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रिसाइक्लिंग में अव्वल ताइवान

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नवोदय टाइम्स, 14 जनवरी, 2018

यूरोपीय भले ही रिसाइक्लिंग लायक चीजों तथा गलने वाले कचरे को अलग-अलग जमा करने की आदत पर गर्व महसूस करते हों परन्तु इस मामले में ताइवान के लोगों से आगे कोई नहीं है।

सच दिखाने पर सत्ता विरोधी जमात में हो जाएँगे शामिल

Author: 
अनिल अश्विनी शर्मा
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डाउन टू अर्थ, जनवरी 2018

संस्कृति और समाज को सत्ता के एकहरे असहिष्णु तरीके पेश करने के खिलाफ जो आवाज उठी उसे प्रतिरोध की पहचान मिली। सरकार के प्रचार के परदे को हटाकर गैरबराबरी, अत्याचार और भ्रष्टाचार के सवाल उठाने वाले सिनेमा को प्रतिरोध के सिनेमा का खिताब मिला। इस सिनेमा को आम मध्यमवर्गीय दर्शक नहीं मिलते हैं पर यह सत्ता के गलियारों में हलचल मचा देती है। मई 2014 के बाद देश में जो स्वच्छता अभियान का राग गाया जा रहा है उसे मात्र एक फिल्म “कक्कूस” से बेसुरा होने का खतरा पैदा हो गया। तमिल भाषा में कक्कूस का अर्थ होता है शौचालय। जहाँ सोच वहीं शौचालय का राग अलापने वाले प्रशासन को कक्कूस की सोच से इतना डर लगा कि इस फिल्म को प्रतिबन्धित कर दिया गया। वजह यह कि सरकारी प्रचारों के इतर दिव्या भारती सरकार से सवाल पूछ रही थी कि आम नागरिकों की गन्दगी साफ करने के लिये मैनहॉल में उतरे सफाईकर्मी की मौतों का जिम्मेदार कौन है? क्या ये हमारे देश के नागरिक नहीं हैं , क्या इनके बुनियादी अधिकार नहीं हैं? सिनेमा के पर्दे पर नीतियों से टकराते से सवाल तमिलनाडु पुलिस को पसन्द नहीं आये और राज्य पुलिस ने उनका उत्पीड़न शुरू किया। सत्ता के प्रतिबन्ध के बाद दिव्या ने सोशल मीडिया का मंच चुना और फिल्म को यूट्यूब पर डाल दिया। आज दिव्या देश के कोने-कोने में घूम जमीनी दर्शकों को यह फिल्म दिखा सत्ता के दिखाए सच और जमीनी हकीकत का फर्क दिखा रही हैं। सत्ता से सवाल पूछती साहसी फिल्मकार दिव्या भारती से अनिल अश्विवी शर्मा के सवाल…

शहर को बनाया जायेगा पॉलिथीन मुक्त

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नवोदय टाइम्स, 10 जनवरी, 2018

नोएडा : शहर को पॉलिथीन मुक्त बनाने के लिये प्राधिकरण ने कमर कस ली है। इसके लिये साप्ताहिक बाजारों में जाँच अभियान चलाया जायेगा। अभियान को सफल बनाने के लिये 10 नोडल अधिकारी बनाये गये हैं।

प्लास्टिक कचराप्लास्टिक कचरा इनके ऊपर दो सुपर नोडल अधिकारी बनाये गये हैं। वहीं परियोजना अभियंता आरएस यादव को समन्वयक अधिकारी बनाया गया है। 15 जनवरी से अभियान की शुरुआत की जायेगी। इसकी जानकारी सिटी मजिस्ट्रेट व प्रदूषण विभाग को दी गई है।

वहीं, पॉलिथीन का प्रयोग करने व गन्दगी फैलाने पर पाँच हजार का जुर्माना लगाया जाएगा। प्रतिदिन की रिपोर्ट अधिकारियों को प्राधिकरण को देनी होगी।

बताते चलें कि शहर में साप्ताहिक बाजारों में दुकानदार बड़े पैमाने पर पॉलिथीन का प्रयोग कर रहे हैं। साथ ही बाजार समाप्त होने के बाद वहाँ गन्दगी का आलम रहता है। इसके निस्तारण के लिये प्राधिकरण विशेष अभियान चलाने जा रहा है। अभियान के तहत साप्ताहिक बाजारों में पॉलिथीन के प्रयोग को बन्द करने के अलावा जिन स्थानों पर पॉलिथीन बनाने या बेचने का काम होता है वह मानकों के अनुसार हो। अभियान के तहत पहला सुपर नोडल अधिकारी एके जैन को बनाया गया है।

इनका कार्य वर्क सर्किल एक से वर्क सर्किल पाँच तक का पूर्ण ब्यौरा प्रतिदिन के हिसाब से तैयार करना होगा साथ ही निगरानी करना भी।

वहीं, दूसरा सुपर नोडल अधिकारी एमसी मित्तल को बनाया गया है। यह वर्क सर्किल छह से वर्क सर्किल 10 तक के क्षेत्र में लगने वाले साप्ताहिक बाजारों व दुकानों का निरीक्षण करेंगे। इनका मुख्य ध्यान गन्दगी पर भी होगा।

अव्यवस्था से जुड़ा है कचरा मुक्ति का सवाल


कहने को दिल्ली में दो साल से पहले से पॉलिथीन पर बंदिश है। लेकिन वह केवल दिखावा है और आज भी बेरोकटोक 585 टन के करीब प्लास्टिक कचरा रोजाना निकल रहा है। इसमें मेडीकल और इलेक्ट्रॉनिक कचरा प्रदूषण में और जहर घोल रहा है। यह पानी को प्रदूषित करने में अहम भूमिका निभा रहा है। अब सरकार दिल्ली में प्लास्टिक से ऊर्जा बनाने का दावा कर रही है। सरकार की मानें तो इससे ठोस प्लास्टिक से होने वाले नुकसान से बचा जा सकेगा। बीते दिनों इंडोनेशिया में खूबसरती के लिये विख्यात और पर्यटकों की पसन्द वाले बाली में कूड़े के कारण स्थानीय प्रशासन को आपात स्थिति की घोषणा करनी पड़ी। इंडोनेशिया में ताड़ के पेड़ों से घिरा रहने वाला बाली का समुद्री तट समुद्र में सर्फिंग और तट पर धूप सेंकने के शौकीन पर्यटकों के लिये लम्बे समय से आकर्षण का केन्द्र रहा है। इंडोनेशिया संयुक्त राष्ट्र संघ के पर्यावरण की ‘क्लीन सी मुहिम’ में शामिल 40 देशों के संगठन में शामिल है।

इस मुहिम का एकमात्र लक्ष्य समुद्र को दूषित करने वाले प्लास्टिक के कचरे से मुक्ति दिलाना है। बाली द्वीपों के लिये मशहूर दुनिया के पर्यटकों की पहली पसन्द के रूप में जाना जाता है। 17 हजार से अधिक द्वीपों का यह द्वीपसमूह समुद्री कचरा पैदा करने वाले देशों में चीन के बाद दूसरे स्थान पर है। कारण यहाँ पर सालाना 12.9 लाख टन कचरा पैदा होता है। इससे बीते दिनों यहाँ यह समस्या इतनी विकराल हो गई कि बाली में जिमबारन, कुटा और सेमियांक जैसे लोकप्रिय विख्यात समुद्री तटों सहित तकरीब छह किलोमीटर लम्बे समुद्र तट पर फैले कचरे के कारण प्रशासन को आपात स्थिति की घोषणा करने को बाध्य होना पड़ा।

सुविधा के साथ संकट बना प्लास्टिक


रसायनों से पहले प्लास्टिक का निर्माण प्रथम विश्वयुद्ध से पहले एल.एच. बैक लैंड नामक रसायनशास्त्री ने किया था। इस प्लास्टिक का नाम इन्हीं के नाम पर बेकेलाइट रखा गया। बेकेलाइट फेनॉल और फार्मोल्डिहाइड के संयोग से बनता है। बेकेलाइट से बनने वाली वस्तुओं का रंग गाढ़ा लाल, भूरा एवं काला होता है। इसका उपयोग तमाम वस्तुओं के निर्माण में किया जा रहा है। इस पर नित नए प्रयोग और अनुसन्धान हो रहे हैं, इसलिये नए-नए रूपों में प्लास्टिक मनुष्य जीवन का अभिन्न अंग बनता जा रहा है। मानव जीवनशैली का अनिवार्य हिस्सा बन गया प्लास्टिक जल, थल और नभ के लिये जबरदस्त पर्यावरणीय संकट बनकर पेश आ रहा है। हिमालय से लेकर धरती का हर एक जलस्रोत इसके प्रभाव से प्रदूषित है। वैज्ञानिकों का तो यहाँ तक दावा है कि अन्तरिक्ष में कबाड़ के रूप में जो 17 करोड़ टुकड़े इधर-उधर भटक रहे हैं, उनमें बड़ी संख्या प्लास्टिक के कल-पुर्जों की है। ये टुकड़े सक्रिय उपग्रहों से टकराकर उन्हें नष्ट कर सकते हैं। नए शोधों से पता चला है कि अकेले आर्कटिक सागर में 100 से 1200 टन के बीच प्लास्टिक हो सकता है। एक और नए ताजा शोध से ज्ञात हुआ है कि दुनिया भर के समुद्रों में 50 प्रतिशत कचरा केवल उन कॉटन बड्स का है, जिनका उपयोग कान की सफाई के लिये किया जाता है।

देश को कूड़ाघर बनाने के खिलाफ

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प्रयुक्ति, 04 जनवरी, 2018

पिछले ही साल केन्द्र सरकार की डम्पिंग नीति के खिलाफ एक गैर सरकारी संगठन की याचिका पर सुनवाई करते हुए देश की शिखर अदालत ने सरकार को जमकर डाँट लगाई थी। कोर्ट ने कहा था जनता की सेहत को दरकिनारकर पैसा कमाने की नीति किसी भी सूरत में सही नहीं है। सरकार की नीति के खिलाफ याचिका दायर करने वाले वकील संजय पारेख ने आरोप लगाया था कि केन्द्रीय शासन ने भारत में खतरनाक कूड़े को डम्प करने की इजाजत दी है, जिसका प्रतिकूल असर आम जनता की सेहत पर पड़ रहा है। पारेख का आरोप यह भी था कि इस मामले में सभी नियमों को ताक पर रखा गया है।

कूड़ा गौरतलब है कि वर्तमान सरकार ने सत्ता सम्भालते ही देश में स्वच्छता अभियान की शुरुआत की थी। इसी बात से अन्दाजा लगाया जा सकता है कि कूड़ा-कचरा और गन्दगी इस देश की कितनी बड़ी समस्या है। एक तरफ हम गन्दगी की समस्या से जूझ रहे हैं और दूसरी तरफ सरकार अपने ही देश को कूड़ाघर बनाकर पैसा कमा रही है। स्वच्छता का अभाव हमारी बड़ी आबादी के लिये अनगिनत बीमारियों का सबब बन रहा है।

विजयनगरम का 100 घंटों में 10,000 शौचालय बनवाने का अभियान

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कुरुक्षेत्र, अगस्त 2017

विजयनगरम में ‘100 घंटों में 10,000 शौचालय’ शीर्षक वाला स्वच्छता अभियान 14 मार्च को लक्ष्य से कुछ अधिक 10,449 शौचालयों के निर्माण के साथ सफलतापूर्वक सम्पन्न हो गया। समुदाय और जिला प्रशासन के प्रयासों की बदौलत इस अभियान के लिये चुनी गई 71 में से 44 ग्राम पंचायतों (जीपी) को खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) बनाया जा सका।

दो गड्ढे वाले शौचालय का निर्माण, दोनों गड्ढे एक मीटर की दूरी पर होने चाहिए 100 घंटों के अभियान का आरम्भ और समापन विजयनगरम मंडल के सनकरीपेटा नामक एक गाँव में जिला कलेक्टर (डीसी) श्री विवेक यादव ने परम्परागत पद्धतियों के साथ किया। उन्होंने बताया, “समाज के सभी तबकों-गैर-सरकारी संगठनों, सामाजिक संगठनों सामुदायिक संगठनों और यूनिसेफ से जुड़े लोगों ने इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और जिला प्रशासन को भरपूर समर्थन दिया।”

कूड़े के ईंधन से दौड़ेंगे वाहन

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राजस्थान पत्रिका, 26 दिसम्बर, 2017

कानपुर। सूबे में कचरे से ईंधन भी बनेगा। हाइवे के किनारे कचरे से सीएनजी बनाने के संयंत्र लगाए जाएँगे। प्रारम्भिक चरण में कानपुर-लखनऊ और लखनऊ-आगरा हाइवे का चयन किया गया है। कचरे से सीएनजी बनाने के लिये राज्य जैव ऊर्जा विकास बोर्ड तकनीकी मदद मुहैया कराएगा। इस योजना के लिये बायो सीएनजी कम्पनियों को न्योता भेजा गया है। कचरा उपलब्ध कराने वाले किसानों को पराली, गोबर आदि की कीमत भी मिलेगी। योजना के अगले चरण में तीन अन्य राजमार्गों का चयन किया जाएगा।

कूड़े का पहाड़

अब मुसीबत नहीं बनेगा कचरा


कचरे से ईंधन बनाने की योजना के तहत सरकार ने तय किया है कि प्रारम्भिक चरण में कानपुर-लखनऊ हाइवे और लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे के किनारे बायो सीएनजी बनाने के प्लांट स्थापित किए जाएँगे। इस वास्ते सरकार ने विभिन्न कम्पनियों को आमंत्रित किया है। करीब एक दर्जन कम्पनियों ने बायो सीएनजी बनाने में रुचि भी दिखाई है। योजना के तहत हाई-वे के किनारे खेतों की पराली, कृषि अपशिष्ट, गोबर और फल मंडियों के कचरे से बायो सीएनजी बनाई जाएगी, जोकि मौके पर ही बिक्री के लिये उपलब्ध रहेगी। बायो सीएनजी बनाने के लिये राज्य जैव ऊर्जा विकास बोर्ड से तकनीकी मदद मिलेगी, अलबत्ता योजना में इच्छुक कम्पनियों ने राज्य सरकार से पाँच साल तक सब्सिडी मुहैया कराने का आग्रह भी किया है।

आसान नहीं है कचरा प्रबंधन का सवाल


. बीते दिनों केन्द्र सरकार ने शहरों को कूड़े-कचरे से मुक्त करने के लिये कूड़े-कचरे के निस्तारण की चरणबद्ध मुहिम शुरू करने की घोषणा की है। इसके पहले चरण में देश की राजधानी दिल्ली सहित 20 प्रमुख शहरों को साल 2018 से पहले कूड़े-कचरे से मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा है। देखा जाये तो यह एक अच्छा कदम है और इसकी सर्वत्र प्रशंसा और सराहना की जानी चाहिए। गौरतलब है कि देश के शहरों में सालाना 6.2 करोड़ टन ठोस कचरा निकलता है। सरकार की मानें तो देश में प्रति वर्ष कचरे की मात्रा 1.3 फीसदी की वृद्धि दर के चलते देश में कचरे की समस्या ने भयावह रूप अख्तियार कर लिया है। इस समस्या का एकमात्र समाधान कचरे को अलग-अलग करके इसका निस्तारण ही है। आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय के स्वच्छ भारत अभियान के तहत पर्यावरण विज्ञान केन्द्र द्वारा शहरों में कचरे के स्रोत के स्थान पर ही उसका निस्तारण किये जाने की योजना है। इससे जाहिर होता है कि इस समस्या ने समूचे देश को अपनी चपेट में ले लिया है। केन्द्र का यह अभियान दिल्ली के अलावा पटना, गया, पूना, इंदौर, गंगटोक और वाराणसी सहित देश के 20 शहरों में एक साथ शुरू किया जायेगा।