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जल फैलाव (Water Spreaders)

जल फैलावजल फैलावकई प्रकार की यांत्रिक एंव वानस्पतिक विधियों का प्रयोग करके वर्षाजल अपवाह को ढ़लान से समतल क्षेत्रों में मोड़ा जाता है। जहां अपवाह जल ज्यादा भूमि क्षेत्र में फैलकर भूमि में वर्षा जल रिसाव को बढ़ावा देता है। उपरोक्त उद्देश्यों से बनाई गई संरचनाओं को जल फैलाव (Water spreaders) कहते है।

विपथक बंध (Diversion bunds) / नालियां

ईट को सिमेंट द्वारा चुनाई कर बनाया गया एक विपथक बंधईट को सिमेंट द्वारा चुनाई कर बनाया गया एक विपथक बंधइनका निर्माण वर्षाजल अपवाह को सुरक्षित जल संग्राहक तालाबों / बांधो में पहुंचाना होता है। ये एक प्रकार की नालियां होती है जिन्हें ढलान के निचले हिस्से में 0.5 प्रतिशत से 1.0 प्रतिशत तक का ढाल देकर बनाया जाता है। यह जल संग्रहण तालाबों (Water harvesting ponds) का अभिन्न हिस्सा है। विपथक बंधों को स्थायित्व प्रदान करने के लिये सिमेन्ट लाईनिंग, ईंट की दीवार अथवा घास पर्त का प्रयोग किया जाता है

टांके

चौकोर पत्थरो को सिमेंट से चुनकर बनाया गया एक सुव्यवस्थित टंकाचौकोर पत्थरो को सिमेंट से चुनकर बनाया गया एक सुव्यवस्थित टंकासतही अपवाह को भंडारित करने वाली एक ढंकी हुई भूमिगत सरंचना जिसे स्थानीय भाषा मं टंका कहते है। इस प्रकार के टंके भारत के शुष्क प्रदेशों में अधिकांश रूप से प्रयोग में लाये जाते है। टंका 3 से 4 मी. व्यास का एक गोल गङ्ढा खोदकर उसके आधार एंव किनारे की दीवारों को 6 मी.मी. मोटे लाईम मोर्टार या 3 मी.मी. मोटे सिमेंट मोर्टार से प्लास्टर किया जाता है। टंकों का निर्माण पत्थर अथवा ईट की दीवार बनाकर भी किया जाता है परन्तु ऐसे टंकों की निर्माण लागत ज्यादा आती है।

खोदकर तालाबों का निर्माण एंव भंडारण टंकियां

खोदकर बनाया गया तालाबखोदकर बनाया गया तालाबखोदकर बनाए गये तालाबों का निर्माण सामान्यतया समतल क्षेत्रों में किया जाता है। तालाब के निर्माण के लिये क्षेत्र के सबसे नीचले हिस्से का चुनाव किया जाता है जहां वर्षा जल अपवाह को आसानी से ले जाया जा सके। सर्वप्रथम आवश्यकतानुसार तालाब की सीमारेखा निर्धारित कर खुदाई शुरू की जाती है और खुदाई की गई मिट्टी को तालाब के चारों तरफ एक मजबूत मेंड के रूप में जमाकर रोलर द्वारा ठीक प्रकार दबाया जाता है। तालाब में अन्दर पानी जाने एंव आवश्यकता से अधिक पानी को बाहर निकालने के लिये उचित प्रबंध करना चाहिए तथा दोनों रास्तों को यांत्रिक एवं वानस्पतिक विधियों द्वारा मजबूती एंव स्थिरता प्रदान करनी चाहि

आवरण फसल (Cover Crop) एंव पलवार (Mulching)

फलों के बाग में दो लाइनो के बीच आवरण फसलफलों के बाग में दो लाइनो के बीच आवरण फसलआवरण फसल का प्रयोग उन फसलों में किया जाता है जिनकी 2 लाइनों के बीच काफी खाली जगह होती है जो वर्षा ऋतु में मृदा अपरदन एवं पोषक तत्व क्षरण को बढ़ावा देती है। इस खाली जगह में कोई कम ऊचांई एंव उथली जड़ों वाली दाल वर्गीय

समोच्च खेती (Contour farming)

सुव्यवस्थित समोच्च खेतींसुव्यवस्थित समोच्च खेतींसमोच्च खेती क्षरण नियंत्रण, नमी सरंक्षण एंव फसल उत्पादकता बढ़ाने का एक आसान, प्रभावशाली एंव कम लागत वाली विधि है। इसमें फसल सबंधी कार्य जैसे हल चलाना, बीज बोना समोच्च पंक्तियों के साथ करते है। इस प्रकार समोच्च पंक्तियों मे

समोच्च खाईयां (Contour ditching)

समोच्च खाईयांसमोच्च खाईयांएक समान अन्तराल पर समोच्च रेखा के साथ साथ नीचे दिखाए गये चित्रानुसार खाईयां बनाई जाती है जिनमें वर्षा अपवाह इकट्ठा होकर भूमि मे नमी संरक्षण (Moisture conservation) के साथ साथ मृदा अपरदन को भी रोकता है।

भूमि समतलीकरण (Land leveling)

भूमि समतलीकरणभूमि समतलीकरणइस तकनीक के अन्तर्गत हल्के ढलान वाली उबड़-खाबड़ भूमि को कृषि उपकरणों की सहायता से समतल कर कृषि योग्य बनाया जाता है। भूमि का समतलीकरण मिट्टी के कटाव को रोकने के साथ-साथ भूमि में नमी का भी वितरण बराबर करती है। समतलीकरण कृषि कार्य हेतु उपयुक्त आधार भी प्रदान करती है।