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नर्मदा समग्र

नर्मदा समग्रनर्मदा समग्रनर्मदा समग्र एक प्रयत्न है। नर्मदा नदी, एक जल स्त्रोत, एक आस्था को स्वस्थ, सुंदर और पवित्र बनाये रखने का यह एक प्रयास है। विश्व की अधिकांश संस्कृतियों का जन्म व विकास नदियों के किनारे हुआ है। भारत के ऋषियों ने पर्यावरण संतुलन के सूत्रों को ध्यान में रखकर समाज की नदियों, पहाडों, जंगलों व पशु-पक्षियों सहित पूरे संसार की ओर देखने की विशेष सह अस्तित्व की अवधारणा का विकास किया। उन्होंने पाषाण में भी जीवन देखने का मंत्र दिया। ऐसे प्रयत्नों के कारण भारत में प्रकृति को समझने व उससे व्यवहार करने की आदान-प्रदान के भाव से युक्त परम्पराओं का विकास हुआ। जिओ और जीने दो जैसी मान्यताएं विकसित हुईं। पेड-पौधे, पशु, पानी सभी पूज

जलधारा अभियान

जयपुर शहर के उत्तर पश्चिम से निकल कर पश्चिम-दक्षिण होती हुई, ठूण्ड नदी से मिलने वाली, द्रव्यवती नदी, उर्फ अमानी शाह का नाला, जयपुर शहर की जीवन रेखा रही है। सर्वे आफ इंडिया द्वारा प्रकाशित सन् 1865- 66 के नक्शों में भी इस नदी को साफ तौर पर दर्शाया गया है। उसके बाद भी सर्वे आफ इंडिया द्वारा प्रकाशित नक्शों में नदी साफ तौर पर चिन्हित है। यदि नदी कहीं नहीं है, तो राजस्थान सरकार के राजस्व विभाग के रिकार्ड में।

सन् 1955 में प्रदेश में हुए भू प्रबंधन के दौरान नदी की अधिकांश भूमि को निजी खातेदारों के नाम चढ़ाकर राजस्व रिकार्ड में निजी खातेदारी में दर्ज कर दिया गया। जिसके चलते नदी के पेटे और बहाव क्षेत्र की जमीन की खरीद- फरोख्त होने लगी, उसमें कॉलोनियां बसने लगी और सरकार के विभागों और निकायों द्वारा उन कॉलोनियों को तमाम सुविधाएं दे, उन्हें नियमित भी किया जाने लगा।