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सिंचाई के अभाव में अब नहीं सूखने दिए जाएंगे बुन्देलखण्ड के खेत

Source: 
दैनिक भास्कर, 21 जून 2017

उत्तर प्रदेश के सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह से ‘दैनिक भास्कर’ की विशेष बातचीत

लखनऊ। प्रदेश के किसानों को मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध कराया जाना योगी आदित्यनाथ सरकार की प्राथमिकता में शामिल है। तीन साल पूरी कर चुकी केंद्र की नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सरकार ने किसानों को खाद-बिजली के अलावा सिंचाई आदि के संबंध में जो सुविधाएँ मुहैया कराई हैं, उन्हीं को आगे बढ़ाते हुए राज्य की योगी आदित्यनाथ सरकार ने संकल्प लिया है कि आने वाले दिनों में किसानों की फसल सिंचाई के अभाव में सूखने नहीं दी जाएगी। कर्जमाफी के बाद किसानों को सिंचाई सुविधाएँ बढ़ाने और उनमें रियायत दिये जाने की गरज से सरकार जल्द ही कई महत्त्वपूर्ण निर्णय लेने जा रही है। किसानों के सम्बंध में सरकार की आगामी योजनाओं को लेकर उत्तर प्रदेश के सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह से दैनिक भास्कर प्रतिनिधि योगेश श्रीवास्तव ने बात की-

सिंचाई को लेकर सरकार की क्या, किन योजनाओं को मूर्तरूप देने जा रही है?

नेतृत्व और निष्ठा का संकट

Author: 
सुष्मिता सेनगुप्ता
Source: 
डाउन टू अर्थ, मार्च 2017

अन्ना हजारेअन्ना हजारेएक तरफ विफल होता सुखोमाजरी है तो दूसरी तरफ रालेगण सिद्धि की आदर्श गाँव की छवि पर सवालिया निशान लग रहे हैं। जल संचयन, सम्भरण व संरक्षण की मिसाल रहे अन्ना हजारे के इस गाँव में टैंकरों से पानी की आपूर्ति भावी संकट का संकेत है? अन्ना हजारे ने जल संचयन के लिये विख्यात गाँवों की चुनौतियों के बारे में सुष्मिता सेनगुप्ता के साथ विस्तार से बातचीत की। प्रस्तुत हैं इसके प्रमुख अंश :

सरकार ने अनेक परियोजनाओं में आपकी सोच को अंगीकार किया, उन पर अमल लिया लेकिन बाकी परियोजनाएँ रालेगण सिद्धि जितनी सफल नहीं रही हैं। ऐसा क्यों?
इस तरह की किसी भी योजना, परियोजना के सफल होने के लिये जरूरी है कि हमारे पास मजबूत नेतृत्व हो, एक मजबूत नेता हो। रालेगण सिद्धि प्रयोग सफल हुआ क्योंकि वहाँ आन्दोलन की अगुवाई करने के लिये सही नेतृत्व रहा। गाँव वालों की पूरी आस्था व निष्ठा इस तरह के नेता में होनी चाहिए। इसके लिये नेता को निःस्वार्थ भाव से काम करना चाहिए, वह भ्रष्ट नहीं हो और अपने जीवन में अच्छे सिद्धान्तों का पालन करने वाला हो। रालेगण सिद्धि जैसे प्रयोगों के लिये नागरिकों को जल संचयन से लेकर सामाजिक सुधारओं व आजीविका कमाने के लिये विभिन्न पहलुओं पर काम करना पड़ता है। ऐसे प्रयोगों की भारी आलोचना भी हो सकती है। ऐसी परियोजना के नेता में आलोचनाओं का सामना करने का साहस होना चाहिए।

पिछली गर्मियों में रालेगण सिद्धि गाँव में भी टैंकरों से जल आपूर्ति की गई। अपनी नियमित जलापूर्ति बनाए रखने या जल संचयन के लिहाज से रालेगण सिद्धि की राह कहाँ गलत रही है?

बिना विज्ञान के बढ़ रही है प्राकृतिक आपदाएँ - श्री वल्दिया


जियोलॉजिस्ट खड़ग सिंह वल्दिया के साथ प्रेम पंचोलीजियोलॉजिस्ट खड़ग सिंह वल्दिया के साथ प्रेम पंचोलीपिछले दिनों उत्तरभारत में आये भूकम्प के बारे में वरिष्ठ भू-वैज्ञानिक के. एस. वल्दिया ने दो-टूक कहा कि मध्य हिमालय में नव ढाँचागत विकास के बारे में सरकारों को एक बार फिर से सोचना चाहिए। वे कई वर्षों से सरकार को ऐसी प्राकृतिक आपदा के बारे में सचेत कर रहे हैं कि देश का मध्य हिमालय अभी शैशव अवस्था में है। यहाँ पर बाँध, भवन व सड़क जैसे नव निमार्ण को बिना वैज्ञानिक परीक्षण के नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार में बैठे जनता के नुमाइन्दे भी अपनी प्रजा की माँग को भूलाकर ऐसी नीति का समर्थन कर देते हैं जो बाद में जन विरोधी हो जाती है।

अच्छा हो कि मध्य हिमालय के परिप्रेक्ष्य में ‘लोक ज्ञान और विज्ञान’ को विकास के बाबत महत्त्व दिया जाना चाहिए। उत्तराखण्ड में भूकम्प का गढ़ बनता ही जा रहा है। माना प्राकृतिक आपदाओं ने यहाँ घर बना लिया हो। प्राकृतिक संसाधन होने के बावजूद भी लोग यहाँ प्यासे हैं? ऐसा मालूम पड़ता है कि प्रकृति व संस्कृति लोगों से मोहभंग हो चली हो जैसे सवालों का जवाब उन्होंने बेबाकी से दिया है। प्रस्तुत है उनसे बातचीत के अंश-

उत्तराखण्ड में भूकम्प के खतरे बढ़ते ही जा रहे हैं।

शब्दों की चौकीदारी संभव नहीं-अनुपम मिश्र

Author: 
संजय तिवारी
Source: 
विस्फोट डॉट कॉम
अनुपम मिश्रअनुपम मिश्रअनुपम मिश्र पानी और पर्यावरण पर काम करने के लिए जाने जाते हैं लेकिन उनकी सर्वाधिक चर्चित पुस्तक आज भी खरे हैं तालाब के साथ उन्होंने एक ऐसा प्रयोग किया जिसका दूरगामी दृष्टि दिखती है। उन्होंने अपनी किताब पर किसी तरह का कापीराईट नहीं रखा। इस किताब की अब तक एक लाख से अधिक प्रतियां प्रकाशित हो चुकी हैं। मीडिया वर्तमान स्वरूप और कापीराईट के सवाल पर हमने विस्तृत बात की। यहां प्रस्तुत है बातचीत के प्रमुख अंश-

कापीराईट को लेकर आपका नजरिया यह क्यों है कि हमें अपने ही लिखे पर अपना दावा (कापीराईट) नहीं करना चाहिए?
कापीराईट क्या है इसके बारे में मैं बहुत जानता नहीं हूं। लेकिन मेरे मन में जो सवाल आये और उन सवालों के जवाब में मैंने जो जवाब तलाशे उसमें मैंने पाया कि आपका लिखा सिर्फ आपका नहीं है।
इस खबर के स्रोत का लिंक: 
http://visfot.com

जिद से बदल दी आबोहवा

Author: 
उमेश कुमार राय

जिन हाओ के अभियान की सराहना करते पदाधिकारीजिन हाओ के अभियान की सराहना करते पदाधिकारीजेजांग चीन का एक प्रान्त है जो कुछ वर्ष पहले तक प्रदूषण की गिरफ्त में था। फैक्टरियों से निकलने वाली गन्दगी ने इस प्रान्त की सूरत बिगाड़ दी थी। आसपास की नदियों की भी दुर्दशा थी। असल में ऐसा इसलिये हुआ था क्योंकि इस प्रान्त में उद्योगीकरण तेज रफ्तार से हुआ था।

फैक्टरियाँ लगीं तो उससे निकलने वाली गन्दगी नदियों में डाली जाने लगी। साथ ही इससे निकलने वाले धुएँ और अन्य कचरों में यहाँ के पर्यावरण को बहुत नुकसान पहुँचाया था। इस प्रान्त में रहने वाले लोग पर्यावरण में आये इस बदलाव को महसूस कर पा रहे थे। इन्हीं लोगों में थे-जिन हाओ और जुनहुआ रुआन।

जिन हाओ जेजांग यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे थे और जुनहुआ रुहान उसी यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर थे। दोनों ने मिलकर जेजांग में बदतर हुए हालात को सुधारने का प्रण लिया और ‘ग्रीन जेजांग’ नाम के एक एनजीओ की स्थापना की।

इस एनजीओ की स्थापना वर्ष 2000 में की गई थी। एनजीओ के प्रयास और स्थानीय लोगों के सहयोग से जेजांग की आबोहवा में काफी बदलाव आया है। बेमिसाल काम की बदौलत ही ग्रीन जेजांग को 16000 एनजीओ की सूची में सबसे ऊपर जगह मिली है। जिन हाओ की मानें तो यह काम बहुत आसान नहीं था क्योंकि सरकार का नजरिया एनजीओ को लेकर बहुत अच्छा नहीं था लेकिन ईमानदार कोशिश से सफलता हाथ लगी।

प्रकृति और परम्परागत इल्म को बचा रहे हैं टेरो

Author: 
उमेश कुमार राय

पुरस्कार लेते टेरो मस्टोनेनपुरस्कार लेते टेरो मस्टोनेनस्नोचेंज कोअॉपरेटिव के टेरो मस्टोनेन को इंटरनेशनल रीवर फाउंडेशन की ओर से इस वर्ष का ‘इमर्जिंग रीवर प्रोफेशनल अवार्ड’ दिया गया है।

टेरो को यह पुरस्कार नई दिल्ली में आयोजित तीन दिवसीय 19वें इंटरनेशनल रीवर सिम्पोजियम में प्रदान किया गया। टेरो उत्तरी ध्रुवीय क्षेत्र में नदियों और देशज लोगों के पारम्परिक इल्म और उनकी लोककलाओं को सहेजने का काम करते हैं। उन्होंने भूगोल में डाक्टरेट किया और इस्टर्न फिनलैंड यूनिवर्सिटी में शोध कर रहे हैं। वे फिनलैंड के एक बेहद छोटे गाँव में अपनी पत्नी, बच्चे, दो बकरियाँ और एक दर्जन मुर्गे-मुर्गियों के साथ रहते हैं।

इस अनूठी मुहिम के लिये उन्हें अब तक कई अन्तरराष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं। इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी) ने टेरो के साथ विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से बातचीत की। पेश है बातचीत के मुख्य अंश-


आपका संगठन कितने वर्षों से काम कर रहा है और क्यों?
आर्कटिक (उत्तरी ध्रुवीय क्षेत्र) में जलवायु परिवर्तन का बहुत असर देखा जा रहा है। जलवायु परिवर्तन के कारण नदियों और मानव समाज का अस्तित्व खतरे में है। जलवायु परिवर्तन के बीच नदियों को संरक्षित रखने और देशज लोगों के पर्यावरण से जुड़े परम्परागत इल्म को संजोने के लिये इस संगठन की स्थापना की गई और इसी पर हम काम कर रहे हैं। इस संगठन की स्थापना वर्ष 2000 में की गई थी। हम परम्परागत जानकारियों के जरिए जलवायु परिवर्तन से जैवविविधता और पर्यावरण में आ रहे बदलावों का अध्ययन कर रहे हैं। साथ ही इन परम्परागत जानकारियों के जरिए जैवविविधता को बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।

नदियों से मित्रता का मिला ईनाम

Author: 
उमेश कुमार राय

पुरस्कार लेते बफेलो नियाग्रा रीवरकीपर के प्रतिनिधिपुरस्कार लेते बफेलो नियाग्रा रीवरकीपर के प्रतिनिधिबफेलो नियाग्रा रीवरकीपर एक सामुदायिक संगठन है। इस संगठन को इस साल थीस इंटरनेशनल वाटरप्राइज अवार्ड दिया गया है। इंटरनेशनल रीवर फाउंडेशन की ओर से आयोजित तीन दिवसीय 19वें इंटरनेशनल रीवर सिम्पोजियम में संगठन के प्रतिनिधि जे. बर्नोस्की और सुजैन कोर्नाकी को यह पुरस्कार सौंपा गया। संगठन को यह अवार्ड नदियों और नदियों के बेसिन के संरक्षण, उनकी सुरक्षा के लिये दिया गया है। बतौर पुरस्कार 2 लाख ऑस्ट्रेलियन डॉलर दिया गया। पिछले वर्ष इस संगठन को नॉर्थ अमेरिकन रीवरप्राइज अवार्ड दिया गया था।

यहाँ यह भी बताते चलें कि इंटरनेशनल रीवर फाउंडेशन ने इस पुरस्कार की शुरुअात 1999 से की थी और अब तक 15 संगठनों को यह पुरस्कार मिल चुका है।

केन-बेतवा लिंक बुन्देलखण्ड को बाढ़-सुखाड़ में डुबोकर मारने का काम है- राजेन्द्र सिंह


अरुण तिवारी द्वारा जलपुरुष राजेन्द्र सिंह से बातचीत पर आधारित साक्षात्कार

राजेन्द्र सिंहराजेन्द्र सिंह सुना है कि पानी के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार आजकल आपके मार्गदर्शन में काम रही है?
मेरा सहयोग तो सिर्फ तकनीकी सलाहकार के रूप में है। वह भी मैं अपनी मर्जी से जाता हूँ।

उत्तर प्रदेश सरकार अपने विज्ञापनों में आपके फोटो का इस्तेमाल कर रही है। ऐसा लगता है कि आप अखिलेश सरकार से काफी करीबी से जुड़े हुए हैं। पानी प्रबन्धन के मामले में क्या आप सरकार के कामों से सन्तुष्ट हैं?

कुछ काम अच्छे जरूर हुए हैं। लेकिन सरकार के प्लान ऐसे नहीं दिखते कि वे राज्य को बाढ़-सुखाड़ मुक्त बनाने को लेकर बनाए व चलाए जा रहे हों। बाढ़-सुखाड़ तब तक आते रहेंगे, जब तक कि आप पानी को ठीक से पकड़ने के काम नहीं करेंगे।

साक्षात्कार: जानें मोबाइल पर पानी में फ्लोराइड की मात्रा

Author: 
मनोरमा

सैमुअल राजकुमारसैमुअल राजकुमारजल प्रदूषण मानवता के सबसे बड़े संकटों में से एक ​है खासतौर पर प्रदूषित पेयजल। पूरी दुनिया के लोग पेय की कमी और दूषित पेयजल की समस्या से जूझ रहे हैं। आज पूरे विश्व की 85 प्रतिशत आबादी सूखे के हालात में रह रही है और कुल 78.3 करोड़ लोगों की पहुँच में साफ पानी नहीं है।

भारत की बात करें तो पानी से सम्बन्धित कुछ आँकड़ों पर नजर डालना बेहद जरूरी है जैसे दुनिया की 16 प्रतिशत आबादी भारत में बसती है लेकिन विश्व के कुल जल संसाधन का केवल 4 प्रतिशत ही भारत के पास है। जबकि भारत ​में भूजल का दोहन पूरे विश्व में सबसे ज्यादा होता है यहाँ तक ​कि चीन भी इस मामले में हमसे पीछे है।

हाल के आँकड़ों के मुताबिक भारत की कुल एक चौथाई यानी लगभग 33 करोड़ आबादी पीने के पानी की कमी से जूझ रही है।