जल और स्वच्छता का अधिकार

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वाटर एड इंडिया

इंदिरा खुराना और रिचर्ड महापात्र
इंदिरा खुरानाइंदिरा खुरानाउन 19.5 करोड़ ग्रामीणों की दुर्दशा की कल्पना करें जिन्हें पीने के लिए पानी तक नसीब नहीं होता और अगर आप इसमें उन लोगों की संख्या जोड दें हैं जिन्हें थोड़ा-बहुत पेयजल मिलता तो है लेकिन पेयजल के स्रोत दूषित हैं तो यह आंकड़ा काफी बडा हो जाएगा. एक ओर 77 करोड भारतीय या तो जल की मात्रा या गुणवत्ता की समस्या झेल रहे हैं तो वहीं स्वच्छता की कहानी भी कुछ भिन्न नहीं है.

भटिंडा : पानी में यूरेनियम …

यूरेनियम का असरयूरेनियम का असरहालिया अध्ययन के अनुसार भटिंडा जिले के मुल्तानिया गाँव में पीने के पानी में यूरेनियम और रेडॉन की भारी मात्रा पाई गई है। यूरेनियम की यह मात्रा WHO के सुरक्षित मानक स्तर से 18 गुना ज्यादा अर्थात 7134 BQ/L (Becquerel Per Litre) पाई गई है। गुरुनानकदेव विश्वविद्यालय के फ़िजिक्स विभाग में पदस्थ जियोफ़िजिक्स के प्रोफ़ेसर सुरिन्दर सिंह और चार अन्य शोधार्थियों द्वारा भटिण्डा जिले के 24 गाँवों में किये गये इस अध्ययन के मुताबिक कम से कम आठ गाँवों में पीने के पानी में यूरेनियम और रेडॉन की मात्रा 400 BQ/L के सुरक्षित स्तर से कई गुना अधिक है, इनमें संगत मंडी, मु

पंजाब के पानी में यूरेनियम

यूरेनियम का कहरयूरेनियम का कहर पांच नदियों का द्वाब पंजाब, अब बे-आब हो रहा है। आर्सेनिक के बाद पंजाब के एक बड़े इलाके के भूजल और सतही जल में यूरेनियम पाया गया है। दक्षिण पश्चिम पंजाब क्षेत्र में “सेरेब्रल पाल्सी” से पीड़ित बच्चों के बालों में यूरेनियम के अंश पाये गए है। हाल ही में जर्मनी की एक लैब ने फरीदकोट के एक मंदबुद्धि संस्थान “बाबा फ़रीद केन्द्र” के बच्चों के बालों पर शोध के बाद रिपोर्ट दी है। जर्मनी की माइक्रो ट्रेस मिनेरल लैब की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि शोध किये गए लगभग 150 बच्चों के बालों में 82 से लेकर 87 प्रतिशत तक यूरेनियम पाया गया है। इस खुलास

पंजाब के जल में आर्सेनिक का ज़हर

पंज़ाब राज्य का लगभग 80% भूजल मनुष्यों के पीने लायक नहीं बचा है और इस जल में आर्सेनिक की मात्रा अब तक के सर्वोच्च स्तर पर पहुँच चुकी है… यह चौंकाने वाला खुलासा पंजाब कृषि विश्वविद्यालय द्वारा किये गये एक अध्ययन में सामने आई है। पानी में आर्सेनिक की मात्रा का सुरक्षित मानक स्तर 10 ppb होना चाहिये, जबकि अध्ययन के मुताबिक पंजाब के विभिन्न जिलों से लिये पानी के नमूने में आर्सेनिक की मात्रा 3.5 से 688 ppb तक पाई गई है। यह खतरा दक्षिण-पश्चिम पंजाब पर अधिक है, जहाँ कैंसर के मरीजों की संख्या में भी बढ़ोतरी देखी गई है। जज्जल, मखना, गियाना आदि गाँव आर्सेनिक युक्त पानी से सर्वाधिक प्रभावित हैं और यहाँ इसका स्तर बेहद खतरनाक हो चुका है।

राष्ट्रीय ग्रामीण जल आपूर्ति कार्यक्रम - कार्यान्वयन के लिए फ्रेमवर्क(2008-12)

ग्रामीण क्षेत्रों में पीने के पानी की सुरक्षा को सुनिश्चित करने की दिशा में पेयजल आपूर्ति विभाग, ग्रामीण विकास मंत्रालय (भारत सरकार) के द्वारा नए दिशा निर्देश जारी किये गये हैं। यह कार्यक्रम राजीव गांधी राष्ट्रीय पेयजल मिशन (आरजीएनडीडब्ल्यूएम) के तहत क्रियान्वित किया जा रहा है।

पेयजल आपूर्ति विभाग, भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय का नोडल विभाग है, जो राज्यों को पेयजल और स्वच्छता के क्षेत्र में तकनीकी, वैज्ञानिक, और वित्तीय सहायता मुहैया कराता है।

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