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नरेगा

नरेगा पर प्रतिमत


पानी के पोर्टल के माध्यम से हमारा मुख्य ध्येय रोज़गार गारण्टी कार्यक्रम के अंतर्गत किए जा रहे कार्यों का बेहतर नियोजन, कार्यान्वयन और सामाजिक अंकेक्षण सुनिश्चित करना है। ताकि रोज़गार गारण्टी स्कीम दीर्घकालीन खाद्यसुरक्षा, पानी-पर्यावरण और निरंतर आजीविका के सृजन का रास्ता बन सके।

बुंदेलखंड में मनरेगा

वेब/संगठन: 
amarujala.com
Author: 
कुमार भवानंद
नरेगाबुंदेलखंड और विकास या यों कहें कि बुंदेलखंड में विकास, दोनों ही बातें अलग-अलग ध्रुवों पर नजर आती हैं। पिछली यूपीए सरकार में शुरू किए गए राष्ट्रीय रोजगार गारंटी अधिनियम (अब मनरेगा) ने देश के हर हिस्से में उन वंचितों की रोजी-रोटी का इंतजाम कर दिया, जो पीढ़ी दर पीढ़ी जमींदारों द्वारा तय मजदूरी पर काम करने और शोषित होने को विवश थे। मनरेगा ने देश के अलग-अलग इलाकों में नई-नई बुलंदियों को छुआ। और इसकी सफलता को देखते हुए ही पिछले लोकसभा चुनाव में संप्रग सरकार ने इसे चुनावी मुद्दा बनाया था। लेकिन यहां भी बुंदेलखंडियों की तकदीर मात खा गई।

नरेगा से निराश सोनभद्र

खेत में मिले सादे जाबकार्डखेत में मिले सादे जाबकार्डसोनभद्र। गरीबी और भूखमरी की अनवरत मार झेल रहे सोनभद्र में राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (नरेगा) में भ्रष्टाचार के चौंका देने वाले तथ्य सामने आये हैं, अधिकारियों की असीमित धन लौलुपता और कमीशनखोरी ने आदिवासियों के हांथों से रोजगार पाने का आखिरी हथियार भी छीन लिया है| पिछले तीन वर्षों के दौरान लगभग ३१० करोड़ रूपया खर्च करने के बाद भी नतीजा कुछ खास नहीं है, सोनभद्र का सच ये है कि इस वर्ष नरेगा से निराश सोनभद्र के लगभग ३५ हजार आदिवासी रोजगार की तलाश में देश के अलग-अलग हिस्सों में पलायन कर गए, पूर

नरेगा की शिकायत दर शिकायत

Source: 
mahanagartimes.net
90 दिन में 700 शिकायतें....मामला राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री तक पहुंचा....क्रियान्विति में अव्वल, अब भ्रष्टाचार में टॉप पर... महानगर संवाददाता.. जयपुर, 21 जुलाई। नरेगा की क्रियान्विति में अव्वल रहने वाला राजस्थान अब इसमें हो रहे भ्रष्टाचार में भी सिरमौर हो गया है। मामला राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री कार्यालय तक जा पहुंचा है। उन्होंने राज्य सरकार से शिकायतों के जवाब तलब किए हैं।...स्थिति यह है कि गुजरे 90 दिन की अवधि में 691 शिकायतें मिल चुकी हैं। नरेगा के सहारे वोट लेने वाली गहलोत सरकार भी शिकायतों की संख्या से हैरत में है।

अब तेरा क्या होगा रे नरेगा?

Source: 
- मृणाल पाण्डे/ hindustandainik.com
दिल्ली लोकतांत्रिक भारत के विकास स्वप्नों की केन्द्रीय किल्ली है। इसलिए मानने में हर्ज नहीं कि दिल्ली की पहल पर जो भी विकास-योजनाएँ बनती हैं, उनके पीछे कहीं न कहीं ईमानदार राष्ट्रीय ख्वाहिशों का एक दबाव होता है। पर जमीन पर लागू होते वक्त ऐसी हर योजना हमारे चारों ओर फैले भारत के ठोस सामाजिक-आर्थिक यथार्थ से टकराती है। इसलिए योजना के मसौदे में भले ही जो निर्देश जारी किए गए हों, अंतत: कार्यान्वयन के स्तर पर उनका वही (या उतना ही) स्वरूप लागू हो पाता है, जो स्थानीय वर्चस्व गुटों को मंजूर हो। लिहाजा दिल्ली से अमेठी पहुंचे राहुल ने नरेगा (राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना यानी एन.आर.ई.जी.एस.

पश्चिम चम्पारण: नरेगा में अब तक आया 75 करोड़

Source: 
teraitarang blog
तरंग टीम

दिसम्बर के शुरु में के0आर0 विद्यालय के समीप स्थित प्रसिद्ध समाजसेवी संगठन रीड के प्रांगण में कारितास इन्डिया द्वारा समर्थित तथा फादर प्रकाश लुईस के नेतृत्व में संचालित ‘बिहार पंचायत नवनिर्माण अभियान’ द्वारा ‘‘नरेगा’’ कार्यक्रम पर एक भव्य कार्यशाला का आयोजन हुआ था। इसमें बिहार सरकार के ग्रामीण विकास विभाग के प्रधान सचिव, अनूप मुखर्जी कार्यक्रम के बावजूद आने में असफल रहे। आखिर बड़े लोग बेतिया जैसे छोटे स्थान पर कैसे आते। उन्हें तो नरेगा की स्थिति विडियो कानफ्रेन्सिग तथा जिला प्रशासन द्वारा प्रेसित सुसज्जित रिपोर्टो से तो पता ही रहता है कि सबकुछ बमबम है, तो फिर अनपढ़, गंवार पंचायत प्रतिनिध्यिों तथा देहाती सामाजिक कार्यकर्ताओं से मिलकर उनके मुखार विन्दु से नरेगा की ‘ दुर्गति ’ सुनने की क्या आवश्यकता....?

पश्चिम बंगाल में महिलायें और रोजगार की गारण्टी – 2

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Source: 
सचिन कुमार जैन

कदम कदम पर लिंगभेद की चुनौती


महिलाओं की आर्थिक और सामाजिक ताकत को एक ढांचागत रूप देने के उद्देष्य से राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी कानून (नरेगा) में कुछ स्पष्ट व्यवस्थाएं बनाने और हकों को कानूनी रूप से परिभाषित करने की कोशिशें हुई हैं। पश्चिम बंगाल के पश्चिम दरिकापुर गांव की जानकी भक्ते दिन भर मछली और केकड़े पकड़कर गांव के बाजार में बेचकर 25 से 30 रूपये कमाती हैं। और इसी से उसके परिवार के पाँच सदस्यों की जिन्दगी चलती है। वह रोजगार गारंटी कानून के बारे में जानती है और 75 रूपये की न्यूनतम मजदूरी के बारे में भी। फिर भी वह नरेगा में काम नहीं करती क्योंकि उसे हर रोज मेहनत करके कमाकर पैसा घर में लाना होता है, तभी बच्चों को खाना मिलता है। वह 30 दिन तक मजदूरी के लिए इंतजार नहीं कर सकती है। उत्तार महिन्द्रापुर गांव की ज्योत्सना घराई ने 25 दिन का काम मांगा, इसमें से तीन दिन के लिये काम मिला पर जॉब कार्ड में 6 दिन की मजदूरी की प्रविष्टि की गई। 

आधी आबादी को रोज़गार का इंतजार

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Source: 
सचिन कुमार जैन
पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के पूर्णचन्द्र गांव की कबिता भुंईया अपनी 400 रूपये की मासिक आय से परिवार के पांच सदस्यों का जीवनयापन नहीं कर पाती हैं। ऐसे में राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी योजना कानून से कबिता को उम्मीद बंधी कि अब जीवन पथ पर गरीबी के कांटे कुछ कम होंगे। 20 सितम्बर 2008 को उन्होंने नियमों के तहत आवेदन देकर रोजगार की मांग की पर पंचायत ने उन्हें काम देने से इंकार कर दिया, 25 सितम्बर को वह फिर ग्राम पंचायत प्रधान के पास गई, जिसने उन्हें बताया कि जब तक कम से कम 30 मजदूर एक साथ आवेदन नहीं करेंगे तब तक उन्हें रोजगार नहीं मिलेगा, यही कानून है। कबिता कहती हैं कि यह कानून नहीं शोषण है, इससे मेरी उम्मीदें टूटी हैं।

झारखंड में नरेगा

वेब/संगठन: 
nregawatch.blogspot.com
Source: 
बलराम
नरेगा बदहालनरेगा बदहालझारखंड में नरेगा की बदहाली खुद सरकारी आंकड़ों से बयान होती है। यह इस राज्य का एक और बड़ा दुर्भाग्य है। नरेगा कानून का लाभ उठाकर देश के अन्य राज्य अपनी ग्रामीण आबादी की किस्मत संवार रहे है। लेकिन झारखंड में इसकी पूरी राशि लूट का शिकार हो रही है।