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खासम-खास

भारत पर मँडरा रहा गुम हुए प्लूटोनियम का खतरा

Submitted by editorial on Mon, 08/13/2018 - 13:28
Author
उमेश कुमार राय
बेस कैम्प जहाँ प्लूटोनियम कैप्सुल्स खो गएबेस कैम्प जहाँ प्लूटोनियम कैप्सुल्स खो गए (फोटो साभार - मेंस एक्सपी)अभी हाल ही में हॉलीवुड की एक फिल्म आई है। नाम है- मिशन इम्पॉसिबल: फॉलआउट। फिल्म की कहानी प्लूटोनियम की एक बड़ी खेप तक खलनायकों की पहुँच को रोकने के मिशन पर आधारित है। फिल्म में मुख्य किरदार टॉम क्रूज ने निभाया है।

Content

एक खो गई नदी की तलाश

Submitted by RuralWater on Tue, 04/03/2018 - 14:28


जलालपुर में सूखी सई नदीजलालपुर में सूखी सई नदीनदी की पहली स्मृतियों में ट्रेन की खिड़की से झाँकता धुँधलका कौंधता हैं। बचपन में पुल से गुजरती ट्रेन की धड़-धड़ सुनते ही हम उचककर खिड़की से झाँकते। लगता था ऊपर से लोहे के भारी-भरकम पिलर्स गिर रहे हैं। उनके गिरने की लयबद्ध आवाज आ रही है। हमारी ट्रेन भी उतनी ही तेजी से भाग रही होती थी।

परम्परागत जल संरक्षण पद्धतियाँ

Submitted by RuralWater on Mon, 04/02/2018 - 14:06
Author
ग्राविस
Source
ग्राविस, जोधपुर, 2006

कृषि और उद्योग


खड़ीनखड़ीनभारत एक कृषि प्रधान एवं ग्रामीण सम्पन्न देश है। भारत की खेती और उद्योग मानसून पर आधारित रहे हैं। अगर देश में मानसून समय से आता है तो खेती अच्छी होती है। पानी की चमक समाज के हर वर्ग में देखने को मिलती है। भारत की खेती और किसान का जीवन पानी के बिना वीरान और सूना है।

राजस्थान की परम्परागत तकनीक

Submitted by RuralWater on Sat, 03/31/2018 - 14:21
Author
ग्राविस
Source
ग्राविस, जोधपुर, 2006


राजस्थान की परम्परागत जल संरक्षण प्रणाली टांकाराजस्थान की परम्परागत जल संरक्षण प्रणाली टांकाराजस्थान विविधताओं से परिपूर्ण एक ऐसा राज्य है, जहाँ एक तरफ रेगिस्तान है तो दूसरी तरफ ऊँचे-ऊँचे पहाड़ और घने जंगल हैं। यहाँ पर गरीबी अपनी चरम सीमा पर है तो महंगे शहर भी देखने को मिलते हैं। यहाँ विभिन्न प्रकार की भूमि जैसे चारागाह, गोचर, औरण, अभयारण्य आदि भी विद्यमान है। हमारी लोक संस्कृति हमारी ग्रामीण और जनजातीय संस्कृति का प्रतिनिधित्व करती है।

प्रयास

इजराइली तरीके से बारिश का पानी तिजोरी में

Submitted by editorial on Tue, 08/07/2018 - 16:14
Author
मनीष वैद्य
पानी से लबालब भरा प्रहलाद का तालाबपानी से लबालब भरा प्रहलाद का तालाबआपने शायद ही कभी सुना होगा कि बारिश के पानी को तिजोरी में रखा जाता हो, लेकिन मालवा के किसान अपने खेतों पर इसे साकार कर रहे हैं। उन्होंने इसके लिये बाकायदा जमीन पर लाखों की लागत से पॉलिथीन बिछाकर बारिश से पहले ही इस पानी को इजराइली तरीके से अपनी तिजोरी में स्टोर करने की पूरी तैयारी कर रखी थी।इस बारिश का करोड़ों लीटर पानी अब इसमें संग्रहित हो चुका है, जो गर्मियों में भी फसल लहलहाएगा। मालवा के कई खेतों पर बीते दो सालों में ऐसी तिजोरियाँ (पॉलिथीन के कृत्रिम तालाब) बनाई गई हैं।

नोटिस बोर्ड

सानंद के स्वास्थ्य में आ रही है गिरावट

Submitted by editorial on Wed, 08/15/2018 - 19:36
Author
इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)
स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंदस्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद (फोटो साभार - डेली मेल) गंगा संरक्षण के लिये केन्द्र सरकार द्वारा अब तक उठाए गए कदमों से असन्तुष्ट, वयोवृद्ध पर्यावरणविद प्रोफेसर जीडी अग्रवाल सह स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद 55 दिनों से अनशन पर हैं। उनके स्वास्थ्य में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है और उनका वजन 15 किलोग्राम कम हो गया है। उन्हें पिछले दिनों ऋषिकेश स्थित एम्स में भर्ती कराया गया है।

युवा वैज्ञानिकों के लिये विज्ञान संचार से जुड़ने का अवसर

Submitted by editorial on Mon, 08/13/2018 - 17:18
Author
उमाशंकर मिश्र
Source
इंडिया साइंस वायर, 13 अगस्त, 2018
विज्ञान संचारकविज्ञान संचारक (फोटो साभार - अवसर) नई दिल्ली। विज्ञान को सरल भाषा में लोगों तक पहुँचाने के लिये अब युवा वैज्ञानिकों का सहारा लिया जाएगा। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने इस सम्बन्ध में एक राष्ट्रीय प्रतियोगिता की घोषणा की है।

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भारत पर मँडरा रहा गुम हुए प्लूटोनियम का खतरा

Submitted by editorial on Mon, 08/13/2018 - 13:28
Author
उमेश कुमार राय
बेस कैम्प जहाँ प्लूटोनियम कैप्सुल्स खो गएबेस कैम्प जहाँ प्लूटोनियम कैप्सुल्स खो गए (फोटो साभार - मेंस एक्सपी)अभी हाल ही में हॉलीवुड की एक फिल्म आई है। नाम है- मिशन इम्पॉसिबल: फॉलआउट। फिल्म की कहानी प्लूटोनियम की एक बड़ी खेप तक खलनायकों की पहुँच को रोकने के मिशन पर आधारित है। फिल्म में मुख्य किरदार टॉम क्रूज ने निभाया है।

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एक खो गई नदी की तलाश

Submitted by RuralWater on Tue, 04/03/2018 - 14:28


जलालपुर में सूखी सई नदीजलालपुर में सूखी सई नदीनदी की पहली स्मृतियों में ट्रेन की खिड़की से झाँकता धुँधलका कौंधता हैं। बचपन में पुल से गुजरती ट्रेन की धड़-धड़ सुनते ही हम उचककर खिड़की से झाँकते। लगता था ऊपर से लोहे के भारी-भरकम पिलर्स गिर रहे हैं। उनके गिरने की लयबद्ध आवाज आ रही है। हमारी ट्रेन भी उतनी ही तेजी से भाग रही होती थी।

परम्परागत जल संरक्षण पद्धतियाँ

Submitted by RuralWater on Mon, 04/02/2018 - 14:06
Author
ग्राविस
Source
ग्राविस, जोधपुर, 2006

कृषि और उद्योग


खड़ीनखड़ीनभारत एक कृषि प्रधान एवं ग्रामीण सम्पन्न देश है। भारत की खेती और उद्योग मानसून पर आधारित रहे हैं। अगर देश में मानसून समय से आता है तो खेती अच्छी होती है। पानी की चमक समाज के हर वर्ग में देखने को मिलती है। भारत की खेती और किसान का जीवन पानी के बिना वीरान और सूना है।

राजस्थान की परम्परागत तकनीक

Submitted by RuralWater on Sat, 03/31/2018 - 14:21
Author
ग्राविस
Source
ग्राविस, जोधपुर, 2006


राजस्थान की परम्परागत जल संरक्षण प्रणाली टांकाराजस्थान की परम्परागत जल संरक्षण प्रणाली टांकाराजस्थान विविधताओं से परिपूर्ण एक ऐसा राज्य है, जहाँ एक तरफ रेगिस्तान है तो दूसरी तरफ ऊँचे-ऊँचे पहाड़ और घने जंगल हैं। यहाँ पर गरीबी अपनी चरम सीमा पर है तो महंगे शहर भी देखने को मिलते हैं। यहाँ विभिन्न प्रकार की भूमि जैसे चारागाह, गोचर, औरण, अभयारण्य आदि भी विद्यमान है। हमारी लोक संस्कृति हमारी ग्रामीण और जनजातीय संस्कृति का प्रतिनिधित्व करती है।

प्रयास

इजराइली तरीके से बारिश का पानी तिजोरी में

Submitted by editorial on Tue, 08/07/2018 - 16:14
Author
मनीष वैद्य
पानी से लबालब भरा प्रहलाद का तालाबपानी से लबालब भरा प्रहलाद का तालाबआपने शायद ही कभी सुना होगा कि बारिश के पानी को तिजोरी में रखा जाता हो, लेकिन मालवा के किसान अपने खेतों पर इसे साकार कर रहे हैं। उन्होंने इसके लिये बाकायदा जमीन पर लाखों की लागत से पॉलिथीन बिछाकर बारिश से पहले ही इस पानी को इजराइली तरीके से अपनी तिजोरी में स्टोर करने की पूरी तैयारी कर रखी थी।इस बारिश का करोड़ों लीटर पानी अब इसमें संग्रहित हो चुका है, जो गर्मियों में भी फसल लहलहाएगा। मालवा के कई खेतों पर बीते दो सालों में ऐसी तिजोरियाँ (पॉलिथीन के कृत्रिम तालाब) बनाई गई हैं।

नोटिस बोर्ड

सानंद के स्वास्थ्य में आ रही है गिरावट

Submitted by editorial on Wed, 08/15/2018 - 19:36
Author
इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)
स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंदस्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद (फोटो साभार - डेली मेल) गंगा संरक्षण के लिये केन्द्र सरकार द्वारा अब तक उठाए गए कदमों से असन्तुष्ट, वयोवृद्ध पर्यावरणविद प्रोफेसर जीडी अग्रवाल सह स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद 55 दिनों से अनशन पर हैं। उनके स्वास्थ्य में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है और उनका वजन 15 किलोग्राम कम हो गया है। उन्हें पिछले दिनों ऋषिकेश स्थित एम्स में भर्ती कराया गया है।

युवा वैज्ञानिकों के लिये विज्ञान संचार से जुड़ने का अवसर

Submitted by editorial on Mon, 08/13/2018 - 17:18
Author
उमाशंकर मिश्र
Source
इंडिया साइंस वायर, 13 अगस्त, 2018
विज्ञान संचारकविज्ञान संचारक (फोटो साभार - अवसर) नई दिल्ली। विज्ञान को सरल भाषा में लोगों तक पहुँचाने के लिये अब युवा वैज्ञानिकों का सहारा लिया जाएगा। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने इस सम्बन्ध में एक राष्ट्रीय प्रतियोगिता की घोषणा की है।

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