नरेगा के संबंधित समाचार

न होने दें तालाबों का अतिक्रमण

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पंचायतनामा टीम
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पंचायतनामा, 19 - 25 नवंबर 2012
तालाब का न केवल मनुष्य बल्कि धरती के विभित्र जीव-जंतुओं के जीवन में बड़ा योगदान है। इसके बिना जीवन संकट से घिर जाता है। ऐसे में तालाब को बचाने के लिए आप आगे आयें। किसी भी परिस्थिति में तालाबों का अतिक्रमण न होने दें। आप इसके खिलाफ लडें.। तालाब अतिक्रमणकारियों के खिलाफ आप शासन-प्रशासन के पास शिकायत करें। इससे भी बात न बने तो कोर्ट से गुहार लगायें। भारत का उच्चतम न्यायालय आपके साथ है। जगपाल सिंह एवं अन्य बनाम पंजाब सरकार (सिविल अपील संख्या 1132/2011), एचएल तिवारी बनाम कमला देवी (एआइआर 2001 एससी 3215) आदि विभित्र मुकदमों में सुनवाई के दौरान भारत के उच्चतम न्यायालय ने यह व्यवस्था दी है कि तालाब को भरकर उस पर भवन या उससे संबंधित किसी प्रकार का निर्माण कार्य नहीं किया जा सकता है। ग्रामसभा एवं पंचायत की जमीन को निजी या व्यावसायिक उद्यम के लिए नहीं दिया जा सकता है। यदि राज्य सरकारें और अन्य प्राधिकार ऐसा करते हैं तो वह पूर्णत: गैरकानूनी है। कोर्ट का मानना है कि तालाब संविधान के अनुच्छेद 21 में प्रदत्त आजीविका के अधिकार को संपोषित करता है।

जगपाल सिंह एवं अन्य बनाम पंजाब सरकार मामले की सुनवाई के बाद 28 जनवरी 2011 को उच्चतम न्यायालय ने सभी राज्यों के मुख्य सचिव को निर्देश जारी किया है। इसके तहत राज्यों को तालाबों का अतिक्रमण रोकने के लिए त्वरित एवं कड़ी कार्रवाई करना है। इसके साथ ही समय-समय पर सुप्रीम कोर्ट को यह बताना है कि तालाबों का अतिक्रमण रोकने के लिए उन्होंने क्या-क्या कदम उठाये हैं। तो देर किस बात की। उठ खड़ा होइये तालाब बचाने के लिए।

झारखंड में मनरेगा के कुओं की जिलावार विवरण

जिला का नाम

स्वीकृत कूप

निर्मित कूप

पूर्वी सिंहभूम

3204

2173

जलसंग्रह में मनरेगा का है योगदान

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पंचायतनामा टीम
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पंचायतनामा, 19 - 25 नवंबर 2012
बोकारो जिले के एक गांव में मनरेगा के तहत बना तालाबबोकारो जिले के एक गांव में मनरेगा के तहत बना तालाबजल संग्रह में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम की योजनाओं का भरपूर योगदान है। पूरे झारखंड में मनरेगा के जरिये एक लाख से ज्यादा तालाब एवं बांध बनाये गये हैं। लगभग 79 हजार सिंचाई कूपों का निर्माण हुआ है। चूंकि मनरेगा मजदूर के हित पर आधारित है, इसलिए इसके निर्माण कार्य बिना मशीन के किया जाता है। ऐसे में तालाबों या बांधों की संरचना भी बहुत छोटी होती है। निर्माण के दौरान तालाब के मानकों पर ध्यान नहीं दिया जाता है। इससे इसकी जल संचयन क्षमता कम होती है। साल भर पानी नहीं रहता है। लेकिन मानसून के चार महीनों में जल को रोकने का काम ये तालाब जरूर करते हैं। जल को रोकने का भी अच्छा फायदा होता है। इससे भूमिगत जलस्तर में वृद्धि होती है।

मनरेगा के तालाबों का सिंचाई में उतना योगदान नहीं हैं, लेकिन कुओं ने तो पूरा परिदृश्य ही बदल दिया है। सिर्फ मनरेगा के कुएं से एक लाख हेक्टेयर भू-भाग पर सिंचाई की सुविधा पिछले दो सालों में बहाल हुई है। इन कुओं ने रबी फसलों के आच्छादन को बढ़ा दिया है। इन कुओं से सब्जियों की खेती भी अच्छी हो रही है। पूरे राज्य में सबसे ज्यादा कुएं गढ़वा, देवघर एवं चतरा में बने हैं। जबकि कुआं निर्माण में साहिबगंज, कोडरमा एवं जामताड़ा पिछड़ गये हैं।

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत कार्यान्वित एक नयी योजना ‘वन सरोवर’

शिमलाः वनों में जल स्रोतों के सम्वर्द्धन एवं विकास के दृष्टिगत प्रदेश सरकार की एक नयी योजना ‘वन सरोवर’ को आरंभ करने की योजना है, जिसे महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत कार्यान्वित किया जाएगा। इस योजना के तहत 200 जल संरक्षण अधोसंरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है, ताकि भू-जल स्तर को बढ़ाकर आर्द्रता क्षेत्र में सुधार किया जा सके। इससे वनों में लगने वाली आग को रोकने में सहायता मिलेगी और वन्य प्राणियों को भी पीने का पानी उपलब्ध होगा।

नरेगा दिवस पर नारी संघ की महिलाओं की पहल

वेब/संगठन: 
meri khabar com
Source: 
मेरी खबर/ 14-Oct-2009
बूढ़नपुर (उत्‍तर प्रदेश): ग्रामीण भारत में लोगों को रोजगार मुहैया कराने के उद्देश्‍य से शुरू की गई महत्‍वाकांक्षी योजना नरेगा भी अब लालफीताशाही की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। ग्रामीण पुनर्निर्माण संस्थान द्वारा आयोजित अधिकारगत ढ़ांचे पर नारी संघ के नेतृत्वकारी महिलाओं के प्रशिक्षण के दौरान भी इस तरह की बात सामने निकलकर आई थी। उस दौरान कहा गया कि था कि अभी भी ग्राम प्रधान नरेगा के अंतर्गत जॉब कार्ड बनाने एवं काम मांगने पर आनाकानी कर रहे हैं। वे न तो ग्रामीणों को जॉब कार्ड बनाने मे मदद कर रहे है और न ही काम ही दे रहे हैं। महिलाओं ने यह भी शिकायत की थी कि लोगों के आवेदनों को भी वे अपने पास ही रखे रहते है और टालने वाला रवैया अपनाते हैं।

नरेगा श्रमिकों को बताए कानूनी अधिकार

Source: 
patrika.com
नागौर। ताल्लुका विघिक सेवा समिति के तत्वावधान में बासनी गांव में विघिक साक्षरता शिविर में सोमवार को नरेगा श्रमिकों को उनके कानूनी अघिकारों से अवगत कराया गया।शिविर में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट राज व्यास ने कहा कि नरेगा के तहत एक तिहाई महिलाओं को रोजगार दिया जाना आवश्यक है। उन्होंने कानून के अनुसार महिलाओं व पुरूषों को समान मजदूरी देने, चिकित्सा सुविधा, छाया, पानी, कार्यस्थल दूर होने पर परिवहन भत्ते की व्यवस्था, सूचना के अघिकार, शिकायत के अघिकार संबंधी कानूनी प्रावधानों की जानकारी श्रमिकों को दी।

नरेगा : 140 गांवों की 43 बिंदुओं पर पड़ताल

Source: 
जागरण याहू / Jul 18,09

अलीगढ़। राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (नरेगा) की स्थिति में कुछ सुधार की उम्मीद जागी है। भ्रष्टाचार की ढेरों शिकायतें मिलने पर शासन के निर्देश के बाद डीएम ने जिले के 140 गांवों में नरेगा की जांच के निर्देश दिए हैं। इसके लिए नरेगा से जुड़े 43 बिंदुओं की पड़ताल की जाएगी।

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जागरण याहू / Jul 18,09

छाया नरेगा व पानी का मुद्दा

Source: 
pressnote.in
देवगढ़। देवगढ़ पंचायत समिति की साधारण सभा की गत दिवस हुई बैठक में विकास के कई प्रस्ताव पारित किए गए। बैठक में नरेगा व पेयजल आपूर्ति के मुद्दे पर चर्चा हुई। बैठक की अध्यक्षता प्रधान चिरंजीलाल टाक ने की।

150 दिन की होगी रोजगार गारंटी

Source: 
in.jagran.yahoo.com
जयपुर, जागरण संवाद केंद्र : केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री डॉ.सीपी जोशी का कहना है कि अफसर नरेगा के स्कोप बढ़ाने को लेकर कसरत कर रहे हैं। डॉ.जोशी ने दैनिक जागरण के साथ विशेष बातचीत में कहा कि नरेगा का फायदा जरूरतमंदों तक सहीं ढंग से मिले इसके लिए इसमें 50 दिन की संख्या और बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। इससे नरेगा में श्रम दिवसों की संख्या 150 दिन हो जाएगी।