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Soil pollution in Hindi (मृदा प्रदूषण)


मृदा प्रदूषण

भूमि पर्यावरण की आधारभूत इकाई होती है। यह एक स्थिर इकाई होने के नाते इसकी वृद्धि में बढ़ोतरी नहीं की जा सकती है। बड़े पैमाने पर हुए औद्योगीकरण एवं नगरीकरण ने नगरों में बढ़ती जनसंख्या एवं निकलने वाले द्रव एवं ठोस अवशिष्ट पदार्थ मृदा को प्रदूषित कर रहे हैं। ठोस कचरे के कारण आज भूमि में प्रदूषण अधिक फैल रहा है। ठोस कचरा प्राय: घरों, फैक्ट्रियों, उद्योगों, कृषि एवं दूसरे स्थानों से भी आता है। इसके ढेर टीलों का रूप ले लेते हैं और बहुत-बहुत दूर तक फैल जाता है क्योंकि इस ठोस कचरे में राख, काँच, फल तथा सब्जियों के छिल्के, कागज, कपड़े, प्लास्टिक, रबड़, चमड़ा, धातुएँ इत्यादि वस्तुएँ सम्मिलित हैं। हवा में छोड़े गये खतरनाक रसायन सल्फर, सीसा के यौगिक जब मृदा में पहुँचते हैं तो यह प्रदूषित हो जाती है। भूमि के भौतिक, रासायनिक या जैविक गुणों में ऐसा कोई भी अवांछित परिवर्तन, जिसका प्रभाव मनुष्य तथा अन्य जीवों पर पड़े या जिससे भूमि की प्राकृतिक गुणवत्ता जैसे उर्वरता तथा उपयोगिता नष्ट हो भू-प्रदूषण कहलाता है। भूमि पर उपलब्ध चक्र भू-सतह का लगभग 50 प्रतिशत भाग ही उपयोग के लायक है और इसके शेष 50 प्रतिशत भाग में पहाड़, खाइयां, दलदल, मरुस्थल और पठार आदि हैं। यहां यह बताना आवश्यक है कि विश्व के 79 प्रतिशत खाद्य पदार्थ मिट्टी से ही उत्पन्न होते हैं। इस संसाधन (भूमि) की महत्ता इसलिए और भी बढ़ जाती है कि ग्लोब के मात्र दो प्रतिशत भाग में ही कृषि योग्य भूमि मिलती है। अत: भूमि या मिट्टी एक अतिदुर्लभ (अति सीमित) संसाधन है। निवास एवं खाद्य पदार्थों की समुचित उपलब्धि के लिए इस सीमित संसाधन को प्रदूषण से बचाना आज की महती आवश्यकता हो गयी है। आज जिस गति से विश्व एवं भारत की जनसंख्या बढ़ रही है इन लोगों की भोजन की व्यवस्था करने के लिए भूमि को जरूरत से ज्यादा शोषण किया जा रहा है। जिसके परिणाम स्वरूप आज भूमि की पोषक क्षमता कम होती जा रही है। पोषकता बढ़ाने के लिए मानव इसमें रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों का जमकर इस्तेमाल कर रहा है।

इसके साथ ही पौधों को रोगों व कीटाणुओं तथा पशु-पक्षियों से बचाने के लिए छिड़के जाने वाले मैलाथियान, गैमेक्सीन, डाइथेन एम 45, डाइथेन जेड 78 और 2,4 डी जैसे हानिकारक तत्व प्राकृतिक उर्वरता को नष्ट कर मृदा की साधना में व्यतिक्रम उत्पन्न कर इसे दूषित कर रहे हैं जिससे इसमें उत्पन्न होने वाले खाद्य पदार्थ विषाक्त होते जा रहे हैं और यही विषाक्त पदार्थ जब भोजन के माध्यम से मानव शरीर में पहुंचते हैं तो उससे कई प्रकार की बीमारियां हो जाती हैं। भूमि (मृदा) प्रदूषण के कारण जब भूमि अपने प्राकृतिक स्वभाव से हटकर अर्थात् कृषि कार्य एवं मानक के उपयोग के लिए अनुपयुक्त हो जाये तो वह प्रदूषित मानी जाती है इस प्रदूषण के पीछे विभिन्न कारण जैसे रासायनिक प्रदूषण, भू उत्खनन, ज्वालामुखी उद्गार जो मानव एवं प्राकृतिक जनित होता है भूमि प्रदूषण के कारण माने जाते हैं। प्रतिदिन आवासीय क्षेत्रों से सफाई के दौरान रसोई का गीला जूठन कागज, प्लास्टिक के टुकड़े, कपड़े के टुकड़े, कांच, शीशियां, थर्माकोल, एल्यूमीनियम, लोहे के तार, टिन कन्टेनर, टायर एवं अन्य कूड़ा करकट निकलता है। यही कचरा मिट्टी में मिलकर भूमि को प्रदूषित कर देता है। नगर पालिका के अंतर्गत सम्पूर्ण शहर का कूड़ा करकट, मानव मल, मरे जानवरों इत्यादि के अवशिष्ट मिट्टी एवं नालों में पड़े सड़ते रहते हैं जिससे भूमि दूषित हो जाती है।

औद्योगिक इकाइयों से सबसे अधिक भूमि प्रदूषण फैल रहा है जिसमें उर्वरक व रसायन शक्कर कारखानों, कपड़ा बनाने वाली इकाइयों, ग्रेफाइट, ताप बिजलीघरों, सीमेंट कारखानों, साबुन, तेल तथा धातु निर्माण कारखानों के द्वारा भारी मात्रा में हानिकारक एवं विषैले रसायन जब जमीन पर पड़ते हैं और इनके ठोस अवशिष्ट अनेक स्थानों पर पहाड़ व टीलों का रूप ले लेते हैं और इसके कारण उस स्थान की भूमि प्रदूषित होकर वनस्पति विहीन तथा अनउपजाऊ हो जाती है। कृषि में अधिक से अधिक पैदावार बढ़ाने के लिए व्यक्ति खेतों का निर्माण किया। इस निर्माण के दौरान उसमें प्रयोग की गई सामग्रियां, सीमेंट, रेत, पत्थर, ईंट, गिट्टी, चूना तथा इधर-उधर बिखर जाना और कुछ दिन बाद यह मिट्टी में मिलकर भूमि को प्रदूषित कर देते हैं। खनन करते समय जब व्यक्ति उससे खनिज तत्व निकालता है तो खुदाई के दौरान निकले अनेक अनुपयोगी पदार्थों एवं वस्तुओं को बाहर छोड़ देते हैं। जिससे वहां की भूमि अनुपयोगी के साथ-साथ अनउपजाऊ भी हो जाती है क्योंकि यह खुली धूल जब हवा में उड़ती है तो उसकी ऊपरी पर्त भूमि को ढक लेती है जिससे वह प्रदूषित हो जाती है।

भूमि प्रदूषण के अन्य स्रोतों में रेगिस्तान की रेत उड़ती हुई अन्य क्षेत्रों की भूमि में आकर उसकी उर्वरता शक्ति को समाप्त कर देती है, अम्ल वर्षा, ईंटों का निर्माण, भूकम्प एवं प्राकृतिक आपदाओं के कारण टूट-फूट, अस्पतालों का कचरा, अनुपयोगी तथा हानिकारक पौधों की खेती तथा सिंचाई व पीने का पानी उपलब्ध कराने के लिए नदियों पर बनने वाले बांधों के कारण वहां की भूमि दलदल में बदल जाती है जिससे भूमि प्रदूषण विविध रूपों में हमारे समक्ष आ खड़ा होता है।{1}

संदर्भ: 

soil pollution

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soil

iam sudhir

Soil pollution

Soil pollution

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