शेखावटीः जैविक खेती और बाजार प्रणाली

Author: 
अभिषेक रंजन सिंह
Source: 
चौथी दुनिया, 05 अक्टूबर 2011

प्रशिक्षण शिविरों के माध्यम से किसानों को जैविक खेती की पद्धति का बारीक प्रशिक्षण दिया गया। नतीजतन, आज शेखावाटी का पूरा इलाका अर्द्ध रेगिस्तान में हरित क्षेत्र की तरह हो गया है। आज यहां दूर-दूर तक फसलें लहलहाती नजर आती हैं। खाद्यान्नों में दलहन और तिलहन ही नहीं, बल्कि हरी सब्जियां भी बहुतायत में पैदा हो रही हैं। फाउंडेशन की कोशिशों के परिणाम इतने उत्साहवर्द्धक हैं कि साल के बारहों महीने शेखावाटी क्षेत्र में पैदा हुई हरी सब्जियां मसलन टमाटर, बैगन, हरी मिर्च, प्याज, लहसुन, गाजर, करेला एवं मटर आदि दिल्ली और मुंबई के बाजारों में सीधे पहुंच रही हैं।

इस खबर के स्रोत का लिंक: 
http://www.chauthiduniya.com

प्रश्न. खेत खाली है जुताई करके छोड दें। उसमें कुछ मिलाना तो नहीं है।

उत्तर. जी हॉ गहरी जुताई करके खेत को खाली छोड दें अभी कुछ मिलाने की आवश्यकता नहीं है।

प्रश्न. मिट्टी की जॉच के लिए क्या करे, कहॉ होगी।

उत्तर खाली खेत से 5-6 जगहों से नमूना लेकर, उसको अच्छी तरह से मिलाकर आधा किग्रा मिट्टी का नमूना आप अपने जनपद के मृदा परीक्षण प्रयोगशाला में भेजें।

प्रश्न. जैविक खाद कहॉ मिल सकती है।

उत्तर क्षेत्रीय मृदा परीक्षण प्रयोगशाला, आलमबाग, निकटतम सहकारी समिति और किसी अच्छे बीज विक्रेता के पास मिल जायेगी। साथ ही इफको किसान सेवा केन्द्रों से सम्पर्क कर सकते हैं।

प्रश्न. सूरजमुखी में सिंचाई कब-कब महत्वपूर्ण है।

उत्तर पहली सिंचाई बोने के 20 से 25 दिन बाद आवश्यक है। फूल निकलते समय तथा दाना भरते समय भूमि में पर्याप्त नमी होनी चाहिए।

प्रश्न. ढैचा बोना है प्रति है बीज की मात्रा क्या होगी।

उत्तर हरी खाद हेतु बीज की मात्रा 45-50 कि.ग्रा. प्रति हेक्टेयर पर्याप्त होती है। इसी प्रकार ढैंचा बीज उत्पादन हेतु 20-25 किग्रा. प्रति हेक्टेयर की दर से बीज पर्र्याप्त होता है। ऊसर भूमि में बीज की मात्रा बढ़ाकर सवा गुना कर लें।

प्रश्न. गांव में पुआल ज्यादा है क्या गन्ने में फैलाकर सिचाई कर दे तो लाभ होगा।

उत्तर जी हॉ फायदा होगा इससे पानी गर्मी में कम उड़ेगा तथा पुआल सड़कर खाद का भी काम करेगा।

प्रश्न. कोनोवीडर क्या है।

उत्तर एस.आर.आई. पद्धति से धान की खेती में खरपतवार नियंत्रण हेतु प्रयोग किया जाने वाला यह कृषि यन्त्र है।

प्रश्न. लेजर लेवलर क्या है। क्या प्रदेश में उपलब्ध है।

उत्तर खेत को समतल करने हेतु आधुनिक कृषि यन्त्र है। जो प्रदेश की समस्त भूमि संरक्षण इकाईयों पर उपलब्ध है।