शीशमबाड़ा प्लांट से पर्यावरण को खतरा

Author: 
ओमप्रकाश सती
Source: 
हिन्दुस्तान, 08 अप्रैल, 2018

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से नगर निगम को प्रस्ताव दिया गया है कि कूड़ा जमा करने वालों को इसकी छँटाई की ट्रेनिंग दिलवाये, जिससे कि वे घरों या अन्य जगहों से कूड़ा जमा करते वक्त उसकी छँटाई कर सकें। निगम की ओर से बोर्ड को बताया गया है कि शहर में करीब 130 कूड़ा बीनने वाले लोग हैं, जो निगम के लिये कूड़ा लाते हैं।

वेदों में प्रदूषण-समस्या का समाधान

Author: 
प्रो. ए.के. चोपड़ा
Source: 
गुरुकुल शोधप्रभा, जुलाई-सितम्बर, 2012

प्रो. ए.के. चोपड़ा1

पानीपानीवायु, अग्नि, जल, पृथ्वी, आकाश ये सृष्टि के आधारभूत पञ्च महातत्व हैं। इनमें वायु का महत्त्वपूर्ण स्थान है। अथर्ववेद में वायु को प्राण कहा है।2 प्राणशक्ति प्रदान करने वाला वायु है।3 यह वायु पिता के समान पालक, बन्धु के समान धारक, पोषक और मित्रवत सुख देने वाला है। यह जीवन देता है।4 वायु अमरत्व की निधि है। वह हमें जीवन प्रदान करता है।5 संहिताओं में कहा गया है कि यदि अन्तरिक्ष को प्रदूषण से मुक्त करके शान्ति की कामना करते हो तो सर्वप्रथम वायु को प्रदूषणरहित करके, उसकी शान्ति अत्यावश्यक है।6 ऋग्वेद का ऋषि कामना करता है कि प्रदूषण-मुक्त कल्याणकारी वायु मेरे चारों ओर बहे।7 वायु नीचे द्वार वाले (स्तर वाले) मेघ को अन्तरिक्ष और पृथ्वी की ओर प्रेरित करता है, उससे यह वायु सब औषधियों, वनस्पतियों और प्राणियों का राजा है क्योंकि जैसे कोई कृषक फलने और फूलने के लिये यव (जौ) आदि को जल से सींचता है, वैसे इसके कारण उत्पन्न वर्षा सम्पूर्ण भूमि को तर करती है।8

प्रार्थना की गई है कि हे वायु! तुम औषधीय गुणों से युक्त ओस जल को प्राप्त कराओ और हानिकारक प्रदूषित वायु को हमारे मध्य से दूर ले जाओ। तुम ही शुद्ध एवं प्रदूषण-रहित होते हुए सम्पूर्ण औषधियों के भण्डार हो। इसलिये तुम्हें दिव्यशक्तियों का दूत कहा जाता है क्योंकि तुम्हीं सम्पूर्ण दिव्य शक्तियों से सम्पन्न, औषधीय तत्वों से युक्त हो।9

भूजल में आर्सेनिक प्रदूषण (Arsenic pollution in groundwater)

Source: 
राष्ट्रीय पेयजल एवं स्वच्छता मिशन उत्तर प्रदेश

सामान्यतः पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
(मोटीवेटर, हेल्थ वर्कर के उपयोग के लिये)

आर्सेनिकोसिसआर्सेनिकोसिस आर्सेनिक क्या है?
आर्सेनिक धातु के समान एक प्राकृतिक तत्व है। पेयजल, भोजन एवं वायु के माध्यम से मानव शरीर में एक निर्धारित मात्रा (0.05 मिग्रा./ली.) से अधिक पहुँच जाने पर यह मानव शरीर के लिये जहरीला हो जाता है।

हम कैसे कह सकते हैं/जान सकते हैं कि पेयजल में आर्सेनिक है?
दुर्भाग्यवश पेयजल में आर्सेनिक को देखा, चखा एवं सूँघा नहीं जा सकता। आर्सेनिक युक्त जल से भरा एक गिलास बिल्कुल वैसा ही दिखता है वैसा कि आर्सेनिक रहित जल से भरा गिलास। पानी में आर्सेनिक है या नहीं इसको पता करने का एक मात्र तरीका यह है कि पानी की जाँच की जाये।

आर्सेनिक प्रदूषण का स्रोत क्या है?
मुख्यतः आर्सेनिक प्रदूषण प्राकृतिक कारणों से होता है अर्थात हैण्डपम्प जिस स्ट्रैटा से पानी लेता है उसी में प्राकृतिक रूप से आर्सेनिक उपस्थित होता है। आर्सेनिक प्रदूषण मुख्यतः सक्रिय नदीय तंत्र से प्राकृतिक रूप से जुड़ा हुआ है और सामान्यतः बड़ी नदियों के बहाव क्षेत्र के मिट्टी में पाये जाते हैं।

आर्सेनिक भूजल में कैसे प्रवेश करता है?
यह भी भू-संरचना एवं भूजल की रासायनिक प्रकृति से जुड़ी हुई प्राकृतिक प्रक्रिया है।

और कहाँ-कहाँ आर्सेनिक प्रदूषण पाया गया?

एक खो गई नदी की तलाश

Author: 
दिनेश श्रीनेत

जलालपुर में सूखी सई नदीजलालपुर में सूखी सई नदीनदी की पहली स्मृतियों में ट्रेन की खिड़की से झाँकता धुँधलका कौंधता हैं। बचपन में पुल से गुजरती ट्रेन की धड़-धड़ सुनते ही हम उचककर खिड़की से झाँकते। लगता था ऊपर से लोहे के भारी-भरकम पिलर्स गिर रहे हैं। उनके गिरने की लयबद्ध आवाज आ रही है। हमारी ट्रेन भी उतनी ही तेजी से भाग रही होती थी।

पानी के प्रदूषण के लिये गंदे टैंक मुख्य कारण

Source: 
ग्राहक साथी, अक्टूबर-नवम्बर, 2016

परीक्षण निष्कर्षों से पता चलता है कि पानी की सीधी आपूर्ति रोगजनकों से मुक्त होती है
पीने का पानी या पेजयल वह पानी है जो मनुष्यों के इस्तेमाल के लिये पर्याप्त सुरक्षित होता है। पीने के पानी के साथ सबसे आम और बड़े पैमाने पर स्वास्थ्य से जुड़ा जोखिम मानव या जानवर मलमूत्र, विशेष रूप से मल के द्वारा सीधे या परोक्ष रूप से संक्रमण होना है। मल संदूषण कॉलिफॉर्म बैक्टीरिया, विशेष रूप से ई. कोलाई की उपस्थिति से निर्धारित होता है।

जल रोगजनकों से दूषित पानी को पीने या खाना बनाने के लिये प्रयोग किया जाता है तब यह हैजा, दस्त, टाइफाइड, अमोबायोसिस और पीलिया जैसे जलजनित रोग फैला सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों से पता चलता है कि भारत में हर साल दूषित पानी से 7,80,000 मौतें होती हैं।

 

संकट में चित्रकूट की लाइफ लाइन मन्दाकिनी

Author: 
जीतेन्द्र कुमार गुप्ता

मन्दाकिनी नदीमन्दाकिनी नदीजब से मानव सभ्यता का विकास हुआ है तब से हम पानी को जानते व समझते आए हैं ऐसा माना जाता है कि मानव सभ्यता का विकास नदियों के किनारे ही हुआ है तथा पला-बढ़ा विकसित हुआ है। इस तथ्य से जल व नदियों की महत्ता का अन्दाजा लगाया जा सकता है।

विश्व के अधिकतर प्रमुख शहर नदियों के किनारे ही बसे हैं क्योंकि नदियों से जीवन दायक जल तो मिलता ही है साथ ही यात्रा मार्ग तथा आजीविका के साधन भी उपलब्ध होते हैं पर अब इंसानी विकास की आँधी ने प्राकृतिक जलस्रोतों व नदियों के अस्तित्व को खतरे में लाकर खड़ा कर दिया है।

इसी स्थिति में बुन्देलखण्ड क्षेत्र के चित्रकूट में बहने वाली मन्दाकिनी नदी अब संकटमय स्थिति में नजर आ रही है। चित्रकूट से 15 किमी. दूर सती अनुसुइया से निकलने वाली यह नदी चित्रकूट, कर्वी से होते हुए बाँदा के राजापुर गाँव के पास यमुना में विलय हो जाती है। लगभग इस 50 किमी. के सफर में मन्दाकिनी कहीं नाले में तब्दील दिखाई देती है तो कहीं बिल्कुल सूखी हुई नजर आती है।

पहले यह नदी सदानीरा रही है और इसके 2003 की बाढ़ के रौद्र रूप के किस्से दूर-दूर तक फैले हुए हैं पर अब यह नदी नाले के रूप में सिकुड़ चुकी है। पूरे चित्रकट का लगभग 70% पीने का पानी इसी सप्लाई होता है। पर इसकी हालत को देखते हुए अब यह कितने दिन तक यह लोंगों की प्यास बुझाएगी कहा नहीं जा सकता। दिनों-दिन नदी के कैचमेंट एरिया में नयी-नयी इमारतें बनती नजर आती हैं जिससे इसके बहाव में तो फर्क आता ही है साथ ही नदी के पारिस्थितिकी में भी बदलाव आ रहा है और बड़ी बात यह है कि यह सब मानव स्वार्थ का ही उदाहरण है।

नदी का पौराणिक महत्त्व

बोतलबन्द पानी के खतरे


अन्तरराष्ट्रीय संस्थाओं ने इस सिलसिले में जो अध्ययन किये हैं, उनसे भी साफ हुआ है कि नल के मुकाबले बोतलबन्द पानी ज्यादा प्रदूषित और नुकसानदेह है। इस पानी में प्लास्टिक कणों के अलावा खतरनाक बैक्टीरिया इसलिये पनपे हैं, क्योंकि नदी और भूजल ही दूषित हो गए हैं। इन स्रोतों को प्रदूषण मुक्त करने के कोई ठोस उपाय नहीं हो रहे हैं, बावजूद बोतलबन्द पानी का कारोबार सालाना 15 हजार करोड़ से भी ज्यादा का हो गया है।

बर्बाद दिखता भविष्य

Source: 
डाउन टू अर्थ, मार्च 2018

सरकार तालाबों और झीलों की सबसे बड़ी दुश्मन बनी हुई है। इन अधिकतर तालाबों पर बंगलुरु नगर निगम, बंगलुरु विकास प्राधिकरण, उद्यान विभाग जैसी सरकारी संस्थाओं ने अतिक्रमण कर रखा है। नगर निगम ने धरमबुधी तालाब पर बस अड्डा बना दिया, सम्पांगी तालाब के एक हिस्से पर कांतीर्वा स्टेडियम बना दिया, जबकि बाकी हिस्से का अधिग्रहण सम्पानीरम नगर एक्स. कॉलोनी के लिये किया गया है।

खेतों से क्रोमियम को दूर भगाएगा बैक्टीरिया


सुन्दरबनसुन्दरबनपश्चिम बंगाल का सुन्दरबन क्षेत्र रिहायश के लिहाज से दुर्गम इलाकों में एक है। यहाँ करीब 40 लाख लोग रहते हैं। पानी से घिरे इस क्षेत्र के लोगों के दरवाजे पर साल भर मुश्किलों का डेरा रहता है। इसके बावजूद मुश्किलों से जूझते हुए जीवन बिताते हैं।