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कोसी के लिए समझदारी और सावधानी

जल-विद्युत विशेषज्ञ दीपक ग्यावलीजल-विद्युत विशेषज्ञ दीपक ग्यावलीजल-विद्युत विशेषज्ञ दीपक ग्यावली, नेपाल के पूर्व जल संसाधन मंत्री रह चुके हैं तथा नेपाल के जल संरक्षण फाउंडेशन के अध्यक्ष हैं। कोसी की बाढ़ और भविष्य की तैयारियों पर दीपक ग्यावली के बेवाक विचार

कोसी ने अपना तटबंध क्यों तोड़ा? मरम्मत कार्य के लिए कौन जिम्मेदार था, भारत या नेपाल?

दीपक ग्यावली : इस बात को समझने के लिए जरा पीछे मुड़कर देखना ज़रूरी है। तब हमें यह अनुभव होगा कि यह आपदा तीन बातों का नापाक मेल है: 1. इस प्रकार के जल-पारिस्थितिक शासन के लिए गलत टैक्नॉलोजी का चुनाव, 2. कोसी समझौते के परिणामस्वरूप गलत संस्थागत प्रबंध,

तीर्थ का एक अनमोल प्रसाद

जल मंदिर का प्रसादजल मंदिर का प्रसादश्री पद्रे


कर्नाटक राज्य के गडग में स्थित वरी नारायण मंदिर बहुत प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि कुमार व्यास ने इसी मंदिर में बैठकर महाभारत की रचना की। यह ऐतिहासिक मंदिर आज एक बार फिर से इतिहास रच रहा है। कई वर्षों में इस मंदिर के कुंए का पानी खारा हो गया था। इतना खारा कि यदि उस पानी में ताबें का बरतन धो दिया जाए तो वह काला हो जाता था। तब मंदिर के खारे पानी के निस्तार के लिए वहां एक बोरवैल खोदा गया। उस कुंए में पानी होते हुए भी उसका कोई उपयोग नहीं बचा था। बोरवैल चलता रहा। और फिर उसका पानी भी नीचे खिसकने लगा। कुछ समय बाद ऐतिहासिक कुंए की तरह यह आधुनिक बोरवैल भी काम का नहीं बचा। कुंए में कम से कम खारा पानी तो था। इस नए कुंए में तो एक बूंद पानी नहीं बचा। मंदिर में न जाने कितने कामों के लिए पानी चाहिए। इसलिए फिर एक दूसरा बोरवैल खोदा गया। कुछ ही वर्षों में वह भी सूख गया।

पहाड़ के माथे पर पानी से तिलक

दक्षिण कन्नडा के किसान ए महालिंगा नाईकदक्षिण कन्नडा के किसान ए महालिंगा नाईकमहालिंगा नाईक पोथी की इकाई-दहाई नहीं जानते लेकिन उन्हें पता है कि बूंदों की इकाई-दहाई सैकड़ा हजार और फिर लाख-करोड़ में कैसे बदल जाती है।

58 साल के अमई महालिंगा नाईक कभी स्कूल नहीं गये। उनकी शिक्षा दीक्षा और समझ खेतों में रहते हुए ही विकसित हुई। इसलिए वर्तमान शिक्षा प्रणाली के वे घोषित निरक्षर हैं। लेकिन दक्षिण कन्नडा जिले के अडयानडका में पहाड़ी पर 2 एकड़ की जमीन पर जब कोई उनके पानी के काम को देखता है तो

उत्तर प्रदेश के रूफ टाप रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रोफेशनल्स

डाटा टेक्नोसिस (इंजीनियर्स) प्रा०लि०, शान्तिमूर्ति सेवा संस्थान, हरियाली एच.जी.ओ., लक्ष्य, नरायन प्रगति आश्रम सेवा संस्थान उ.प्र., पहल जन विकास संस्थान लखनऊ, महाराण प्रताप शिक्षण प्रशिक्षण संस्थान, राष्ट्रीय एकता संस्थान, अर्चना सेवा संस्थान, मेसर्स आर्कीटेक प्लस, मातृभूमि सेवा संस्थान., सोसायटी फॉर इको सस्टेनेवल, डेवलपमेंट, ग्लोबल आइडियाज, प्रकाश फाउन्डेशन., प्रियदर्शनी ज्ञानोदय प्रशिक्षण समिति, गांधी, सूरत विकास संस्थान, एक्सनोस., जन कल्याण सेवा समिति, सील साइन्सटेक ट्रेडर्स., नेटवर्क फॉर इनटीग्रेटेड डेवलपमेंट, सीको एडक्टीइजर, संत कबीर स्कूल समिति के अलावा कई अन्य उत्तर प्रदेश के रूफ टाप रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रोफेशनल्स -


पानी के पत्रकार श्रीपद्रे से बातचीत - विकास पाण्डेय

श्रीपद्रेश्रीपद्रेश्रीपद्रे 70 के दशक से पानी की पत्रकारिता कर रहे हैं। 20 साल तक अदिके पत्रिका के मानद संपादक रहे। श्री पानी की रिपोर्टिंग करते हैं और लोग श्री के जरिए पानीदार भारत को समझते हैं। पत्रकारिता की पढ़ाई कहती है कि रिपोर्ट करने से पहले आपको विषय का चुनाव करना होता है। लेकिन जब आप पर्यावरण और गांव की रिपोर्टिंग करने जाते हैं तो यह सिद्धांत लागू नहीं होता। वहां आपको विषय की पहचान करनी होती है। पानी की पत्रकार श्रीपद्रे से बातचीत



क्या मुख्यधारा की पत्रकारिता पानी, पर्यावरण और गांव को वह महत्व दे रहा है जो उसकी जिम्मेदारी है?