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जहरीला हुआ पंजाब का पानी

पंजाब का पानीपंजाब का पानीजी क्राइम/जालंधर/पंजाब। कहते हैं 'जल ही जीवन है', लेकिन पंजाब में अब यही बात हम दावे के साथ नहीं कह सकते, क्योंकि पंज दरियाओं की इस धरती का पानी अब इतना जहरीला हो चुका है कि अगर अब भी हम न चेते तो यह जीवन देने की बजाय, जीवन ले लेगा। इसका कारण है पानी में बढ़ता केमिकल। मालवा के पानी में तो केमिकल पहले ही काफी मात्रा में मिल चुका है और अब दोआबा व माझा में भी पानी प्रदूषित हो चुका है।

भारत की अधिकतर नदियाँ प्रदूषण की शिकार

बढ़ता प्रदूषणबढ़ता प्रदूषणबीबीसी/ बनारस/ भारत की सबसे पवित्र माने जाने वाली नदियों में से एक गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के लिए स्वच्छ गंगा अभियान नाम के ग़ैर सरकारी संगठन ने लंदन स्थित एक संगठन से समझौता करने की योजना बनाई है.क़रीब ढाई हज़ार किलोमीटर लंबी गंगा नदी भारत के कई राज्यों से होकर बहती है.

बनारस में गंगा की हालत बहुत खराब है. वहाँ लोगों को ये बताए जाने की आवश्यकता है कि वे नदी के आसपास कैसे रहें,
मार्क लॉयड, टेम्स 21

प्लास्टिक की बोतल का पानी दिमाग के लिए खतरनाक

पानी और स्वास्थ्यपानी और स्वास्थ्यतरकश ब्यूरो/ कनाडा की एक रिसर्च टीम के अनुसार प्लास्टिक की बोतल में उपलब्ध पानी दिमाग के लिए खतरनाक होता है. प्लास्टिक के कंटेनर बनाने के उपयोग मे लिया जाने वाला बाइसफेनोल ए दिमाग के कार्यकलापों को प्रभावित कर सकता है और इंसान की समझने और याद रखने की शक्ति को छीण करता है.

वर्षा ऋतु की बीमारियाँ और उनसे बचाव

Author: 
राकेश सिंह
Source: 
योजना, अगस्त 2008
वर्षा ऋतु हमारे लिए हजार नेमते लेकर आती है, लेकिन मुश्किलें भी कम नहीं। इस मौसम में शरीर का मेटाबालिज़्म कम जाता है जो हमारी पाचन क्षमता को प्रभावित करता है। गन्दे पानी से पैदा होने वाली बीमारियाँ भी कम नहीं होतीं। मच्छरों और अन्य कीटों का प्रकोप बढ़ जाता है और वे बीमारियों का दूसरा बड़ा जरिया बनते हैं। वरिष्ठ चिकित्सक ने प्रस्तुत लेख में ऐसी ही कुछ बीमारियों के कारण और निदान की चर्चा की है हैजा एक संक्रामक रोग है, जो विविरियो कोल्री नामक जीवाणु द्वारा उत्पन्न होता है। ये जीवाणु साधारण दूषित जल के माध्यम से रोगी से स्वस्थ मनुष्य के शरीर में पहुँचते हैं। कई बार सीधे रोगी के सम्पर्क में आने से स्वस्थ मनुष्य को हैजे का संक्रमण हो सकता है। हैजा को कॉलरा भी कहा जाता है। एक स्वस्थ मनुष्य के शरीर में मुँह के माध्यम से पहुँच कर विवरियो-कोल्री जीवाणु छोटी आँत का संक्रमण करते हैं। यह संक्रमण इन जीवाणुओं द्वारा स्रावित एक जहरीले पदार्थ के कारण होता है जिसे ‘इण्टीरोटॉक्सिन’ कहा जाता है। यह केवल मानव शरीर में स्थित छोटी आँत की दीवारों पर ही अपना दुष्प्रभाव डालता है जिसके फलस्वरूप रोगी को दस्त की शिकायत हो जाती है। आमतौर पर लगभग नब्बे प्रतिशत रोगियों में यह सामान्य अतिसार की तरह उत्पन्न होती है परन्तु कुछ लोगों में यह जानलेवा भी सिद्ध हो सकती है। यह रोग सभी आयु वर्गों में पाया जाता है, परन्तु छोटे बच्चे इसके कुप्रभाव से ज्यादा ग्रसित होते हैं।

कीटनाशक से कैंसर

Author: 
डॉ. श्रीगोपाल काबरा
Source: 
पाञ्चजन्य, 31 अगस्त 2014
समस्त कीटनाशक जैविक विष हैं। विभिन्न प्रकार के विष अलग-अलग तरह से प्रभावी होते हैं। सभी विष जीव कोशिकाओंं में सतत् चल रही रासायनिक जीवन प्रक्रिया को बाधित कर देते हैं। ऐसे कीटनाशकों के प्रयोग से रक्त कैंसर, ब्रेन कैंसर और सॉफ्ट टिश्यू सरकोमा नामक कैंसर होने की दर अधिक होती है। प्रतिरोधात्मक शक्ति के क्षीण होने से भी कैंसर की संभावना बढ़ जाती है। कीटनाशक जैविक विष होते हैं। विभिन्न प्रकार के रासायनिक विष, मानव शरीर पर उनके कुप्रभाव की संभावना तार्किक है। यहां तक इनसे कैंसर भी हो सकता है। यह साक्षय कीटनाशकों के व्यापक प्रयोग पर धीरे-धीरे सामने आए हैं। कीटनाशकों के व्यापक प्रयोग से अमेरिका में पक्षी विलुप्त हो गए। पक्षियों का कलरव बंद हो गया, वादियां शांत हो गईं। इसी को आधारित कर रेसेल कारसन ने 1962 में ‘साईलेन्ट स्प्रिंग’ पुस्तक लिखी, जो क्रांतिकारी सिद्ध हुई। पहली बार कीटनाशकों के घातक प्रभाव उजागर हुए और मीडिया ने भी इसे प्रमुखता से उठाया जिसके कारण जनसाधारण भी उद्वेलित हुआ और सरकार जागी। विश्व भर में प्रतिक्रिया हुई। वातावरण में इस विष के प्रतिवर्ष हजारों टन घुलने के प्रति लोग सजग हुए।

ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करता है पानी

Author: 
नवभारत टाइम्स
Source: 
नवभारत टाइम्स, जूलाई 2010
वॉशिंगटन।। पानी पीने के फायदों को जानते हुए भी अगर आपने अभी तक रोजाना पर्याप्त मात्रा में पानी पीने की आदत नहीं डाली है तो अब जरा पानी को लेकर सीरियस हो जाइए। एक स्टडी में पता लगा है कि पानी हमें ज्यादा अलर्ट रखता है। यही नहीं हमारे ब्लड प्रेशर को भी कंट्रोल करता है।

वैंडरबिल्ट यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर के रिसर्चरों ने एक स्टडी में पाया कि पानी पीने से हमारे नर्वस सिस्टम की एक्टिविटी बढ़ जाती है जिससे हम ज्यादा अलर्ट रहते हैं। इसी कारण हमारा ब्लड प्रेशर भी बढ़ता है और एनर्जी का खर्च भी।

पानी पियो बार-बार

Author: 
लाईव हिंदुस्तान डॉट कॉम
Source: 
लाईव हिंदुस्तान डॉट कॉम
बहुत देर तक बैठना पड़ता था उन्हें। काम ही कुछ ऐसा था। वह कोशिश करते थे कि कुछ एक्सरसाइज हो जाए, लेकिन रोज कर नहीं पाते थे। वजन बढ़ता ही जा रहा था। वैन्डरबिल्ट यूनिवर्सिटी की एक रिसर्च के मुताबिक अगर हम दिन में तीन गिलास पानी ज्यादा पी लेते हैं, तो एक साल में पांच किलो वजन कम कर सकते हैं। इसके अलावा पानी पीने से हम कहीं ज्यादा तरोताजा होते हैं। हमारा मेटाबॉलिज्म भी बेहतर होता है।

आमतौर पर माना जाता है कि हमें दिन में 10-12 गिलास पानी तो पीना ही चाहिए। इस लिहाज से अगर हम 14-15 गिलास पानी पी लें, तो उसका असर दिखने लगेगा। अगर हमारा वजन ज्यादा है, तो उससे घटने लगेगा। वजन अगर ठीकठाक है, तो भी सेहत दुरुस्त रखने में वह मदद करेगा। उससे हम जल्दी से थकान नहीं महसूस करेंगे।

गंगाजल अमृत नहीं अब आर्सेनिक

मदन जैड़ा/ हिन्दुस्तान
नई दिल्ली, 15 जनवरी।
गंगा का पानी कभी सबसे स्वच्छ होता था इसलिए वेदों-पुराणों तक में कहा गया है-गंगा तेरा पानी अमृत। मान्यता थी कि इसे पीकर या इसमें डुबकी लगाकर बीमारियां दूर हो जाती हैं। लेकिन अब स्थिति उलट है। गंगा के इर्द-गिर्द बढ़ते शहरीकरण, उद्योग धंधों से निकलने वाले कचरे, प्रदूषणकारी तत्वों के बढ़ने के कारण गंगाजल में आर्सेनिक का जहर घुल गया है।

मेघ पाईन अभियान क्या है?

मेघ पाईन अभियान

मेघ पाईन अभियान क्या है?


यह एक प्रयास है वर्षाजल के प्रासंगिकता को पहचानने व उसके संग्रहण को व्यापक स्तर पर फैलाने का, जो उत्तर बिहार के ग्रामीण इलाकों में रह रहे लाखों लोगों को साफ व सुनिश्चित पेयजल उपलब्ध कराने में मदद देना।

मेघ पाइन अभियान का मुख्य उददेश्य


1- उत्तर बिहार के ग्रामीण लोगों के बीच वैचारिक व व्यवहारिक बदलाव लाकर स्थानीय जल प्रबंधन तकनीकों को प्रभावी तरीके से पूर्णजीवित व स्थापित करना है और