जलसंरक्षण के आसान तरीके

स्थान- जलगांव जिले में तालुका यावल का अदगांव, परोला तालुका का तितवी गांव और चालीसगांव तालुका का मलशेवगा गांव

उद्देश्‍य :-
कम कीमत पर घरेलू इस्तेमाल योग्य पानी उपलब्ध कराने, इसे गंदा होने से बचाने और साफ रखने के तरीकों को प्रोत्साहित करना जिसका सबसे बडा और सीधा असर बच्चों का स्वास्थ्य बेहतर रखने पर हो सके।

परिस्थिति :-

पानी के स्रोतों का संरक्षण -

अदगांव/ तालुका यावल/ जिला जलगांव

उद्देश्‍य:-

गांवों में पीने योग्य पानी के स्रोतों को स्थानीय स्तर पर प्रदूषणकारी मिश्रण से बचाने के उपाय सुनिश्चित करना

परिस्थिति :-

प्यास बुझाने की चुनौती

जल प्रबंधनजल प्रबंधनकिसी के लिए भी अपने बच्चों को हर जगह मिलने वाले पानी को पीने से रोकना हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है। बच्चों को यह समझाना मुश्किल है कि कौन-सा पानी पीने के लिए अच्छा होता है और कौन सा नहीं? शुरू से ही पानी मानवीय, सामाजिक और आर्थिक विकास का घटक रहा है। तमाम मानव सभ्यताएं नदी के किनारे ही विकसित हुई हैं। ताजे और खारे पानी की पर्याप्त आपूर्ति और प्रबंधन के बिना सामाजिक और आर्थिक विकास पूरा नहीं हो सकता। नि:संदेह पानी और विकास एक-दूसरे से गहरे जुड़े हैं।

पानी की गुणवत्ता बरकरार रखने के सर्वोत्तम उपाय

पीने योग्य जल के संरक्षण के तरीके -

ग्राम अदगांव, तालुका- यावल, जिला जलगांव

उद्देश्‍य : पानी के टैंक में कैल्शियम कार्बोनेट के जमाव को रोकने और बेहतर क्लोरीन परीक्षण विधि :

फ्ल्यूरोसिस के शिकार

फ्ल्यूरोसिस दांतफ्ल्यूरोसिस दांतभारत में करीब 6.2 करोड़ लोग फ्ल्यूरोसिस से पीड़ित हैं, जिनमें से 6 करोड़ से अधिक बच्चे और युवा हैं। इससे पीड़ित युवाओं से करीब २०,००० केवल असम में हैं। अपनी प्राकृतिक खूबसूरती और घने जंगलों के लिए मशहूर कर्बी एंगलांग में आबादी का दसवां हिस्सा दांत या हड्डी के फ्ल्यूरोसिस से पीड़ित हैं। नवा ठाकुरिया की रिपोर्ट।

09 जनवरी 2007/ मशहूर असमी फिल्मकार मंजू बारो कर्बी एंगलांग के जिला मुख्यालय दिफू आए हैं। वे यहां कर्बी के मशहूर लोगों पर एक डॉक्यु-फीचर फिल्म बनाने आए हैं। पटकथा कर्बी के ही लेखक बसंत दास ने लिखी है।

पानी ही पानी, लेकिन पीने को बूंद भी नहीं

..नयी दिल्ली 18 अप्रैल (आईपीएस)/ भारत में प्रदूषित पानी की आपूर्ति के कारण 3.37 करोड़ से अधिक लोग पानी से होने वाली बीमारियों के शिकार हैं। नए आंकड़ों के मुताबिक हर साल लगभग 15 लाख से अधिक बच्चों की डायरिया के कारण मौत हो जाती है।

अंतरराष्ट्रीय गैर सरकारी संगठन वाटर एड और सरकार के बीच सहयोग से जो आंकड़े सामने आएं हैं वे उन सरकारी दावों के उलट हैं जिनमें कहा गया था कि 94 फीसदी शहरी और 91 फीसदी ग्रामीण आबादी को अब पीने का साफ़ पानी मिल रहा है।

वाटर एड के मुताबिक अंतर यह भी है कि अभी तक आधिकारिक आंकड़ों में आपूर्ति किए जाने वाले पानी की गुणवत्ता का कोई ज़िक्र नहीं है। यह भी नहीं बताया गया कि क्या पानी की आपूर्ति साल भर होती है?

जहर बुझा पानी

चांद नहीं यह हिडंन नदी हैचांद नहीं यह हिडंन नदी हैसंजय तिवारी/ उत्तर प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में बहनेवाली हिडंन जब दिल्ली के पास यमुना में आकर मिलती है तो कितनों को तारती है पता नहीं लेकिन बहुतों को मारती जरूर है।

अब इस बात का दस्तावेजी प्रमाण हैं कि पिछले पांच सालों में प्रदूषित हिंडन के कारण 107 लोगों को कैंसर हुआ है। कौन हैं वो लोग जिन्होंने एक नदी को मारने का हथियार बना दिया? मेरठ के पास जयभीम नगर झोपड़पट्टी में पिछले 5 सालों में ही 124 लोग काल के गाल में समाहित हो चुके हैं। इन गरीबों का कसूर यह है कि वे मिनरल वाटर नहीं पीते। वे जो पानी भूमि के गर्भ से निकालकर पीते हैं वह इतना जहरीला है कि बचना संभव नहीं।

रोज 4000 की जान लेता है दूषित पानी

एजेंसी / सिंगापुर/ प्रदूषित पानी पीने से होने वाली बीमारियों के कारण दुनियाभर में रोजाना 4000 लोगों की मौत हो जाती है। यदि सरकारों ने जल आपूर्ति व्यवस्था को साफ-सुथरा बनाने के ठोस उपाय नहीं किए तो प्रदूषित जल से इस साल करीब 16 लाख लोगों की मौत हो जाएगी। यह चेतावनी विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने सोमवार को जारी एक रिपोर्ट में दी है।

इंटरनेशनल वाटर वीक यह रिपोर्ट सिंगापुर में मंगलवार से शुरू हो रहे इंटरनेशनल वाटर वीक के मौके पर जारी की गई है। डब्ल्यूएचओ के जल, स्वच्छता और स्वास्थ्य कार्यक्रम के संयोजक डॉ. जेम्स बर्टरैम ने कहा कि प्रदूषित जल के कारण होने वाली मौतें केवल विकासशील देशों तक सीमित नहीं हैं।