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भूजल पर अब क्रोमियम का भी कहर

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7 August09/ mahanagartimes.net
दिल्ली और वाराणसी में भी घुसपैठ कर चुका है क्रोमियम
नई दिल्ली। गंगा और यमुना के तटीय क्षेत्रों के भूजल में आर्सेनिक व फ्लोराइड के बाद अब क्रोमियम ने भी घुसपैठ कर दी है। पश्चिम बंगाल के बाद अब दिल्ली व वाराणसी में पेयजल में तय मात्रा से ज्यादा क्रोमियम मिलने लगा है। क्रोमियम युक्त पानी के प्रयोग से पेट की गड़बड़ी से लेकर कैंसर तक का खतरा है। आर्सेनिक व फ्लोराइड के ज्यादा इस्तेमाल से विभिन्न बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए अब क्रोमियम ने खतरे की घंटी बजा दी है। तय मानदंड से ज्यादा क्रोमियम मिला है

मेवात के गांवों का पानी हुआ जहरीला

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भास्कर न्यूज June 22, 2009
नूंह. मेवात के लोगों की प्यास बुझाने और उन्हें शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के सभी सरकारी प्रयास बेमानी साबित हो रहे हैं। सरकारी आंकड़े ही इस बात के गवाह हैं कि भीषण जल संकट से जूझ रहे मेवात को इससे निजात मिलने की संभावनाएं दूर-दूर तक दिखाई नहीं दे रही है। आलम यह है कि मेवात के पांच खंडों के 423 गांवों में से सिर्फ 57 गांव ही ऐसे हैं, जहां अच्छी गुणवत्ता का पीने योग्य भू-जल उपलब्ध है।

गंगाजल अमृत नहीं अब आर्सेनिक

मदन जैड़ा/ हिन्दुस्तान
नई दिल्ली, 15 जनवरी।
गंगा का पानी कभी सबसे स्वच्छ होता था इसलिए वेदों-पुराणों तक में कहा गया है-गंगा तेरा पानी अमृत। मान्यता थी कि इसे पीकर या इसमें डुबकी लगाकर बीमारियां दूर हो जाती हैं। लेकिन अब स्थिति उलट है। गंगा के इर्द-गिर्द बढ़ते शहरीकरण, उद्योग धंधों से निकलने वाले कचरे, प्रदूषणकारी तत्वों के बढ़ने के कारण गंगाजल में आर्सेनिक का जहर घुल गया है।

कीड़ों से पानी का परीक्षण

भास्कर न्यूज/भोपाल। अमरकंटक से निकलकर कोटेश्वर में समाप्त होने वाली नर्मदा के पानी की शुद्धता का परीक्षण कीड़ों के माध्यम से किया जा रहा है। बॉयोमानीटरिंग पद्धति से किसी नदी की शुद्धता जांचने का मप्र में यह पहला प्रयास है। इसके लिए मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने बॉयो विभाग के रिसर्च वैज्ञानिकों की एक तीन सदस्यीय टीम गठित की है। यह टीम साल भर में इस प्रयोग को पूरा कर विभाग को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। अभी तक जल प्रदूषण की जांच फिजियो केमिकल पद्धति से होती थी। इसमें पानी को बर्तन में भरकर लेबोरेटरी में लाया जाता है और वहां उसकी गुणवत्ता की जांच की जाती है। अब बायोमानीटरिंग पद्धति से रिसर्च वैज्ञानिक पानी की गहराई में जाकर वहां पाए जाने वाले कीड़ों की प्रजातियों के आधार पर पानी की शुद्घता जांच रहे हैं। इसे फिजियो केमिकल पद्धति से सटीक और सस्ता बताया जा रहा है।

भोपाल का पानी (भाग 2)

भास्कर न्यूज/भोपाल. राजधानी का भूमिगत जल भी प्रदूषण के खतरे से घिर गया है। स्वयं प्रदूषण नियंत्रण मंडल की एक रिपोर्ट में यह खतरनाक तथ्य सामने आया है। रिपोर्ट बताती है कि पानी में भारी तत्व इस हद तक बढ़ गए हैं कि भविष्य में बाहरी के साथ जमीन का पानी भी उपयोग के लायक नहीं बचने की आशंका है। मप्र विज्ञान सभा के सर्वेक्षण में भी यही स्थिति सामने आई है। उक्त रिपोर्ट की गंभीरता को देखते हुए प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने इस बात की जरूरत बताई है कि शहर में जल प्रबंधन के अधिक से अधिक उपाय करने होंगे। यह रिपोर्ट जल्द ही जिला प्रशासन सहित जिम्मेदार विभागों को सौंप दी जाएगी। इस रिपोर्ट का आधार मंडल द्वारा नियमित रूप से की जाने वाली पानी की जांच के संकलित आंकड़ों को बनाया गया है।

यह है रिपोर्ट में:

जलसंरक्षण के आसान तरीके

स्थान- जलगांव जिले में तालुका यावल का अदगांव, परोला तालुका का तितवी गांव और चालीसगांव तालुका का मलशेवगा गांव

उद्देश्‍य :-
कम कीमत पर घरेलू इस्तेमाल योग्य पानी उपलब्ध कराने, इसे गंदा होने से बचाने और साफ रखने के तरीकों को प्रोत्साहित करना जिसका सबसे बडा और सीधा असर बच्चों का स्वास्थ्य बेहतर रखने पर हो सके।

परिस्थिति :-

पानी के स्रोतों का संरक्षण -

अदगांव/ तालुका यावल/ जिला जलगांव

उद्देश्‍य:-

गांवों में पीने योग्य पानी के स्रोतों को स्थानीय स्तर पर प्रदूषणकारी मिश्रण से बचाने के उपाय सुनिश्चित करना

परिस्थिति :-

प्यास बुझाने की चुनौती

जल प्रबंधनजल प्रबंधनकिसी के लिए भी अपने बच्चों को हर जगह मिलने वाले पानी को पीने से रोकना हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है। बच्चों को यह समझाना मुश्किल है कि कौन-सा पानी पीने के लिए अच्छा होता है और कौन सा नहीं? शुरू से ही पानी मानवीय, सामाजिक और आर्थिक विकास का घटक रहा है। तमाम मानव सभ्यताएं नदी के किनारे ही विकसित हुई हैं। ताजे और खारे पानी की पर्याप्त आपूर्ति और प्रबंधन के बिना सामाजिक और आर्थिक विकास पूरा नहीं हो सकता। नि:संदेह पानी और विकास एक-दूसरे से गहरे जुड़े हैं।

पानी की गुणवत्ता बरकरार रखने के सर्वोत्तम उपाय

पीने योग्य जल के संरक्षण के तरीके -

ग्राम अदगांव, तालुका- यावल, जिला जलगांव

उद्देश्‍य : पानी के टैंक में कैल्शियम कार्बोनेट के जमाव को रोकने और बेहतर क्लोरीन परीक्षण विधि :