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स्वच्छता में करियर

Author: 
डा. एस.पी. कोचर
Source: 
नवोदय टाइम्स, 17 जनवरी, 2018

राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के जन्म के 150वें वर्ष अर्थात वर्ष 2019 तक स्वच्छ भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त, 2014 को एक राष्ट्रव्यापी आन्दोलन ‘स्वच्छ भारत अभियान’ प्रारम्भ किया। स्वच्छ भारत अभियान ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों, विशेष रूप से स्कूल परिसरों में स्वच्छता में सुधार लाने के लिये संसाधनों को संघटित करता है।

स्वच्छता का संस्कार स्वच्छ भारत अभियान के चलते हमारे देश में स्वच्छता एवं स्वच्छता प्रबन्धन के क्षेत्र में रोजगार के अवसरों में बहुत तेजी से वृद्धि हो रही है तथा बहुत बड़ी संख्या में युवा वर्ग स्वच्छता के क्षेत्र में करियर बनाने के लिये आगे बढ़ रहा है। गौरतलब है कि स्वच्छता न केवल सामान्य स्वास्थ्य की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है, अपितु यह हमारे व्यक्तिगत तथा सामाजिक जीवन में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

महत्त्वपूर्ण आवश्यकता


स्वच्छता मनुष्य के लिये मूल सुविधा है, क्योंकि स्वास्थ्य विज्ञान का स्वच्छता से सीधा सम्बन्ध है। अच्छी स्वच्छता पद्धति जल एवं मिट्टी को प्रदूषित होने से रोकती है इससे बीमारियों का भी निवारण होता है इसलिये स्वच्छता की संकल्पना में व्यक्तिगत स्वास्थ्य विज्ञान, गृह स्वच्छता, सुरक्षित जल, कूड़ा निपटान, मल-जल निपटान जैसे कार्य शामिल किये जाते हैं। स्वच्छ पेयजल तथा अच्छी स्वच्छता को व्यवहार में लाये बिना, प्रदूषण को नहीं रोक सकते हैं। संकलित जल की आपूर्ति भी स्वास्थ्य विज्ञान के अभाव में प्रदूषण का एक स्रोत हो सकती है।

स्वच्छ भारत कोष की स्थापना इस आह्वान के सन्दर्भ में कॉर्पोरेट क्षेत्र से कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व निधि तथा व्यक्तियों एवं लोक परोपकारियों से अंशदान आकर्षित करने के लिये की गई। इसके चलते इस क्षेत्र में धन की कमी भी काफी हद तक कम हो गई है।

बीमारियों को फैलने से बचाने के लिये हाथों की स्वच्छता को प्रायः अत्यधिक प्रभावी उपाय के रूप में उद्धृत किया जाता है। बच्चे अपने समकक्ष, अपने परिवारों एवं अपने समुदायों में बदलाव लाने तथा सुरक्षित जल पीने, अच्छी स्वास्थ्य आदतों एवं सुरक्षित स्वच्छता सुविधाओं के महत्त्व को बढ़ावा देने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

बच्चों को ऐसे ज्ञान, अभिवृत्ति और कौशल का विकास करने के लिये प्रोत्साहित किया जाता है जो अच्छे स्वास्थ्य आचरण एवं स्वस्थ जीवन जीने में सहायक होते हैं। जीवन निर्वाह के लिये जल बुनियादी आवश्यकता एवं एक महत्त्वपूर्ण संसाधन है। जल की गुणवत्ता कम होने से मनुष्य के स्वास्थ्य तथा पारिस्थितिकी प्रणाली में संकट उत्पन्न हो जाता है।

साफ पेयजल स्वास्थ्य विज्ञान तथा स्वच्छता बनाये रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। किसी भी व्यक्ति का स्वास्थ्य एवं स्वास्थ्य विज्ञान बड़े पैमाने पर पेयजल की पर्याप्त उपलब्धता और उपयुक्त स्वच्छता पर निर्भर करता है अतः जल, स्वच्छता एवं अच्छे स्वास्थ्य के बीच एक सीधा सम्बन्ध है।

असुरक्षित पेयजल का उपयोग, मानवीय मल-मूत्र का अनुचित निपटान आदि खराब स्वच्छता में व्यापक भूमिका निभाते हैं। जल स्वास्थ्य विज्ञान एवं स्वच्छता उपायों का अधिकतम लाभ लेने के लिये खराब स्वच्छता, स्वास्थ्य विज्ञान एवं बीमारियों के बीच सम्बन्ध पर जागरुकता उत्पन्न करना जरूरी है। जल, स्वच्छता और स्वास्थ्य विज्ञान का महत्त्व राष्ट्रीय विकास की कुंजी है।

भारत में तेजी से हो रहे शहरीकरण तथा बढ़ती जनसंख्या ने मौजूदा आधारभूत संरचना पर भयंकर दबाव डाल दिया है। इसने स्वच्छ पेयजल तथा प्रभावी स्वच्छता उपाय उपलब्ध कराने की सरकार की क्षमता को बहुत अधिक प्रभावित किया है।

सरकार ने निगमों या अन्य संगठनों के योगदान से स्वच्छ भारत या स्वच्छ भारत अभियान जैसे शहरी विकास कार्यक्रमों के माध्यम से इस समस्या पर काबू रखने के प्रयास किये हैं, परन्तु अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है।

अच्छे स्वास्थ्य एवं स्वच्छता की आदत बनाये रखने की आवश्यकता पर जागरुकता लाने के लिये स्वच्छता कार्यक्रमों पर बल दिया जाता है। हमारे देश में स्वच्छता तथा स्वास्थ्य विज्ञान को बेहतर रूप से प्रोत्साहन दिये जाने की जरूरत है। वर्तमान में स्वच्छता एवं स्वास्थ्य को मुख्य रूप से सरकारी संगठनों तथा जल वितरक संस्थाओं के माध्यम से प्रोत्साहन दिया जाता है। शैक्षिक संस्थाएँ हर स्तर पर छात्रों को स्वास्थ्य विज्ञान पढ़ा रही हैं तथा स्वास्थ्य संस्थाएँ स्वच्छता एवं रोग निवारण प्रक्रियाओं के लिये संसाधन दे रही हैं।

रोजगार अवसर


स्वच्छता एवं अच्छे स्वास्थ्य विज्ञान के इस क्षेत्र में कार्य करने के इच्छुक युवाओं के लिये करियर के उज्जवल अवसर है।

सरकारी, निजी तथा गैर-सरकारी संगठन क्षेत्रों यथा सरकारी सार्वजनिक विभागों में रोजगार के उजले अवसर हैं। योग्यता प्राप्त युवा उक्त उल्लिखित क्षेत्रों में स्वास्थ्य निरीक्षक एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रबन्धक तथा पर्यवेक्षक के रूप में कार्य कर सकते हैं। स्वास्थ्य, पर्यावरण, जल तथा स्वच्छता आदि से सम्बन्धित विकास से जुड़े अध्ययन को बढ़ावा देने के लिये योग्य उम्मीदवारों को विभिन्न विश्वविद्यालयों, विदेशी, सरकारी तथा अन्तरराष्ट्रीय संगठनों द्वारा बड़ी संख्या में छात्रवृत्तियाँ प्रदान की जाती हैं।

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