है। देश का वन क्षेत्र कुल वैश्विक भूभाग का 2.4 फीसद है। हालाँकि देश का मौजूदा वन क्षेत्र 1988 में सरकार के बनाए 33 फीसद वन क्षेत्र के लक्ष्य से काफी कम है, फिर भी संतोषजनक बात यह है कि भारत में धीरे-धीरे ही सही वन क्षेत्र बढ़ रहा है। इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट- 2017 के मुताबिक 2015 से 2017 के बीच वृक्ष आच्छादित कुल क्षेत्र दो फीसद बढ़कर 93,815 वर्ग किमी हो गया।

बड़े काम के पेड़


- एक औसत आकार का पेड़ एक वर्ष में इतनी ऑक्सीजन देता है जिससे चार लोगों का परिवार पूरे साल सांस ले सकता है।
- किसी भवन या इमारत के पास लगाए गए तीन पेड़ एयर कंडीशनर का खर्चा 50 फीसद तक कम कर सकते हैं।
- अगर धरती पर दो करोड़ पेड़ लगाये जाएँ तो 26 करोड़ टन अधिक आॅक्सीजन मिलेगी। ये पेड़ एक करोड़ टन कार्बन डाइआॅक्सीइड सोख लेंगे।
- पेड़ों को देखने से भी स्वास्थ्य ठीक होता है। जिन अस्पतालों में पेड़ होते हैं वहाँ मरीज जल्दी स्वस्थ होते हैं।

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